पकड़े गये मओवादियों के झारखण्ड कनेक्शन की जांच
पूर्व सीएम के करीबी नेता को दिया था महंत ने फ्लैट!
हरिद्वार। बड़ा अखाड़ा के कोठारी महंत मोहनदास के रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब होने के पीछे एसटीएफ और पुलिस के शक की सुई बार-बार संपत्ति विवाद की तरफ घूम रही है। दरअसल, कनखल में बड़ा अखाड़े की संपत्तियों पर पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर फ्लैट का निर्माण किया गया। निर्माण को लेकर अखाड़े पर कुछ देनदारी बकाया है। वहीं, पड़ताल में यह भी सामने आया है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी एक कांग्रेस नेता को उपहार स्वरूप फ्लैट दिया गया था। यह उपहार महंत ने क्यों दिया और ऐसे कौन-कौन लोग महंत की कृपा पात्रों की सूची में है, इसकी जानकारी भी एसटीएफ जुटा रही है।
महंत मोहनदास का अचानक गायब होना तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहा है। संत पहले दिन से अपहरण जैसी अनहोनी की आशंका जता रहे हैं। सवाल यह है कि संत के साथ कोई ऐसा क्यों करेगा। संत होने के नाते परिवार न होने पर पारिवारिक रंजिश जैसी बात असंभव है। अखाड़े की बेशुमार संपत्ति की तरफ बार-बार पुलिस के शक की सुई घूम रही है। कनखल में सामान्य चर्चा है कि महंत मोहनदास ने कई साधारण पृष्टभूमि वाले लोगों को फर्श से अर्श पर पहुंचाया। जांच कर रही एसटीएफ और पुलिस के लिए यह जानना जरूरी हो गया है। खोजबीन में पता चला है कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय ही कनखल में बिल्डरों ने बड़ा अखाड़ा की भूमि पर फ्लैट का निर्माण कराया। सूत्र बताते हैं कि फ्लैट निर्माण से जुड़ा कार्य कराने के लिए महंत मोहनदास ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी एक स्थानीय कांग्रेस नेता को उपहार में एक फ्लैट भी दिया था। एक बड़े कार्यक्रम का खर्च उठाने की बात भी सामने आ रही है। संपत्ति के एंगल को खंगाल रही एसटीएफ और पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाली जानकारियां लगी हैं। अखाड़े की सपंत्ति अरबों में बताई जाती है लेकिन करोड़ों का लेनदेन संभालने वाले कोठारी महंत मोहनदास के चार पांच खातों को मिलाकर कुछ हजार की नगदी है। जांच में यह भी सामने आया है कि मुंबई के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने 40 हजार रुपये एटीएम से निकाले थे। हरिद्वार से रवाना होने पर उनके पास छह से सात लाख रुपये की नगदी होने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, अखाड़े के संत उनके पास नगदी होने की बात से इन्कार कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि यदि महंत के पास नगदी नहीं थी और उनके बैंक खाते भी खाली हैं तो वह मुंबई जैसे शहर के बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने कैसे जा रहे थे।
दूसरी बात यह है कि खातों में कम नगदी होने की जानकारी के बावजूद महंत ने देनदारी के लिए चेक क्यों बांटे और उधारी का तकादा करने के लिए लोग महंत मोहनदास के सामने पहले कभी अखाड़े में क्यों नहीं आए। महंत की गुमशुदगी में शहर के एक बड़े होटल के मालिक व रत्न कारोबारी पर भी पुलिस की नजर है। यह कारोबारी व्यवसाय में महंत मोहनदास के साथ रहे हैं। व्यवसाय में निवेश करने की बात भी सामने आ रही है। एसटीएफ इस मामले में कभी भी कारोबारी से पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही एक विदेशी महिला का नाम अचानक ही सुर्खियों में आया है। बताया गया है कि महिला कई बार महंत मोहनदास से मिल चुकी है। गायब होने के कुछ दिन पहले भी महिला ने महंत मोहनदास से मुलाकात की थी। जांच में जुटी पुलिस और एसटीएम विदेशी महिला की कुंडली जुटा रही हैं। इसके लिए महंत मोहनदास के चारों फेसबुक अकाउंट से भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस अगले दो दिन में बड़ा खुलासा कर सकती है। हालांकि संतों की लगातार नाराजगी को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत मंगलवार को हरिद्वार आ रहे हैं। सीबीआई जांच की सुगबुगाहट संतों के बीच उठने लगी है। कुछ संत मुख्यमंत्री के आने पर सीबीआइ जांच की संस्तुति करने की मांग उठाने की रणनीति भी बना चुके हैं। वहीं पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अधिकारी अगले दो दिन में महंत की गुमशुदगी की गुत्थी खोल सकते हैं। इस बारे में जानकारी जुटाकर ही मुख्यमंत्री हरिद्वार आ रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष का आरोप प्रोटोकॉल का नहीं किया गया पालन
ऋषिकेश एम्स में परिवहन विभाग के अधिकारियों को बस सेवा के शुभारम्भ कार्यक्रम में प्रेमचंद अग्रवाल के मनमुताबिक काम न करना भारी पड़ गया, और अध्यक्ष अपने पद की गरिमा को भूलके कर्मचारियों को हड़काने लगे और शिखाने लगे प्रोटोकॉल का पाठ। गुस्से में आपा खोके विधानसभा अध्यक्ष परिवहन मंत्री को भी कड़घरे में खड़ा करके अपने पद की गरिमा का कर्मचारियों के सामने रोब झड़ते दिखे।
पूरा मामला उनके ग्रह विधानसभा छेत्र का हिअ जहाँ से जीतकर वो तीसरी बार विधानसभा में पहुंचे है। आपको बता दे की एम्स ऋषिकेश के लिए देहरादून-हरिद्वार से पांच बसों के संचालन का शुभारम्भ कार्यक्रम में आज 5 बसों की जगह सिर्फ 2 बसें ही पहुची, परिवहन विभाग के अधिकारियों से इस समन्ध में सवाल करने पर अधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष के विशेष कार्याधिकारी तजेन्द्र नेगी से बदसलूकी की।
जब खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल कार्यक्रम में पहुचे तो अधिकारियो ने विधानसभा अध्यक्ष को भी तबज्जों नही दी जिसके बाद विधानसभ अध्यक्ष आक्रोशित हो गये, अग्रवाल ने अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई, मौके पर मौजूद कर्मचारियों के साथ ही परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियो को भी जमकर फटकार लगाई।
भरत मिलाप लीला में उमड़ी भीड़
काशीपुर की प्राचीन रामलीला पायते वाली रामलीला में भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया, अयोध्या के राजा दशरथ से उनकी रानी केकई ने राम के लिए 14 वर्ष वनवास व भरत के लिए राजतिलक मांगा। उसके बाद मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम ने पिता वचन का पालन करते हुए वन जाना स्वीकार किया। उनके साथ सीता व भाई लक्ष्मण भी राज महल छोड़कर वन में गए। राजा दशरथ ने इस वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। वहीं नाव लीला राम के वट संवाद, भरत मिलाप का मंचन भी किया गया।
रामलीला के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के साथ रामलीला का आनंद लेने के लिए रामलीला मैदान में पहुंचे। शहर में रामलीला चाहे कितने ही स्थानों पर होती हों लेकिन दशहरे कि दिन रामलीला मैदान में ही रावण, कुंभकरण व मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। भरत मिलाप लीला में मुख्य कलाकारों में भरत मनोज पंत, राम शिवम अग्रवाल, लक्षमण सजल मेहरोत्रा, शत्रुघ्न शिवम सिंघल, कैकई अनिल ठाकुर, कौशल्या अनिल सिन्हा,निशादराज संजय चौधरी, सीता सोनू चतुर्वेदी थे।
भरत मिलाप लीला के दौरान बतौर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद और कुमाऊं नरेश के.सी.सिंह बाबा मौजूद थे, जिनका स्वागत रामलीला केमेटी के अध्यक्ष विष्णु प्रकाश अग्रवाल, संरक्षक महेश अग्रवाल,शरद मित्तल, राजेन्द्र महेश्वरी, राजेन्द्र मेहरोत्रा, मुकेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, विनोद बाबू, मुकुन्द अग्रवाल, जिन्दर, दीपांशी मित्तल,पूनम अग्रवाल, गौरव गुप्ता, पारुल गुप्ता द्वारा किया गया, वहीं इस मौके पर विशिष्ठ अतिथि के तौर पर विमला गुडिया, पूर्व राज्य मंत्री इन्दु मान, संदीप सहगल, सूर्यप्रताप मौजूद थे।
केसीसिंह बाबा ने कहा कि, “संस्कारों को जीवंत रखने के लिए रामलीला के मंच एक बेहतर माध्यम है, हमारी संस्कृति को बचाने में रामलीला का अहम योगदान है, जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम की लाला का मंचन कर भावी पीढी में संस्कारों का संचार करने में योगदान दे रहे हैं।”
दशहरा पर्व की तैयारियों को लेकर एसएसपी ने किया परेड ग्राउंड का निरीक्षण
देहरादून। गृहमंत्री, भारत सरकार राजनाथ सिंह के प्रस्तावित जनपद भ्रमण कार्यक्रम के दृष्टिगत एसएसपी ने मुख्य कार्यक्रम स्थल परेड ग्राउंड पर जाकर वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया गया।
इस दौरान एसएसपी द्वारा माननीय गृहमंत्री की सुरक्षा के लिये नियुक्त किए जाने वाले पुलिस बल की समीक्षा की एवं उपस्थित अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा निर्देश दिए गये।
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक यातायात, श्री धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक नगर, श्री प्रदीप राय, क्षेत्राधिकारी यातायात, श्री राकेश देवली, प्रभारी निरीक्षक डालनवाला व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
मलबे में दबने से दो की मौत
थाना राजपुर को सूचना मिली कि कुल्हाण क्षेत्र में एक घर के पीछे पुश्ता बनाते समय मिट्टी का ढेर गिरने से उसमें कुछ लोग दब गए हैं। सूचना पर थाना राजपुर से पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा तथा राहत एवं बचाव कार्य हेतु एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर बुलाया गया।
पुलिस तथा एसडीआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ करते हुए मलबे में दबे तीन व्यक्तियों में से एक व्यक्ति काशी मेहतो को सकुशल बाहर निकाला गया। बाकि 2 व्यक्ति की मलबे में दबने से मृत्यु हो गई। जिनके शव को पुलिस द्वारा मलबे से बाहर निकाला गया।
जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि व्यक्ति पुश्ता निर्माण का कार्य करते थे तथा आज कुल्हाण स्थित, समचू डोलमा के घर के पीछे पुश्ता निर्माण का कार्य करने आए थे। पुश्ता निर्माण करते समय मिट्टी का ढेर गिरने से तीनों व्यक्ति उसमें दब गए। पुलिस द्वारा दोनों शवों का मौके पर पंचायतनामा भर पोस्टमार्टम हेतु दून अस्पताल भिजवाया गया है। मामले में अग्रिम कार्रवाई प्रचलित है।
कबीर खान की फिल्म में रणबीर बनेंगे कपिल देव
धोनी, अजहर और सचिन के बाद अब भारतीय क्रिकेट के एक और महान खिलाड़ी कपिलदेव को लेकर फिल्म बनने जा रही है, जिसमें रणबीर सिंह उनका रोल करेंगे। ये फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘ट्यूबलाइट’ के बाद कबीर खान बनाएंगे। आज इस फिल्म में रणबीर सिंह को कास्ट करने की औपचारिक रुप से घोषणा कर दी गई। बताया जाता है कि इस फिल्म की कहानी 1983 में पहली बार क्रिकेट का विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम पर होगी, जिसका नेतृत्व कपिल देव ने किया था।
अभी सिर्फ रणबीर सिंह के कपिल देव बनने की खबर सार्वजनिक की गई है। सूत्र बताते हैं कि फिल्म की कहानी पर काम शुरु हो गया है और अगले साल ये फ्लोर पर जाएगी। ‘ट्यूबलाइट’ के बाद कबीर खान की नई फिल्म को लेकर पहले चर्चा थी कि वे रितिक रोशन और अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म बनाएंगे। फिर खबर आई थी कि कबीर की अगली फिल्म शाहरुख खान के साथ होगी, जिन्होंने ‘ट्यूबलाइट’ में जादूगर का मेहमान रोल किया था।
रणबीर सिंह की ‘पद्मावती’ इस साल 1 दिसंबर को रिलीज होगी, जिसके बाद उनकी अगली फिल्म में जोया अख्तर की फिल्म है, जिसमें उनकी जोड़ी आलिया भट्ट के साथ है। इसके अलावा ‘गोलमाल 4’ के बाद रोहित शेट्टी ने भी रणबीर के साथ फिल्म शुरु करने की खबर की पुष्टि की है।
जेपी दत्ता की फिल्म से अभिषेक हुए बाहर
जेपी दत्ता की फिल्म ‘पलटन’ की शूटिंग का पहला शेड्यूल शुरु होने से ठीक एक दिन पहले अभिषेक बच्चन ने खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया। इसका कोई कारण भी अभी सामने नहीं आया है। दत्ता की फिल्म की यूनिट लद्दाख पंहुच चुकी है, जहां फिल्म का पहला शेड्यूल शुरु होना है।
दत्ता के दफ्तर ने अभिषेक के अलग होने की खबर की पुष्टि कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि अभिषेक जिस तरह से अंतिम पलों में फिल्म से अलग हुए हैं, उसे लेकर दत्ता नाराज हैं। जेपी दत्ता ने ही फिल्म रिफ्यूजी में अभिषेक को परदे पर लांच किया था। ‘रिफ्यूजी’ के बाद दत्ता के साथ अभिषेक ने ‘उमराव जान’, ‘एलओसी’ फिल्मों में काम किया है।
दत्ता कई साल बाद फिल्मों में लौटे हैं और इस बार वे भारत-चीन के सैनिक टकराव पर फिल्म बना रहे हैं, जबकि अब तक उनकी फिल्में भारत-पाकिस्तान टकराव पर रही हैं। दत्ता की फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा, सोनू सूद, पुल्कित सम्राट और जिमी शेरगिल के साथ मेहमान भूमिकाओं में सुनील शेट्टी और जैकी श्राफ हैं। दत्ता की टीम जल्दी ही अभिषेक की जगह लेने वाले कलाकार का नाम घोषित करेगी।
संस्थानों के आसपास भी दिखाई नहीं देंगे जंक फूड और मादक पदार्थ
देहरादून। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी), सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के बाद अब आॅल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी जंक फूड को लेकर कड़ा रूख अपना लिया है। काउंसिल ने देशभर के संस्थानों में इस प्रकार के खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगा दी है।
स्कूलों और डिग्री कॉलेजों के बाद अब तकनीकि संस्थानों की कैंटीन में भी पिज्जा-बर्गर आदि की बिक्री नहीं होगी। इसके अलावा मादक पदार्थों को लेकर भी कड़ा रवैया अपनाते हुए काउंसिल ने संस्थानों के आसपास सिगरेट, बीड़ी, पान गुटखा आदि पदार्थों की बिक्री पर बैन लगा दिया है।
काउंसिल का कहना है कि शिक्षण संस्थानों के आसपास के स्थानों पर इस प्रकार के मादक पदार्थों की बिक्री किसी लिहाज से ठीक नहीं है। काउंसिल ने तकनीकि व प्रबंधन से जुड़े सभी संस्थानों को इसे लेकर कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। कॉलेजों को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जंक फूड छात्रों में मोटापे सहित अन्य कई बीमारियों का कारण बन रहा है। सरकार विद्यार्थियों के सेहत पर पड़ रहे बुरे प्रभाव को लेकर बेहद चिंतित है, इसलिए संस्थानों को सुझाव दिया जाता है कि वो अपने कैंपस कैंटीन में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाए। सर्कुलर में कहा गया है कि सिगरेट, गुटखा और तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में सभी जानते हैं। इसके मद्देनजर छात्रों में इसके दुष्प्रभाव के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए कैंपस में अवेयरनेस कैंपेन चलाए जाने चाहिए।
बच्चे लगातार हो रहे बीमार
काउंसिल ने यह कदम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थानों में जंक फूड के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में बच्चे बीमारियों से ग्रस्त होने की पुष्टि की गई है। इसके अलावा, पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने और जंक फूड को बैन करते हुए कैंटीन में स्वच्छता, खाने की क्वॉलिटी आदि को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं।
उत्तराखंड तकनीकि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने बताया कि काउंसिल का यह कदम वाकई सराहनीय है। जंक फूड बच्चों को बीमार बना रहा है। ऐसे में इस प्रकार के खाद्य पदार्थों पर रोक लगाने के साथ ही छात्रों को इसके दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक किया जाना जरूरी है।
ज्यादातर संस्थानों में बगैर लाइसेंस के कैंटीन
अकेले देहरादून की बात करे तो यहां ज्यादातर शिक्षण संस्थान बगैर लाइसेंस के कैंटीन संचालित कर रही है। हालांकि कुछ संस्थानों ने पहले ही नियमों का पालन करते हुए कैंटीन संचालन के लिए लाइसेंस प्रक्रिया पूरी की हुई है। इसके बाद भी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में कई ऐसे हैं जहां नियमों से बेपरवाह होकर मेस और कैंटीन आदि का संचालन किया जा रहा है।
जिला प्रशासन का कहना है कि राजधानी में ज्यादातर संस्थानों ने कैंटीन संचालन के लिए लाइसेंस लिया हुआ है लेकिन अब भी कई ऐसे हैं जो नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों की लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद इन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीबीएसई पहले ही दे चुका है निर्देश
सीबीएसई ने स्कूलों की कैंटीन में जंक फूड का इस्तेमाल न हो, इसके लिए खास तौर पर कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन करेगा, जिसके बाद यह कमेटी कैंटीन में खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई और जंक फूड पर रोक लगाने पर काम करेगी। कमेटी बच्चों को बेहतर खाना मिले, इसके लिए पौष्टिक आहार की लिस्ट तैयार कर भोजन उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा बोर्ड ने यह भी कहा है कि संभव हो तो स्कूल के 200 मीटर के आसपास जंक फूड की बिक्री पर भी लगाम लगाई जाए।
दिए गए निर्देश
– संस्थानों में जंक फूड परोसे जाने पर रोक लगाई जाए।
– कैंटीन में खाने की क्वॉलिटी चेक करने की व्यवस्था की जाए।
– व्यवस्था के तहत जंक फूड पर रोक लगाने के लिए कमेटी बनाई जाए।
– संस्थानों के 200 मीटर के दायरे में जंक फूड व मादक पदार्थों की बिक्री पर रोक।
– पौष्टिक आहार को लेकर संस्थानों में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
– छात्रों को मादक पदार्थों और जंक फूड को लेकर जागरुकता का कार्य किया जाए।
पहाड़ की फसल ”कंडाली” लगा सकती है पलायन पर रोक
हरिद्वार। “कंडाली” जिसे पहाड़ की बिच्छू घास भी कहा जाता है, जिसे अक्सर पहाड़ में बच्चों की शैतानी पर उन्हें सजा देने के काम में लाया जाता था लेकिन बदलते वक्त के साथ पता चला कि कंडाली न केवल बच्चों की शैतानी को रोकने में काम आती है इसका उपयोग रोजगार के अवसर पैदा करने और पलायन पर लगाम लगाने की भी क्षमता है। हरिद्वार के एक छात्र ने अपने शोध में यह साबित कर दिया है कि कंडाली का फाइबर अन्य फाइबर के मुकाबले न केवल मजबूत है अपितु यह मानव निर्मित फाइबर से सस्ता भी है।
मंयक पोखरियाल के इस शोध का प्रकाशन अमेरिका की प्रसिद्व टेलर एंड फ्रांसिस ऑनलाइन में भी प्रकाशित हुआ हैं। शोध में पाया गया कि कंडाली का फाइबर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज, एयरो स्पेस इंडस्ट्रीज, स्पोर्टस इंडस्ट्रीज, फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर, डोरपैनल, हेलमेट आदि बनाने में सहायक है। 20 सितम्बर को अमेरिका की टेलर एंड फ्रांसिस ऑनलाइन में जब कंडाली को लेकर हरिद्वार के छात्र मंयक पोखरियाल का शोध प्रकाशित हुआ तो यह साबित हो गया कि जंगल में पायी अपने आप उगने वाली यह घास कितने काम की हैं।
मंयक ने बताया कि उसने कंडाली हिमायलन नेट्टल पर 2013 में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी के दौरान शोध शुरु किया था। जिसे करीब 2015 में पूरा कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने इस शोध में पाया कि उत्तराखंड राज्य के मध्य हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाला पौधा कंडाली हिमालयन नेट्ल के फाइबर को हम कम्पोजिट मैटेरियल्स बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह एक ईको फाइबर है जो मानव निर्मित फाइबर से काफी सस्ता आसानी से उपलब्ध एक कम घनत्व वाला बायो डिग्रेडेबल है। इसको पॉल्मर के साथ मिलकर कम्पोजिट बनाया जा सकता है। इसका फाइबर बास्ट फाइबर की केटेगरी में आने वाला सबसे मजबूत फाइबर है। शोध में हिमालयन नेट्टल फाइबर को पहले केमिकल ट्रीटमेंट देने के बाद सुखाकर इसको पॉल्मर के साथ रैनफोर्स किया गया। उसके बाद इस पर विभिन परीक्षण जैसे टेंसिलटेस्ट, इम्पैक्ट टेस्ट, वियर टेस्ट किये गए जिसमें यह पाया गया की इसको विभिन्न क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज, एयरो स्पेस इंडस्ट्रीज,स्पोर्टस इंडस्ट्रीज, फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर, डोरपैनल, हेलमेट आदि बनाने में सहायक है।
मंयक ने बताया कि पूर्व में उत्तरखंड के पहाड़ी इलाके जैसे पौड़ी, चमोली और पिथौरागढ़ आदि क्षेत्रों में लोग इसके फाइबर से रस्सी, धागे, बोरे, चटाई व कपड़ा आदि बनते थे, जो जानकारी के अभाव में अब कम हो गया था। यह पौधा 1200 मीटर की ऊंचाई से ऊपर प्राकृतिक रूप से बंजर भूमि, रास्ते एवं सड़कों के किनारे स्वतः ही उग जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला हिमालयन नेट्टल रोजगार देने और पलायन रोकने में सहायक होने के साथ साथ लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा। मंयक ने बताया कि इस शोध में उनके गाइड एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. लालता प्रसाद व सहायक आचार्य हिमांशु प्रसाद रतूड़ी उत्तराखंड बम्बू एंड फाइबर डेवलपमेंट बोर्ड के मैनेजर दिनेश जोशी, आगाज फाउंडेशन के जेपी मैथानी का पूर्ण सहयोग मिला।




























































