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राजधानी में चार दिन में ढर्रे पर आएगी गैस आपूर्ति

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राजधानी में बीते कुछ दिनों से चली आ रही गैस की परेशानी दूर हो गई है। इंडियन आॅयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की ओर से मंगलवार को भी कुछ एजेंसियों को गैस दी गई। लेकिन, बैकलॉग चार दिन का होने के कारण अभी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। एसोसिएशन की मानें तो सभी उपभोक्ताओं को गैस मिलने में अभी तीन से चार दिन लग जाएंगे।

बीते दिनों गुजरात में आई बाढ़ के कारण दून में गैस की आपूर्ति ठप हो गई थी। चार दिन की किल्लत के बाद सोमवार से सप्लाई शुरू हुई। आधी एजेंसियों को 300 सिलेंडर की एक गाड़ी जहां सोमवार को उपलब्ध कराई गई, वहीं बाकी की एजेंसियों को एक-एक गाड़ी कंपनी ने मंगलवार को भेजी।
40 हजार पहुंचा गैस का बैकलॉग
गैस एजेंसियों पर चार दिन का बैकलॉग 40 हजार के करीब पहुंच गया है तो फिलहाल पिछले बुधवार की बुकिंग पर एजेंसियों ने रसोई गैस भेजी। बैकलॉग के चलते गैस एजेंसियों ने तेल कंपनियों को मेल के माध्यम से सूचना भेजते हुए अतिरिक्त गैस देने की मांग की है, जिससे बैकलॉग को शून्य किया जा सके। लेकिन, फिलहाल की स्थिति को देखते हुए अभी दून में रसोई गैस की स्थिति सामान्य होने में चार दिन लग जाएंगे।
दून एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चमनलाल ने बताया कि एजेंसियों पर गैस पहुंचनी शुरू हो गई है। अधिकांश एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक था, जिस कारण उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन अभी कई एजेंसियों पर बैकलॉग है। यदि कंपनी अतिरिक्त गैस भेजती है तो जल्द बैकलॉग की समस्या दूर हो जाएगी।
प्रमुख एजेंसियों का बैकलॉग
एजेंसी, बैकलॉग
वैली गैस, 1200
सत्यशील, 1100
चुघ गैस, 1200
यूरेका गैस, 1300
अनिल गैस, 700

प्रदेश के 1870 स्कूल एकीकरण के लिए चिह्नित

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स्कूलों की दुर्दशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने स्कूलों के एकीकरण का फैसला किया है। इसी के तहत प्रदेशभर में 1870 स्कूलों व राजधानी के 104 स्कूल एकीकरण के लिए चिह्नित किए गए हैं। एकीकरण के दायरे में आने वाले स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग ने शिक्षा मंत्री को सौंप दी है। अब शिक्षा मंत्री के निर्देशों के बाद आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

प्रदेश में खस्ताहाल स्कूलों की बेहतर बनाने और स्कूलों की संख्या को कम करने के लिए शिक्षा मंत्री ने ऐसे स्कूलों का एकीकरण करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें छात्रों की संख्या कम है। ऐसे प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर स्कूलों को एक से 12 तक की क्लास एक ही परिसर में लाने को लेकर शिक्षा विभाग प्लान तैयार कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ऐसे प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर स्कूलों को चिह्नित कर लिस्ट विभाग को सौंप दी थी, जो अब शिक्षा मंत्री के पास स्वीकृति के लिए भेजी जा चुका है। विभाग को अब शिक्षा मंत्री के निर्देशों का इंतजार है।
राजधानी की बात करें तो यहां 2048 शासकीय स्कूल हैं। जिनमें से ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया गया जिनमें छात्रों की संख्या कम है। साथ ही इन स्कूलों को कक्षा एक से 12 तक के सभी बच्चों को एक ही परिसर में लाने की योजना पर काम होना है। हालांकि अभी सिर्फ स्कूलों के चिह्नीकरण का काम ही पूरा हो पाया है। इसके बाद किस आधार पर स्कूलों को एकीकृत किया जाएगा। इसे लेकर रूपरेखा तैयार की जाएगी। विभाग के पास अभी इसके लिए कोई रणनीति तैयार नहीं है। जिस कारण एकीकरण को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

प्रदेशभर के स्कूलों की बात करें तो यहां करीब 20 हजार स्कूलों में से 1870 स्कूलों को एकीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। विभाग की ओर से देहरादून के साथ सभी जिलों की लिस्ट सौंपी जा चुकी है। पहाड़ में कई ऐसे स्कूल जहां पर कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों को एक ही परिसर में लाने से फायदा होगा। इधर शिक्षा विभाग का दावा है कि स्कूलों के एकीकरण से न सिर्फ स्कूलों की दशा सुधरेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी काफी फायदा होगा। स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी नहीं होगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून एसबी जोशी ने बताया कि विभाग ने स्कूलों को चिह्नित कर लिस्ट विभाग को सौंप दी है। जो एकीकरण के दायरे में आ रहे हैं। अभी विभाग की ओर से आगे के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। निर्देशों के बाद ही आगे की योजना पर कार्य किया जाएगा।

एमआईएस विश्वस्तरीय नागरिक बना रहा है: राजदूत

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शिक्षा की दृष्टि से उत्तराखंड एमआईएस अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर महत्वपूर्ण विद्यालय माना जा रहा है, जहां शिक्षा का श्रेष्ठ स्तर तो है ही व्यवस्था भी चाक-चौबंद है। यह मानना है नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय का।

उपाध्याय एमआईएस मसूरी के 33वें स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उनका कहना था कि शिक्षा जो लोगों को सभ्य सुसंस्कृत और कार्य क्षेत्र में उतरने लायक बनाती है। उसके लिए जो व्यवस्थाएं दी जाती हैं वे अपने आप में किसी ज्येष्ठ और श्रेष्ठ व्यवस्था से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि एमआईएस शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विश्वस्तरीय केन्द्र है जो नेपाल सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों का स्वागत करता है। एक साथ मिलकर सीखना और आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध विकसित करना, एमआईएस के विद्यार्थियों को सही मायनों में विश्वस्तरीय नागरिक बनाता है। मुझे यह जानकर गर्व हुआ कि एमआईएस में शिक्षा प्राप्त नेपाली विद्यार्थी आज दुनिया में अपना नाम रौशन कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि मुझे स्कूल के 33वें संस्थापक दिवस के जश्न में शामिल होने का मौका मिला, मैं विद्यार्थियों, अध्यापकों, प्रधानाध्यापक एवं प्रबन्धन को आगामी वर्षों में कामयाबी के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
कार्यक्रम के अतिथियों में शान्तनु प्रकाश तथा एमआईएस के अध्यक्ष डॉ. श्यामा चोना के नाम शामिल हैं। रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली विद्यार्थियों के देवी स्तवनम के साथ हुई जिसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न नृत्यरूपों के साथ वैदिक गायन किया।
इस मौके पर एमआईएस के चेयपर्सन डॉ. श्यामा चोना ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों की घोषणा की तथा कहा कि भारत की परम्पराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को बरकऱार रखते हुए विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करना हमारा उद्देश्य है।
एमआईएस के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रदर्शनियों में रीसाइक्लेबल सामग्री जैसे बोतल, गेंद, बोतल का ढक्कन आदि से बने मॉडल प्रदर्शित किए तथा भारत में जीएसटी विषय पर भी व्याख्यात्मक डिस्प्ले बोर्ड प्रदर्शित किया गया। 

राखी पर भद्रा के साथ चंद्रग्रहण का भी साया

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भाई-बहन के असीम स्नेह का पर्व रक्षा बंधन 7 अगस्त को है, लेकिन इस बार इस त्योहार पर भद्रा के साथ ही चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। करीब 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ग्रहण लग रहा है। इसलिए इस बार राखी के दिन सूतक भी लगेगा। इसलिए सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा।

रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण रात 10.53 बजे से शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी का कहना है कि चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 1.53 बजे से सूतक लग जाएगा। सुबह 11.04 बजे तक भद्रा काल का असर रहेगा। चूंकि सूतक और भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित हैं, इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। सुबह 11.28 बजे से लेकर 1.29 मिनट तक आप रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि सूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया, यानी कि रावण का अहित हुआ। इस कारण लोग मना करते हैं कि भद्रा में राखी नहीं बांधनी चाहिए। राखी का त्योहार रक्षा बंधन का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है। आमतौर पर यह त्यौहार भाई-बहनों का माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती हैं और भाई भी अपनी बहनों को सदा रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षा बंधन का त्यौहार भाई-बहन मनाते हैं पर क्या आप जानते हैं कि यह त्यौहार भाई-बहन ने नहीं बल्कि पति पत्नी ने शुरू किया था और तभी संसार में रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की हो रही हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के तप करना शुरू कर दिया, तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षा सूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया, जिससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर जीत प्राप्त की।

पुराणों के अनुसार आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं, चाहें वह किसी भी रिश्ते में हो। रक्षाबंधन का त्यौहार बिना राखी के पूरा नहीं होता, लेकिन राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब उसे मंत्रों के साथ रक्षा सूत्र बांधा जाए। यह मंत्र है-’येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे। मा चल! मा चल।’इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षा सूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार रक्षा हो।
वामन पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने जब राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया था। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा। वरदान में बलि ने विष्णु भगवान को पाताल में उनके साथ निवास करने का आग्रह किया। भगवान विष्णु को वरदान के कारण पाताल में जाना पड़ा। इससे देवी लक्ष्मी बहुत दुखी हुईं। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को बलि से मुक्त करवाने के लिए एक दिन वृद्ध महिला का वेष बनाकर पाताल पहुंची और बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया। बलि ने जब लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तो लक्ष्मी ने बलि से भगवान विष्णु को पाताल से बैकुंठ भेजने के लिए कहा। बहन की बात रखने के लिए बलि ने भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ भेज दिया। भगवान विष्णु ने बलि को वरदान दिया कि चतुर्मास की अवधि में वह पाताल में आकर रहेंगे।

इसके बाद से हर साल चार महीने भगवान विष्णु पाताल में रहते हैं। जिसे चातुर्मास कहा जाता है। यह मास संन्यासियों के लिए खास महत्व रखता है। भगवान विष्णु के पाताल में चले जाने के कारण त्रिलोक की सत्ता भगवान शिव के हाथों में रहती है।

उत्तराखंड के 9 जिलों में नहीं है एक भी बिल्डर!!

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रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी एक्ट में अपने को रेजिस्टर कराने की समय सीमा 31 जुलाई को खत्म हो गई। इसके बाद बी उत्तराखंड में केवल 167 बिल्डरों ने ही अपना पंजीकरण कराया है। इनमें भी राज्य के नौ जिलों में से एक भी बिल्डर ने पना पंजीकरण नहीं कराया है। इसके चलते सचिव आवास ने सभी जिलाधिकारियों से उनके यहां चल रहे निर्माण प्राॅजेक्ट का ब्यौरा मांगा है। इस लिस्ट के आधार पर शासन रेरा के तहत अपना पंजीकरण न कराने वाले बिल्डरों पर एक्शन लेने की तैयारी कर रहा है।

डेडलाइन बीत जाने के बाद तक 167 बिल्डरों वे और 39 एजेंटो ने ही पंजीकरण के लिये आवेदन किया है। इनमें से

  • देहरादून में 87
  • हरिद्वार  में 23
  • नैनीताल में 04
  • उधमसिंह नगर में 52 बिल्डरों ने ही पंजीकरण के लिये आवेदन दिया है।

इन सभी के आवेदनों पर एक महीन में एक्शन लिया जायेगा। गौरतलब है कि ये सभी आवेदक देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के हैं। यानि बाकी के 9 जिलों से एक भी आवेदन नहीं आया है। इसके चलते शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलाधिकारियों से जानकारी तलब की है।

विकास प्राधिकरण सचिव पंकज उपाध्याय ने बताया कि स्थानीय विकास प्राधिकरणों के पास रेरा के तहत रजिस्ट्रेशन करने की शक्ति नहीं है। यदि बिल्डर इस संबंध में आवेदन जमा करते तो उन्हें देहरादून भेजा जा सकता था। 31 जुलाई को इस संबंध में चार बिल्डर मिले भी थे उन्हें प्रक्रिया समझा दी गई। देहरादून से पंजीयन की सूची मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने बिल्डर/डेवलेपर ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। इसी के बाद प्राधिकरण भी कार्रवाई अमल में लाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकरा ने बिल्डरों की मनमानी रोकने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिये रियल ऐस्टेट रेग्यूलेटरी एक्ट लागू किया है। उत्तारखंड के लिये भी ये एक्ट खासा लाभदायक साबित हो सकता है क्योंकि जिस बेतरतीब तरीके से राज्य में बिल्डर नेकसस काम कर रहा है उससे न सिर्फ ग्राहक पेशान हैं बल्कि नियम कानूनों को भी घड़ल्ले से ताक पर रखा जा रहा है। बहरहाल इस ऐक्ट की सफलता के लिये ये जरूरी है कि सरकार बिल्डरों की सही पहचान करे और कानून को ठेंगा दिखाने वाले बिल्डरों पर नकेल कसे।

 

उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी की सेमेस्टर परीक्षा के पेपर लीक

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लगातार विवादों में रहने वाली उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में एक नया विवाद जुड़ गया है। इस बार मामला पेपर लीक से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी के बीएएमएस के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को पेपर व्हाट्सअप से भेजे जाने की बात सामने आई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पेपर लीक का मामला स्वीकार करते हुए जांच कराए जाने की बात कही है।

यूनिवर्सिटी में बीएएमएस प्रथम सेमेस्टर की परीखाएं संचालित की जा रही है। परीक्षा यूनिवर्सिटी के तीन संस्थानों सहित प्रदेश के अन्य 11 निजी संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है। लेकिन परीक्षा से पहले से पेपर लीक किए जा रहे हैं। दरअसल परीक्षा से पले पेपर सील बंद लिफाफे में रखे जाते हैं। यह लिफाफा परीक्षा वाले दिन कुछ ही मिनट पहले खोला जाता है, लेकिन यहां इन लिफाफों में रखे पेपर बिगना सील खुले इनमें रखे प्रश्नपत्र छात्रों तक व्हाट्सएप आदि माध्यमों से भेजे जा रहे हैं।
आखिरी दो दिन में ईमेल से भेजे पेपर
यूनिवर्सिटी से जुड़े संस्थानों में बीएएमएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं 24 जुलाई से शुरू हुई थी। परीक्षा कुल आठ विषयों के लिए आयोजित की गई थी। सूत्रों के मुताबिक 24 से 26 जुलाई तक की परीक्षाओं के पेपर लीक व्हाट्सअप के जरिये आउट किए गए। इसमें छात्रों से पैसे के लेन की बात भी सामने आ रही हैं। यूनिवर्सिटी को जैसे ही मामले की भनक लगी तो सुरक्षा के मद्देनजर आखिरी दो दिन की परीक्षा ईमेल के जरिये संस्थानों को पेपर भेजकर कराई गईं। पेपर लीक मामले में यूनिवर्सिटी अंदर के कर्मियों की मिली भगत होने की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। बिना लिफाफा खोले पेपर छात्रों तक पहुंचना यूनिवर्सिटी के अंदर के कर्मियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ ने बताया कि पेपर लीक होने की बात सामने आई है, लेकिन मामले में अभी तक कोई शिकायत यूनिवर्सिटी को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि यूनिवर्सिटी द्वारा लीक प्रश्नपत्रों के मामले में कमेटी गठित कर जांच कराई जाएगी।
बिना परीक्षा नियंत्रक के हो रही हैं परीक्षा
आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में परीक्षाएं बीते कई सालों से बिना परीक्षा नियंत्रक संचालित हो रही है। जिसके चलते परीक्षाओं का आयोजन व परिणाम समय से घोषित नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि टाइम टेबल आदि को लेकर भी छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी में परीक्षाओं सहित सभी अहम कार्य बिना स्थाई प्रभारी के ही निष्पादित हो रहे हैं। इससे छात्रों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा से लेकर परिणाम घोषित करने में असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं हालात यह हैं कि मौजूदा वक्त में यूनिवर्सिटी के पास स्थाई कुलपति और कुलसचिव तक नहीं है। यूनिवर्सिटी में प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी प्रभारी कुलपति और प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ बतौर प्रभारी कुलसचिव कार्यभार संभाल रहे हैं।

यूएपीएमटी पर खड़ा हो रहा सवाल
सेशनल एग्जाम में पेपर आउट होने की घटना ने आयुष कोर्स की यूजी और पीजी सीटों पर दाखिले के लिए आयोजित होने वाली यूएपीएमटी प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी द्वारा उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) के लिए आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन प्रक्रिया 16 अगस्त तक चलेगी, जिसके बाद 3 सितंबर को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। बीते वर्ष पर नजर डालें तो यूएपीएमटी परीक्षा में एक दर्जन से भी ज्यादा मुन्नाभाई पुलिस के हत्थे चढ़े थे। मामले में एक बड़े गिरोह का भी भंडाफोड़ हुआ था। ऐसे में यूनिवर्सिटी के अंदर बिना लिफाफा खोले पेपर लीक होेने की घटना को देखते हुए बड़ी प्रवेश परीक्षा में पेपर की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कॉपीराइट उल्लंघन मामले में जयपुर कोर्ट में ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’ पर सुनवाई

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ग्यारह अगस्त को रिलीज के लिए शेड्यूल्ड अक्षय कुमार की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ को लेकर जयपुर की मेट्रोपोलिटन कोर्ट में कॉपीराइट के उल्लंघन के केस को लेकर सुनवाई हो रही है। ये मामला जयपुर के निर्माता-निर्देशक प्रतीक शर्मा ने अपनी फिल्म ‘गुटरुं गुटरगूं’.. को लेकर दर्ज किया है और ‘टॉयलेट’ के निर्माता नीरज पांडे तथा फिल्म की मार्केटिंग कर रही कंपनी वायकॉम 18 पर उनकी फिल्म के सीन और संवाद चोरी करने का आरोप लगाया है।

सोमवार को अदालत में ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ की टीम की ओर से वकीलों ने अपना पक्ष रखा और कहा कि किसी विचार को लेकर कॉपीराइट का मामला नहीं बनता। उनका कहना था कि स्वच्छ भारत अभियान की चर्चा पूरे देश और दुनिया में हो रही थी, इसी को ध्यान में रखते हुए इस फिल्म को बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ। उधर, प्रतीक शर्मा का दावा है कि उनकी फिल्म 2015 में बन चुकी थी और ‘टॉयलेट… एक प्रेमकथा’ में उनकी फिल्म के संवादों की चोरी के बाद उनकी फिल्म को लेकर वितरक आनाकानी कर रहे हैं।

प्रतीक शर्मा के मुताबिक, वे 28 जुलाई को अपनी फिल्म रिलीज करने के लिए तैयार थे, लेकिन ‘टॉयलेट..’ का ट्रेलर आने के बाद वितरकों ने उनकी फिल्म से हाथ खींच लिए। कोर्ट में मंगलवार को भी इस फिल्म को लेकर जिरह जारी रहेगी। इस दिन ‘टॉयलेट..’ के वकीलों द्वारा रखे गए तर्कों को लेकर प्रतीक शर्मा के वकील अपना जवाब पेश करेंगे। 

सेंसर में फंसी नवाज की नई फिल्म

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आने वाली फिल्म ‘बाबू मोशाय बंदूकबाज’ भी सेंसर में फंस गई है। सेंसर ने इस फिल्म को 48 कट्स दिए हैं, जिनको फिल्म के निर्माता-निर्देशक कुशान नंदी ने नामंजूर कर दिया है।

इस फिल्म को लेकर एक और विवाद हो गया है। फिल्म निर्देशकों की संस्था इंडियन फिल्म डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि सेंसर बोर्ड के अधिकारियों ने फिल्म के निर्माताओं के साथ बदसलूकी की, जिसे लेकर मामला गरमा गया है। निर्देशकों की संस्था ने इस बदसलूकी को लेकर सोमवार को मुंबई में विरोध सभा करने का ऐलान किया है। साथ ही संस्था की ओर से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है और बदसलूकी करने वाले बोर्ड के सदस्यों की बर्खास्तगी की मांग की है।

इस मामले को लेकर एसोसिएशन ने सभी प्रमुख निर्देशकों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है। 25 अगस्त को रिलीज होने जा रही इस फिल्म में कई हॉट सीनों और संवादों को लेकर सेंसर बोर्ड ने कैची चलाई है। इस पूरे विवाद पर अब तक बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

बद्रीनाथ हाइवे चार स्थानों पर बंद

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बद्रीनाथ हाईवे चमोली से लेकर बद्रीनाथ तक चार स्थानों पर बंद है। हालांकि बीआरओ तथा एनएच की कंपनी मेकाफेरी द्वारा मार्ग खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। बद्रीनाथ हाइवे चमोली से आगे क्षेत्रपाल, कोडिया, बाजपूर तथा लामबगड में जनपद में हो रही भारी वर्षा के कारण अवरुद्ध हो गया है। इन सभी स्थानों पर पहाड़ी से मलव आ जाने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है। जिससे तीर्थ यात्रियों व लोकल सवारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि बीआरओ तथा मेकाफेरी द्वारा मार्ग खोलने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही वर्षा के कारण मार्ग खुलने में परेशानी आ रही है। मार्ग अवरुद्ध होने से इन सभी स्थानों पर लोकल सवारियां तथा यात्रियों के वाहन फंसे हुए हैं। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि एक से दो घंटे के बीच मार्ग को सुचारु कर लिया जाएगा। 

पीएम से मिले मंत्री मदन कौशिक, विकास कार्यों की दी जानकारी

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कैबिनेट मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर उत्तराखंंड में में चल रहे विकासात्मक प्रगति की जानकारी दी।
बुधवार को पीएम से भेंट के दौरान मंत्री मदन कौशिक ने उत्तराखंंड के अवस्थापना विकास, स्वच्छता कार्यक्रम के बारे में विशेष रूप में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में चल रहे स्वच्छ भारत अभियान, नगर विकास हेतु साॅलिड वेस्ट, सीवरेज व पेयजल क्षेत्र में किए गए कार्याें की समीक्षा की जा रही है।
मुलाकात के दौरान बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत स्वच्छता कार्यक्रम को अपने सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखकर समस्त प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव को निर्देश दिए हैं कि अपने भ्रमण कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वच्छता कार्यक्रम को भी एजेंडे में रखा जाय।
शहरों के नियोजित विकास के लिए क्षेत्र में किए जाने वाले कार्याें की जानकारी देते हुए मंत्री ने रेरा कानून को प्रदेश में लागू करने हेतु राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यशाला के बारे में भी बताया।
प्रवक्ता ने प्रदेश के कुम्भ मेला-2021 के तैयारियों के सम्बन्ध में और सफल कांवड़ मेला के प्रबन्धकीय स्वरूप के बारे में भी बताया। उत्तराखंंड सरकार नौजवानों के रोजगार हेतु कौशल प्रबन्धन के क्षेत्र में विशेष कार्य कर रही है। सब्जी विक्रेता, नाई, दूधवाला, पलम्बर, राजमिस्त्री इत्यादि कि लिए विशेष रोजगार योजना की जानकारी दी।
पलायन रोकने के लिए पलायन आयोग का भी गठन किया गया है। राज्य में जीएसटी कानून को लागू करने के लिये अनोखी पहल के रूप में नौजवानों को प्रशिक्षित कर जीएसटी मित्र की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश के विकास में केन्द्र सरकार से मिलने वाले सहायोग के लिए आभार व्यक्त किया और देवभूमि की गंगा जल को भी भेंट स्वरूप दिया। समस्त चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त किया।