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हिलजात्रा मेला में शामिल हुए वित्त मंत्री

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प्रदेश के वित्त व संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने सोमवार को पिथौरागढ़ के पुराण गांव में प्रसिद्ध हिलजात्रा में सम्मलित हुए। ग्रामीणों द्वारा वित्त मंत्री का जोरदार स्वागत किया।
वित्त मंत्री ने मेले की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी परंपरा को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की मेले और पयर्टन को बढ़ावा दे रही है। इस दौरान ग्राम प्रधान द्वारा गांव की विभिन्न समस्याएं को बताया। जिस पर वित्त मंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा कि पुराण गांव की समस्याओं को निस्तारण विधायक निधि से किया जाएगा।

आधुनिक उपकरणों से लैस होगा मीडिया सेंटर, सीएम ने दिए निर्देश

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 मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को सचिवालय स्थित निर्माणाधीन मीडिया सेन्टर का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया सेन्टर में आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की व्यवस्था की जाए, जिससे मीडिया प्रतिनिधियों को सूचनाओं के प्रेषण में सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक सूचना पंकज कुमार पाण्डेय को निर्देश दिये कि अवशेष कार्य को शीघ्र पूरा कर लिया जाए।
सूचना महानिदेशक पाण्डेय ने कहा कि 481.35 लाख रूपये की लागत से बन रहे मीडिया सेंटर में सभी आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जायेगी। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए मीडिया सेन्टर में आधुनिक तकनीक के कम्प्यूटर व वाई-फाई कनेक्टिविटि की व्यवस्था के साथ ही अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जायेंगी। मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ताओं के लिए लगभग 200 की सीटिंग क्षमता का एक आधुनिक हॉल भी बनाया जा रहा है।

पेयजल निगम ने 25 अफसरों को दी चेतावनी

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पेयजल निगम प्रबंधन की तमाम सख्ती के बावजूद अफसरों के सुस्त रवैये में सुधार नहीं आ रहा। अब पेयजल निगम प्रबंधन ने लापरवाह अधिशासी अभियंताओं को नोटिस जारी कर अपनी कार्यशैली सुधारने का अल्टीमेटम दिया है। निगम ने दो टूक कहा है कि यदि अफसरों ने अपने काम में तेजी नहीं दिखाई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

तीन साल पहले पेयजल निगम ने 25 अधिशासी अभियंताओं को काम में हीलाहवाली पर नोटिस जारी किए थे। इन अभियंताओं ने अपने अधीन बन रही पेयजल योजनाओं के काम में सुस्ती दिखाई थी। यह इन अभियंताओं की लापरवाही का ही नतीजा है कि सालों पहले शुरू हुई एनआरडीडब्ल्यूपी, नाबार्ड, 13वें वित्त आयोग की योजनाओं का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
हैरत की बात यह है कि वर्तमान में भी इन अफसरों का काम सुस्त ही है। इससे आजिज आकर पेयजल निगम प्रबंधन ने इन अभियंताओं को अपने काम का ढर्रा सुधारने के लिए दो माह का वक्त दिया है। इस बावत प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने बताया कि अधिकारियों की लापरवाही उनकी एसीआर में तो शामिल की ही जाएगी, साथ ही उनके खिलाफ प्रबंधन कार्रवाई भी करेगा।
अटके हुए हैं 70 करोड़ रुपये
अफसरों की सुस्ती के चलते एनआरडीडब्ल्यूपी का काम पूरा नहीं हो पाया। जिस कारण प्रोजेक्ट बंद हो गया और निगम को छह योजनाओं को पूरा करने के लिए शेष 70 करोड़ रुपये नहीं मिल पाए। बजट की आस में ये योजनाएं अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। इसी तरह 13वें वित्त आयोग का भी बजट रुका हुआ है। यदि अधिकारी इन योजनाओं का काम समय पर पूरा कर लेते तो ये नौबत नहीं आती। 

शिक्षक दिवस विशेषः पौड़ी का एक ऐसा स्कूल जो दे रहा बच्चों को मेट्रोपाॅलिटन शहरों जैसी शिक्षा

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दुनिया के लगभग हर कोने में ऐसे बहुत से लोग मिलेंगे जो समाज के लिए कुछ अलग करना चाहते हैं, और कुछ लोग ऐसे मिलेंगे जो सोचते नहीं कुछ अलग करते हैं। ऐसे ही कुछ गुरुओं से शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको रूबरु करवाऐंगे।यह शिक्षक ना केवल अलग कर रहे बल्कि उन्होंने अपने आस पास के लोगों को भी इस काम को करने के लिए प्रेरित किया है।

पहाड़ो के बीच बसे पौड़ी जिले का एक ऐसा दूरस्थ गांव सयालखाल जिसे देखने लोग दूर-दूर से जाते हैं। अपनी सुंदरता के लिए मशहूर यह गांव लोगों को एक और बात से आकर्षित करता है।इस गांव की जो दूसरी खास बात है वह है यहां कि बहुत ही स्पेशल स्कूल परमार्थ अवधावन, एक ऐसा स्कूल जिसकी सुविधाएं मेट्रो शहर से कहीं बेहतर हैं।

इस स्कूल की खास बात हैं यहां का पाठ्यक्रम। Parmarth Awadhawan हम सभी जानते हैं कि स्कूल में पढ़ाई होती है लेकिन इस स्कूल में बच्चों को अलग ढंग से पढ़ाया जाता है।चली आ रही टीचिंग टेक्निक के अलावा यहां बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रेक्टिकल रुप से तैयार किया जाता है।इस स्कूल में हर वो सुविधा है जो शहरों को महंगे स्कूलों में होती है जैसी की स्मार्टक्लास रुम, लाइब्रेरी, रिक्रेएशनल रुम और प्लेग्राउंड।

यह स्कूल दिलबीर सिंह परिहार और उनके बेटे रोहन सिंह परिहार के अलावा शिन शिवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा है।टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में रोहन सिंह परिहार ने बताया कि, “यह स्कूल बहुत से मायने में दूसरे स्कूलों से अलगा है। यहा हमारा फोकस बच्चों में तीन खास बातें उजागर करने में होता है, पहला क्रिएटिविटी, दूसरा कांफिडेंस और तीसरा बच्चों की उचित डायट।” रोहित कहते हैं कि, “हम बच्चों में डायट का ध्यान इसलिए रखते हैं कि बचपन में दिमागी विकास के लिए उचित भोजन बहुत जरुरी जिसके लिए हमें इंटरनेशल टीचर गाईड करते हैं। हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों की क्रिएटिविटी को बाहर लाने में विश्वास रखते हैं और अपना पाठ्यक्रम भी उसी आधार पर सेट करते हैं कि बच्चे अपनी सोच और क्षमता से पढ़ाई करें।”

Parmarth Awadhawan

वह बतातें हैं कि, “यह स्कूल बाकी सभी स्कूलों से अलग है क्योंकि इसमें हम को-करीक्युलक एक्टिविटी ज्यादा करवाते हैं। इस स्कूल को चलाने के लिए रोहित और उनके पिता दिलबीर हर महीने एक फिक्स अमाउंट डोनेट करते हैं स्कूल और आश्रम दोनों के लिए।अभी यहां लगभग 53 बच्चे हैं जो बिना किसी फीस के इस स्कूल में पढ़ रहे हैं।अभी इस स्कूल में प्री नर्सरी से कक्षा पांच तक के बच्चे पढ़ रहे हैं।

स्कूल के आसपास, स्कूल मैनजनमेंट द्वारा बनाये गये कुछ क्वार्टर हैं जिसमें स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर रहते हैं ।स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक दूर से आए हैं और एक अच्छे काम में मदद कर रहे हैं , इसलिए स्कूल उन्हें तनख्वाह भी अच्छी देता है।स्कूल के बाहर कुछ गाड़ियां खड़ी रहती हैं जो आस-पास के गांव से आने वाले बच्चों को लाने और वापस ले जाने के काम आती है।एक कुक के अलावा परमार्थ अवधावन में गेस्ट रुम भी उपलब्ध है।

इस स्कूल को खोलने के पीछे क्या वजह थी इसपर रोहन परिहार कहते हैं कि, “यह हम 5-6 लोगों की सोच थी और उसमें हमें राह दिखाई हमारे स्पीरुचुअल गुरु शिन ने। हम आने वाले पौध को शुरुआत से ही अच्छी शिक्षा के माध्यम से आगे आने समय के लिए तैयार कर सकते हैं।” रोहन ने कहा हमारे गुरु के मार्गदर्शन के बिना शायद यह कर पाना आसान नहीं था।

उत्तराखंड में रंगमंच की एक आधार शिला, नाट्य गुरु श्रीश डोभाल

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कहते है अगर जीवन में समाज की बेहतरी के लिए कोई उदेश्य न हो तो वो जिंदगी निर्थक और बेजान सी हो जाती है, लेकिन उदेश्य को लेकर आगे बढ़ते रहना क्या होता है और उस उदेश्य की पूर्ति के जीवन – घरबार, दो टाइम की रोटी और चमचमाता कॅरियर सब दाँव पर लगा कर कंधे पर बैग, बैग में 2 कपडे और एक शहर से दूसरे शहर की डगर भरते जीते जागते आदमी की मिसाल है नाट्य गुरु श्रीश डोभाल जिनका हाथ लगते ही या यू कहे जिनकी कार्यशाला में जाते ही देश भर के कई युवा-छात्र -पत्रकार और अध्यापक तप कर सोना बन जाते है और अपने-अपने छेत्र में एक नयी पहचान बनाते है।

ऐसे है साहित्य की आधार शिला पर अनेक कलाओ की संविंत विधा रंगमंच के लिए समर्पित रंगकर्मी श्रीश डोभाल जिनका जन्म ऋषिकेश में हुआ, आरंभिक शिक्षा चम्बा, टिहरी गढ़वाल के बाद देहरादून से बी.एस.सी. करके सरकारी नौकरी छोड़ कर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानि की एन.एस.डी  से नाट्य व रंगमंच में तीन वर्षीय गहन स्नातकोत्तर प्रशिक्षण अभिनय विशेज्ञता के साथ 1984 में पूरा किया।

ये उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था, हर कोई एन.एस डी से निकल कर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में अपना भाग्य आजमाने और बेहतर कैरियर के लिए जा रहा था, ऐसे में श्रीश डोभाल ने रंगमंच के प्रति अपनी प्रतिब्धता को घ्यान में रख कर उत्तराखंड में नए रंगमंच को जन्म दिया। उसी वर्ष,1984 में जब उत्तराखंड अविभाजित उत्तरप्रदेश का अंग था यहाँ के उन प्रमुख स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर स्थानीय कला व साहित्य प्रेमियों के सहयोग से संचालित किया और उत्तराखंड में रंगमंच को आधुनिक शैली व तकनीक से विकसित किया।

shirish dobhal

क्रमश:उत्तरकाशी ,कोटद्वार ,टिहरी, गोपेश्वर  और श्रीनगर में उत्साही युवाओ, प्राथमिक से लेकर महाविद्यालयों तक के अध्यापको, छात्र-छात्राओं को सार्थक रंगमंच की ओर रुझान बढ़ाते हुए नब्बे के दशक में अनेक प्रबुद्ध व्यक्तियों को रंग आंदोलन से जोड़ कर उत्तराखंड में एक नयी विधा को जन्म दिया। आज श्रीश डोभाल के जिंदगी भर के प्रयास की बदौलत उत्तराखंड के सभी जिलों में शैलनट की स्वतंत्र इकाई स्थापित की और उत्तराखंड में कला के छेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, शैलनट के इस नाट्य गुरु की पाठशाला से निकले और सहयोगी रहे उत्तराखंड के कुछ प्रबुद्ध नागरिक मंत्री प्रसाद नैथानी, सुरेंद्र सिंह रावत, कमला राम नौटियाल, प्रो प्रभात उप्रेती, डॉ महावीर प्रसाद गैरोला, डा सुधा आत्रे, प्रो चन्द्रप्रकाश बड़थ्वाल [पूर्व कुलपति ], सत्यप्रकाश हिंदवाण, डॉ नन्द किशोर हटवाल, प्रो डी आर पुरोहित, एसपी ममगाई, डा राकेश भट्ट, डा डीएन भट्ट ,दिनेश उनियाल ,अनुराग वर्मा जैसे उत्तराखंड के कई नाम है जो हर छेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे है।

श्रीश डोभाल ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को कई डाक्यूमेंट्री के जरिये सजोये रखा है, साथ ही 15 भाषाओ में नाटकों का निदेशन, 11 नाटकों का अनुवाद और गढ़वाली से अंग्रेजी महाभारत पर आधारित गरुड़ व्यूह का लेखन के साथ-साथ 35 अधिक निर्देशकों के साथ अभिनय, 6 निदेशित नाटकों की अंतराष्ट्रीय समारोह में सफल मंचन किया है, 20 टीवी धारावाहिक, कई टेली -फिल्मो में अभिनय भी किया हैं। श्रीश डोभाल ने प्रख्यात निर्देशकों के साथ तीन राष्ट्रीय पुरूस्कार प्राप्त फिल्मों में अभिनय तो किया है लेकिन अाज श्रीश डोभाल उत्तराखंड सहित कई राज्यों में नाट्य विधा के प्रसार के चलते कई पुरुस्कारों से सम्मानित भी हुये है।

इस नाट्य गुरु का पूरा जीवन रगमंच को समर्पित है। इनकी पाठशाला से निकले कई शिष्य देश भर में इस विधा को आगे ले जाने में लगे है।

पेट्रोल की बोतल लेकर महाविद्यालय की छत पर चढ़ा छात्र

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चमोली जिले के कर्णप्रयाग महाविद्यालय में यूआर पद पर विजयी प्रत्याशी के तृतीय सेमेस्टर में कम अंक आने के कारण लिंगदोह कमेटी के अनुसार उसे अयोग्य प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। इसके विरोध में यूआर पद के विजयी प्रत्याशी सूरज सिंह पेट्रोल की बोतल लेकर महाविद्यालय की छत पर चढ़ गया और आत्मदाह की चेतावनी देते हुए इस पद पर चुनाव निरस्त करने की मांग करने लगा।

बीते शनिवार को महाविद्यालय कर्णप्रयाग के छात्र संघ का चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें यूआर पद पर सूरज सिंह विजयी रहे। जबकि अंकित रावत दूसरे स्थान पर रहे। चुनाव से पूर्व नामांकन होने के दिन तक सूरज सिंह का तृतीय सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हुआ था, लिहाजा उसने महाविद्यालय प्रशासन को लिखित रूप में दिया था कि यदि उसका परीक्षा परिणाम अनुकूल न रहा तो उसका नामांकन रद्द किया जा सकता है।
महाविद्यालय प्रशासन ने चुनाव संपन्न करवा दिए, लेकिन यूआर पद के चुनाव की तकनीकी कारणों से विधिवत घोषणा नहीं की। लिहाजा अब जब सूरज सिंह का परीक्षा परिणाम आया तो वह तृतीय सेमेस्टर में 24 के्रडिट अंक पूरे न पा सका। जिससे लिंगदोह कमेटी के अनुसार वह इस पद के लिए अयोग्य माना गया। अब जब रिजल्ट आया तो सूरज सिंह ने महाविद्यालय प्रशासन से मांग की कि यूआर पद का चुनाव निरस्त कर दिया जाए। इस मांग को लेकर जब महाविद्यालय प्रशासन नहीं माना तो वह पेट्रोल की बोतल लेकर महाविद्यालय की छत पर जा पहुंचा और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। बाद में किसी प्रकार उसे नीचे उतार कर प्रधानाचार्य और चुनाव अधिकारी डा. जीसी वैंजवाल ने वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन देर शाम तक वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल पाया और छात्र वहां से चले गये। इस दौरान महाविद्यालय में पुलिस की टीम भी पहुंची जो सूरज को नीचे उतारने के लिए मसक्कत करती रही।

अनियंत्रित बस पहाड़ी से टकराई, सभी यात्री और ड्राईवर सुरक्षित

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सहारनपुर रोडवेज की बस संख्या UP 11 T 3412, जिसे चालक अमित कुमार पुत्र विक्रम सिंह निवासी सहारनपुर चला रहा था तथा बस में सवारी भरी हुई थी। डाट काली मंदिर के पास देहरादून की तरफ अचानक बस अनियंत्रित हो गई एवं चालक ने बस को पहाड़ी से टकरा दिया। सूचना मिलने पर पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा। पुलिस के पहुँचने तक बस से सारी सवारियां नीचे उतर चुकी थी। चालक द्वारा बताया गया कि बस के ब्रेक फेल हो गए थे एवं सवारियों को बचाने के लिए तुरंत बस को मैंने पहाड़ी पर टकरा दिया। किसी भी सवारी को अथवा चालक-परिचालक को कोई चोट नहीं आयी है।

एक ही दिन में शुरू हुई ‘केदारनाथ’ और ‘फन्ने खां’ की शूटिंग

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रविवार को बॉलीवुड की दो बड़ी फिल्मों की शुरुआत हुई। उत्तराखंड में देहरादून के करीब बालाजी की नई फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिग सुशांत सिंह राजपूत और सैफ-अमृता की बेटी सारा अली खान के साथ शुरू हुई। इस फिल्म का निर्माण एकता कपूर और निर्देशन उनके कजिन ब्रदर अभिषेक कपूर उर्फ गट्टू कर रहे हैं, जो पूर्व में ‘काय पो चे’ और ‘फितूर’ का निर्देशन कर चुके हैं। ये फिल्म अगले साल अप्रैल में रिलीज होनी है।

दूसरी ओर, मुंबई में राकेश मेहरा की प्रोडक्शन कंपनी में फिल्म ‘फन्ने खां’ की शूटिंग शुरू हुई जिसमें अनिल कपूर और ऐश्वर्या राय 17 साल के बाद एक साथ काम कर रहे हैं लेकिन फिल्म में उनकी जोड़ी नहीं है। इस फिल्म में ऐश्वर्या राय के साथ राजकुमार राव की जोड़ी होगी, तो अनिल कपूर के साथ दिव्या दत्ता को कास्ट किया गया है। इस फिल्म का निर्देशन अतुल मांजरेकर कर रहे हैं, जो राकेश मेहरा के सहायक निर्देशक रहे हैं और पहली बार स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर मैदान में आए हैं। इस फिल्म को अगले साल अक्तूबर में रिलीज करने की योजना बनी है। 

बस और टैम्पो की टक्कर से टैम्पो चालक की मौत और नौ बच्चे घायल

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काशीपुर में आज सुबह एक निजी बस और स्कूली ऑटो में आमने सामने की भिड़ंत हो गयी ! दुर्घटना इतनी ज़बरदस्त थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए ! बस चालक मौके पर बस छोड़कर फरार हो गया ! दुर्घटना में ऑटो में सवार 9 बच्चे घायल हो गए जबकि ऑटो चालाक की मौत हो गयी ! घायल बच्चों में से 2की हालत नाजुक देखते हुए उन्हें अन्यत्र रैफर कर दिया गया ! हादसे के बाद सूचना मिलने पर हॉस्पिटल पहुंची ने मामले की जांच शुरू कर दी है !
दरअसल आईटीआई थाना क्षेत्र के पैगा पुलिस चौकी के अंतर्गत अलीगंज रोड पर डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले मासूमों को लेकर उनका ऑटो चालक साजिद नमक युवक महुआखेड़ागंज तथा आसपास के मासूम बच्चों को लेकर स्कूल की तरफ आ रहा था कि सेंट मेरी स्कूल के गेट पर सामने से आ रही एक प्राइवेट बस ने ओवरटेक करने के प्रयास में ऑटो को टक्कर मार दी जिससे मौके पर हाहाकार मच गया ! बच्चों की चीखो-पुकार मचने की आवाज़ सुनकर आसपास के गुजरने वाले राहगीरों तथा सेंट मेरी स्कूल के बस चालकों ने बसों के ज़रिये काशीपुर के राजकीय चिकित्सालय पहुँचाया ! दुर्घटना में ऑटो में सवार 9 बच्चे घायल हो गए जिसमें से ख़ुशी और अभय कुमार नामक दो बच्चों और ऑटो चालक की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें रैफर कर दिया गया जहाँ दोनों बच्चों की हालत चिंताजनक बनी हुई है औरउनका उपचार जारी है ! जबकि ऑटो चालक की उपचार के दौरान मौत हो गयी ! सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारीयों ने घटना के बावत जानकारी ली !
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ बस चालक की लापरवाही से यह हादसा हुआ है !

दिव्यांका त्रिपाठी की मौत की अफवाह

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सोशल मीडिया के बढ़ते दौर में किसी की भी मौत की अफवाहों का दौर तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को सोशल मीडिया पर टीवी अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी की मौत की अफवाह इतनी तेजी से फैली कि उनको खुद सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा।

दिव्यांका त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि कोई उनके मौत की अफवाह उड़ा रहा है, जिससे परिवार से लेकर दोस्त परेशान हो गए। दिव्यांका त्रिपाठी ने लिखा कि, “मैं जिंदा हूं और सही सलामत हूं।” सोशल मीडिया पर फैली अफवाह में कहा गया था कि एक कार हादसे में टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी की मौत हो गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर ही उनको श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया।

इससे कुछ दिनों पहले अभिनेत्री श्वेता तिवारी भी इसी तरह की अफवाह का शिकार हो चुकी हैं। फिल्मी सितारों को लेकर तो इस तरह की अफवाहें उड़ती रहती हैं। दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन और कादर खान से लेकर राजपाल यादव और हाल ही में फरीदा जलाल को भी सोशल मीडिया इसी तरह से मार चुका है।