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खाई में गिरी कार, व्यवसायी की मौत

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रानीखेत-कठपुडिया दौलाघट रोड पर बेकाबू कार खाई में जा गिरी। हादसे में व्यवसायी की मौत हो गई। गुरना गांव दौलाघट निवासी योगेश जोशी अपनी अल्टो कार यूके 01- ए- 5092 से मजखाली अल्मोडा हाईवे स्थित शौकियाथल बाजार आए थे। वापसी में कठपुडिया दौलाघट रोड पर कयाला गांव के पास कालिका मंदिर के तीखे मोड पर कार का पिछला टायर नाले में फंस गया।

इस बीच उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो कार खाई में फिसल गई। इसके कार के परखच्चे उड़ गए, व्यापारी क्षतिग्रस्त कार में ही फंसे रहे। उन्हें गंभीर हालत में नागरिक चिकित्सालय पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

कैलाश का किसानों पर कहर 

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बरसात से कैलाश नदी में आई बाढ़ ने रसोईयापुर गांव में तबाही मचा रखी है। अब तक पांच किसानों की करीब साढ़े पांच एकड़ कृषि भूमि कटकर नदी में समा चुकी है। इसके अलावा नौ किसानों की लगभग 32 एकड़ धान की फसल में नदी की सिल्ट भर गई है, जिससे फसल खराब होने के कगार पर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी में कटकर समाई भूमि का मुआवजा देने की मांग की है।
वर्षाकाल के दिनों में कैलाश नदी ने विकराल रूप धारण कर रखा है। चीकाघाट के पास रसोइयापुर गांव में नदी के कटाव करने से नदी गांव के समीप पहुंच गई है।
बीडीसी सूरज नारायण ने ग्रामीणों के साथ नदी का हाल जाना व बताया कि, ‘नदी ने गांव की ओर रुख कर लिया है, जिससे गांव को बाढ़ का खतरा बना हुआ है। नदी द्वारा जमकर भूमि कटाव किया जा रहा है। गांव के वकील अहमद के चार बीघा गन्ने की फसल पूरी तरह नदी में समा गई है। इसके अलावा इरशाद अहमद का एक एकड़ धान, अर्जुन सिंह के तीन बीघा धान, सतनाम सिंह का एक एकड़ धान, बबलू सिंह के ढाई एकड़ धान की फसल नदी लील गई।   किसान जहीर अहमद के 15 एकड़ धान, सतनाम सिंह के चार एकड़, हरबंश सिंह के तीन एकड, प्रकाश सिंह के तीन एकड़, बलजिंदर सिंह के तीन एकड़, जीत सिंह का एक एकड़, फईम के दो एकड़ व परमजीत सिंह एवं चरनजीत सिंह के एक-एक एकड़ धान की फसल में सिल्ट जमा है। जिससे धान की फसलें खराब होने के कगार पर हैं।’
ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी विनोद कुमार से नदी से हो रहे नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि गांव को बाढ़ से बचाने के लिए कटाव रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

भीड़ वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग

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जिला मुख्यालय गोपेश्वर के व्यापारियों व उम्मींदे ग्रुप ने एसपी चमोली व लोनिवि के अधिकारियों से मुलाकात कर शहर के भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगावाने की मांग की है।

जिला मुख्यालय के वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मुरारी लाल, सुरेंद्र सिंह लिंगवाल, व्यापार संघ अध्यक्ष अंकोला पुरोहित सहित अन्य लोगों ने एसपी चमोली व लोनिवि के अधिकारियों से गुरुवार को मुलाकात की। उन्होंने कहा कि शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्पीड ब्रेकर नहीं होने के कारण दुपहिया वाहन सहित अन्य वाहन सपरट भाग रहे हैं, जिससे राह चलने वाले लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
विशेषकर मंदिर मार्ग पर कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित होने की संभावना बनी हुई है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इन स्थानों पर स्पीड ब्रेकर लगाए जाए ताकि राह चलने वाले लोगों को असुविधा न हो। 

13 अगस्त को एक दिवसीय ‘रंवाई लोक महोत्सव’ का आयोजन

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टिहरी जनपद के थत्यूड़, देहरादून जनपद के कालसी और चकराता, उतरकाशी जनपद के नौगांव, पुरोला व मोरी विकास खण्डो को जोड़कर एक बड़े कलस्टर का परिचय कराती है। इसी रंवाई घाटी के मध्यस्थल, नौगांव विकासखण्ड मुख्यालय है। जहां पर आगामी 13 अगस्त, 2017 को एक दिवसीय ‘रंवाई लोक महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा हैं ।

इस दौरान तीन प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होंगे: –

पहला सम्मान समारोह, दूसरा स्थानीय लोक संस्कृति व साहित्य समाज को लेकर विद्वानजनो के साथ स्थानीय लोगों की चर्चा एवं दस्तावेजीकरण, तीसरा बीट् आॅफ यमुना वैली एक वृहद कल्चरल कार्यक्रम होगा जिसमें कम से सम 45 लोक कलाकार एकसाथ स्टेज पर प्रस्तुति देंगे।

कार्यक्रम के विषेष आकर्षण:

डेढ घंटे का कवि सम्मेलन होगा, जिसमें स्थानीय लोक भाषा पर लिखने वाले कवियों को आमन्त्रित किया गया है। इस कवि सम्मेलन में रवांई-जौनपुरी, जौनसारी-बंगाणी कविताओं के विभिन्न कवियों द्वारा प्रस्तुतिकरण होगा।

डेढ घंटे की एक विशेष चर्चा आमन्त्रित की गयी है जिसमें राज्य के प्रतिष्ठित लोक साहित्यकार भाग ले रहे हैं। इस दौरान रवांई-जौनपुर, जौनसार-बाबर, बंगाण, मोरी क्षेत्र, पर्वत की लोक संस्कृति व लोक साहित्य पर चर्चा व दस्तावेजीकरण होगा।

बीट्स आॅफ यमुना वैली: नाम से एक वृहद सांस्कृतिक समागम का आयोजन होगा। जिसमें 45 लोक कलाकार एक साथ मंच पर प्रस्तुति देंगे। इस प्रकार की प्रस्तुति पहली बार होने जा रही है। लोक संस्कृति को एक बड़े मंच पर लाने के लिए और लोक कलाकारो को मंच उपलब्ध करवाने एवं लोक कला को व्यवसाय के रूप में कैसे विकसित करें इस हेतु इस प्रस्तुति की विशेष तैयारी की गयी है। इस दौरान पहाड़ी वाद्य यंत्रों के साथ गीत-संगीत की अद्भुत जुगलबंदी होगी। जिसमें क्रमशरू – शंक, भाणू (घंटी), रणसिंघे दो, ढोल दो, नगाड़े दो, की-बोर्ड, पैड, ढोलक, तबला, मुरली, हुड़का, हारमोनिय, मशकबीन दो, अलगुजा, डौंर इत्यादि 19 लोक बाध्यान्त्र प्रस्तुत होंगे।

हरिद्वार की सियासी झड़प में विधायकों ने दिया सतपाल महाराज को समर्थन

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हरिद्वार में सतपाल माहराज और मदन कौशिक के समर्थकों के बीच लड़ाई का मामला अब राजनैतिक रंग भी लेता जा रहा है।घटना बे बाद जनपद के भाजपा विधायक श्रीप्रेमनगर आश्रम पहुंचे और आश्रम प्रबंधक पवन को हर मदद का भरोसा दिलाते हुए सतपाल महाराज को समर्थन दिया।
सतपाल महाराज को समर्थन देने हरिद्वार ग्रामीण सीट से विधायक स्वामी यतीश्वरांनद, रानीपुर विधायक आदेश चैहान, लक्सर विधायक संजय गुप्ता व ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर तथा हरिद्वार सांसद प्रतिनिधि राजेश शर्मा ने आश्रम पहुंचकर अपना विश्वास महाराज में जताया। उनका कहना था कि यदि किसी प्रकार का विवाद था तो उसे बातचीत के जरिए निपटाया जा सकता था। जो कुछ भी घटित हुआ, उसको उन्होंने निदंनीय करार दिया। कहा कि शहर की तमाम नालियों पर अवैध कब्जा लोगों ने किया हुआ है। पहले मेयर को वहां का अतिक्रमण हटाना चाहिए था। अगर कोई समस्या थी तो आश्रम में बात की जा सकती थी। संघर्ष के बाद आश्रम के बाहर कूड़ा डलवाना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।

वहीं सवाल ये भी बना हुआ है कि सड़कों से अतिक्रमण हटाने निकले मेयर आखिरकार पुलिस फोर्स के बिना सड़क पर कैसे उतर गए, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। मेयर मनोज गर्ग ने पुलिस प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी और न ही पुलिस फोर्स की कोई मदद ली।
मेयर मनोज गर्ग ने केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम की दीवार को गिराने का निर्णय खुद ही लिया और आदेश भी खुद ही दिया। इस दौरान उन्होंने झगड़े को शांत करने का कोई प्रयास भी नहीं किया।
एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि मेयर मनोज गर्ग की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए कोई सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं दी गई। जब विवाद बढ़ गया तो जनता की सूचना पर पुलिस फोर्स घटनास्थल पर पहुंची। ऐसे हालात में जब भाजपा के ही केबिनेट मंत्री के आश्रम से अतिक्रमण हटाया जाना था तो इस झगड़े को हवा किसने दी। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि इस घटना के पीछे भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी का हाथ हो सकता है।

जानिये मौत का इन्तजार क्यो करते हैं गांव के लोग

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उत्तराखण्ड में नैनीताल से लगे खूपी गाँव में सैकड़ों परिवार हर रोज रातभर जागकर अपनी मौत का इंतज़ार करते हैं। इन घरों की दीवारों और बीमों में आई दरारें, इन लोगों के चेहरे पर पड़ी लकीरें इस बात की गवाही दे रही हैं की इन्हें अपनी मौत का डर तो है लेकिन अपने पुस्तैनी घरों से लगाव भी उतना ही है। सरकारें भी आई गई लेकिन इन असहाय और मजबूर लोगों की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। अब जिला प्रशासन का कहना है की इन्हें दो जगह विस्थापित करने की बात चल रही है हालाँकि ये मैदानी क्षेत्रों में विस्थापन चाह रहे हैं।

बरसात के आते ही ये 110 परिवार अपनी मौत के डर से परेशांन हैं क्यूंकि इनके गांव के नीचे बहने वाले पाइंस नाले का बरसात में बहाव बहुत तेज हो जाता है और इससे गांव के नीचे से भूकटाव की स्थिति पैदा हो जाती है । लगभग डेढ़ किलोमीटर की परिधि में बसे इस छोटे से गाँव में निम्न वर्ग के श्रमिक लोग बसेरा करते हैं जिनकी अपनी पुस्तैनी भूमि में मकान है।भूकटाव से गाँव का पहाड़ धीरे धीरे नीचे को खिसक रहा है और इससे घरों समेत सड़कों और दूसरी जगहों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। घर में लगभग डेढ़ इंच की दीवार पर दरार से आरपार देखा जा सकता है। महिलाऐं खाना तो अंदर ही बनाती हैं लेकिन डर के चलते बांकी सब काम घर से बाहर ही करती हैं। बच्चों को भी केवल सोने के समय ही घर में घुसने की इजाजत दी जाती है। समस्त क्षेत्र के साथ घर के भूस्खलन की चपेट में आने के खतरे से यहाँ रहने वाले लोग अपने दरारों वाले कमरे को छोड़कर दूसरी जगह पनाह लेने को मजबूर हैं। मकानों के फर्स भी टूटकर अलग हो गए हैं। यहाँ इतना खतरा है की नए बने मकानों में भी एकदम दरार आ जाती है।
यह पूर्व विधायक सरिता आर्या का गृह क्षेत्र है लेकिन आरोप है की सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने इसके लिए कुछ नहीं किया। क्षेत्रवासियों का आरोप है की यहाँ हर वर्ष नेता और अधिकारी पहुँचते हैं लेकिन काम ढेले भर का भी नहीं हो पाता है। उनका कहना है कि कुछ समय पहले जमीन धंसने की शुरू हुई इस प्रक्रिया के कारण ही घरों में दरारें आई हुई हैं जो पिछले तीन वर्षों से बढ़ते जा रही हैं । मज़बूरी के कारण उन्होंने अपने बच्चों को यहाँ से दूर किसी के घर में आसरा देना पड़ रहा है। आरोप लगाया की कुछ समय पहले प्रशासन ने केवल दो हजार रूपये का मुआवजा देकर इतिश्री कर ली और अब वो ऐसे में जाएं तो जाएं कहाँ ? अब वो सरकार से असमर्थ लोगों के विस्थापन की मांग कर रहे हैं जिससे इन ग्रामीणों को परेशानी ना हो, जबकि कुछ लोग तो पहले ही इस जगह को छोड़कर बाहर जा चुके हैं।
ग्रामीणों ने ये भी बताया कि ये भूकटाव का सिलसिला सन 1997 से शुरू हुआ था जिससे खूपी, भुमियधार और कुरिया गांव को खतरा हो गया था । क्षेत्र की ग्राम प्रधान का कहना है की उन्होंने कई बार ये बात सरकार के कानों तक पहुंचाने की कोशिश की है, जिसके बाद जिला प्रशासन जाग जाता है लेकिन हर वर्ष बरसात जाते ही सब भूल जाते हैं। उनकी मांग है की इस बरसाती नाले की पक्की मरम्मत की जाए तांकि वो चैन से सो सकें।
ग्रामीणों के इस दर्द को दूर करने के लिए उठाए गए कदम को जानने के लिए जब हम प्रशासन के पास पहुंचे तो उन्होंने हमें बताया की इस गाँव के विस्थापन की कार्यवाही लम्बे समय से चल रही है। इन्हें दो विकल्प दिए गए हैं। इसमें 20 नाली गेठिया तो 30 नाली बेलुवाखान में दी जानी थी लेकिन इन पीड़ितों ने पर्वतीय क्षेत्र छोड़कर मैदानी क्षेत्रों में विस्थापन की मांग की है।
जिलाधिकारी ने बताया की एस.डी.एम.को ग्रामीणों के साथ फिर से बैठकर उन दो प्रस्तावित स्थानों में जाने पर चर्चा करने को कहा गया है। साथ में निर्देश दिए हैं कि बरसातों के दौरान उन्हें समीप्वर्तीय गेठिया गाँव के सरकारी स्कूल में विस्थापित कर दिया जाए। उन्होंने ये भी कहा की भूकटाव रोकने के लिए सरकार अपने भूगर्भ वैज्ञानिकों से परिक्षण करवाएगी।

एक और रिकाॅर्ड को दे रहा है चुनौती दून का ये डेयर डेविल

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टीम ऐवोलूय्शन ने अपनी स्टंट बाइकिंग के जरिये काफी नाम कमा लिया है। इस ग्रुप ने कई रिकाॅर्ड अपने नाम किये हैं, और अब जल्द ही एक और रिकाॅर्ड पर जीत हासिल करने की तैयारी में है युवाओं का ये दल। टीम के सबसे युवा सदस्य देहरादून के अंकित भास्कर आने वाले दिनों में आॅटो गियर स्कूटर पर सबसे ज्यादा गोल चक्कर मारने के रिकाॅर्ड पर अपनी नजरे लगाये हुये हैं।

ankit bhaskar

ग्रुप के मेंटर विनीत बताते हैं कि, “धन की कमी और पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश ने हमारे रास्ते में रुकावट जरूर डाली है लेकिन हमें उम्मीद है कि जल्द ही मौसम भी साफ होगा और फंड का इंतजाम भी हो सकेगा।” फिलहाल सबसे ज्यादा सर्कल व्हीली का रिकाॅर्ड दो लोगों के नाम दर्ज है, इनमें एक स्पेन से है तो दूसरा जपान से, दोनों ने ही 101 चक्कर लगा कर ये रिकाॅर्ड हासिल किया हैं।

चार सदस्यिो के टीम का सदस्य अंकित कहते हैं कि, “ये सर्कल व्हीली हर कोई अासानी से नहीं कर पाता। इसके लिये बैलैंस औऱ ब्रेक पोइंट बेहद जरूरी है। मैं काफी उत्साहित हूं औऱ रोजाना अभ्यास भी कर रहा हूं। मैं जल्द से जल्द अपने सपने को साकरा करना चाहता हूं”

इस दल के पीछे की ताकत, लक्ष्य खंडूरी का कहना हैं कि, “हांलाकि स्टंक बाइकिंग को खेल नहीं रोमांचक खेल माना जाता है पर अंकित एक बेहतरीन खिलाड़ी है। इस खेल की मार्केट पनपने में अभी समय लगेगा पर ये दिन पर दिन देशभर में प्रचलित होता जा रहा है।”

हांलाकि ट्रैक पर अंकित 12-13 घंटे रोजाना अभ्यास कर अपने सपने को साकार करने में लगा है पर अभी अंकित के सामने चुनौतियां और भी है। स्टंट के लिये अपने स्कूटर को मोडिफाय करने के लिये पैसों की दिक्कत सामने आ रही है औऱ साथ ही ईवेंट को स्पाॅन्सर की भी जरूरत पड़ेगी।

टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से अंकित और उनके पूरे दल को शुभकामनाऐं।

तो भगवान बद्री विशाल भी हुए मिलावट के शिकार!!

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तीर्थयात्रियों को यह जानकर झटका लगेगा कि मंदिर में उनकेे द्वारा चढ़ाया हुआ ‘प्रसाद’ जो चारधम मंदिरों में दिया गया था वह ना केवल केमिकल से बना हुआ था बल्कि उसमें खराब गुणवत्ता वाले इन्ग्रिडियेंट भी इस्तेमाल किया गया था।

देहरादून का एक गैर सरकारी संगठन सोसाइटी आॅफ पाॅल्यूशन एंड इन्वाॅरमेंट कन्जरवेशन साइंटिस्ट (एसपीईसीएस) ने एक अध्ययन के बाद पाया है कि गांगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ के चारों देवस्थानों में इलायची को प्रसाद के रुप में दिया गया था,जिसमें रसायन शामिल थे। इसके अलावा, एनजीओ ने दावा किया है कि, घी, नारियल, काजू और किशमिश भी खराब गुणवत्ता के थे।

एनजीओ ने मई-जून की अवधि में 1,143 खाद्य पदार्थों का सेंपल लिया और जांच करने पर 983 नमूनों में मिलावट मिला।एनजीओ के एक अधिकारी ने कहा कि इससे ज्यादा बुरा क्या हो सकता है कि भोजन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नमक में आयोडीन शामिल नहीं है।

टेस्ट किए गए सेंपल के कुल नमूनों में से 86% का मिलावट मिला। नमक के सैंपल में 81 प्रतिशत में आयोडीन नहीं था, सरसों के तेल और वर्मिलियन मिलावटी पाए गए।चाइनिज नूडल्स बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाले मिर्च के सॉस, टमाटर सॉस और सिरका जैसे कुछ सामान्य आइटम खाने के लिए हानिकारक और अनफिट पाए गए।

एसपीईसीएस के सेक्रेटरी बृजमोहन शर्मा ने बताया कि “केवल भोजन ही नहीं, यहां तक कि देवताओं को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद खराब गुणवत्ता का है। यात्रा पर लोगों को दिया जाने वाला खाना जिसकी गुणवत्ता इतनी खराब हो वह जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। नमक, जो  खाने के लिए सबसे एक महत्वपूर्ण माना जाता है,वो भी आयोडीन के बिना पाया गया जो खतरनाक है।”

चारधाम यात्रा शुरु होने के पहले 10 दिनों में, 2.21 लाख तीर्थयात्रियों ने बद्रीनाथ और केदारनाथ में श्रद्धांजलि अर्पित की। तीर्थयात्रा का मौसम 27 अप्रैल को शुरू होने के बाद करीब 15 लाख तीर्थयात्रियों ने दो महीनों में चार पर्वतों का दौरा किया।

खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) एडिशनल कमीश्नर पंकज पांडे ने एनजीओ के निष्कर्षों को खारिज कर दिया।उन्होंने कहा कि “यदि निष्कर्ष वास्तविक हैं, तो वे सरकार के साथ अपने आंकड़े क्यों नहीं साझा करते हैं?उन्होंने कहा कि हम इस बात का दावा नहीं कर सकते कि कि चारधाम मार्ग पर कोई मिलावट नहीं है, लेकिन यह रिपोर्ट बढा़-चढ़ा कर पेश की गई है।

वहीं पर्यटन सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम भी पंकज पांडे के समर्थन में आए।उन्होंने कहा कि “मैं यह नहीं कह सकता कि रिपोर्ट सही है या नहीं, लेकिन यह राज्य का नाम खराब करती है। अगर एनजीओ मिलावट को  लेकर इतनी परेशान है, तो यह प्राधिकरण तक क्यों नहीं पहुंचता है?

एसपीईसीएस के सचिव बृजमोहन शर्मा से इस बारे में कहा कि “हम साल 2005 से यह टेस्ट करते आ रहे हैं लेकिन इसपर सरकार का रवैया मुझे आज तक समझ नहीं आया,रिर्पोट को खारिज़ करने के अलावा आज तक किसी भी सरकार ने इसपर कोई कदम नहीं उठाया है”।उन्होंने कहा कि “रही बात राज्य का नाम खराब होने की तो हमारा काम जनता को सही और सच बताने का है हम वहीं कर रहे हैं।” रिर्पोट के बारे में उन्होंने कहा कि “राज्य में सचिव से मिलना मुश्किल होता है और सीएम को हमने यह रिर्पोट भेज दी है।शर्मा ने कहा कि देखना यह है ये सरकार इसपर कोई कदम उठाती है या नहीं।”

वहीं शासन की तरफ से भी इन खबरों पर ध्यान देते हुए जिलाधिकारियों और अधिकारियों को यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले खाने की दुकाओनों आदि पर सैंपलिंग कर प्रसाद, खाना आदि कि गुणवत्ता की जांच करने को कहा गया है।

उत्तराखंड में शनिवार-रविवार को भारी बारिश की संभावना

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सूबे में भारी बारिश से अभी राहत मिलने वाली नहीं है। मौसम विभाग ने एक बार फिर से सूबे के सात जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार और रविवार को देहरादून समेत सात जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही शुक्रवार को भी कई जगह भारी बारिश हो सकती है, जबकि राजधानी देहरादून सहित सूबे कई जिलों में गुरुवार को रूक-रूककर वर्षा होती रही।

विभाग के अनुसार, इससे पहाड़ में जहां भूस्खलन हो सकता है वहीं मैदान में नदी किनारे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। देहरादून मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक, शुक्रवार को भी प्रदेश में कई जगह भारी बारिश हो सकती है। लेकिन बारिश के असली तेवर शनिवार और रविवार को देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, चम्पावत, नैनीताल पिथौरागढ़ और यूएस नगर में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन प्रदेश में अच्छी बारिश के आसार हैं। इस कारण पहाड़ में कई जगह भूस्खलन के साथ ही मैदान में नदी-तटों पर बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है।

मूसलाधार बारिश से जलमग्न हुई तीर्थनगरी

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गुरुवार को तीर्थनगरी हरिद्वार में हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर जलमग्न हो गया। करीब डेढ़ घंटे की बारिश के कारण कई दुकानों व घरों में पानी घुस गया। बारिश और जलभराव के कारण कई स्थानों पर जाम लग गया।

गुरुवार को तीर्थनगरी में बादल जमकर बरसे। प्रातः करीब सात बजे आरम्भ हुई बारिश से सम्पूर्ण तीर्थनगरी में जलभराव हो गया।। शहर की कोई ऐसी सड़क व गली नहीं बची, जहां जलभराव न हुआ हो। उपनगरी ज्वालापुर, मध्य हरिद्वार, उत्तरी हरिद्वार व ज्वालापुर के कई इलाकों में भारी जल भराव के कारण कई घरों व दुकानों में पानी घुसने से लोगों का काफी नुकसान हुआ। मध्य हरिद्वार के रानीपुर मोड़ पर हर बार की तरह इस बार भी भारी जलभराव देखने को मिला। रानीपुर मोड़ पर करीब पांच फुट के लगभग जलभराव होने से कई यहां यातायात बाधित रहा। वहीं, गोविन्दपुरी में भी कई घरों में पानी घुस गया। ऐसा ही कुछ हाल उत्तरी हरिद्वार में भी देखने को मिला। यहां भी कई कालोनियों व आश्रमों में बरसात का पानी घुसने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। रानीपुर मोड़ पर जल निकासी के लिए लगाए गए पम्पिंगसेट भी किसी काम न आए। बरसात के कारण ड्यूटी पर जाने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक समस्या सिडकुल व भेल जाने वालों को हुई। जहां रानीपुर मोड़ पर जलभराव के कारण वह सिडकुल व भेल क्षेत्र में नहीं जा सके। बरसात बंद होने बाद लोग जब घरों से काम के लिए निकले तो सड़कों पर जलभराव के कारण उनको समस्याओं से दो-चार होना पड़ा।
वहीं, प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में हो रही बारिश और तीर्थनगरी में हुई मूसलाधार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया। राजमार्ग निर्माण के कारण भी लोगों की समस्या में इजाफा हुआ। जहां भराव के लिए डाली गई मिट्टी सड़कों पर बरसात के कारण बह आई, जिस कारण सड़कों पर कीचड़ होने से वाहन चलाने में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बहराल काफी दिनों से ऐसी बरसात की उम्मीद लगाए बैठे तीर्थनगरी के बाशिंदों को गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश के कारण खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।