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जल संस्थान को मिलेंगी 87 नई पेयजल योजनाएं

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देहरादून। लंबे समय से पानी के संकट से जूझ रहे उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए 87 पेयजल योजनाएं तैयार हो चुकी हैं। अगले तीन से चार माह के अंतराल में पेयजल निगम इन योजनाओं को भौतिक सत्यापन कराकर जल संस्थान को हैंडओवर कर देगा, जिससे दस जिलों के करीब दो लाख ग्रामीण आबादी को पानी की किल्लत से निजात मिलेगी।

पेयजल निगम ने नाबार्ड, एनआरडीडब्ल्यूपी (राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम), स्टेट सेक्टर आदि प्रोजेक्ट के तहत दो साल पहले इन योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया था, लेकिन इनमें कुछ पेयजल योजनाओं पर जल संस्थान की आपत्तियां होने के कारण हैंडओवर की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई थी। इसके बाद मामला शासन तक पहुंचा तो शासन के हस्तक्षेप के बाद इन योजनाओं की हैंडओवर प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। इनमें सबसे ज्यादा टिहरी गढ़वाल की 26 व इसके बाद पौड़ी की 19 योजनाएं शामिल हैं। सबसे कम उधमसिंहनगर व नैनीताल की एक-एक योजनाएं हैं, जबकि देहरादून के ग्रामीण क्षेत्र की आठ योजनाएं शामिल हैं।
पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने कहा कि पेयजल निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 87 पेयजल योजनाओं का निर्माण कर लिया है। जल्द ही इन्हें जल संस्थान को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
जिला- कुल योजनाएं
बागेश्वर- 05
टिहरी- 26
पिथौरागढ़- 04
चमोली- 01
हरिद्वार- 18
पौड़ी- 19
देहरादून- 08
नैनीताल- 01
अल्मोड़ा- 04
उधमसिंहनगर- 01
कुल- 87

उत्तराखंड के पानी व जवानी बचाने को सचिवालय घेराव करेगा उसमा

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विकासनगर। प्रदेश से पलायन रोकने व पानी का सदुपयोग करने में प्रदेश सरकार पर असमर्थ रहने का आरोप उत्तराखंड संवैधानिक संरक्षण मंच ने प्रदेश सरकार पर लगाया। मंच की कोर कमेटी की बैठक के बाद मीडिया को जारी बयान में मंच के प्रदेश संयोजक व प्रदेश सह प्रवक्ता अरविंद शर्मा ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस बारी-बारी से प्रदेश के संसाधनों का दोहन कर जनता का शोषण किया है। प्रदेश में घोटाले व दल बदल की संस्कृति को बढ़ावा देकर दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकीं है।

मंच के प्रदेश सह प्रवक्ता शर्मा ने कहा सूबे के किसानों का कर्जा माफ कराने, राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में नब्बे सरकारी महकमों के 15907 बैकलाग के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने व उत्तराखंड में जगह-जगह चैक स्कीम को लिफ्ट योजना से जोड़कर स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की मांग को लेकर मंच आगामी 25 अक्टूबर को सचिवालय का घेराव करेगा। इसके साथ ही मंच उत्तराखंड के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों को मालिकाना हक दिए जाने, औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को सत्तर प्रतिशत रोजगार दिए जाने, प्रदेश में बंद पड़ी उर्दू शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी सरकार पर दबाव डाला जाएगा।
मंच के प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से एससी, एसटी, ओबीसी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि प्रदेश के औद्योगिक व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कई बाल श्रमिक मजदूरी कर रहे हैं लेकिन सरकार के पास इन बाल श्रमिकों के शिक्षा व पुनर्वास के लिए कोई नीति नहीं है। बताया कि सभी मसलों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर प्रदेश का पानी व जवानी बचाने के लिए 25 अक्टूबर को सचिवाल घेराव किया जाएगा जिसके बाद मंच चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।

साधारण लगने वाले बालकृष्ण बने देश के आठवें अमीर

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हरिद्वार। कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो और दिल में सच्ची लगन हो तो रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएं फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मंजिल साफ नजर आती हैं। कुछ ऐसे ही यात्रा रही है आचार्य बालकृष्ण की। आज इस नाम को कहीं भी पहचान की जरूरत नहीं। ये उनकी लगन का ही नतीजा है कि पतंजलि को घर-घर में जगह मिली है। आज बालकृष्ण आचार्य होने के साथ-साथ देश में टॉप 10 उद्योगपतियों में शामिल हो गए हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण से अब देश के बड़े उद्योगपति घबराने लगे हैं। अडानी-अंबानी हों या फिर टाटा-बिड़ला जैसे दिग्गज। जिस तेजी से बालकृष्ण देश के बड़े उद्योगपतियों में अपना नाम दर्ज करवा रहे हैं उसे देख इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि आने वाले दिनों में आचार्य बालकृष्ण देश के सबसे बड़े अमीर बिजनेसमैन बन सकते हैं।

यह हम नहीं, बल्कि हर साल उद्योगपतियों और लोगों की संपत्ति पर सर्वे करने वाली सबसे बड़ी बिजनेस पत्रिका हुरून रिच ने कहा है। आचार्य बालकृष्ण देश के टॉप 10 अमीरों में से आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं यानी शून्य से शुरू हुआ बालकृष्ण का सफर आज देश की नामचीन हस्तियों में पहुंच गया है। नेपाल में जन्मे आचार्य बालकृष्ण बहुत सामान्य परिवार से आते हैं। पांच भाई-बहनों में से एक बालकृष्ण का परिवार आज भी सामान्य जीवन ही जी रहा है। नेपाल में पैदा हुए और गुरुकुल में अपनी शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने के साथ योग और आयुर्वेद में उपलब्धि हासिल करने के बाद साल 2000 में पूरी तरह से योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अस्तित्व में आए थे। 2000 के आसपास ही रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर पतंजलि योगपीठ और दूसरी संस्थाओं की स्थापना की थी। धीरे-धीरे ये कदम बढ़ते गए और एक पतंजलि आज भारत के साथ-साथ कई देशों में स्थापित हो चुकी है।
लगभग 15 साल पहले रामदेव ने अपने काम की शुरुआत की थी, जिसका नतीजा आज पूरे देश में नजर आ रहा है। सर्वे करने वाली मैग्जीन की मानें तो उनकी प्रॉपर्टी में 173 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है और वह बढ़कर 70,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। आप सभी को यह जानकार हैरानी होगी कि पतंजलि का वित्त वर्ष 2017 में कुल टर्नओवर 10,561 करोड़ रुपये था। हुरुन के मुताबिक, पतंजलि के सीईओ बालकृष्ण अब देश के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं।
सर्वे में मुकेश अंबानी पहले और दिलीप सांघवी दूसरे नंबर पर हैं। पतंजलि का मुनाफा पिछले तीन साल में रिकॉर्ड तोड़ प्रतिशत से बढ़ा है। सर्वे के मुताबिक, पतंजलि भारत का सबसे तेजी से बढ़ता एफएमसीजी ब्रांड है। फिलहाल पतंजलि का सालाना टर्न ओवर 5000 करोड़ से अधिक है और 2017 में ये दोगुना हो गया है। 2013-14 में पतंजलि का कुल मुनाफा 95.19 करोड़ था।
साल 1995 में आचार्य बालकृष्ण ने अपने गुरु शंकरदेव के आश्रम में दिव्य फार्मेसी की शुरुआत की थी। आज दिव्य फार्मेसी की सहयोगी पतंजलि दुनिया में मशहूर हो चुकी है। देश ही नहीं विदेशों में भी आज पतंजलि के प्रोडक्ट्स की भारी मांग है। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि जब उन्होंने यह सफर शुरू किया था तब भी और आज जब वो इस मुकाम पर पहुंचे हैं उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी वह धोती कुर्ता ही पहनते हैं। सामान्य सा जीवन जीते हैं। पतंजलि योगपीठ में खेतों में काम करते हैं और जंगलों में घूमकर जड़ी-बूटी ढूंढ़ने का भी वह स्वयं काम करते हैं। बालकृष्ण कहते हैं कि जब वह आज लोगों के बीच गांव-गांव जाते हैं तो सभी उनसे यही सवाल करते हैं आखिरकार वो वहां क्या कर रहे हैं। उनके साथ आईआईटी-आईआईएम और दूसरे बड़े शिक्षा संस्थानों से पासआउट लोग काम करते हैं, लेकिन वह कहते हैं कि जब तक आदमी स्वयं काम नहीं करता तब तक वह सफल नहीं हो सकता इसलिए वो अपना हर काम खुद अपने हाथों से करते हैं।
बालकृष्ण का कहना है कि वह आज भी खेतों में काम करके गाय का गोबर उठाते हैं। इतना ही नहीं वह सुबह चार बजे उठते हैं जिसके बाद वह नित्य कर्म करने के बाद रात 10 बजे तक पतंजलि योगपीठ से जुड़ा काम भी करते हैं। हालांकि, वो ये कहते हैं कि लोग उनके कपड़ों को देखकर कई बार ये सोच लेते हैं कि आखिरकार धोती कुर्ता पहनने वाला इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंच सकता है जिस पर उनका यही कहना है कि इंसान के कपड़े नहीं बल्कि उसका दिमाग उसे आगे बढ़ाता है।
आज जब वह बड़े-बड़े सेमिनार बड़ी-बड़ी मीटिंग में जाते हैं तो तमाम बिजनेसमैन कोट पेंट टाई और सूट बूट में आते हैं लेकिन वो एकमात्र ऐसे सीईओ हैं जो धोती कुर्ता और एक झोले के साथ बड़ी से बड़ी बिजनेस मीटिंग में पहुंच जाते हैं। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि वो आज भी इस दिशा में काम कर रहे हैं कि लोगों को अच्छा खाना मिले, लोग स्वस्थ रहें और देशवासियों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो। आज जो भी काम कर रहे हैं वो अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए कर रहे हैं। अगर किसी भी संस्थान ने उन्हें देश में टॉप-10 उद्योगपतियों में शामिल किया है तो वह उनका सम्मान नहीं बल्कि देशवासियों का सम्मान है।
जहां पर पतंजलि योगपीठ और आचार्य बालकृष्ण सहित स्वामी रामदेव पहुंचे हैं, वहां तक पहुंचना उनका लक्ष्य नहीं है। बालकृष्ण की मानें तो वो चाहते हैं कि देश में भारतीय संस्कृति का डंका बजे। देश को जो कंपनियां लूटने में लगी हुई हैं, यहां से भागे और देश के सभी लोग खुशहाल रहें। यही उनकी इच्छा है और यह मिशन तब तक जारी रहेगा जब तक भारत में यह सब कुछ संभव नहीं हो जाता। जब उनका मिशन शुरू हुआ था तब से लेकर आज तक वह बड़ी-बड़ी कंपनियों के टारगेट पर भी रहे हैं। लिहाजा यहां तक का सफर बेहद खतरनाक भी रहा है लेकिन इन सब को दरकिनार कर वो अपने काम को अंजाम देते रहे और उसका असर यह हुआ कि आज लोग आयुर्वेद और योग को घर-घर अपना रहे हैं। बालकृष्ण शांति और सौम्यता का रंग सफेद धारण करते हैं। वो सफेद रंग के कुर्ते और धोती में ही नजर आते हैं। लेकिन आचार्य के आसपास बाउंसरों का घेरा रहता है। बालकृष्ण 70 लाख से भी महंगी रेंज रोवर गाड़ी में चलते हैं। कंधे पर थैला और पैरों में साधारण सी चप्पल धारण करने वाले आचार्य बालकृष्ण रामदेव के आयुर्वेद का पूरा कारोबार संभालते हैं।

आरके स्टूडियो में लगी आग पर अब भरना होगा जुर्माना

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विगत 16 सितंबर को आरके स्टूडियो में लगी आग से जहां भारी नुकसान हुआ, वहीं अब मुंबई के दमकल विभाग ने नोटिस भेजा है, जिसमें कहा गया है कि स्टूडियो में आग बुझाने की व्यवस्था नहीं थी और इसके लिए तय कानूनों का पालन नहीं किया गया था। इस नोटिस पर जवाब के बाद दमकल विभाग आरके स्टूडियो के प्रबंधन के खिलाफ जुर्माना तय करेगा। विभाग के सूत्रों ने माना है कि जुर्माना लगेगा, लेकिन इसका फैसला नोटिस का जवाब मिलने के बाद होगा।

दमकल विभाग का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले का निपटारा होने तक अब स्टूडियो में किसी भी तरह की शूटिंग नहीं हो पाएगी। दमकल विभाग का कहना है कि विभाग द्वारा एनओसी जारी करने के बाद ही वहां कोई शूटिंग हो सकेगी। 16 सितंबर की दोपहर को आरके स्टूडियो में लगी आग में वहां का सेट नंबर एक जलकर खाक हो गया। यहां सोनी चैनल के एक डांस शो की शूटिंग होनी थी।

रविवार होने की वजह से उस दिन वहां कोई शूटिंग नहीं थी, वरना इस कांड में कई जानें जा सकती थीं। इस अग्निकांड से आरके स्टूडियों में सालों पुरानी तमाम चीजें भी जलकर राख हो गईं, जिसमें कई पुरानी ड्रेसेज भी थीं। दमकल विभाग का कहना है कि 2014 के बाद स्टूडियो ने इस बारे में एनओसी लेने के लिए कोई आवेदन नहीं किया, जबकि कानूनी रुप से हर साल दमकल विभाग से एनओसी लेना पड़ता है और इसके लिए आग रोकने के लिए की गईं व्यवस्थाओं का विवरण विभाग को भेजना पड़ता है, जिनकी जांच के बाद ही एनओसी जारी होता है।

जिस दिन आग लगी थी, उसी दिन ये बात सामने आई थी कि वहां बिजली के तारों की पुराने दौर की फिटिंग होने से आग का खतरा बना हुआ था, जिस तरफ आरके के प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया। ऋषि कपूर ने इस नोटिस मिलने की खबर पर कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। 

कार पार्किंग को लेकर दीपिका का टकराव

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दिसंबर में ‘पद्मावती’ बनकर परदे पर आने को तैयार दीपिका पादुकोण इन दिनों एक और जंग में शामिल हैं। ये जंग कार पार्किंग को लेकर है। मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के बांद्रा उपनगर के पाली हिल इलाके की जिस बिल्डिंग में जहां दीपिका पहले रहा करती थीं, वहां कार पार्किग को लेकर बिल्डिंग की सोसायटी के साथ दीपिका का मामला टकराव की ओर बढ़ गया है और ये कानूनी जंग में बदल सकता है।

सोसायटी का तर्क है कि दीपिका अब इस बिल्डिंग में नहीं रहतीं, इसलिए उनके लिए रिजर्व पार्किंग देना संभव नहीं, क्योंकि पार्किंग की जगह ज्यादा नहीं है। दीपिका अब दादर में लिए नए घर में रहने जा चुकी हैं और उनका तर्क है कि अभी फ्लैट उनका है और पार्किंग की जगह का किराया वे दे चुकी हैं, ऐसे में उनकी जगह सोसायटी नहीं छिन सकती। अब इस मामले को लेकर दोनों पक्ष कानूनी कार्रवाई की बात कह रहा है।

दीपिका का तर्क है कि बालीवुड हीरोइन होने की वजह से उनको निशाना बनाकर कुछ लोग पब्लिसिटी पाना चाहते है, तो सोसायटी का कहना है कि दीपिका सेलिब्रिटी हैं, इसलिए वे कानूनों को तोड़ मरोड़ना चाहती है, जबकि सोसायटी के कानून बिल्डिंग में रहने वाले सभी सदस्यों के लिए एक जैसे हैं।

एक अक्टूबर से नि:शुल्क महिला चिकित्सा ​शिविर का आयोजन

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देहरादून। केन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की ओर से एक अक्टूबर से नि:शुल्क महिला चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें महिलाओं से संबंधित रोग का निदान विशेष महिला डॉक्टरों की ओर से किया जाएगा। पांच अक्टूबर को प्रेस क्लब में सुबह दस से एक बजे तक महिलाएं शिविर का लाभ उठा सकेंगे।

शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान फाउंडेशन की अध्यक्ष और स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि महिला जनित रोग की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इस तरह के रोग को लेकर महिलाएं खुलकर बता नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि स्तन और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। यदि समय-समय पर जांच होती रहे तो इनको रोका जा सकता है। इसी क्रम में संस्था की ओर से अक्टूबर माह में शहर के कई जगहों पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाया जा रहा है। जिसमें महिलाएं स्तन, सर्वाइकल कैंसर के अलावा शुग, ब्लड प्रेशर की जांच नि:शुल्क करवा सकेंगी। प्रेस क्लब में पांच अक्टूबर को यह शिविर लगाया जा रहा है। जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ महिलाओं की जांच करेंगे। यदि पहले चरण में इलाज किया जाए तो रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। संस्था ने पिछले चार साल में विभिन्न जगह कैंप लगाकर दस हजार लोगों की जांच कराई। जिसमें से आठ सौ महिलाओं का सफल इलाज किया गया। इस दौरान संस्था के संरक्षक महेश कुडियाल, सचिव प्रवीण डंग आदि मौजूद रहे। 

क्वींस बेटन रिले के लिए हरिद्वार का नाम शामिल

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हरिद्वार। काॅमन वैल्थ गेम्स 2018 की क्वींस बेटन रिले के लिए हरिद्वार जनपद का नाम शामिल होने पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने इसे विशेष अवसर बताया।

जिलाधिकारी ने रिले के यहां पहुंचने के सम्बंध में खेल विभाग, पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में जिलाधिकारी ने छह अक्टूबर को हरिद्वार पहुंच रही मशाल यात्रा की तैयारियों को लेकर विभागीय अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये।
डीएम ने मशाल यात्रा के ऋषिकेश से हरिद्वार हर की पैड़ी पहुंचने पर उसके स्वागत तथा सड़क मार्ग से होते हुए नेहरू युवा केंद्र पर समापन किये जाने के सम्बंध में यातायात प्लान, सुरक्षा सहित अनेक विषयों पर अधिकारियों से चर्चा की।
जिलाधिकारी ने रिले के हर की पैड़ी पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक तथा स्थानीय समस्त जनप्रतिनिधियों व गंगा सभा द्वारा स्वागत जलपान के बाद रिले के लिए आगे का रूट भी निर्धारित किया। रिले के दौरान एम्बुलेंस, मार्गों की स्वच्छता व पेयजल आदि की व्यवस्था के लिए भी सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।
बैठक में सीडीओ स्वाती भदौरिया, मुख्य नगर आयुक्त नितिन भदौरिया, एडीएम वित्त ललित नारायण मिश्र, एसडीएम मनीष सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी डोभाल, गंगा सभा के पुरुषोत्तम गांधी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

दुल्हे के पत्रकार होने पर लड़की वालों का शादी से इंकार

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हरिद्वार। लोकतंत्र का चौथा और सबसे मजबूत स्तंभ मीडिया के क्षेत्र में बने रहना किसी खतरे से कम नहीं है। मीडियाकर्मियों की हत्या और कम वेतन उनकी निजी जिंदगी पर भी भारी पड़ने लगे हैं। इसी के चलते नौजवान पत्रकारों की शादियां तक खतरे की जद में आ गई है। बेटी वाले अब नौजवान पत्रकारों के साथ अपनी बेटी की शादी करने से भी इंकार करने लगे है।

हरिद्वार के एक पत्रकार ने खुलासा किया कि बेटी वालों ने शादी से इसलिये इंकार कर दिया कि वह पेशे से पत्रकार है। बेटी के परिजनों ने साफ तौर पर पत्रकार के साथ बेटी की शादी करने से मना कर दिया है। लड़की के परिजनों का कहना है कि पत्रकारों का जीवन असुरक्षित होता है। उनकी आर्थिक स्थिति पर संकट बना रहता है। जिसके बाद से उक्त पत्रकार के परिजन लगातार मीडिया का पेशा छोड़ने का दबाव बना रहे हैं।
पत्रकार ने बताया कि यूपी के मेरठ से उसकी शादी का रिश्ता आया था। बेटी के परिजनों को हरिद्वार आकर जब पता चला कि लड़का पत्रकार है तो कई सवाल उन्होंने कर दिए। लड़की के परिजनों ने यह तक कह डाला कि पत्रकार की जिंदगी क्या होती है। आये दिन पत्रकारों की हत्या हो रही हैं। जबकि पत्रकारों की आर्थिक स्थिति से सभी वाकिफ हैं। उक्त पत्रकार अपने ही मन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि वास्तव में पत्रकारिता का पेशा समाज की नजर में इतना खराब कि लोग शादी तक से इंकार करने लगे है। 

महंत मोहनदास की गुमशुदगी से नहीं उठा परदा, रहस्य बरकरार

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एडीजे कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने लापता महंत मोहनदास के गुमशुदगी में सभी संभावनाओं के दरवाजे खुले रखे हैं। उन्होंने कहा कि महाराज खुद एकांत में चले गये या उनका अपहरण किया गया ये रहस्य बरकरार है। पुलिस फोर्स पूरी गहनता से तमाम एंगल पर जांच कर रही है। संतों को भरोसा दिया गया कि जल्द ही महंत को बरामद कर लिया जायेगा। इसी के साथ केबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने भी आखड़े पहुंचकर पुलिस अधिकारियों और संतों से मंत्रणा की।

एडीजे कानून व्यवस्था अशोक कुमार महंत मोहनदास की गुमशुदगी के प्रकरण में संत समाज के लोगों से मिलने के लिये शुक्रवार सुबह बड़ा उदासीन अखाड़े पहुंचे। करीब 45 मिनट तक एडीजे ने अखाड़े के संत से बंद कमरे में गुफ्तगू की। संतों को पुलिस की अभी तक इंवेस्टीगेशन से अवगत कराया। संतों को महंत मोहनदास को सकुशल बरामद करने का भरोसा दिया। इसी दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी अखाड़े पहुंच गये। मंत्री, एडीजे और संतों ने करीब 15 मिनट तक एक फिर चर्चा की।

मीटिंग खत्म करने के बाद एडीजे अशोक कुमार ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए गुमशुदगी के रहस्य में पुलिस के हाथ खाली होने की जानकारी दी। अशोक कुमार ने बताया कि वह लगातार विशेष जांच टीम के संपर्क में बने हुए हैं। विभिन्न लाईनों पर काम कर रहे हैं। कई प्रदेशों में पुलिस टीम भेजी गई है। संवेदनशील मामले में पुलिस फूंक-फूंक कर काम कर रही है।

अशोक कुमार ने कहा कि, “किसी केस को पुलिस जल्दी खोल देती है। कुछ केसों में लंबा वक्त लग जाता है लेकिन महंत मोहनदास को सकुशल बरामद करने के लिये पुलिस पूरे प्रयास कर रही है।”

गृहमंत्री राजनाथ सिंह जवानों के साथ मनाएंगे दशहरा

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गोपेश्वर। गृहमंत्री राजनाथ सिंह उत्तराखंड के भारत-चीन सीमा पर आईटीबीपी के जवानों के साथ दशहरा मनाएंगे। साथ ही यहीं पर दशहरे के दिन शस्त्र पूजा भी करेंगे। चमोली जनपद के माणा में सेना के कैंप में पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं, सैनिकों का हौसला मजबूत है, डोकलाम विवाद सुलझा है, चमोली से लगी सभी सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि जवानों को हल्के व बेहतर कपड़े दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सेना में प्रमोशन दो दशक से नहीं हुए थे लेकिन अब एक बार प्रमोशन हो चुके हैं और इसको लगातार जारी रखा जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री तीन दिवसीय दौरे पर चमोली पहुंच गए हैं। उन्होंने माणा आईटीबीपी कैंप में जवानों के साथ चाय, नाश्ता कर उनका हौसला अफजाई किया। उन्होंने जवानों की समस्याएं पूछी और उन्हें एक लाख रुपये बड़ा खाना के लिए देते हुए एलईडी टेलीविजन भी मनोरंजन के लिए दिया। इस दौरान जवानों ने कहा कि हमें कोई दिक्कत नहीं है। हम देश की सेवा के लिए किसी भी परिस्थिति में तत्पर हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री 2ः20 बजे बद्रीनाथ स्थित आर्मी हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर से उतरे। हेलीपैड पर पुलिस के जवानों ने गृहमंत्री को गार्ड ऑफ आनर दिया। गृहमंत्री को हेलीपैड पर ही आईटीबीपी की महिला कमांडो यूनिट ने शस्त्र के साथ करतब दिखाकर स्वागत किया। गृह मंत्री ने महिला कमांडो के पास जाकर उन्हें देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होने पर शाबासी दी। वहां से वह सीधे सेना व आईटीबीपी के जवानों के पास पहुंचे, जहां उन्होंने एक घंटा बिताया।
गृहमंत्री ने जवानों को दशहरा व दीपावली की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि मैंने दशहरे को सीमा पर जाना इसलिए चुना क्योंकि हमारे जवान देश की रक्षा के लिए परिवार से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक साल पहले भी आना चाहता था लेकिन नहीं पहुंच पाया। जवानों से उन्होंने कहा कि हमें अपने आप पर गर्व है कि सेना देश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। सरकार भी उनकी हर समस्याओं के निदान के लिए गंभीर है।
वहीं, पत्रकारों से रूबरू होते हुए गृहमंत्री ने भारत सीमा विवाद पर कहा कि अब भारत-चीन के बीच सीमा विवाद जैसी कोई बड़ी समस्या नहीं है। डोकलाम विवाद भी दोनों देशों के बीच वार्ता के बाद सुलझ चुका है और चमोली की सीमाओं पर स्थिति सामान्य है।
माणा आईटीबीपी में जवानों के साथ समय बिताने के बाद गृह मंत्री शेषनेत्र बद्रीनाथ धाम के पास सीमा सड़क संगठन के गेस्ट हाउस में ठहरे हैं। गृहमंत्री ने बद्रीनाथ मंदिर में पहुंचकर सायं आरती व सायंकालीन पूजाओं में भी भाग लिया। उनके साथ पारिवारिक सदस्य भी शामिल रहे।