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दहेज उत्पीड़न का आरोपी फरार

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ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न मामले में पुलिस ने पति और देवर की तलाश में छापा मारा, लेकिन दोनों पुलिस के हाथ नहीं लगे। पुलिस ने बहनोई को हिरासत में लिया है। वहीं फरार आरोपियों के घर की कुर्की के लिए पुलिस ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है।

पिछले दिनों ज्वालापुर कोतवाली में गांव सराय, निवासी उजमा ने पुलिस को तहरीर देकर पति जुबैर, सास अनवरी व देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न व मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। इस बीच सास अनवरी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।

मामले की जांच कर रहे दरोगा गजेंद्र यादव ने पीड़िता के पति जुबैर व देवर की तलाश को कई बार छापेमारी की, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़े। पुलिस ने छापा मारकर जुबैर के बहनोई शहनवाज को हिरासत में ले लिया है। दोनों के नहीं मिलने पर पुलिस ने घरों की कुर्की के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र भी दिया है।

रोडवेजकर्मी राज्य में करेंगे 13 को चक्का जाम

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आगामी 13 अगस्त को प्रदेशभर की रोडवेज सेवा बंद रहेगी। परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने पूरी तरह से हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है। इसे लेकर सीएम को चेतावनी भी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो इस बार वे आरपार की लड़ाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे परिवहन निगम के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों की मांग है कि लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों के रूप में काम कर रहे सैकड़ों वर्करों को विभागीय संविदाकर्मी घोषित किया जाए। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने बताया कि सरकार हर बार कर्मचारियों को आश्वासन का झुनझुना देती है, लेकिन कुछ खास असर नहीं दिखता। रतूड़ी ने ये भी बताया कि प्रदेश में परिवहन निगम लगातार घाटे में जा रहा है, लेकिन निगम कोई ध्यान नहीं दे रहा। राज्य सरकार पर निगम का 67 करोड़ रुपये बकाया है। सरकार अगर निगम को ये पैसा दे देती है तो सभी कर्मचारियों का भला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इस बार मांगों को लेकर सरकार ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो उग्र आंदोलन को हम बाध्य होंगे।

भाजपा की बैठक 17 को

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भारतीय जनता पार्टी, चमोली की जिला कार्यकारणी की एक आवश्यक बैठक आगामी 17 अगस्त को जिला मुख्यालय गोपेश्वर में आहुत की गई है। इस बैठक में प्रदेश संगठन मंत्री संजय तथा उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भाग लेंगे।

जानकारी देते हुए भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी महावीर रावत ने बताया कि, ‘भाजपा की जिला कार्यकारणी की बैठक 17 अगस्त को गोपेश्वर में आहुत की गई है। जिसमें जिले के तीनों विधायक सहित भाजपा के सभी मंडल, नगर अध्यक्ष व सदस्यों सहित सभी विभाग प्रमुखों को भाग लेना है।’

इस बैठक में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश संगठन मंत्री संजय व पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भाग लेंगे। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से बैठक में उपस्थित होने की अपील की है। 

मुख्यमंत्री के डोईवाला का गांव बुल्लावाला में सड़कें बनी नदी

उत्तराखंड में बृहस्पतिवार की सुबह तेज बारिश ने शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों पर भी बड़ा असर डाला है विकास के दावे करने वाली त्रिवेंद्र सरकार के सभी दावों की पोल उनका विधानसभा क्षेत्र डोईवाला ही खोल रहा है। यहां के ग्रामीण क्षेत्र में बरसाती पानी ने सड़कों को नदियों में तब्दील कर दिया है और मकानों के साथ-साथ खेत में खड़ी फसलों पर भी इस आसमानी आफत ने अपना कहर ढा दिया है।

बात करें डोईवाला विधानसभा, बुल्लावाला गांव की जहां पर एकमात्र सड़क जो आवाजाही का मुख्य साधन है, वह किसी बरसाती नदी के  रूप में तब्दील हो गई है। लोगों को आने जाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग गड्ढों में गिरकर चोट खा चुके हैं लेकिन गांव के विकास के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं और बारिश के रूप में बरस रही आसमानी आफत हर जगह परेशानी का सबब बनती जा रही है

छात्रसंघ चुनाव: जान न पहचान, वोट के लिए घमासान

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डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में इलेक्शन फीवर छात्रों के सर चढक़र बोल रहा है। लेकिन प्रथम सेमेस्टर के छात्रों के लिए इलेक्शन सरदर्द बना हुआ है। कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया और चुनावी का प्रचार दोनों एकसाथ चल रहें हैं। दावेदारों और समर्थक वोटरों को पकड़-पकड़ कर प्रचार में जुटे हैं। ऐसे में दाखिले पाने आए छात्रों के लिए दाखिले की टेंशन से ज्यादा उनकी वोट मुसीबत बन रही है।

हाईकोर्ट के अनुमन्य सीटों और मेरिट से दाखिला करने के फैसले के बाद कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी कारण जहां कॉलेज को लिंगदोह समिति कि सिफारिशों के मुताबिक छह से आठ हफ्तों के अंदर इलेक्शन संपन्न कराने हैं। डीएवी पीजी कॉलेज की बात करें तोे इलेक्शन 25 अगस्त को होना है। लेकिन, अभी तक दाखिले प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है। ऐसे में दाखिले और इलेक्शन प्रक्रिया के बीच नए छात्रों को चुनाव में उतर रहे दावेदारों को भी जानने का मौका नहीं मिलेगा। जिसके चलते नए छात्रों को अपना नेता बिना जाने ही चुनना होगा।

हर साल बड़ी मात्रा में प्रथम सेमेस्टर में दाखिला लेकर छात्र कॉलेज का हिस्स बनते हैं। ऐसे में यह संख्या वोट बैंक के मामले में काफी अहमियत रखती है। चुनावी प्रत्याशी इसी मकसद से नए छात्रों को घेरने में लगे हैं। लेकिन इन सब के बीच दाखिले के लिए आए छात्र काफी परेशान हैं।

बीए में दाखिले के लिए आई सुहानी और मीनल ने बताया कि कॉलेज में दाखिले के लिए कहां संपर्क करना है इसकी जानकारी कहीं नहीं है। लेकिन, चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के बैनरों से कॉलेज पटा पड़ा है। इस बीच वोट मांगने के लिए सपोर्टर्स आते रहे। काम करें या उनकी सुनें। थोड़ी समस्या होगी है। दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने में दर्जन भर समर्थक मदद के लिए आते हैं, लेकिन जिन्हें जानते ही नहीं उन पर कैसे विश्वास करें। लेकिन यह सब सीनियर हैं आगे कई साल कॉलेज मे ही बिताने हैं। इतना जरूर है कि फिलहाल हमारी वोट ही हमारी मुश्किलें बढ़ा रही है।

बारिश के चलते पौड़ी के 50 से ज्यादा मार्ग अवरुद्ध

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जनपद पौड़ी गढ़वाल में बारिश के चलते 50 से अधिक मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं, जबकि जनपद के सभी राष्ट्रीय राजमार्ग सुचारू हैं।
आपदा परिचालन केंद्र पौड़ी गढ़वाल के अनुसार, बुधवार को श्रीनगर तहसील में सर्वाधिक 35 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। जबकि पौड़ी तहसील में 29 मिमी, लैंसडोन में 12, थलीसैंण व चाकीसैंण में 2, धुमाकोट में 3, चौबट्टाखाल में 5 मिमी वर्षा हुई। इसके अलावा कोटद्वार, सतपुली तथा यमकेश्वर में वर्षा का स्तर शून्य रहा। श्रीनगर में अलकनंदा नदी जलस्तर 534.10 मीटर आंका गया। जनपद के सभी राष्ट्रीय राजमार्ग पारगमन हेतु शुलभ, 7 राज्य राजमार्ग, 3 मुख्य जिला मार्ग एवं 42 ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध रहे।

कोटद्वार में आपदा ग्रस्त क्षेत्रों के 698 प्रभावित परिवारों को 26 लाख 25 हजार 4 सौ की अहेतुक सहायता राशि का वितरण जिला प्रशासन ने किया। कोटद्वार में आई दैवीय आपदा प्रभावितों को बुधवार को 250 लंच पैकेट वितरित किये गये। प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति सुचारु तथा नगरीय क्षेत्रों में आंशिक विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रभावितों के लिए तीन स्थानों पर जीआईसी, पंचायती धर्मशाला, नेशनल डिपो ठेकेदार संघ में 200 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा दो स्थानों जीआईसी व नेशनल डिपो पर लंगर की व्यवस्था कर 1200 लोगों को भोजन आदि वितरित किया जा रहा है तथा एक स्थान शीतलपुर सिगड्डी पंचायत घर में व्यक्तिगत रूप से भी लोगों द्वारा प्रभावितों को भोजन कराया जा रहा है।

अब स्कूलों के पास जंक फूड बेचने पर लगेगा बैन

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राज्य बाल संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) ने उत्तराखंड सरकार से स्कूलों से 200 मीटर में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। एससीपीसीआर के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने मुख्य सचिव एस रामस्वामी को लिखे एक पत्र में, जंक फूड के हानिकारक प्रभावों पर बात की और स्कूलों के 200 मीटर में इसकी बिक्री पर रोक लगाने के लिए कहा।

स्कूलों के आसपास के अलावा उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि स्कूल और हॉस्टल कैंटीन को जंक फूड बेचने से रोकना है। खण्डुरी ने कहा कि, “जंक फूड खाने से ना केवल बच्चों में मोटापा बढ़ता है, बल्कि हाई ब्लडप्रेशर और डायबटिज जैसी बीमारियां पैदा होने का खतरा बढ़ता है।” उन्होंने कहा कि, ‘खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लागू किया जाएगा।’

योगेंद्र खंडूरी ने कहा कि, “महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के तहत बनाए गयें एक पैनल ने स्कूली बच्चों को जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की थी।अब जब गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूलों को एक बार फिर से खोला गया है, तो सरकार को स्कूल के चारों ओर जंक फूड की बिक्री पर प्रभावी ‘प्रतिबंध’ को सख्ती से लागू करना चाहिए और बच्चों के हित में किए गए कार्यों पर आयोग को जानकारी देना चाहिए।”

कैंसर से पीड़ित अभिनेता सीताराम पंचाल का निधन

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अभिनेता सीताराम पंचाल का गुरुवार की सुबह निधन हो गया। अभिनेता सीताराम काफी लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित थे। इन्होंने पिपली लाइव जैसे कई फिल्मों में काम किया है।

PANCHAL

बॉलीवुड की फिल्मों से लेकर टीवी सीरियलों में बरसों से काम करते आ रहे वरिष्ठ कलाकार सीताराम पांचाल कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे और आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उनकी मदद की अपील की जा रही थी।सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री के सितारों से भी सीताराम पाचांल की मदद की गुहार लगाई गई थी। हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले सीताराम पांचाल पिछले लगभग 30 सालों से फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया में काम कर रहे हैं। उनके परिजनों ने जानकारी दी थी कि वे पिछले तीन सालों से ज्यादा वक्त से कैंसर से जूझ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों ने उनके कैंसर को चौथे स्टेज पर बताते हुए उनकी हालत को बेहद गंभीर बताया था। कहा जाता है कि शरीर कमजोर होने की वजह से ऐलोपैथी की दवाइयों को उनका शरीर स्वीकार नहीं कर पाता। इसलिए वे होम्योपैथी के इलाज पर ही चल रहे थे।
उनके परिजनों के मुताबिक, पिछले तीन सालों से उनके इलाज में परिवार की जमा पूंजी खर्च हो चुकी थी और एक मकान भी बिक चुका है। अब उनका इलाज जारी रखना मुश्किल हो गया, तब उनके दोस्तों की ओर से सोशल मीडिया पर मदद की अपील की गई थी। बालीवुड में कलाकारों की संस्था सिंटा की ओर से भी सीताराम पाचांल को तुरंत आर्थिक मदद करने की घोषणा की थी। सिंटा ने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों से मदद का हाथ बढ़ाने की अपील की थी।
इस अपील पर राजकुमार राव, रणदीप हुड्डा, सतीश कौशिक की ओर से सकारात्मक जवाब मिला था। इनके अलावा संजय मिश्रा, इरफान की ओर से भी सीताराम को मदद पहुंचाई गई थी। सीताराम पांचाल की प्रमुख फिल्मों में स्लमडाग मिलेनियर, नाना पाटेकर की शक्ति- द पावर, बैंडिट क्वीन, पीपली लाइव, पान सिंह तोमर के नाम शामिल हैं।

पहाड़ी संस्कृति को जिंदा रख रहा है मसूरी का ये म्यूजियम

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जहां एक तरफ नेता और तमाम लोग पहाड़ों से पलायन और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही पहाड़ी संस्कृति की बातें तो बहुत करते हैं वहीं ऐसे लोग कम ही देखने को मिलते हैं जो इस संस्कृति को बचाने के लिये कुछ ठोस कर रहे हों।जब पहाड़ की संस्कृति विलुप्त होते दिख रही हो और ऐसे में कोई ऐसा मिले जो इसे संजों रहा हो तो इससे बेहतर कुछ नहीं होता। ऐसे ही एक जोड़ा, पहाड़ो की रानी मसूरी में पहाड़ औऱ उसकी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में लगा है ।

सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर के माध्यम से समीर शुक्ला और उनकी पत्नी डाॅक्टर कविता शुक्ला अपनी विरासत को संजो और संवार रहें हैं। न्यूज़पोस्ट से हुई खास बातचीत में समीर शुक्ला ने बताया कि ”सोहम म्यूज़ियम के लिए रिर्सच और डाटा कलेक्शन का काम 1997 में शुरु हो चुका था लेकिन इसकी औपचारिक शुरुआत 2014 में हुई”। इसके माध्यम से शुक्ला दंपत्ति पहाड़ की सुंदरता और यहां की संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।इस काम की शुरुआत उन्होंने हिमालय की संस्कृति से की लेकिन अब शुक्ला दंपत्ति का पूरा ध्यान उत्तराखंड पर  केंद्रित हैं।

उत्तराखंड राज्य में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी विरासत को संभालने के काम में लगे हैं और एसे ही यह दंपत्ति अपने सोहम म्यूज़ियम के माध्यम से ना केवल क्षेत्रीय लोगों को बल्कि दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को भी पहाड़ की संस्कृति से रुबरु करा रहा हैं। मसूरी के इतिहास के बारे में अगर आप कोई भी जानकारी चाहते हैं तो उसका पता है, सोहम म्यूज़ियम।

समीर म्यूज़ियम के बारे में बताते हैं कि ”दो भागों में बटां यह म्यूजियम आपको पहाड़ की संस्कृति और उसके इतिहास से सराबोर कर देगा”।

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इंडोर सेटअप में आप तीन चीजें देखेंगेः

  • पेंटिंगः  डाॅ.कविता शुक्ला जो एक आर्टिस्ट हैं, वह पेंटिंग के माध्यम से उत्तराखंड की विरासत एक बार फिर ताजा करती हैं।
  • फोटोग्राफीः फोटोग्राफी के माध्यम से मसूरी शहर और उत्तराखंड राज्य को आप एक बार फिर से नये अंदाज में देख सकेंगे। पुराने बाज़ार की फोटो, लैंडोर बाजार की फोटो, मसूरी की कुछ ऐसी फोटो जो आपको कहीं भी देखने को नहीं मिलेगा, वह सब आपको यहा मिल सकता है।
  • आर्टिफेक्ट यानि की शिल्पकृतिः इस भाग में आपको उत्तराखंड के पुराने साजो सज्जा के सामान, वाद्य यंत्र, पुराने समय के बर्तन जिनका मिलना अब नामुमकिन है, यह सारी चीजें यहां देखने को मिलेंगी।

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आउटडोर में आप कुछ और चीजें देख सकते हैंः

  • वुडक्राफ्टः इसमें आप लकड़ी के उपर कि हुई पुरानी संस्कृति के कुछ अंश देख सकते हैं।
  • लोक-कलाः फोल्क आर्ट के माध्यम से इस म्यूजियम की दीवैरों पर आपको वह चित्रकारी देखने को मिलेंगी जो बहुस पहले उत्तराखंड के गांव के घरों में दिवारों पर बनाई जाती थी।इस म्यूज़ियम के माध्यम से समीर ने हर वो कोशिश की है जिससे वह ज्यादा से ज्यादा लोगो तक अपनी परंपरा और संस्कृति को पहंचा सकें।

मूल रुप से उत्तराखंड की चीजों और पारंपरिक परिधान से लेकर हर बात को हल्के-फुल्के बदलाव के साथ लोगों के बीच लाया जा रहा है।इसमें आपको बहुत सी ऐसी चीजें मिलेंगी जो लगभग विलुप्त होने की कगार पर है। ऊंट की पारंपरिक पेटिंग, वॅाटर पेंटिग आदि लोगों के बीच आर्कषण का केंद्र बना हुआ है।अलग-अलग जगहों से जब पर्यटक घूम कर यहां पहुंचते हैं तो उनके लिए यह एक अलग ही अनुभव होता है।ना केवल पहाड़ के लोग बल्कि टूरिस्ट भी इन चीजों से जुड़ाव महसूस करते हैं।

समीर बताते हैं कि ”सोहम म्यूज़िम केवल आर्ट दिखाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अलग-अलग शहरों से लोग यहां आकर रिर्सच और इसके बारे में पढ़ाई भी करते हैं। सोहम म्यूजियम ना केवल एक म्यूजिम है बल्कि लोगों के बीच यह एक ऐसी संस्था हैं जिसपर लोग पढ़ाई करते हैं और इतिहास के पन्नों को दोबारा दोहराते हैं”।

सोहम म्यूज़ियम किसी सरकारी संस्था के अंर्तगत काम ना करते हुए राज्य के भविष्य और संस्कृति के लिए काम कर रहा है।इतना कुछ करने के बाद समीर इसमें काफी कुछ और करना चाहते हैं जिसके लिए उन्होंने तैयारी शुरु कर दी है। हिमालयन जड़ी-बूटी जो विलुप्त हो चुकी हैं और जिनके बारे में लोग भूलते जा रहे हैं उनके लिए सोहम काम करने वाला है।इसके अलावा पशु-पक्षी, सेना और डिफेंस में उत्तराखंड के योगदान के बारे में सोहम म्यूजियम काम करने वाला है।

अपनी इस म्यूजियम के बारे में समीर केवल यहीं कहना चाहते हैं कि ”वह जितना हो सके अपने राज्य की परंपरा,संस्कृति,यहां की विरासत लोगों के बीच में दिखाना चाहते हैं”।

सुशांत के साथ चंदा मामा.. में श्रद्धा कपूर की चर्चा

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संजय पूरन सिंह के निर्देशन में शुरु होने जा रही फिल्म, ‘चंदा मामा दूर के’ में सुशांत सिंह के साथ हीरोइन के नाम पर एक और चर्चा शुरु हुई है। अब तक माना जा रहा था कि इस दौड़ में सबसे आगे कीर्ति सेनन हैं, जिनको सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड भी कहा जाता है। इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘राब्ता’ में सुशांत और कीर्ति की जोड़ी पहली बार एक साथ परदे पर आई थी, लेकिन बाक्स आफिस पर ये फिल्म असफल साबित हुई।

अचानक अब इस दौड़ में श्रद्धा कपूर का नाम भी शामिल हो गया है, जो इन दिनों अपनी फिल्म ‘हसीना पारकर’ को रिलीज करने की तैयारियो में व्यस्त हैं। खबर मिली है कि हाल ही में संजय पूरन सिंह के साथ श्रद्धा की मुंबई में लंबी मीटिंग हुई। इसके बाद ही श्रद्धा का नाम चर्चा में आया है। ऐसा हुआ, तो सुशांत पहली बार उनके साथ काम करेंगे।

इस फिल्म के लिए सुशांत हाल ही में अमेरिका के अंतरिक्ष केंद्र नासा से एक सप्ताह की ट्रेनिंग लेकर लौटे हैं। इस फिल्म का पहला शेड्यूल अक्तूबर से अमेरिका में होना है। फिल्म में अब तक सुशांत सिंह के साथ नवाजुद्दीन और आर माधवन के नाम तय हो चुके हैं।