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ट्रेन की चपेट में आकर एक व्यक्ति घायल

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थाना डोईवाला क्षेत्र के गूलर घाटी में एक व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आकर घायल हो गया। सूचना पर चौकी हर्रावाला पुलिस मौके पर पहुंचकर उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। घायल की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

हर्रावाला चौकी पुलिस ने बताया कि सोमवार को सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति गूलर घाटी में ट्रेन की पटरी के किनारे घायल अवस्था मे पड़ा है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। वहां एक व्यक्ति की दाहिनी टांग घुटने से नीचे से कटी हुई थी और बेहोशी की हालत में था। पुलिस ने तुरंत घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया।

व्यक्ति की पहचान छोटे पहाड़िया पुत्र चंदा पहाड़िया ग्राम बड़ा पत्थर थाना बरहेट जिला साहेबगंज झारखंड के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक यह व्यक्ति 10-12 दिन से डॉक्टर दौलतराम डोभाल राजा पैलेस होटल मालिक देहरादून के यहां सफाई का काम करता था। डॉक्टरों के अनुसार छोटे पहाड़ियां की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस द्वारा परिवारजनों को सूचित किया गया है।

चार पीढ़ियों से बना रहा मुस्लिम परिवार रावण का पुतला

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काशीपुर। कला किसी पहचान की मोहताज नहीं, किंतु आधुनिकता की चकाचौंध में उसे कायम रखना मुश्किल है। आर्थिक लाभ के फेर में लोग पुश्तैनी कार्यों को छोड़ रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी हाथ के हुनर का हस्तांतरण खत्म होने से कलाओं का अस्तित्व भी खोने को है।

लेकिन परिवार को विरासत में मिली कला को कायम रखने की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है एक मुस्लिम परिवार, जो पूर्वजों से मिली पुतले बनाने की कला को तीसरी पीढ़ी न केवल जिंदा रखे हुए है, बल्कि उनकी ख्वाहिश अगली पीढ़ी को भी यह कला सौंपने की है।
असत्य पर सत्य की विजय के पर्व दशहरे को लेकर जहां एक ओर गुरु द्रोणाचार्य की तप स्थली काशीपुर में गंगा-जमुनी तहजीब को बनाये रखने वाले शहर काशीपुर में मुस्लिम बंधुओं द्वारा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है। वहीं दशहरे के पर्व को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है, वहीं जगह जगह रावण के पुतले भी नज़र आने लगे हैं। काशीपुर के रामलीला मैदान में होने वाले पुतला दहन के लिए रावण का 70 फीट ऊँचा पुतला तैयार किया जा रहा है। पुतला दहन के साथ मुस्लिम बंधुओं का भी कर्म जुड़ा हुआ है। यहाँ जलाये जाने वाले पुतलों को पिछले कई दशक से मुस्लिम परिवार ही बनाता आ रहा है। चार पीढ़ियों से दशहरे के पर्व पर रावण सहित कुम्भकर्ण और मेघनाथ का पुतला बनाने का काम कर रहे महबूब कहते है, “इस काम में हमें दिल से बहुत खुशी मिलती है क्योंकि यह एक धार्मिक आस्था का काम है। जब लोग दशहरे के दिन पुतला दहन के बाद खुश होते हैं तो हमें भी त्यौहार मनाने वालों की तरह ही ख़ुशी होती है। महबूब कहते हैं कि , “इस काम को करते हुए हमारी चार पीढ़ियां गुजर गई लेकिन इस बार महंगाई की मार सबसे अधिक है।

वहीं आयोजकों द्वारा भी महबूब और उसके परिवार के लोगों के लिए दो माह पहले से ही तैयारी के लिे जगह देदी जाती है, मेरठ के रहने वाले महबूब की चार पीढीयों से आज तक पुतला बनाने का काम एक ही परिवार को दिया जाता रहा है, वहीं रामलीला कमेठी भी महबूब ौर ुसके परिवार के कार्यों की सराहना करता है।
गौरतलब है कि शहर में रावण का सबसे बड़ा पुतला यहीं जलाया जाता है। पुतला दहन के साथ यहाँ होने वाली भव्य आतिशबाजी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होती है। काशीपुर के रामलीला मैदान में जब रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले को आग के हवाले किया जाएगा तो असत्य पर सत्य की जीत की मिसाल पेश होगी।

राज्य में तीन नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मिली मान्यता

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देहरादून। आयुर्वेद चिकित्सक बनने के इच्छुक प्रदेश के युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में तीन नए आयुर्वेदिक कॉलेजों को मान्यता मिल गई है। यह कॉलेज बेशक निजी क्षेत्र के हैं लेकिन इनकी पचास प्रतिशत सीट राज्य कोटे में ही भरी जाएंगी।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने इसी माह तीन सितम्बर को यूएपीएमटी का आयोजन किया था। जिसका परिणाम जारी किया जा चुका है और विवि अक्टूबर माह में काउंसलिंग आयोजित करेगा। यूएपीएमटी की अधिसूचना में तब सरकारी व निजी कॉलेजों की 880 सीट का उल्लेख था। जिसमें अब बढ़ोत्तरी हो गई है। राज्य में तीन और निजी कॉलेजों को बीएएमएस की 60-60 सीट के लिए मान्यता मिल गई है। इनमें शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च झाझरा, दून इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फैकल्टी मेडिकल साइंसेज शंकरपुर सहसपुर और देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल मांडूवाला शामिल हैं। विवि के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ ने बताया कि मान्यता मिलने पर इन कॉलेजों को भी काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। इनमें 30-30 सीट राज्य कोटे में भरी जाएगी। ऐसे में सीट बढ़ने का फायदा राज्य के युवाओं को मिलेगा। 

गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक में लगी आग

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सोमवार दिन में करीब 12 बजे नैनीताल वीरभट्टी के पास एक गैस सिलेंडर के ट्रक में आग लग गई जिसके चलते सिलेंडरों में विस्फोट भी होने लगा। इस दौरान विस्फोट से ट्रक के परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद यातायात बंद हो गया है। चालक और क्लीनर किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहे।  भवाली वीरभट्टी रास्ता आम जनता के लिए बंद कर दिया गया और साथ ही फायर ब्रिगेड और साथ ही फायर ब्रिगेड और एक आॅफिसर को घटना स्थल के पास भेज दिया गया आग पर काबू करने के लिए।

हल्द्वानी से अल्मोड़ा की ओर जा रहे गैस सिलेंडर से लदे ट्रक पर सोमवार दिन में करीब 12 बजे आग लग गई। गोठिया पुल पर ट्रक में आग लगने की भनक लगते ही चालक व क्लीनर ट्रक से कूदकर दूर भाग निकले। सूचना पर नैनीताल से फायर ब्रिगेड भी मौके के लिए रवाना कर दी गई।सिलेंडर की गाड़ी में आग ठीक एक पुराने पुल के ऊपर हुई जोकि एनएच 87 का हिस्सा भी है, खबर  यह भी आ रही है कि है कि पुल भी इस विस्फोट से कमजोर हुआ है।

एसएसपी नैनीताल जन्मेजय खंडूड़ी ने बताया कि ”लगभग 12 बजे के आसपास ये घटना हुई और तुरंत ही फायर ब्रिगेड टीम और फायर आॅफिसर घटना स्थल के लिए रवाना किए गए।इस गटना में जान हानि की कोई खबर नहीं है।पहले पुलिस के लिए महत्तवपूर्ण था आग को काबू  में करना।घटना के दौरान ट्रेफिक रोक दिया गया था।बाद में घटना की जांच की जाएगी”।

देश विदेश के श्रद्धालु होंगे महासू महिमा से परिचित

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विकासनगर। अब देश, विदेश के श्रद्धालु भी जौनसार-बावर परगने समेत रवांई, जौनपुर व हिमाचल प्रदेश के आराध्य देव चार महासू की महिमा से परिचित होंगे। जय महासू सिरीज ने महासू दरबार चलो रे नाम से वीडियो एलबम तैयार की है। इसमें चार महासू की वंदना व महिमा का वर्णन है।

रविवार को एलबम के निर्माता आशीष भट्ट ने बताया कि धार्मिक नगरी हनोल, थैना सहित जौनसार-बावर परगने में चार महासू के दर्जनों मंदिर है, जहां देश विदेश से श्रद्धालु आराध्य देवों के दर्शन के लिए आते हैं। हिंदी में महासू महिमा का वर्णन उपलब्ध नहीं होने से श्रद्धालुओं को इनकी विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती है। लिहाजा जय महासू सिरीज के बैनर तले एक वीडियो एलबम तैयार किया गया है। एलबम में महासू महिमा के साथ ही परगने की सुंदरता को भी दर्शाया गया है ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ ही मुख्य पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके। एलबम में गीत संगीत स्थानीय प्रतिभाओं द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि वीडियो एलबम आगामी 28 सितंबर को बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। इस दौरान गीतम पंडित, मनोज भट्ट, रोशन, पिंकेश, शेखर अधिकारी, राहुल वर्मा, हिरोज महंता आदि मौजूद रहे।

दून में 4 जुअारी गिरफतार

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कल रात धारा चौकी पुलिस द्वारा सेंट थॉमस स्कूल के पीछे फालतू लाइन से 4 व्यक्ति ललित थापा, मोनू कुमार,रोबिन गर्ग व विकास त्यागी  को सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया गया।

मौके से उक्त अभियुक्तों के कब्जे से 8400/- ₹ की धनराशि बरामद की गई। अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 13 जी एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। जिन्हें आज माननीय न्यायालय पेश किया जाएगा।

बजट का संकट, अधर में लटका ‘अमृत प्रोजेक्ट’

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देहरादून। केंद्र सरकार भले ही अमृत प्रोजेक्ट को लेकर गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन स्थिति यह है कि तीन साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक सरकार ने एक तिहाई बजट भी नहीं भेजा है। इसका परिणाम ये है कि 90 में से 87 योजनाओं का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है।

वर्ष 2015 में शुरू हुए अमृत प्रोजेक्ट के लिए 144.83 करोड़ रुपये में 30 पेयजल, सीवेज, ड्रेनेज योजनाएं स्वीकृत की गई लेकिन इसमें से सिर्फ बीस फीसद बजट ही जारी किया गया। इसके बाद वर्ष 2016 में 192.58 करोड़ रुपये में 31 योजनाएं स्वीकृत हुई। इसमें मात्र देहरादून के लिए बीस फीसद बजट जारी किया गया। बाकी छह शहरों के लिए सरकार ने कोई पैसा नहीं दिया। इतना ही नहीं इस साल 230.49 करोड़ रुपये में 29 योजनाएं स्वीकृत हुई लेकिन इस साल अब तक पेयजल निगम को बजट के नाम पर एक रुपया तक नहीं मिला है। इतना ही नहीं, पेयजल निगम की भी अमृत के प्रति कार्यप्रणाली सुस्त है। इसी का नतीजा है कि तीन साल के भीतर पेयजल निगम मात्र तीन योजनाओं के ही निर्माण कार्य पूरा कर पाया है, बाकी के कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। चूंकि, ये प्रोजेक्ट पांच साल का है और इस रफ्तार से तो समय से प्रदेश में अमृत प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद नहीं है।
सूत्रों की मानें तो इस साल के लिए बजट की एक किश्त शहरी विकास विभाग के पास पहुंची हुई है लेकिन अब तक यह पैसा पेयजल निगम को नहीं मिल पाया है। यदि शहरी विकास विभाग समय से इस पैसे को निगम को सौंप दे तो योजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी आए। वहीं पेयजल निगम प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने कहा कि बजट के अभाव में योजनाओं के निर्माण में कुछ देरी हो रही है। इस संबंध में बात चल रही है कि जल्दी बजट मंगाया जाए, जिससे कि योजनाओं का निर्माण समय से पूरा हो सके। 

भैयादूज को बंद होंगे केदारनाथ धाम के कपाट

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रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज पर्व पर 21 अक्टूबर को विधि-विधान पूर्वक बंद कर दिए जाएंगे। जबकि द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम व तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि विजयादशमी पर्व पर घोषित की जाएगी। इन तीनों धामों के कपाट बंद करने के लिए बद्री-केदार मंदिर समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा होती है, जबकि धाम के कपाट भैयादूज पर बंद होने की पौराणिक परंपरा है। इसके साथ ही द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि की आधिकारिक घोषणा भी 30 सितम्बर को विजयदशमी पर्व पर की जाएगी।
बद्री-केदार मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि भगवान मद्महेश्वर के कपाट बंद होने की तिथि पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ व तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में तय होगी।

लावारिस गायों के लिए गौसदन बनाने की मांग

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पछवादून क्षेत्र में लावारिस गौ वंश के संरक्षण की कोई भी व्यवस्था नहीं होने के चलते बाड़वाला से लेकर सेलाकुई तक हर रोज सैंकड़ों गौवंश राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ ही अन्य संपर्क मार्गों पर घूमते रहते हैं। लावारिश घूम रहे पशु अक्सर वाहनों की चपेट में आकर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, जबकि इन पशुओं पर तस्करों की नजर भी लगी रहती है। वारियर्स गर्ल्स ग्रुप हरबर्टपुर ने गौ वंश के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की मांग शासन, प्रशासन से की है।

पांच लाख से अधिक वाली पछवादून तहसील के बाशिंदों को मुख्य पेशा कृषि है, लिहाजा यहां ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी सहायक व्यवसाय के तौर पर पशुपालन किया जाता है। अधिकांश लोगों द्वारा पालतू पशुओं की उपयोगिता समाप्त होने पर उन्हें लावारिश छोड़ा जा रहा है, जो अक्सर रात दिन राष्ट्रीय राजमार्ग सहित गांवों के संपर्क मार्गों पर घूमते रहते हैं। ऐसे लावारिश पशु अक्सर तेज गति से चल रहे वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, जबकि कई बार ये पशु वाहन दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं। साथ ही इन पशुओं पर तस्करों की निगाहें भी लगी रहती हैं।

तहसील क्षेत्र में सरकारी स्तर पर लावारिश गौवंश के संरक्षण के लिए काई भी गौसदन व कांजी हाउस नहीं है। निजी स्तर पर छरबा पंचायत के पूर्व प्रधान रूमीराम जसवाल ने जरूर गौशाला बनाई है लेकिन सरकारी सहायता नहीं मिलने के चलते उसकी क्षमता भी सौ से अधिक गौवंश के संरक्षण की नहीं है। वारियर्स गर्ल्स ग्रुप ने लावारिश पशुओं के संरक्षण के लिए कांजी हाउस या अन्य कोई उचित व्यवस्था किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है।

ज्ञापन के माध्यम से पछवादून क्षेत्र सहित तहसील क्षेत्र में गौ सदन बनाने व उसमें पशुओं के संरक्षण और पोषण की उचित व्यवस्था मांग की है, जिससे लावारिश गोवंश के संरक्षण के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं पर भी रोक लग सके। ज्ञापन पर ग्रुप की अध्यक्ष रिहाना सिद्दीकी, रितु सैनी, प्रीति सैनी, अनीता सैनी, नरेश, मोहसिन आलम के हस्ताक्षर हैं।

लगातार बारिश से गंगा खतरे के निशान के करीब

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rains cause water level in rivers to rise

हरिद्वार। तीर्थनगरी में पिछले तीन दिन से हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर एक बार फिर चेतावनी स्तर 293 मीटर के करीब पहुंच गया है। शाम को गंगा का जलस्तर 292.65 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो चेतावनी स्तर 293 और खतरे के निशान 294 मीटर के करीब पहुंच गई है।

जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार शाम चार बजे तक गंगा का जलस्तर 292.65 मीटर पर पहुंची है। हरिद्वार में 89, और लक्सर तहसील क्षेत्र में 60 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश फिर हुई तो जलस्तर में इजाफा हो सकता है।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि बारिश को देखते हुए सभी को अलर्ट पर रखा गया है। गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहने वालों को सचेत किया गया है। वहीं संबंधित तहसीलों के अधिकारियों को तहसीलवार स्थिति पर नजर रखने की हिदायत देकर एहतियाती उपाय करने को कहा है।