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फिल्म समीक्षा-भूमि: कमजोर कहानी, कमजोर निर्देशन का शिकार 

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संजय दत्त की वापसी वाली फिल्म ‘भूमि’ पहली नजर में खोदा पहाड़ निकली चूहिया वाली कहावत को चरितार्थ करती है। इस फिल्म में न तो कहानी में दम है और न ही पटकथा में। निर्देशक ओमांग कुमार ने 2017 में 70 के दशक के रिवेंज ड्रामे की कहानी को उन मसालों के साथ रख दिया, जो अब किसी काम के नहीं रहे है।

कहानी आगरा के पास धौलपुर में रहने वाले अरुण (संजय दत्त) की है, जो अपनी बेटी भूमि (अदिति राव हैदरी) के साथ रहता है। भूमि की शादी उसकी पसंद के लड़के से होने वाली है। वहीं एक और लड़का रहता है, जो भूमि से एकतरफा प्यार करता है। भूमि ने उसके प्यार को ठुकरा दिया, तो इलाके के दबंग धौली (शरद केलकर) के साथ मिलकर भूमि की इज्जत लूट ली जाती है। पुलिस और अदालत से इंसाफ नहीं मिलता, तो अपनी बेटी के दुश्मनों से निपटने के लिए पिता खुद मैदान संभालता है और गुनाहगारों को सजा देता है।

ओमांग कुमार ने इससे पहले प्रियंका चोपड़ा के साथ मैरीकाम और ऐश्वर्या राय के साथ सर्बजीत फिल्में बनाई है। भूमि हर लिहाज से उनकी सबसे कमजोर फिल्म है। ओमांग कुमार और उनके लेखकों की टीम ने इतनी लचर कहानी का ताना बाना बुना, जिसमें कुछ भी अच्छा नही रहा। भूमि जैसा रिवेंज ड्रामा 60-70 के दशक के सिनेमा का हिस्सा हुआ करता था। इस दौर में सब कुछ बनावटी लगता है। कमजोर कहानी, बेहद लुलपुंज स्क्रीनप्ले और ओमांग कुमार के गड़बड़ निर्देशन ने इस फिल्म को खराब करने में जमकर योगदान दिया। इस कहानी के सारे किरदार ही इतने कमजोर हैं कि फिल्म कहीं नहीं ठहरती। फिल्म की घटनाओं के बारे में पहले से अंदाज लग जाता है, क्योंकि कुछ नयापन नही है। वही इलाके के दबंग, वही कमजोर अदालल, नक्कारा पुलिस, लांछन लगाने वाले पड़ोसियों जैसे सभी किरदार कमजोर हैं। फिल्म में गति नहीं है। फिल्म के शुरु होने के दस मिनट बाद इंटरवल का लंबा इंतजार होता है और इंटरवल के 5 मिनट बाद दी एंड का इंतजार शुरु हो जाता है।

जब फिल्म का स्ट्रेक्चर ही इतना कमजोर हो, तो इसमें संजय दत्त ही क्या करेंगे। उन्होंने अपने बेहद कमजोर किरदार को इमोशन और एक्शन सीनों से ताकत देने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। उनकी बेटी के रोल में अदिति का किरदार भी कमजोर रहा है। इतनी कमजोर फिल्म से वापसी संजय दत्त के परदे पर लौटने का इंतजार करने वालों को मायूस करेगी। अदिति की परफारमेंस भी खास नहीं। मेन विलेन के रोल में शरद केलकर बेहद लाउड हैं, तो अदिति के मंगेतर के रोल में सिद्धार्थ को तो गायब ही कर दिया गया। संजय के दोस्त के किरदार में शेखर सुमन भी बेदम नजर आए।

अगर इस फिल्म में कुछ अच्छा है, तो वो है एक्शन। गीत-संगीत के मामले में फिल्म साधारण है। सनी लियोनी का आइटम सांग भी अच्छा नहीं है। एडीटिंग कमजोर है। कैमरावर्क अच्छा रहा है। आगरा और आसपास की लोकेशन अच्छी हैं।

भूमि की सबसे बड़ी उम्मीद ये थी कि कई सालों बाद संजय दत्त परदे पर वापसी कर रहे हैं। इस उम्मीद पर ये फिल्म कहीं से खरी नहीं उतरती। छोटे शहरों और कस्बों के सिंगल थिएटरों में शायद कुछ दर्शकों को ये अच्छी लगे, लेकिन आम दर्शकों को ये मायूस करने वाली फिल्म है, जो बाक्स आफिस पर घाटे का सौदा साबित होगी और संजय दत्त की वापसी का ये सफर नाकामयाबी के साथ शुरु होगा।

मेडिकल स्टोर के ताले टूटे, पैसे चुराये

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काशीपुर में चोर ने मेडिकल स्टोर के ताले तोड़कर गल्ले में रखे करीब ढाई हजार रुपये नकदी साफ कर दी। अंदर लगा लाइट विजन सीसीटीवी कैमरे में नकाबपोश कैद हो गया। आवास विकास निवासी योगेश विशनोई कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव हैं। उनका आवास विकास के गेट पर शिवा मेडिकल स्टोर के नाम से मेडिकल स्टोर है। वह रोजाना की तरह गत रात करीब साढ़े नौ बजे स्टोर बंद कर घर चले गए।

आज सुबह वह मेडिकल स्टोर खोलने पहुंचे तो शटर के ताले टूटे थे, इसे देख उनके होश उड़ गए। दुकान में अंदर जाकर देखा तो गल्ले में रखे करीब ढाई हजार रुपये गायब थे। इसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।

साथ ही मेडिकल स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली तो रात करीब 2:19 बजे एक नकाबपोश युवक गल्ले से नकदी निकलता दिखा। उसने फुल बाजू की टी-शर्ट व लाइट ब्लू रंग की जींस पहनी है। पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस मामले की जांच कर रही है। योगेश ने बताया की करीब तीन वर्ष पहले भी मेडिकल स्टोर में चोरी हुई थी। तब गल्ले से तीन हजार रुपये की चोरी हुई थी। पुलिस के मुताबिक चोर की तलाश की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में प्रदर्शन कर चुके ऋषिकेश के राजेंद्र गुप्ता का स्वागत

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फोटोः कृष्णा रावत

इंडोर एशियन गेम्स 2017 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले तीर्थनगरी ऋषिकेश के कराटे खिलाड़ी राजेन्द्र गुप्ता का ऋषिकेश लौटने पर भव्य स्वागत किया गया, एसोसिएशन के अधिकारियों ने ऋषिकेश प्रेस भवन में राजेंद्र गुप्ता का स्वागत किया।

आपको बता दे कि इंडोर एशियन गेम्स इस साल तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशग़ावट में चल रहे है, जिसमे भारत से 268 सदस्यों की टीम अलग अलग खेलों ले किये वहां पहुंचे है, मीडिया से बात करते हुए राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि, “ये उनका सपना था कि वो कभी वो देश के लिए अंतराष्ट्रीय लेवल पर खेले, काफी लंबे समय के बाद उन्हें ये मौका मिला है।” उन्होंने बताया कि वो आगे चलकर ओलिंपिक में भारत को कराटे में मैडल दिलाना चाहते है।

राष्ट्रपति दौरे के लिये पुलिस बल की ब्रीफिंग

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आने के अवसर पर शुक्रवार को पुलिस लाइन देहरादून में अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार की अध्यक्षता में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने ड्यूटी में नियुक्त किए गए समस्त पुलिस बल की ब्रीफिंग की गई। ब्रीफिंग के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखंड, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना, पुलिस उप महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र, जिलाधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने ड्यूटी में लगने वाले समस्त पुलिस बल को निर्देशित किया की वी.वी.आई.पी. ड्यूटी के दौरान निर्धारित समय से 3 घण्टा पूर्व अपने ड्यूटी स्थल पर  पहुंचकर अपनी ड्यूटी के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर लें तथा ड्यूटी स्थल व उसके आस पास के स्थान को भली-भांति चैक कर लिया जाए।

कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर उसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारी गणों को दी जाए। वी0वी0आई0पी0 से मिलने वाले व्यक्तियों पर भी सुरक्षा की दृष्टि से कड़ी नजर रखी जाए एवं पूर्व में नामित व्यक्तियों को ही एंटी सबोटाज चेकिंग के पश्चात कार्यक्रम स्थल में जाने की अनुमति दी जाए। बरसात के मौसम के दृष्टिगत सभी पुलिसकर्मी अपने साथ बरसाती अवश्य रख लें। नोडल पुलिस अधिकारी अपने साथ वर्दी एवं सादे में लगने वाले समस्त पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों की पहचान कर उनके ड्यूटी कार्ड चेक कर लें तथा उनको ड्यूटी के संबंध में भली-भांति ब्रीफ कर ले तथा इस बात को सुनिश्चित कर लें कि ड्यूटी में नियुक्त अधिकारी कर्मचारिगण अपने ड्यूटी स्थल को छोड़कर किसी एक स्थान पर एकत्रित न हो।

जिन स्थानो पर यातायात एवं भीड़ का दबाव अधिक रहता हो वहां रस्सों व बैरिकेटिंग की सहायता से यातायात नियंत्रित किया जाए। संदिग्ध व्यक्तियो एवं वाहनों की चेकिंग विधिवत रुप से की जाए । आपराधिक, अवांछनीय एवं सांप्रदायिक तत्वों पर कड़ी दृष्टि रखी जाए ताकि वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था में कोई त्रुटि ना हो। साथ ही प्रभारी अधिकारी जौलीग्रान्ट को निर्देशित किया गया कि वह एयरपोर्ट व उसके आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश हेतु सघन कांबिंग करा ले।

इसके अतिरिक्त वरिष्ठ एसएसपी देहरादून ने ड्यूटी प्वाइंटो पर नियुक्त समस्त प्रभारी अधिकारियों को बताया कि आज होने वाली रिर्हसल के पश्चात यदि उन्हें किसी ड्यूटी प्वाइंट पर सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता हो तो उसे डी-ब्रीफिंग के दौरान बता दें ताकि समय से सारी सुरक्षात्मक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाए। ड्यूटी पर लगने वाले समस्त कर्मियों को निर्देशित किया गया कि ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन का बिल्कुल इस्तेमाल ना किया जाए एवं ना ही बिना बताए अपने ड्यूटी पॉइंट को छोड़ा जाए। ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उक्त ब्रीफींग के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ, सेनानायक 46 वीं वाहिनी पीएसी, पुलिस अधीक्षक सतर्कता, सेनानायक आई0आर0बी प्रथम नैनीताल एवं अन्य शासन प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। ब्रीफिंग के पश्चात समस्त पुलिस बल की फुल ड्रेस रिहर्सल करवाई गई।

कुंजापुरी पर्यटन मेले में सांस्कृतिक संध्या में झूम के नाचे कैबिनेट मंत्री

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फोटोः कृष्णा रावत

कुंजापुरी पर्यटन समिति, ऋषिकेश के द्वारा आयोजित होने वाला कुंजापुरी पर्यटन विकास मेले कि शुरुवात हो चुकी है, नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले की ख़ास बात ये है कि इसमें कलाकार उत्तराखंड सहित देश के कोने कोने से आकर अपनी कला की प्रस्तुति देते है।

नवरात्रों की शुरुवात के साथ ही कुंजापुरी मेले पर भी शबाब चढ़ने लगा है पहले दिन की सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के मशहूर गायक शबाब साबरी की प्रस्तुति पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भी अपने आप पर काबू नही रख सके और उनके धुन पर नाचने लगे। मंत्री जी को नाचता देख उनके छेत्र की स्थानीय जनता में भी जोश आ गया और वो भी मंत्री जी के साथ ठुमके लगाने लगे।

वहीं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है की नवरात्री पर्व का हमारे लिए काफी बड़ा महत्व है इसे बुराई पर मानवता की जीत मन जाता है, वहीँ कुंजापुरी पर्यटन विकास मेले के बारे में मंत्री जी ने बताया की इस मेले के माध्यम से नरेंदर नगर छेत्र के तमाम विकास की घोस्नाएं होती हैं।

उर्दू विषय में बिना डिग्री नहीं बनेंगे सहायक अध्यापकः हाईकोर्ट

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राज्य में समकक्ष परीक्षा पास और उर्दू विषय में डिग्री के बिना प्राथमिक सहायक अध्यापक नही बन सकते। शिक्षक बनने के टीईटी जरूरी है, शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए उर्दू मोअल्लिम डिग्री अयोग्य घोषित हो गई है।

दरअसल उधमसिंह नगर के मो.हफीज व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहायक अध्यापक के पदों पर आवेदन निरस्त करने को चुनौती दी, इनका कहना था कि, “वह उर्दू मोअल्लिम पास हैं जो बीटीसी के समकक्ष मानी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही नियम लागू है तो एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश पारित कर दिया।”

इस फैसले के खिलाफ सरकार ने विशेष अपील दायर की, सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने बताया कि, “2012 की निवमावली के अनुसार यह डिग्री पद के योग्य नही है। उत्तराखंड में उर्दू मुख्य विषय के साथ स्नातक, दो साल का बीटीसी व टीईटी के बाद ही शिक्षक बन सकते हैं। उर्दू मोअल्लिम एक साल का है और राज्य में समकक्ष डिग्री को नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में आवेदक पात्र नही है।”

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने सरकार की दलीलें स्वीकार कर अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया।

बीआरओ की सुस्ती, निजी कम्पनी के हाथों बार्डर रोड का काम

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मुनस्यारी के चीन सीमा तक सड़क निर्माण में हो रही देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 27 किलोमीटर सड़क निर्माण का दायित्व सीमा सड़क संगठन से वापस लेकर निजी कंपनी को सौंप दिया है। कंपनी को दो वर्ष के भीतर सड़क तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।

उत्तराखंड से लगी चीन सीमा तक 66 किमी लंबी सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 2007 में स्वीकृत हुआ था। 2009 में इसका कार्य शुरू हुआ, वर्ष 2012 तक सड़क निर्माण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन आठ वर्षो में मात्र 20 किमी सड़क बन पाई है। सड़क निर्माण की धीमी गति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तिलमधार से बुगडियार तक 27 किलोमीटर सड़क निर्माण का जिम्मा सीमा सड़क संगठन से वापस लेकर निजी कंपनी एबीसीआइ को सौंप दिया है।

कंपनी वर्ष 2019 तक इस काम को पूरा करेगी। शेष 19 किमी सड़क निर्माण का कार्य सीमा सड़क संगठन करता रहेगा।आइटीबीपी के बरेली रेंज के डीआइजी एपीएस निंबाडिया ने कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने सड़क को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कंपनी निर्धारित समय पर कार्य पूरा करे। उन्होंने कहा कि, “सड़क निर्माण की मॉनिटरिंग अब खुद आइटीबीपी खुद करेगी, आइटीबीपी के अधिकारी हर सप्ताह क्षेत्र में आकर निर्माण कार्य की समीक्षा करेंगे।” शुभारंभ अवसर पर एबीसीआइ कंपनी के तमाम प्रतिनिधि मौजूद थे।

पिता-पुत्र करेंगे धर्म और अधर्म का युद्ध

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हर पिता चाहता है कि उसका बेटा राम जैसा हो और शायद ही कोई बेटा हो जो चाहेगा उसके पिताजी रावण जैसे हों, लेकिन शीशमहल की रामलीला में पिताजी रावण तो बेटा राम की भूमिका में मंच पर आमने-सामने होंगे। राम के रूप में बेटा रावण बने अपने पिता पर युद्धभूमि में बाणों की बौछार करेगा।

शीशमहल, हल्द्वानी में युवा सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति की ओर से 23 सितंबर से रामलीला का शुभारंभ होगा। राम और रावण के रूप में पिता-पुत्र की जोड़ी मंच पर भक्तों के आकर्षण का केंद्र होगी। रामलीला में कार्तिकेय कॉलोनी ऊंचापुल निवासी प्रेम चंद्र जोशी रावण की भूमिका निभाएंगे, जबकि उनके पुत्र कृष्ण जोशी राम की भूमिका।

एलआइसी में क्लर्क के पद पर तैनात उनके पिता प्रेम पहले शीशमहल में ही रहते थे। वह पिछले आठ सालों से रामलीला में रावण के पात्र की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि, “पुत्र कृष्ण पहले सीता और भरत की भूमिका निभा चुका है। कृष्ण ने विगत वर्ष निर्मला कॉन्वेंट स्कूल काठगोदाम से इंटर की परीक्षा 94.3 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। वर्तमान में वह दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र है।” कमेटी के अध्यक्ष हरीश पांडे ने बताया कि, “रामलीला में राम की भूमिका निभाने के लिए कृष्ण छुट्टी लेकर अपने घर आएगा, वह किरदार को लेकर उत्साहित है।”

पिता-पुत्र की भूमिका में दोनों को देखने के लिए दर्शकों में भी उत्साह है। कमेटी पिछले 46 वर्षों से शीशमहल में रामलीला का आयोजन कर रही है। निर्देशक नीरज फुलारा और सह-निर्देशक विनोद तिवारी ने सभी कलाकारों को रामलीला की तालीम दी है। कमेटी के मीडिया प्रभारी कमल पपनै ने बताया कि 23 सितंबर से रामलीला का आयोजन प्रारंभ होगा।

उत्तराखंड के कारीगरों ने इंग्लैंड में दिखाया जलवा

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फोटो साभारः नीति माणा घाटी कल्याण समिति फेसबुक पेज

उत्तराखंड के कारीगरों के लिए एक बहुत बड़ा अवसर था क्योंकि उन्हें र्बिमिंघम में आयोजित ‘ऑटम फेयर इंटरनेशनल 2017’ में अपने काम का प्रदर्शन करना था। राज्य के विभिन्न हिस्सों के आठ कारीगरों ने प्रदर्शनी में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कारीगरों ने कालीन, शाॅल, मैट के अलावा उत्पाद जैसे बास्केट, टोपी, लैंप शेड्स, फूलों के गुलदस्ते और अन्य वस्तुओं का प्रदर्शन किया।

इंटरनेशनल फेयर 2017

उत्तराखंड हथकरघा और हस्तशिल्प विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर चंद्र नौटियाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, “हम प्रदर्शनी में कारीगरों द्वारा बनाई गई प्राचीन वस्तुएं, तांबा और बांस से बनने वाली हैंडिक्राफ्ट की वस्तुओं का प्रदर्शन करते हैं।प्रदर्शनी के दौरान हम अंतरराष्ट्रीय बाजार के बारे में बहुत कुछ सीख चुके हैं, हालांकि प्रदर्शनी में हमारे उत्पादों की डिमांड ज्यादा थी, लेकिन कुछ लोगों को हमारे उत्पादों की कीमत थोड़ी अधिक लगी। अब हम अपने परियोजना में और अधिक कारीगरों को शामिल करने की योजना बना रहे हैं।इसके अलावा मशीन के द्वारा अपने कुछ उत्पादों को बनाने की भी योजना बना रहे हैं ताकि हम कम समय में और अधिक निर्माण कर सकें, मशीन का प्रयोग यह हमारे मूल्यों को कम करने में हमारी मदद करेगा। “

चमोली जिले की गुड्डी देवी जिनको इस मेले में जाने का मौका मिला उन्होंने कहा कि, ”मेरे लिए अपनी कला को लोगों के बीच दिखाने के लिए दूसरे देश जाने का मौका मिलना बहुत गर्व की बात हैं। प्रदर्शनी में आने वाले लोगों को मेरे हाथ का बना हुआ कालीन और शाॅल बहुत पसंद आया और इन चीजों के लिए मुझे आॅर्डर भी मिले।”

वहीं शिव लाल ने कहा कि, ”दूसरे देश में जाकर अपनेी कला को दिखाने का अनुभव शानदार था, लोगों ने हमारे काम को सराहा और हमें दूसरे देश के कारीगरों से मिलने का मौका भी मिला”।

क्या कूड़ा उठाने वालों के दाम बढ़ने से होगी दून में सफाई!!

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दिसंबर से देहरादून में शिशमबर कचरा प्रबंधन कार्य शुरु हो जाने के बाद, नगर निगम एक निजी फर्म को डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने को काम सौंपने की योजना बना रहा है। जिसके बाद उपभोक्ता शुल्क प्रत्येक दो वर्षों में 10% बढ़ जाएगा। फिलहाल निगम उन उपभोक्ताओं से जो इस सेवा का लाभ उठाते हैं उनसे 40 रुपये जमा करवाता है।

देहरादून नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ कैलाश गंज्याल ने कहा कि, “गजट अधिसूचना जो कि 2009 में की गई थी, उसके मुताबिक उपयोगकर्ता के शुल्क को 10% तक बढ़ाया जाएगा, लेकिन हमने अभी तक ऐसा नहीं किया है। एक बार जब सेवा का निजीकरण दिसंबर में होगा, फर्म इस नियम का पालन करेगी और उपयोगकर्ता को हर दो साल में 10 प्रतिशत शुल्क बढ़ा कर निगम में देना होगा।”

निगम के इस पहल का निवासियों ने स्वागत किया है जो दावा करते हैं कि उपयोगकर्ता शुल्क में वृद्धि से बेहतर सेवाएं सुनिश्चित हो सकती हैं। दून निवासियों के कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष डॉ महेश भंडारी ने कहा, “हम जो भुगतान करते हैं वह एक छोटा अमाउंट है जो मेरे हिसाब से स्वच्छता श्रमिकों के वेतन को भी कवर नहीं करता है। निजीकरण इन समस्याओं को दूर करेगा और कंपनी यह सुनिश्चित करेगी कि सफाई का काम समय पर किया जाए है क्योंकि वे सेवा के माध्यम से लाभ कमा सकते हैं। “

नगर निगम के आयुक्त रवनीत चीमा ने कहा कि, “हम इस काम की निगरानी कर रहे हैं और आशावादी हैं कि हम 1 नवंबर से इसका परीक्षण शुरू करेंग। हालांकि इसके एक महीने बाद यह पूरी तरह से कार्य करना शुरु कर देगा।”

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वहीं शहर में सफाई और दूसरे मुद्दों पर काम करने वाला एनजीओ ”मैड मेकिंग ए डिफ्रेंस बाई बिंग द डिफ्रेंस” के सदस्य करन कपूर ने कहा कि, ”नगर निगम ने पहले भी ऐसे प्रयास किए हैं, इससे पहले भी नगर निगम ने डीबीडब्लूएम को कूड़ा उठाने और उसके डंप करने का काम दिया गया था लेकिन वह बहुत ज्यादा फायदेमेंद साबित नहीं हुआ।एक बार फिर नगर निगम किसी प्राईवेट कंपनी को यह काम दे रहा है जिसकी पीछे वजह हैं कि सेवाएं बेहतर होंगी और पैसे बढ़ाने से लोग ज्यादा तत्परता दिखाऐंगे तो यह सोचना गलत है।

“करन ने कहा कि, ”अभी दिक्कत यह नहीं है कि सफाई कर्मचारियों का वेतन कम है या नगर निगम को पैसो की जरुरत है। समस्या यह है कि सबसे पहले निगम को अपना दायरा बढ़ना होगा, उन लोगों पर जुर्माना लगाना होगा जो निगम की सेवाएं ना लेकर अपने घर का कचड़ा खुले मैदानों में डंप करते हैं।”

मैड ग्रुप ने पहलेे भी निगम को सुझाव दिया था कि नगर निगम को बिजली विभाग के साथ टाईअप करना चाहिए जिससे बिजली बिल के साथ कूड़े का बिल लोगों के घर तक पहुंचे और हर कोई बिजली के साथ निगम की सेवाएं ले सके”।

नगर निगम की यह नई पहल कहां तक सफल होती है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल निगम ने अपनी नई सुविधाओं के लिए कमर कस ली है।