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रेखा आर्या मिली महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट

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हाल ही में महिला क्रिकेट विश्व कप भले ही देश की बेटियां नही जीत पाई हो। लेकिन इंग्लैंड ने भी इतना सम्मान  अपनी टीम को नही दिया होगा जितना सम्मान भारत ने अपनी बेटियो को दिया है। ये क्रिकेट इतिहास में पहली मर्तबा ऐसा हुवा है जब किसी उपविजेता टीम के प्रत्येक खिलाड़ी के घर-घर जाकर बधाईयां दी जा रही है, ये महिला क्रिकेट के लिए सुखद अनुभव है।
इसी क्रम में आज रेखा आर्या – राजयमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उत्तराखंड सरकार ने अल्मोड़ा जिलाधिकारी ईवा आशीष श्रीवास्तव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वी.रेणुका संग भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य एकता बिष्ट को अल्मोड़ा स्तिथि आवास पर जाकर बधाई दी। एकता ने विश्वकप टूर्नामेंट में देश के साथ-साथ अपने प्रदेश का नाम भी रोशन  किया है।
श्रीमती रेखा आर्य ने कहा कि सरकार बेटियों के बेहतर भविष्य को लेकर हर सम्भव प्रयासो को लेकर कार्यरत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के सपनो के आगे कभी अर्थिकि को आड़े नही आने दिया जाएगा। एकता बिष्ट को प्रदेश की बेटियों का रोल मॉडल बताते हुए श्रीमती रेखा आर्य ने उनकी उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दी और आगामी भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां हमारी शान है। हमें उन पर गर्व है। क्योंकि हमारी बेटियां बेटो से कम नही है।

उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन ने 12,700 युवाओं को रोजगार के लायक बनाया

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उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत गत वर्ष 12,700 युवाओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार के लायक बनाया गया है। इस वर्ष 13,000 युवाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत उत्तराखंड में वर्ष 2020 तक 48,236 युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य में 120 प्राइवेट पार्टनर के माध्यम से 22 सेक्टर स्किल काउंसिल के 32 ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्य सचिव एस.रामास्वामी की अध्यक्षता में बुधवार को उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट सोसाइटी के गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई।
उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन के परियोजना निदेशक डॉ.पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 30,000 लोगों ने नामांकन किया है। रोजगारपरक ट्रेड में उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गत वर्ष 7 किमी दूरी से आने वाले प्रशिक्षुओं को 2500 रूपये प्रतिमाह दिये गये। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन(यूकेएसडीएम) का कौशल उत्तराखंड नाम से मोबाइल एप बनाया गया है। किसी को मिस्त्री, प्लम्बर, मैकेनिक चाहिए तो इस ऐप से तलाश कर सकता है। इसके अलावा प्रशिक्षण संबंधी जानकारी देने के लिए यूकेएसडीएम का पोर्टल है। इस वर्ष में विदेशी भाषा, पंचकर्म, योग, ध्यान, वेलनेस, एडवेंचर गाइड, हॉस्पिटलिटी सहित अन्य रोजगारपरक ट्रेड में ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग पाने वाले युवाओं के प्लेसमेंट के लिए अलग से प्रकोष्ठ बनाया गया है। डॉ.पाण्डेय ने बताया कि ‘अर्न हवाइल यू लर्न’ योजना का प्रसार पर्वतीय क्षेत्रों में किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के समन्वय से स्किल गैप एनालिसिस भी किया जा रहा है। नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के अंतर्गत कौशल का लेवेल दिया जाएगा।
बैठक में सचिव श्रम हरिवंश सिंह चुघ, कुलपति तकनीकी विश्वविद्यालय डॉ.पीके गर्ग सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क मार्ग को समय से न खोलने के लिए तीन विभागों को नोटिस

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चमोली जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने 31 जुलाई को विकास खंड देवाल हिमनी घेस के मध्य सड़क पर मलवा आने से अवरुद्व मोटर मार्ग को खोलने में लापरवाही को देखते हुए अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई लोनिवि कर्णप्रयाग तथा अधिशासी अभियन्ता लोनिवि थराली को भी आपदा प्रबंधन अधिनियम तहत नोटिस जारी किया है।

विदित हो कि थानाध्यक्ष थराली मय टीम/कर्मचारियों के साथ 31 जुलाई को थराली, विकास खंड देवाल की सड़कों की जानकारी हेतु लोहागंज, देवाल, लोसारी, घेस, हिमनी आदि क्षेत्रों के भ्रमण पर गये थे। भ्रमण के दौरान हिमनी घेस के पास सड़क पर मलवा आने से मार्ग अवरूद्व हो गया। मोटर मार्ग को खोलने के लिए जेसीबी मशीन भेजने के लिए थराली एवं पीएमजीएसवाई, कर्णप्रयाग के अधिकारियों को सूचित किया गया, किंतु मोटर मार्ग खोलने हेतु जेसीबी मशीन उपलब्ध नही करायी गयी और ना ही कोई प्रयास किया गया तथा जेसीबी मशीन खराब होना बताया गया। थानाध्यक्ष के द्वारा व्यक्तिगत रूप से जेसीबी मशीन की व्यवस्था कर 01 अगस्त को मोटर मार्ग खुलवाकर कर्मचारी एवं सरकारी वाहनों को निकलवाया गया।

जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि वर्षा ऋतु के दृष्टिगत जेसीबी मशीन एवं लेबरों की पर्याप्त व्यवस्था पीएमजीएसवाई एवं लोनिवि के द्वारा की जानी थी। जिसकी सूचना भी विभाग के उच्चाधिकारियों को दे दी गयी थी। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उक्त घटना में जान-माल के साथ सरकारी वाहनों की क्षति हो सकती थी। जो कि एक घोर लापरवाही का द्योतक है। जिस पर जिलाधिकारी ने तीनों विभागों के अधिशासी अभियंताओं को नोटिस जारी किया है। 

तीर्थ नगरी में अब नहीं करने दी जाएगी अवैध शराब की बिक्री : मंजूनाथ

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ग्रामीण पुलिस अधीक्षक मंजुला नाथ ने दावा किया कि अब ऋषिकेश तीर्थ नगरी मे हो रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने तथा सड़कों पर पसरे अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाएगा। जिससे लोगो को शुकुन मिल सके।

ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने यह दावा कोतवाली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान किया उन्होंने कहा कि उन्हें यहां आने पर अवैध शराब बिक्री की ही शिकायत मिल रही है।
जिसमें बड़े-बड़े सफेद पोश लोगों के भी शामिल होना बताया गया है लेकिन उन्होंने अब इसे रोकने के लिए नया प्लान बना दिया है। जिसके चलते अब ऋषिकेश सीमाओं पर पूरी तरह नाकेबंदी कर शराब की बिक्री को रोकने का प्रयास किया जाएगा तथा दिन-रात चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। जिससे ऋषिकेश में किसी भी प्रकार से अवैध शराब पर रोक लगाई जा सके।
साथ ही मंजू नाथ ने कहा कि अब मलिक बस्तियों शांति नगर चंद्रभागा शिवाजी नगर सरवहारा नगर लेवर कॉलोनी में जहां शराब की बिक्री होना बताया जा रहा है वहां लगातार छापेमारी की जाएगी जहां सादी वर्दी में पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
यातायात को सुचारु रुप से चलाने के लिए सड़कों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध सघन रुप से अभियान चलाया जाएगा। उसके बावजूद भी यदि अतिक्रमण कारी नहीं माने तो उनका चालान किया जाएगा इसके लिए पुलिस ने योजना बना ली है

गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक भवन बनाएगा: शांतिकुंज

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शांतिकुंज गुजरात के बनासकांठा के डीसा क्षेत्र के दामा व वडावल गांंव में जरूरतमंद लोगों के आश्रय के लिए सामुदायिक भवन बनाएगा। व्यवस्थापक गौरीशंकर शर्मा ने बताया संस्था प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी ने गुजरात के बनासकांठा के क्षेत्र में सामुदायिक भवन बनाने का निर्देश दिया है। दामा व वडावल गांंव में भूमि पूजन कर भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया।
शांतिकुंज परिवार की ओर से निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में शांतिकुंज प्रतिनिधि विष्णु मित्तल, सुखदेव अनघोरे व हरिराम सुथार की टीम सिरोही व जालौर जिले के प्रभावित गांंवों में पैदल व नावों से कई किमी की दूरी तय कर पीड़ित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी है। टीम प्रातःकाल से प्रभावित गांव के लिए अपने पीठ व नाव के माध्यम से राहत सामान लेकर निकलती है।
सांचोर, किलवा, बावरला, ददूसन, कोटड़ा, गोगनाड़ी, सिसावा सहित दर्जन भर गांंवों में दो सौ से अधिक युवाओं की टीम जुटी हैं।
उन्होंने बताया कि गुजरात में राकेश जायसवाल की टीम ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बनांसकांठा जिले के धानेरा, कांकरेज, थराद, वाव, राघनपुर तहसील के कई गाँवों में सेवा कार्य में 350 से अधिक युवा जुटी है।
जायसवाल के अनुसार समाचार लिखे जाने तक दस हजार राशन किट, एक लाख फूड पैकेट, पांंच हजार सेट कपड़े सहित अन्य राहत सामग्री पीड़ित परिवारों को दी जा चुकी है। डॉ. भीखू भाई पटेल के नेतृत्व में मेडिकल टीम शारीरिक परीक्षण कर दवाइयांं भी दे रही है।
संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी एवं प्रवास से आज ही लौटे हैं।
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक गायत्री परिवार के कार्यकर्त्ता सेवा कार्य जुटे रहेंगे। पीड़ितों की सेवा के साथ-साथ मृत्मात्मा की शांति एवं सद्गति के लिए विशेष प्रार्थनाएंं एवं सामूहिक श्राद्ध संस्कार गायत्री तीर्थ किये जा रहे हैं।

कांग्रेस में नई जान फूंकने के लिए महिला विंग ने संभाला मोर्चा

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विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूटा हुआ है। कांग्रेसी कार्यकर्ता पूरी तरह से बिखर गए हैं। बिखरे और बेजान पड़ी कांग्रेस में नई जान फूंकने के लिए कांग्रेस की महिला विंग ने कमान संभाल ली है। महिला कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पूरे जोश के साथ भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बनाया है। इसी के चलते तीन अगस्त को महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा शोभा ओझा उत्तरी हरिद्वार में कार्यकर्ताओं की बैठक करेंगी। वह महिलाओं में जोश और नई ऊर्जा का संचार करेंगी तथा भाजपा को घेरने की नई रणनीति बनाकर देगी।

पूर्व राज्य मंत्री और महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष किरण सिंह ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेसी कार्यकर्ताओें का मनोबल पूरी तरह से टूट चुका है। कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए कांग्रेस की महिला विंग पूरी तरह से एकजुट है।
इसी के चलते महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा हरिद्वार आ रही हैं। वह महिला कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। पार्टी की आगे की रणनीति का खुलासा कार्यकर्ताओं से करेंगी। महिला कार्यकर्ता इस बैठक को सफल बनाने के लिए पूरे मनोभाव से कार्य कर रही हैंं।
किरण सिंह ने बताया कि भाजपा विकास का सब्जबाग दिखाकर जनता को धोखा दे रही है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में विकास के तमाम कार्य कराए। लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही सभी विकास कार्यो को ठप्प कर दिए हैं। महिला कांग्रेस एक बार फिर से जनता के बीच जाकर पार्टी को मजबूत करने का कार्य करेंगी।

राजधानी में चार दिन में ढर्रे पर आएगी गैस आपूर्ति

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राजधानी में बीते कुछ दिनों से चली आ रही गैस की परेशानी दूर हो गई है। इंडियन आॅयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की ओर से मंगलवार को भी कुछ एजेंसियों को गैस दी गई। लेकिन, बैकलॉग चार दिन का होने के कारण अभी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। एसोसिएशन की मानें तो सभी उपभोक्ताओं को गैस मिलने में अभी तीन से चार दिन लग जाएंगे।

बीते दिनों गुजरात में आई बाढ़ के कारण दून में गैस की आपूर्ति ठप हो गई थी। चार दिन की किल्लत के बाद सोमवार से सप्लाई शुरू हुई। आधी एजेंसियों को 300 सिलेंडर की एक गाड़ी जहां सोमवार को उपलब्ध कराई गई, वहीं बाकी की एजेंसियों को एक-एक गाड़ी कंपनी ने मंगलवार को भेजी।
40 हजार पहुंचा गैस का बैकलॉग
गैस एजेंसियों पर चार दिन का बैकलॉग 40 हजार के करीब पहुंच गया है तो फिलहाल पिछले बुधवार की बुकिंग पर एजेंसियों ने रसोई गैस भेजी। बैकलॉग के चलते गैस एजेंसियों ने तेल कंपनियों को मेल के माध्यम से सूचना भेजते हुए अतिरिक्त गैस देने की मांग की है, जिससे बैकलॉग को शून्य किया जा सके। लेकिन, फिलहाल की स्थिति को देखते हुए अभी दून में रसोई गैस की स्थिति सामान्य होने में चार दिन लग जाएंगे।
दून एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चमनलाल ने बताया कि एजेंसियों पर गैस पहुंचनी शुरू हो गई है। अधिकांश एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक था, जिस कारण उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन अभी कई एजेंसियों पर बैकलॉग है। यदि कंपनी अतिरिक्त गैस भेजती है तो जल्द बैकलॉग की समस्या दूर हो जाएगी।
प्रमुख एजेंसियों का बैकलॉग
एजेंसी, बैकलॉग
वैली गैस, 1200
सत्यशील, 1100
चुघ गैस, 1200
यूरेका गैस, 1300
अनिल गैस, 700

प्रदेश के 1870 स्कूल एकीकरण के लिए चिह्नित

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स्कूलों की दुर्दशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने स्कूलों के एकीकरण का फैसला किया है। इसी के तहत प्रदेशभर में 1870 स्कूलों व राजधानी के 104 स्कूल एकीकरण के लिए चिह्नित किए गए हैं। एकीकरण के दायरे में आने वाले स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग ने शिक्षा मंत्री को सौंप दी है। अब शिक्षा मंत्री के निर्देशों के बाद आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

प्रदेश में खस्ताहाल स्कूलों की बेहतर बनाने और स्कूलों की संख्या को कम करने के लिए शिक्षा मंत्री ने ऐसे स्कूलों का एकीकरण करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें छात्रों की संख्या कम है। ऐसे प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर स्कूलों को एक से 12 तक की क्लास एक ही परिसर में लाने को लेकर शिक्षा विभाग प्लान तैयार कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ऐसे प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर स्कूलों को चिह्नित कर लिस्ट विभाग को सौंप दी थी, जो अब शिक्षा मंत्री के पास स्वीकृति के लिए भेजी जा चुका है। विभाग को अब शिक्षा मंत्री के निर्देशों का इंतजार है।
राजधानी की बात करें तो यहां 2048 शासकीय स्कूल हैं। जिनमें से ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया गया जिनमें छात्रों की संख्या कम है। साथ ही इन स्कूलों को कक्षा एक से 12 तक के सभी बच्चों को एक ही परिसर में लाने की योजना पर काम होना है। हालांकि अभी सिर्फ स्कूलों के चिह्नीकरण का काम ही पूरा हो पाया है। इसके बाद किस आधार पर स्कूलों को एकीकृत किया जाएगा। इसे लेकर रूपरेखा तैयार की जाएगी। विभाग के पास अभी इसके लिए कोई रणनीति तैयार नहीं है। जिस कारण एकीकरण को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

प्रदेशभर के स्कूलों की बात करें तो यहां करीब 20 हजार स्कूलों में से 1870 स्कूलों को एकीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। विभाग की ओर से देहरादून के साथ सभी जिलों की लिस्ट सौंपी जा चुकी है। पहाड़ में कई ऐसे स्कूल जहां पर कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों को एक ही परिसर में लाने से फायदा होगा। इधर शिक्षा विभाग का दावा है कि स्कूलों के एकीकरण से न सिर्फ स्कूलों की दशा सुधरेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी काफी फायदा होगा। स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी नहीं होगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून एसबी जोशी ने बताया कि विभाग ने स्कूलों को चिह्नित कर लिस्ट विभाग को सौंप दी है। जो एकीकरण के दायरे में आ रहे हैं। अभी विभाग की ओर से आगे के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। निर्देशों के बाद ही आगे की योजना पर कार्य किया जाएगा।

एमआईएस विश्वस्तरीय नागरिक बना रहा है: राजदूत

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शिक्षा की दृष्टि से उत्तराखंड एमआईएस अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर महत्वपूर्ण विद्यालय माना जा रहा है, जहां शिक्षा का श्रेष्ठ स्तर तो है ही व्यवस्था भी चाक-चौबंद है। यह मानना है नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय का।

उपाध्याय एमआईएस मसूरी के 33वें स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उनका कहना था कि शिक्षा जो लोगों को सभ्य सुसंस्कृत और कार्य क्षेत्र में उतरने लायक बनाती है। उसके लिए जो व्यवस्थाएं दी जाती हैं वे अपने आप में किसी ज्येष्ठ और श्रेष्ठ व्यवस्था से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि एमआईएस शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए विश्वस्तरीय केन्द्र है जो नेपाल सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों का स्वागत करता है। एक साथ मिलकर सीखना और आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध विकसित करना, एमआईएस के विद्यार्थियों को सही मायनों में विश्वस्तरीय नागरिक बनाता है। मुझे यह जानकर गर्व हुआ कि एमआईएस में शिक्षा प्राप्त नेपाली विद्यार्थी आज दुनिया में अपना नाम रौशन कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि मुझे स्कूल के 33वें संस्थापक दिवस के जश्न में शामिल होने का मौका मिला, मैं विद्यार्थियों, अध्यापकों, प्रधानाध्यापक एवं प्रबन्धन को आगामी वर्षों में कामयाबी के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
कार्यक्रम के अतिथियों में शान्तनु प्रकाश तथा एमआईएस के अध्यक्ष डॉ. श्यामा चोना के नाम शामिल हैं। रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली विद्यार्थियों के देवी स्तवनम के साथ हुई जिसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न नृत्यरूपों के साथ वैदिक गायन किया।
इस मौके पर एमआईएस के चेयपर्सन डॉ. श्यामा चोना ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों की घोषणा की तथा कहा कि भारत की परम्पराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को बरकऱार रखते हुए विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करना हमारा उद्देश्य है।
एमआईएस के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रदर्शनियों में रीसाइक्लेबल सामग्री जैसे बोतल, गेंद, बोतल का ढक्कन आदि से बने मॉडल प्रदर्शित किए तथा भारत में जीएसटी विषय पर भी व्याख्यात्मक डिस्प्ले बोर्ड प्रदर्शित किया गया। 

राखी पर भद्रा के साथ चंद्रग्रहण का भी साया

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भाई-बहन के असीम स्नेह का पर्व रक्षा बंधन 7 अगस्त को है, लेकिन इस बार इस त्योहार पर भद्रा के साथ ही चंद्रग्रहण का साया भी रहेगा। करीब 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ग्रहण लग रहा है। इसलिए इस बार राखी के दिन सूतक भी लगेगा। इसलिए सूतक लगने से पहले भद्रा का असर रहेगा।

रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण रात 10.53 बजे से शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी का कहना है कि चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 1.53 बजे से सूतक लग जाएगा। सुबह 11.04 बजे तक भद्रा काल का असर रहेगा। चूंकि सूतक और भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित हैं, इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। सुबह 11.28 बजे से लेकर 1.29 मिनट तक आप रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि सूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया, यानी कि रावण का अहित हुआ। इस कारण लोग मना करते हैं कि भद्रा में राखी नहीं बांधनी चाहिए। राखी का त्योहार रक्षा बंधन का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है। आमतौर पर यह त्यौहार भाई-बहनों का माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की दुआ करती हैं और भाई भी अपनी बहनों को सदा रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षा बंधन का त्यौहार भाई-बहन मनाते हैं पर क्या आप जानते हैं कि यह त्यौहार भाई-बहन ने नहीं बल्कि पति पत्नी ने शुरू किया था और तभी संसार में रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की हो रही हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के तप करना शुरू कर दिया, तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षा सूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया, जिससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर जीत प्राप्त की।

पुराणों के अनुसार आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं, चाहें वह किसी भी रिश्ते में हो। रक्षाबंधन का त्यौहार बिना राखी के पूरा नहीं होता, लेकिन राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब उसे मंत्रों के साथ रक्षा सूत्र बांधा जाए। यह मंत्र है-’येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे। मा चल! मा चल।’इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षा सूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार रक्षा हो।
वामन पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने जब राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया था। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा। वरदान में बलि ने विष्णु भगवान को पाताल में उनके साथ निवास करने का आग्रह किया। भगवान विष्णु को वरदान के कारण पाताल में जाना पड़ा। इससे देवी लक्ष्मी बहुत दुखी हुईं। लक्ष्मी जी भगवान विष्णु को बलि से मुक्त करवाने के लिए एक दिन वृद्ध महिला का वेष बनाकर पाताल पहुंची और बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया। बलि ने जब लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तो लक्ष्मी ने बलि से भगवान विष्णु को पाताल से बैकुंठ भेजने के लिए कहा। बहन की बात रखने के लिए बलि ने भगवान विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ बैकुंठ भेज दिया। भगवान विष्णु ने बलि को वरदान दिया कि चतुर्मास की अवधि में वह पाताल में आकर रहेंगे।

इसके बाद से हर साल चार महीने भगवान विष्णु पाताल में रहते हैं। जिसे चातुर्मास कहा जाता है। यह मास संन्यासियों के लिए खास महत्व रखता है। भगवान विष्णु के पाताल में चले जाने के कारण त्रिलोक की सत्ता भगवान शिव के हाथों में रहती है।