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दिलीप कुमार की सेहत को लेकर कम हुई डॉक्टरों की चिंता

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दिलीप कुमार पिछले छह दिनों से मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। इस दौरान उनके इलाज में लगी डॉक्टरों की टीम पहली बार सकारात्मक नजर आई। कल पहली बार अस्पताल की ओर से मीडिया के नाम बयान जारी किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया कि उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। आज सुबह डॉक्टरों के हवाले से खबर आई कि उनके लीवर की सूजन अब नहीं है, जिससे सबने राहत की सांस ली है। अब भी एहतियात के तौर पर दिलीप कुमार को आईसीयू में ही रखा गया है, लेकिन डॉक्टरों ने डायलेसिस की संभावना से अब मना किया है।

डॉक्टरों का कहना है कि अब दिलीप कुमार का रक्तचाप भी सामान्य हो गया है और लीवर की समस्या भी अब दूर हो गई है। फिर भी डॉक्टरों की टीम कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। कहा जा रहा है कि दिलीप कुमार अगले 24 घंटों तक आईसीयू में ही रहेंगे। सालों से दिलीप कुमार का इलाज कर रहे मुंबई के सीनियर डॉक्टर जलील पारकर ने उनके इलाज का जिम्मा संभाला है, तब से दिलीप कुमार की सेहत में तेजी से सुधार देखा गया। दिलीप कुमार के साथ लगातार बनी हुईं उनकी पत्नी सायरा बानो की ओर से भी संदेश आया है, जिसमें कहा गया है कि लोगों की दुआओं और डॉक्टरों की लगातार कोशिशों से दिलीप कुमार अब बेहतर होते जा रहे है। सायरा बानो ने दुआ करने वालों को शुक्रिया भी कहा है। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने जाना आपदा पीड़ितों का हाल

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pritam singh visits calamity affected areas

गढ़वाल के द्वार कोटद्वार में आपदा के बाद सोमवार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने वहां पहुंच कर आपदा प्रभावितों का हाल जाना । कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कोटद्वार में आपदा पीड़ितों से रिफ्यूजी कॉलोनी, धर्मशाला एवं राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में पहुंच कर आपदा प्रभावित लोगों से मुलाकात की ओर उन्हें हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया ।

प्रदेश अध्यक्ष ने आपदा पीड़ितों का राहत कैंप जाकर और आपदा से ग्रस्त क्षेत्रों का भ्रमण कर आपदा पीड़ितों का हाल चाल जानकर प्रदेश सरकार को कोसा। वहीं, उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है, जिस तरह आपदा के बाद कोटद्वार का हाल है, उससे लगता नहीं है कि शासन प्रशासन आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा हो। जो क्षति हुई है उसका आंकलन प्रशासन सही तरीके से कर नहीं पा रहा है। आपदा ग्रस्त क्षेत्र में सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं दिखायी दे रहा है, लोग अपने आप ही अपने घरों को साफ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के द्वारा कोटद्वार पहुंचकर आपदा पीड़ितों को जो 38 सौ रुपये के चेक दिये हैं, वो भी लोग वापस देने की बात कह रहे हैं। इन बातों से नही लगता है कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज है।

5 युवकों को टोंस नदी से रेस्क्यू कर बाहर निकाला

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youths rescued from river by police

सोमवार कोे देहरादून में बारिश के कारण कुछ युवकों की जान पर बन आई। दरअसल सोमवार को सिटी कण्ट्रोल रूम से सूचना मिली कि 5 युवक पिकनिक मनाते हुए नदी में आये पानी के बीच में फंस गये हैं। ये मामला थाना राजपुर के अंतर्गत गुनियाल गांव में सामने आया। टोंस नदी में पिकनिक मनाने गये ये युवक अचानक तंज बरसात होने के कारण नदीं में आये पानी में फंस गये।

सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम हरकत में आ गई। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस औऱ एसडीआरएफ के जवानों ने पामचों युवकों को सकुशल पानी से बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू कर बाहर निकाले गए युवक है अक्षय पंवार, युधिष्टिर शर्मा, आदित्य पाण्डेय, अंकित पंत अौर रक्षित जोशी। सभी युवक ग्राफ़िक एरा क्लेमेंन् टाउन देहरादून के छात्र है और हॉस्टल मैं रहते है।

किसानों की मौत पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

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अब तक प्रदेश में छह किसानों ने आत्महत्या कर ली है,जिनमें ऊधमसिंह नगर में तीन, बालेश्वर में एक,पिथौरागढ़ में एक तथा टिहरी में एक किसान ने आत्महत्या की है। इन सभी के कारण अलग-अलग हैं। नैनीताल के बिन्दुखत्ता में आर्थिक तंगी के कारण साठ वर्षीय धनसिंह डसीला ने आत्महत्या कर ली। पड़ोसी मोहन सिंह विष्ट बताते हैं कि धन सिंह का बेटा बीमार रहता था,उन्होंने इलाज के लिए लाखों रुपये कर्ज ले लिया,लेकिन रविवार को उन्होंने जहर खा लिया। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तब तक वो दम तोड़ चुके थे। विपक्ष इस मामले को भी किसानों की आत्महत्या बता रहा है। उत्तराखंड के कृषिमंत्री सुबोध उनियाल नहीं मानते कि जिन किसानों ने कथित रूप से आत्महत्या की है, उन्होंने कर्जों के कारण की। “इसके पीछे और कोई भी कारण हो सकते हैं। किसी भी कीमत पर आत्महत्या दुखद है चाहे जिस कारण से हो। किसानों की आत्महत्या के लिए वर्तमान सरकार पर आरोप लगाना पूरी तरह भ्रामक है।” कृषिमंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि “चार महीने में न तो कोई जनविरोधी निर्णय लिया गया है और न ही किसान विरोधी। किसानों की आत्हत्या मान भी ली जाए तो इसके पीछे कांग्रेस सरकार की नीतियां हैं।” कृषिमंत्री के साथ-साथ कांग्रेस के सवालों का जवाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने देना प्रारंभ कर दिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस अपने गिरेबान में झांके। इसी घटना पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी भाजपा को घेरने के लिए मोर्चा खोल दिया है।

  • स्वाड़ी गांव के एक किसान राजकुमार ने भी ऐसी ही आत्महत्या की है, जिस पर उत्तरांचल ग्रामीण बैंक और सहकारी समिति के 73 हजार 199 बकाया थे,जिसकी एवज में आत्महत्या की। 19 जुलाई को हुई इस आत्महत्या के पीछे भी बैंकों द्वारा पैसे जमा करने का दबाव होना बताया गया है।
  • यही स्थिति ऊधमसिंह नगर के हल्दी पचपेड़ा गांव के किसान रामअवतार सिंह की है। उसने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खटीमा से एक लाख 80 हजार तथा बैंक ऑफ बड़ौदा से एक लाख 23 हजार का ऋण कृषि कार्यों के लिए लिया था,लेकिन इसे जमा नहीं करा पाया। छह जून को स्टेट बैंक ऑफ इडिया ने उसे नोटिस भेज दिया। छह बेटियों तथा एक बेटे के पिता रामअवतार सिंह ने दबाव के कारण आत्महत्या कर ली।
  • इसी प्रकार टिहरी गढ़वाल के दिनेश सेमवाल की मृत्यु हो गई।
  • इसी तरह बेरीनाग और बाजपुर के दो किसानों ने भी कथित रूप से आत्महत्या की।

विपक्ष की ओर से जहां प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह,किशोर उपाध्याय तथा अन्य लोग मामले को लगातार उठा रहे हैं वहीं पूर्व मंत्री भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अजय भट्ट का साफ कहना है कि कांग्रेस द्वारा किसानों को जिस ढंग से भडक़ाया जा रहा है, वह अपने आप में इस बात का संकेत है कि कांग्रेस सरकार किसानों को भडक़ाकर उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रही है। आंकड़े देते हुए उन्होंने बताया कि एनसीआरबी के अनुसार देश में 2004-2014 तक 10 वर्षों में एक लाख 58 हजार 117 किसानों ने आत्महत्या की। यदि इसका अनुपात लगाया जाए,तो लगभग 20 हजार किसानों ने प्रतिवर्ष आत्महत्या की। जिस सरकार के हाथ किसानों के आत्महत्या से रंगे हों,उसी दल के लोग भाजपा पर अंगुली उठाएं, जहां किसानों की आत्महत्या का कारण कांग्रेस सरकार की कारगुजारियां हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के दौरान किसानों का हिस्सा भी चट कर जाने वाले कांग्रेस के नेताओं ने 6 हजार करोड़ की आय और 80 हजार करोड़ का खर्च दिखाया है। यह खर्च किसानों के पैसे का खर्च है,लेकिन किसानों को पैसे डकारने वाली सरकार के लोग ही अब किसानों को भडक़ाने का काम कर रहे हैं,जो पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसानों ने आत्महत्या की है,तो यह आत्महत्या किसानों के कारण हुई है। किसानों को दो-दो बैंकों से ऋण दिलाना कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस तथाकथित आत्महत्या पर कांग्रेस के लोग छाती पीट-पीटकर रो रहे हैं,उसी पर आत्महत्या करने वाले के परिजन बोलने तक को तैयार नहीं है। आत्महत्या करने वाले कोई सुसाइड नोट तक नहीं छोड़ा है। अजय भट्ट ने कहा कि बैंकों द्वारा किसके कार्यकाल में ऋण दिया गया,जिसके कारण किसान परेशान हुआ। कांग्रेस को इसका जवाब देना होगा और नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि हमने किसानों को 1 लाख तक ऋण महज 2 प्रतिशत ब्याज पर दिलाने का निर्णय लिया है शेष प्रबंधन सरकार क रेगी। अजय भट्ट ने कहा कि आज एक पान का बीड़ा दस रुपये का है यदि कोई एक पान ही रोज खाता है तो उसे महीने में तीन सौ रुपये चुकता करना होता है। हमारी सरकार किसानों को ऐसी ऋण की व्यवस्था कर चुकी है,जिसे 100 रुपये की एवज में मात्र दो रुपये देना पड़ेगा। 2 प्रतिशत ब्याज के ऋण पर किसानों को ऋण दिलाने के साथ-साथ सरकार ने किसान के हित में जो निर्णय लिया है,उनमें खाद और बीज के निर्णय शामिल हैं। यूरिया खाद जिसे किसान ब्लैक में भी खरीदता था। उसके लिए लाठी गोली तक चलती भी। अब सस्ती और किसान जितना चाहे उतना खरीद सकता है। इसका कारण यूरिया का नीम कोटेड कर दिया जाना है,जिससे न तो वह दूध में मिलाया जा सकता है और न ही अन्य कामों का प्रयोग किया जा सकता है,जिसके कारण इसकी मात्रा किसानों को भरपूर ढंग से मिल रही है यही स्थिति अन्य प्रकरणों में भी है। प्रदेशाध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि रेलवे आदि के लिए अधिग्रहीत जमीनों का मुआवजा चार गुना दे रहे हैं ताकि विकास की योजनाओं को पंख लगे और किसान को घाटा न हो। उन्होंने कहा कि नवंबर 2016 से जनता को दिया जाने वाला राशन कांग्रेस नहीं दे पाई। उस हम आठ रुपये 60 पैसे प्रति दर से जनता को दे रहे हैं। इसका भी कांग्रेस ने राजनीतिकरण करने का प्रयास किया,अपने आप दे नहीं सके और हम दे रहे हैं तो उस पर राजनीति कर रहे हैं। किसानों के संदर्भ में भाजपा दिल से काम कर रही है,जबकि कांग्रेस महज नाटक कर रही है। कांग्रेस सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रही है। ऐसे में जनता कांग्रेस के नाटक का जवाब देगी और उसे उसका यथार्थ याद दिलाएगी।

खटीमा के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि हमारी सरकार को आए महज चार महीने हुए हैं। इन चार महीनों में न तो ऐसा कोईकाम हुआ न ही कोई किसान विरोध निर्णय लिया गया,जिसके कारण किसानों आत्महत्या करनी पड़ती। धामी का कहना है कि यह कांग्रेस के जमाने का पाप है,जिसके कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। हमारी सरकार ने किसानों को हर मामले में आत्मनिर्भर बनाया है और हम उनकी आय को दोगुनी करने को संकल्पित हैं। विधायक पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि यदि कांग्रेस ने किसानों हो आत्मनिर्भर बनाया होता तो उन्हें आत्महत्या भी न करना पड़ता। फिर यह घटनाएं दुखद हैं और इससे भी दुखद यह है कि कांग्रेस इस पर राजनीति कर रही है। पुष्कर सिंह धामी मानते हैं कि आने वाले दिनों में किसान भाजपा के प्रयासों से पूरी तरह सक्षम और मजबूत बनेगा।

इस संदर्भ में कांग्रेस के चकराता विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि बीजेपी के शासनकाल में ही किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। यह मामले अतिदुखद हैं। जिस प्रदेश का किसान आत्महत्या करता है,उस प्रदेश की क्या स्थिति होगी,यह स्वत: स्पष्ट है। प्रीतम सिंह का कहना है कि अपनी शर्मनाक स्थिति को छिपाने के लिए भाजपा कांग्रेस पर किसानों की मौत का आरोप मढ़ रही है,जो किसी भी कीमत पर कोई भी समझदार व्यक्ति नहीं मान सकता। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यदि भाजपा मानती है कि कांग्रेस किसानों के मुद्दे को उकसा रही है,तो उसे कांग्रेस के खिलाफ मुकदमा करनी चाहिए ताकि हमारी गिरफ्तारी हो और हम जनता को भाजपा की असलियत बता सकें। प्रीतम सिंह का साफ कहना है कि भाजपा प्रचंड बहुमत का मजाक उड़ा रही है,जो क्षम्य नहीं होगा।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय मानते हैं कि भाजपा ने प्रदेश की जनता और किसानों को छला है। उसने कर्ज माफी जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया जिसके कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टिहरी स्वाड़ी गांव के किसान राजकुमार ने उत्तरांचल ग्रामीण बैंक और सहकारी समिति जो ऋ ण लिया है उसे मैं चुकाऊंगा। उन्होंने कहा कि किसान राजकुमार ने दोनों स्थानों जो ऋण लिया था उसकी राशि 73 हजार 199 बकाया है,जो वह स्वयं अपने आप जमा करेंगे। उन्होंने बताया कि उत्तरांचल ग्रामीण बैंक के साथ-साथ सहकारी समिति नागणी से यह ऋण लिए थे। बैंक के कर्ज जमा करने के दबाव में उसने आत्महत्या कर ली है,जो दुखद तो है ही भाजपा के लिए कलंक भी है। 

8 मिनट चला देवीधुरा बग्वाल,भीमताल विधायक रामसिंह कैड़ा सहित 334 लोग घायल

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रक्षाबंधन पर सोमवार को मां बाराही के खोली खांड मैदान में बग्वाल (पत्थर युद्ध) मात्र आठ मिनट चला।दिन में लगभग 2.43 बजे शुरू हुआ बग्वाल 2.51 बजे समाप्त हो गया।आपको बतादें कि इसमें कुल 250 लोग घायल हुए हैं। सीएमओ एमएस बोरा के अनुसार सभी घायलों का इलाज किया गया है। किसी को गंभीर चोटें नहीं लगी हैं। शुरुआत में फलों की बग्वाल के बाद पत्थरों से बग्वाल खेली गई। इसमें दोनों ओर से पथराव किया गया।

बग्वाल के दौरान बालिक खाम की ओर से बग्वाल खेलने उतरे भीमताल के विधायक रामसिंह कैड़ा भी घायल हो गए। उन्हें हाथ और पीठ में चोट लगी है। सीएमओ एमएस बोरा ने बताया कि विधायक को सामान्य चोट लगी है।  रक्षाबंधन पर चम्पावत जिले के देवीधुरा में पौराणिक बाराही धाम में होने वाले बग्वाल को देखने के लिए हजारों भक्त देवीधुरा पहुंचे। इससे पूर्व पौराणिक बाराही धाम में सुबह चार बजे से पूजा अर्चना चली। बग्वाल के चार खामों और सात द्योकों के लोग दो हिस्सों में बंटकर पत्थर युद्ध करते हैं।

धन सिंह रावत ने हल्द्वानी जिला कारागार में महिला कैदियों से राखी बंधवाकर मनाया रक्षा-बंधन

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धन सिंह रावत ने हल्द्वानी जिला कारागार में महिला कैदियों से राखी बंधवाकर मनाया रक्षा-बंधन

उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने रक्षाबंधन के अवसर पर हल्द्वानी जिला कारागार में महिला कैदियों के साथ मनाया त्योहार। धन सिंह रावत ने अपने आधिकारिक टिव्टर अकाउंट पर तस्वीरों के माध्यम से इस बात की पुष्टि की।

आपको बतादें कि रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर सीएम रावत ने रविवार को जनता मिलन हाॅल में महिलाओं से राखी बंधवाई थी।

धन सिंह रावत ने कारागार की महिलाओं से राखी बंधवाकर एक मिसाल कायम की है।

संदिग्ध परिस्थितियों में छात्रा की मौत

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संदिग्ध परिस्थितियों में छात्रा की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा और मृतका के परिजनों को सूचित किया।

पुलिस के अनुसार किशोरी की मौत बीमारी के चलते हुई। जानकारी के अनुसार मातृआचंल कन्या विद्यापीठ, राजा गार्डन, कनखल में कक्षा आठ की छात्रा जमेरिया, पुत्री बसाना कुमार जमेरिया की अचानक तबीयत बिगड़ गई। संस्थान में तैनात एक चिकित्सक ने छात्रा का उपचार किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।

इसके बाद छात्रा को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। छात्रा ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जगजीतपुर चौकी प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे। 

विधायक जोशी को माता मंगला ने बांधी राखी

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पूर्व कैनाल रोड स्थित लक्जरी फार्म में मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मसूरी विधानसभा क्षेत्र की बहनों के साथ रक्षाबंधन के पवित्र पर्व को सार्वजनिक तौर पर मनाया गया। हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला ने विधायक जोशी को राखी बांधी और संस्था के माध्यम से मसूरी क्षेत्र में हरसम्भव मदद का आश्वासन दिया।

रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर मसूरी विधायक गणेश जोशी एवं स्थानीय भाजपा परिवार की ओर से आयोजित होने वाला सार्वजनिक रक्षाबंधन कार्यक्रम में महिलाओं ने इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। समारोह के दौरान लोक कलाकारों द्वारा कुमांऊनी, गढ़वाली तथा गोर्खाली मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। माता मंगला द्वारा विधायक जोशी को रक्षा सूत्र बांध कर रक्षा के बंधन की औपचारिक शुरूआत की। विधायक जोशी एवं भाजपा परिवार ने मसूरी भाजपा की ओर से माता मंगला का अभिनन्दन पत्र देकर सम्मानित भी किया। वहीं विधायक जोशी द्वारा अतिथियों को शाॅल ओढ़ाकर तथा तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

बतौर मुख्य अतिथि पहुॅची हंस कल्चर सेंटर की संस्थापिका एवं आध्यात्मिक माता मंगला एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर अपने सम्बोधन में कहा कि विधायक गणेश जोशी के निमंत्रण को स्वीकार कर यहां आई तथा उनके प्रति आपके इस स्नेह को देख कर अत्यधिक आनन्द आया। आप बहनें धन्य हैं कि आपको गणेश जोशी जैसा विधायक तथा भाई मिला है।

शहीद सैनिकों की शहादत को प्रणाम करते हुए उन्होंने कहा कि विधायक जोशी की पहल तथा हंस फाउंडेशन सहयोग से निर्मित शहीद द्वारों का भी जल्द ही उद्घाटन किया जाएगा। उन्होनें आश्वस्त करते हुए कहा कि अगले रक्षाबंधन से पूर्व यह अस्पताल बन कर तैयार हो जाएगा। बताया कि हंस फाउंडेशन देश में 24 राज्यों में सामाजिक सहयोग कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड में कोटद्वार के पास सतपुली में 200 बेड का अस्पताल बन कर तैयार हो चुका है, हरिद्वार के बहादराबाद में हंस आई हाॅस्पिटल सेवाएं देना प्रारम्भ कर चुका है, हल्द्वानी में केंसर अस्पताल बन रहा है।

नाटकीय ढंग से शराब तस्कर गिरफ्तार

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जिलाधिकारी के निर्देश पर आबकारी निरीक्षक दर्शन सिंह चौहान ने आबकारी टीम के साथ लगातार अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। यह मुहिम धर्मनगरी के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही हैं। इसी कड़ी में मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन के पास राजेन्द्र कुमार को 122 पव्वों के साथ नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया। काफी समय से हरिद्वार स्टेशन के आस पास अवैध रूप से शराब की बिक्री की शिकायतें विभाग को मिल रही थी।

अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग ने नाटकीय ढंग से अवैध शराब की बिक्री करने वाले आरोपी को धर दबोचा। आबकारी निरीक्षक दर्शन सिंह चैहान ने टीम के एक पुलिसकर्मी को अवैध शराब बेचने वाले व्यक्ति के पास ग्राहक के रूप में भेजा। सादी वर्दी में आबकारी विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए राजेन्द्र गुप्ता को रंगे हाथों पकड़ा। राजेन्द्र गुप्ता रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर अवैध शराब का धंधा चला रहा था। वह ग्राहकों को शराब के पव्वे स्टेशन परिसर के बाहर ही उपलब्ध करा रहा था।

आबकारी टीम में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र उनियाल, उमराव राठौर, संजीव कुमार, मनोज कुमार, डिम्पल रानी, डीएस चैहान आदि शामिल रहे। आबकारी निरीक्षक दर्शन सिंह चैहान ने जानकारी देते हुए बताया कि लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। पंतद्वीप पार्किंग ब्रह्मपुरी आदि क्षेत्रों में अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए छापेमारी अभियान वृहद स्तर पर चलाया गया। अब तक 778 पव्वे देशी शराब जब्त की गई गत माह जुलाई में अंग्रेजी एवं देशी शराब को जब्त किया गया है। 

सड़क के गड्ढे ने नहीं “एडजस्टमेंट” ने ली दो युवतियों की जान

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देहरादून में दो युवतियों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत के बाद की सवाल खड़े हो गये हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या देहरादून की सड़के लगातार बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिये काफी है। राज्य बनने के बाद से ही प्रदेशभर में गाड़ियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इसे राज्य की बढ़ती अर्थ व्यवस्था के अलावा और राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड में सड़क कर की दरें कम होना भी है। राजधानी देहरादून की ही बात करें तो शहर की सड़कों पर लगातार गाड़ियों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके साथ साथ बारिशों ने एक बार फिर सरकारी काम की पोल खोल के रख दी है।

हादसे का संज्ञान लेते हुए सीएम रावत ने सोमवार को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियन्ता को निर्देश दिये कि प्रदेश भर में सड़कों पर हुए गड्डो को तुरंत भरें। उन्होंने अभी तक इस दिशा में लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त भी की।इसके लिए जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों से तालमेल कर इस समस्या का निवारण करें। पहाड़ो में भारी बारिश को देखते हुए आपदा से निपटने के लिये जिलाधिकारियों को और एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट पर रहने के निर्देश भी दिए हैं।

सीएम का ये एक्शन पर रियेक्शन काबिले तारीफ तो है पर सवाल ये है कि कब तक सरकार को जगाने के लिये आम लोगों को अपनी जान की कुर्बानियां देनी पड़ेगी। इस हादसे की ही बात करें तो क्यों नहीं सरकार ने सड़क बनाने वाले ठेकेदार या उसे पास कर रख ऱखाव का ध्यान रखने वाले सरकारी अधिकारी पर आपराधिक मामला दर्ज कराया। क्यों हम किसी आपदा का इंतजार करते हैं पर्यावरण बचाव संबंधी कदम उठाने के लिये। क्यों किसी हत्या होने का इंतजार किया जाता है जिसके बाद पुलिस महकमा हरकत में आये कानून की रक्षा करने के लिये।

हमारी राजनैतिक और सामाजिक जीवनशैली का एक ढर्रा सा बन गया है। जो जैसा है उसे वैसा ही चलने दिया जाये। अंग्रेजी में इसके लिये सब्द है “एडजस्ट” करना। जब तक पानी सर के ऊपर से न निकल जाये तब तक जनाब एडजस्ट करते रहिये। इस एडजस्टमेंट की नींद से जागने के लिये हमें कम सेकम एक हादसे की जरूरत पड़ती है। इसके बाद भी कोई गारंटी नही है कि हमारा सिस्टम कुछ बदलेगा। पर हां ये तय है कि कुछ नये एडजस्टमेंट के लिये तैयारी जरूर कर ली जायेगी।

बहरहाल इस हादसे ने सवाल तो कई खड़े कर दिये हैं लेकिन इन सवालों के जवाब भी हमें ही तलाशने होंगे। क्योंकि जिन हुक्मरानों से हम जवाबों की उम्मीद कर रहे हैं वो भी शायद कोई और हादसा होने का इंतजार कर रहे हैं।