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ओसामा बिन लादेन पर फिल्म बनाएंगे विशाल भारद्वाज

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‘रंगून’ के बाद विशाल भारद्वाज निर्देशन के मैदान में वापसी की तैयारियां कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, विशाल की अगली फिल्म ओसामा बिन लादेन पर होगी, जिसके लिए ‘ओटाबाबाद’ टाइटल रजिस्टर्ड कराया गया है। पाकिस्तान के इसी शहर में अमेरिकी कमांडो ने कार्रवाई करते हुए ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।

जानकारी के अनुसार, विशाल की फिल्म ‘द एक्सिल’ नाम के उपन्यास पर आधारित होगी, जिसे ओसामा बिन लादेन और उसके संगठन अल कायदा पर इनसाइड स्टोरी के तौर पर लिखा गया था। इसके लेखक कैथी स्काट क्लार्क और एंड्री लेवी हैं। विशाल ने फिल्म बनाने के लिए इसके अधिकार खरीदे हैं और जल्दी ही वे इस पर काम शुरु करने जा रहे हैं।

बतौर निर्माता विशाल इस वक्त दो फिल्मों की योजनाओ पर काम कर रहे हैं। उनकी कंपनी में बनने जा रही इन फिल्मों में से एक फिल्म में इरफान और दीपिका पादुकोण की जोड़ी काम करेगी, जो पहले पीकू में काम कर चुकी है। इसका निर्देशन उनके सहयोगी रहे हनी त्रेहन करेंगे। दूसरी फिल्म कामेडी होगी, जिसमें नवाजुद्दीन होंगे।

हरभजन सिंह मान का नया एलबम सतरंगी पींग 3

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जाने माने पंजाबी गायक और कलाकार हरभजन सिंह मान ने अपनी म्यूजिक कंपनी एचएम में अपना नया म्यूजिक एलबम लांच किया है, जिसका टाइटल ‘सतरंगी पींग 3 जिंदरिए’ रखा गया है। सतरंगी पींग के अब तक इससे पहले दो एलबम आ चुके हैं और दोनों को काफी पसंद किया गया है।

अपने नए एलबम के बारे में हरभजन सिंह मान का कहना है कि हमारी एलबम में संगीत की ताजगी है, जिसे सुनकर लोगों को अच्छा महसूस होगा। इस एलबम में मान की आवाज में 8 गाने हैं, जिसमें अलग अलग अंदाज के पंजाबी गीत हैं।

उनका कहना है कि, “पहले दो एलबमों को मिले शानदार रेस्पांस के बाद हमने इसकी नई कड़ी लांच करने का फैसला किया।” हरभजन मान ने उम्मीद जताई कि तीसरी कड़ी के गानों को भी जनता पसंद करेगी।

सड़क 2 का मामला हुआ ठंडा

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संजय दत्त की वापसी वाली फिल्मों में एक नाम ‘सड़क’ की सिक्वल का भी था। ये चर्चा थी कि महेश भट्ट की कंपनी और संजय दत्त का प्रोडक्शन हाउस मिलकर इसकी सिक्वल बनाएंगे, जिसमें संजय दत्त की बेटी के रोल में आलिया भट्ट इसकी कहानी को आगे बढ़ाएंगी और कहानी पिता-बेटी के रिश्तों पर होगी।

महेश भट्ट और उनके भाई मुकेश भट्ट से संजय दत्त मिले थे, तो इस सिक्वल को लेकर चर्चा और तेज हुई। संजय दत्त ने भी कहा था कि ‘सड़क 2’ का आइडिया दिलचस्प है और वे इसे लेकर उत्साहित हैं। ये सब ‘भूमि’ के रिलीज के पहले तक की बातें हैं। ‘भूमि’ की रिलीज के बाद मुकेश भट्ट ने साफ तौर पर ‘सड़क 2’ बनाने की बातों को अफवाह करार दे दिया।

उनका कहना था कि, “आइडिया पसंद आना और उस पर फिल्म बनाना अलग अलग बातें होती हैं।” मुकेश भट्ट ने संकेतों में कहा कि ‘भूमि’ के बाद ‘सड़क 2’ बनाना फायदे का सौदा नहीं होगा। इसे ‘भूमि’ की बाक्स आफिस पर कमजोर परफारमेंस से जोड़कर देखा जा रहा है।

‘भूमि’ के बाद संजय ने तिग्मांशु धूलिया की, ‘साहब बीवी और गैंगस्टर 3’ की शूटिंग राजस्थान के बीकानेर में शुरु की है। यही फिल्म ‘भूमि’ के बाद संजय की अगली रिलीज होने वाली फिल्म होगी।

उजड़ने को तैयार है फिर से सभ्यता और संकृतिक धरोहर

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बांधों में डूबता उत्तराखण्ड आखिर कब तक विस्थापित होता रहेगा, घरों को उजाड कर आखिर कब तक घर रोशन होते रहेंगे, अपनी सभ्यता और संस्कृति को पानी में डूबोकर आखिर कैसे जी सकेंगे, कई एेसे सवाल उनके जहन में कौंधते हैं जिन्हे अपना घर छोड कर दुसरी जगह जागर विस्थापित होना पडेगा और बचपन की यादों को पानी में डूबते हुए देखना होगा। सैकड़ों बाँधों से लगभग पूरा नक्शा ही काला हो गया था। बाँधों से उभरी यह कालिख प्रतीकात्मक रूप में तथा कथित ऊर्जा प्रदेश के भविष्य को भी रेखांकित करती है।
उत्तराखण्ड में सबसे बड़ा बाँध टिहरी बाँध है। बाँध निर्माण के पिछले कई वर्षों से इस पर बनी जलविद्युत परियोजना के जो परिणाम आ रहे हैं, उससे उत्तराखण्ड सरकार की ऊर्जा नीति सवालों के घेरे में आ गई है। दावा था कि टिहरी बाँध 2,400 मेगावाट विद्युत का उत्पादन करेगा। लेकिन पिछले कई सालों से टिहरी जल विद्युत परियोजना निर्धारित उत्पादन से कम मेगावाट विद्युत का उत्पादन ही कर पा रही है। सैकड़ों गाँवों, हजारों लोगों के विस्थापन के साथ उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण नागर सभ्यता को झील में डुबो देने वाले इस बाँध का औचित्य क्या है, यह समझ नहीं आ रहा है। बाँध से पूरे उत्तराखण्ड के विकास की उम्मींदें लगाए लोग विद्युत के इतने कम उत्पादन को देख हतप्रभ हैं।
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नेपाल-उत्तराखण्ड के बीच बहने वाली काली नदी पर टिहरी से तीन गुना बड़े पंचेश्वर बाँध (पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना) पर सरकारी तौर पर सहमति नजर आ रही है। भारत-नेपाल का 230 किमी. का सीमांकन करती महाकाली नदी पर पंचेश्वर में बनने वाले इस बांध के प्रस्ताव ‘भारत-नेपाल महाकाली संधि’ पर 12 फरवरी 1996 को दोनों देशों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। नवम्बर 1999 में काठमांडू में एक संयुक्त परियोजना प्राधिकरण (जेपीओ) गठित की गई। इसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को नेपाल में उस समय विपक्षी दल नेकपा (एमाले) ने संसद में पास नहीं होने दिया था। यह जेपीओ भी 2002 में रद्द कर दिया गया। 2004 में दोबारा बनाए जेपीओ की पहली मीटिंग इसी वर्ष दिसम्बर में हुई। लेकिन 2005 में प्रस्तावित इसकी दूसरी मीटिंग नेपाल में आई राजनीतिक अस्थिरता के चलते टल गई। इसके बाद नेपाल में हुए चुनावों में सीपीएन (माओवादी) को अच्छी बढ़त मिली और पुष्पकमल दहल ‘प्रचण्ड’ प्रधानमंत्री बने।
पंचेश्वर बाँध 315 मी. ऊँचा विश्व में दूसरा सबसे बड़ा बाँध होगा। इस बाँध की क्षमता 6,480 मेगावाट आंकी जा रही है। इस परियोजना पर दो चरणों में काम होना है। पहले 315 मीटर ऊँचा बाँध पंचेश्वर में महाकाली और सरयू नदी के संगम से 2 किमी नीचे बनना है। दूसरे चरण में 145 मीटर ऊंचाई वाला बाँध इससे नीचे महाकाली की अग्रगामी शारदा नदी पर पूर्णागिरी में। बाँध की इस बहुउद्देश्यीय परियोजना में भारत और नेपाल का 134 वर्ग किमी क्षेत्र डूब जाना है। इसमें भी 120 वर्ग किमी का क्षेत्र उत्तराखण्ड का है। सिर्फ 14 वर्ग किमी का क्षेत्र नेपाल का डूबेगा। दोनों ही ओर महाकाली और सहायक नदियों की उपजाऊ तलहटी में बसे प्रमुखतः कृषि पर जीवनयापन करने वाले 115 गांवों के 11,361 परिवार प्रभावित होंगे। ‘टिहरी विस्थापन’ से उबर भी न पाए उत्तराखण्ड के लोगों को एक और बड़े विस्थापन से जूझने की तैयारी करनी है। नेपाल ने अपने प्रभावित क्षेत्र के गांवों के पुनर्वास का एक नक्शा भी तैयार कर लिया है। भारत की ओर से क्षेत्रीय लोगों को ऐसे किसी भी नक्शे की जानकारी नहीं है।

विस्थापन से पुनर्वास के अतिरिक्त मध्य हिमालयी क्षेत्र में बनने वाले इस बृहद बांध से कई समस्याएं हैं। भूगर्भवेत्ताओं का मानना है कि ‘पंचेश्वर’ भूगर्भीय हलचलों की दृष्टि से ’जोन 4’ में है। बांध में रोके जाने वाले पानी से यहां तकरीबन 80 से 90 करोड़ घन लीटर का दबाव पड़ेगा। यह दबाव पहाड़ों के भीतर संवेदनशील स्थिति में अवस्थित चट्टानों को धंसाने का काम कर सकता है। इसके कारण बड़े भूकम्पों की आशंका है। विगत 15 वर्षों में मध्य हिमालय के ‘सीसमिक 4 जोन’ में रिएक्टर पैमाने पर 5 अंकों की तीव्रता से ऊपर वाले दस भूकम्प दर्ज हुए हैं। इनमें से पांच भूकम्पों का केन्द्र पंचेश्वर से 10 किमी की दूरी के अंदर ही रहा है। भूकम्पीय खतरों के अतिरिक्त पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह बांध मध्य हिमालय के इको सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इसके अलावा बांध विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बांधों की उम्र लम्बी नहीं है। इसीलिये इन पर किए जा रहे बड़े निवेशों का कोई भविष्य नहीं है। पंचेश्वर बांध के लिए बनाई गई रिपोर्ट में इसकी उम्र 100 वर्ष आंकी गई है। लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बांध केवल 25 से 30 वर्षों में ही नदी के साथ बहकर आने वाले गाद के चलते बेकाम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में केवल 25 से 30 वर्षों की एक योजना के लिए सैकड़ों वर्षों से नदियों के किनारे बसे हिमालयी समाज को विस्थापित कर दिया जाना जायज नहीं ठहराया जा सकता।

पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना मुख्यतः

विद्युत उत्पादन के अतिरिक्त, सिंचाई, पेयजल और बिहार व उत्तर प्रदेश में आने वाली बाढ़ पर नियंत्रण के उद्देश्य के लिए बनाई गई है। उत्तराखण्ड का एक बड़ा क्षेत्रफल इस परियोजना के तहत डूब जाना है और एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित भी होनी है। भारत में भी इसका विरोध करने वाले आंदोलनकारियों में इससे पहले टिहरी बांध के विरोध में शामिल भूगर्भवेत्ता, पर्यावरणविद, संस्कृतिकर्मियों, सामाजिक संगठनों के अतिरिक्त यहां की क्षेत्रीय जनता है। एक व्यापक प्रतिरोध के बावजूद भी जिस तरह टिहरी बांध को बनने से नहीं रोका जा सका, उस तरह ही पंचेश्वर बांध को बनने से रोका जाना असम्भव तो नहीं पर कठिन बहुत है

फर्जी नर्सिंग होम और क्लीनिक किया सीज

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कस्बा लंढौरा, रुड़की में बिना डिग्री के चलाए जा रहे दो नर्सिग होम व एक क्लिनिक को सीज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान झोला छाप चिकित्सकों में हडकंप मचा रहा।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लंढौरा में डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में फर्जी तरीके से चलाये जा रहे दो नर्सिग होम व एक क्लिनिक को सीज कर दिया। कुछ झोला छाप चिकित्सक अपनी दुकाने बंद कर फरार हो गये। टीम ने लंढौरा लक्सर रोड पर एक फर्जी नर्सिग होम को सीज किया। दूसरा कस्बा लंढौरा में स्थित पूर्व एएनएम द्वारा बिना रजिस्ट्रेशन के चलाया जा रहा नर्सिंग होम भी सीज किया गया। हालांकि कार्रवाई की भनक लगने पर एएनएम को पहले ही नर्सिंग होम बंद कर फरार हो गयी थी ।टीम ने उसको भी सीज कर दिया है ।

वहीं एक क्लीनिक को भी सीज किया है। इस सम्बंध में डिप्टी सीएमओ डा. अशोक कुमार का कहना है कि फिलहाल सीज की कार्यवाही की गयी है। आगे विस्तार से जांच की जायेगी। टीम में अपर शोध अधिकारी रवीन्द्र कुमार,एसआई खेमेनदर गंगवार,कांस्टेबल यशपाल,रवि चौहान,खलील अंसारी आदि शामिल रहे।

दो अभियुक्त 16.10 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार

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एसएसपी देहरादून के निर्देशानुसार चलाए जा रहे नशे के खिलाफ अभियान के तहत निरीक्षक रायपुर के निर्देशन में कार्यवाही करते हुए चौकी मयूर विहार, थाना रायपुर पुलिस के द्वारा पॉलिटेक्निक तिराहा, आमवाला, रायपुर से दो अभियुक्तों को 16.10 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया गया।

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जिसमें रोबिन रावत के पास से 8.460 ग्राम स्मैक व तोशिबा कंग के पास से 7.650 ग्राम स्मैक नाजायज बरामद हुई। अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि वह यह स्मैक बरेली उत्तर प्रदेश से लाकर देहरादून में बेचते हैं।

विद्यालय में मोबाइल लाने पर लगा प्रतिबंध

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चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर के राजकीय बालिका इंटर कालेज में अभिभावक संघ की बैठक में विद्यालय परिसर के अंदर छात्राओं के मोबाइल फोन लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने पाल्यों को मोबाइल फोन से दूर रखने की हिदायत दें।

राबाइका में हुई अभिभावक संघ की बैठक में प्रधानाचार्या ममता शाह ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि सार्वजनिक वाहनों से विद्यालय आने वाले छात्राओं के अभिभावक वाहन चालक व वाहन की पूरी जानकारी अपने पास रखे साथ विद्यालय को भी इसकी सूचना दें ताकि जरूरत पड़ने पर उनके संपर्क किया जा सके।

बैठक में अभिभावक संघ के अध्यक्ष शिवलाल रूद्रियाल ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा का जिम्मा प्रशासन के साथ ही अभिभावकों का भी है। इसलिए वे अपने कर्तव्यों का सही पालन करें। 

हंस फाउंडेशन उठाएगा वरुण के इलाज का खर्च : विधायक जोशी

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किडनी की समस्या से पीड़ित 13 वर्षीय वरुण की मदद को मसूरी विधायक गणेश जोशी ने हाथ बढ़ाया है। नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में वरुण का इलाज चल रहा है। विधायक जोशी ने वरुण का इलाज कर रहे डाॅक्टरों से मुलाकात की है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा बिल्कुल ठीक हो सकता है, बशर्ते इलाज के लिए तकरीबन आठ-नौ लाख का खर्चा आएगा।

विधायक जोशी ने खर्च के सम्बन्ध में हंस फाउंडेशन की चैयरमेन माता मंगला से वार्ता की है। जोशी ने बताया कि हंस फाउंडेशन पीड़ित वरुण के इलाज के लिए पूरा खर्च उठाने का आवश्वासन दिया है। विधायक जोशी ने माता मंगला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और आर्शीवाद से असंख्य अक्षम लोगों की मदद होती रही है।

किडनी की समस्या से पीड़ित 13 वर्षीय वरुण ने मंगलवार को एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मदद की गुहार लगाई थी। नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती वरुण ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया था कि मुझसे मां की आंखों में आंसू नहीं देखे जाते किन्तु जब मुझे अधिक दर्द होता है तो तकिए में मुंह देकर रोना पड़ता है। पीड़ित वरुण का परिवार पुरानी दिल्ली के बल्लिरामान में रहता है और पिता कमल किशोर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

इसकी जानकारी मिलने पर मसूरी विधायक गणेश जोशी ने नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में किडनी की समस्या से पीड़ित वरुण का हाल जाना। विधायक जोशी ने बताया कि खर्च के सम्बन्ध में हंस फाउंडेशन की चैयरमेन माता मंगला से वार्ता की गयी है। और उनके द्वारा पीड़ित वरुण के इलाज के लिए पूरा खर्च उठाने का आवश्वासन दिया गया है।

निशंक को गुजरात सौराष्ट्र का प्रभारी बनाए जाने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बांटी मिठाई

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद हरिद्वार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सौराष्ट्र का प्रभार सौंपा है। रुड़की में भाजपाईयों ने मिठाई खिलाकर खुशियां मनाई।

इस मौके पर भाजपा नेता कुँवर नागेश्वर का कहना है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार सांसद को आगामी वर्ष में होने वाले गुजरात में विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र का जिम्मा राष्ट्रीय भाजपा कार्यकारिणी द्वारा सौंपा गया है इसका वह दिल से धंयवाद करते हैं।

उनका कहना है कि डॉ. निशंक सौराष्ट्र क्षेत्र के लगभग 16 सांगठनिक जनपद एवं 48 विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास करेंगे। पहले सौराष्ट्र की जिम्मेदारी वरिष्ठ भाजपा नेता निर्मला सीतारमन को सौंपी गई थी। उनके रक्षा मंत्री बनने के बाद उनकी व्यस्तता को देखते हुए अब यह प्रभार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को दिया गया है। 

दशहरे को तय होगी बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की तिथि

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गोपेश्वर। हिन्दुओं के प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की तिथि 30 सितम्बर दशहरे के दिन तय की जाएगी।

जानकारी देते हुए बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि धर्माधिकारियों द्वारा दशहरे के दिन पचांग देखकर बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की तिथि तय की जाएगी। पचांग के आधार पर तिथि निर्धारित होने के बाद ही कपाट बंद होने की प्रक्रिया होगी। कहा कि इस बार बद्रीनाथ धाम में आपदा के बाद यात्रियों की अच्छी तादात रही। आशा है कि अगले वर्ष भी कपाट खुलने पर यात्रा ठीक ठाक चलेगी।