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घरेलू गैस के दामों में बढ़ोत्तरी पर भड़के कांग्रेसी

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हरिद्वार, गैस के दामों में बढ़ोत्तरी के विरोध में महानगर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने देवपुरा चौक पर एकत्र होकर नारेबाजी की। महानगर संयोजक संजय अग्रवाल ने कहा कि, “गैस के दामों में बेतहाशा मूल्य की वृद्धि की गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम अांशिक रूप से घटाकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।”

अग्रवाल ने कहा कि, “मंहगाई पर कोई नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। जमाखोरों पर अंकुश लगाने का काम केन्द्र सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। खाद्य पदार्थों के दामों में बेतहाशा वृद्धि से आमजनमानस हलकान है। गैस के दामों को तत्काल वापिस लिया जाए, नहीं तो कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”

गैस की सब्सिडी भी धीरे-धीरे समाप्त करने का काम किया जा रहा है। केन्द्र सरकार लगातार जनता से झूठे वादे कर जनता को छलने का काम कर रही है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी कर गैस के बढ़े दामों को वापस लिए जाने की मांग की। 

डीएलएड में रजिस्‍ट्रेशन नहीं होने से युवती ने की खुदकुशी

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देहरादून, थाना पटेलनगर, पटेलनगर क्षेत्र में एक युवती ने डीएलएड में रजिस्‍ट्रेशन न हो पाने के कारण पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली।

थाना पटेलनगर को सूचना मिली कि चंद्र विहार, कारगी ग्रांट में एक लड़की ने अपने घर में पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली है। उप निरीक्षक पंकज तिवारी मौके पर पहुंचे। कुमारी तुलसी पवार,निवासी चंद्र विहार कारगी ग्रांट ने अपने घर में सुबह पंखे से लटक कर खुदकुशी कर ली।

मृतका के कमरे से एक सुसाइड नोट प्राप्त हुआ है। जिस पर लिखा गया है कि 30 सितंबर 2017 को डीएलएड कोर्स छूटने के कारण डिप्रेशन में आने से आत्महत्या कर रही हूं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया है।

प्राइमरी, सेकेंडरी स्कूल के बाद अब कम छात्र संख्या वाले इंटर कॉलेजों पर फोकस

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देहरादून। शिक्षा विभाग में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और बजट को बनाए रखने के लिए विभाग ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर शिफ्ट करने की कवायद मेें जुटा है, जहां छात्र संख्या बहुत कम है। गौरतलब हो कि शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों की लिस्ट फाइनल कर शिफ्ट करने के प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी थी। इसके बाद अब ऐसे इंटर कॉलेजों को लेकर विभाग स्तर पर समीक्षा शुरू हो गई है। जिसमें छात्र संख्या कम हो।

सुधरेंगे बजट और हालात:
सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए स्कूलों के विलय की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। दरअसल शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग के बजट को सही जगह खर्च करने और स्कूलों के हालातों को सुधारने के लिए ऐसे स्कूलों के विलय की मंजूरी दी थी जहां छात्र संख्या 10 से कम हो। शिक्षा मंत्री का दावा है कि स्कूलों विलय से स्कूलों के हालात सुधरेंगे। एक ही जगह पढ़ाने से जहां बजट सही जगह खर्च होगा तो वहीं टीचर्स की संख्या भी स्कूलों में बढ़ेगी। जिससे स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक और जूनियर स्कूलों को विलय करने की प्रकिया शुरु कर दी गई है। जिसके लिए स्कूलों की लिस्ट तैयार कर दी गई है।

आरटीई के मानकों को नहीं कर सकते नजरअंदाज:
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के निर्देश के बाद ऐसे प्राथमिक और जूनियर स्कूलों के विलय के लिए चिन्हिकरण का काम किया गया जिनमें छात्र संख्या 10 से कम है। जिसमें प्रदेश के 452 प्राथमिक स्कूल, 148 जूनियर स्कूलों का विलय होगा। अब इंटर कॉलेज की समीक्षा भी की जाएगी। जिसमें 50 से कम छात्र संख्या है। शिक्षा विभाग के लिए स्कूलों के विलय में सबसे बड़ी समस्या आरटीई के मानकों के अनुरूप विलय करने की चुनौती है। जिसमें एक किमी के दायरे में आने वाले स्कूलों को ही शामिल किया जाना है। ऐसे में जो प्राथमिक और जूनियर स्कूल एक किमी के दायरे में आ रहे हैं और जहां छात्र संख्या 10 से कम हैं वही स्कूल शिफ्ट होंगे।

उच्च शिक्षा में सुधार को लेने होंगे सख्त फैसले: रावत

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देहरादून, अक्सर सरल और हल्के फुल्के अंदाज में नजर आने वाले उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का लहजा गुरुवार को कुछ तल्ख नजर आया। महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू करने पर कहा कि वह हाथ जोड़कर काम नहीं चला तो उंगली टेढ़ी करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। अशासकीय महाविद्यालयों की अव्यवस्थाओं व प्रबंध तंत्र रवैये पर दो टूक कहा कि अभी प्यार मोहब्बत से बात कर रहा हूं, जरूरत पड़ी तो अधिग्रहण का भी विकल्प खुला है।

डीडब्ल्यूटी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रावत ने कहा कि, “प्रदेशभर में छात्रसंघ चुनाव का शोर अब थमने वाला है, जिसके बाद एक माह ड्रेस कोड पर रायशुमारी की जाएगी। गोष्ठी के माध्यम से न केवल छात्र, बल्कि अभिभावकों से भी राय ली जाएगी। प्रदेश के 82 महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू हो चुका है, 22 अशासकीय महाविद्यालयों में भी 16 इसे अपना चुके हैं।

उन्होंने कहा कि, “कुछ दिन तनख्वाह भी रोकनी पड़ी तो परहेज नहीं करुंगा। कुछेक अशासकीय महाविद्यालयों का उदाहरण देते कहा कि शैक्षिक गुणवत्ता सरकार की प्राथमिकता है और हर कॉलेज को इस पर खरा उतरना होगा। शिक्षक या भौतिक संसाधनों की कमी मिलकर दूर करेंगे।  पहले लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाऊंगा और जरूरत पड़ी तो अधिग्रहण का भी विकल्प खुला रखा है।

दीक्षांत की ड्रेस का डिजाइन जल्द
उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में अब दीक्षांत समारोह में गाउन पहनने की परम्परा बंद होगी। विभाग अंग्रेजियत खत्म करने की कवायद में जुटा है। डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि हम गाउन के बदले नई ड्रेस तैयार कर रहे हैं। जिसमें न सिर्फ खादी का इस्तेमाल होगा, बल्कि उत्तराखंडी संस्कृति की भी झलक मिलेगी। निफ्ट यह ड्रेस डिजाइन कर रही है। 14 नवंबर को डिजाइन प्रस्तुत किया जाएगा।

किसी एक कॉलेज को दस लाख का इनाम
राज्य सरकार ने महाविद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा का भाव विकसित करने के लिए एक नई पहल की है। प्रदेश के किसी एक कॉलेज को हर साल दस लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। इसके लिए उनका विभिन्न मानकों पर आकलन होगा। जिसमें 180 दिन कक्षाओं का संचालन, शैक्षिक गुणवत्ता, स्वच्छता, ड्रेस कोड समेत अन्य तमाम मानक सम्मलित रहेंगे।

शिक्षा की गुणवत्ता पर मंथन
शिक्षा की गुणवत्ता पर मंत्री ने कहा कि इसे लेकर अक्टूबर-नवंबर में प्रदेशभर में सेमीनार आयोजित किए जाएंगे। हर तीन माह में प्राचार्यों की बैठक होगी, इसके अलावा इसी माह रूसा की भी बैठक है, जिनमें प्राप्त सुझावों पर सरकार काम करेगी।

महाविद्यालयों को जल्द मिलेंगे शिक्षक
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की कमी भी जल्द दूर होगी। महाविद्यालयों को बहुत ही कम वक्त में असिस्टेंट प्रोफेसर मिल जाएंगे। इसके लिए 29 अक्टूबर को लिखित परीक्षा है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी होती है तहसील स्तर पर क्वालिफाइड युवाओं की अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं ली जाएंगी। वहीं, अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी सरकार जल्द दूर करेगी।

स्व. इंद्र कुमार की अंतिम फिल्म का म्यूजिक लांच

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दिवंगत अभिनेता इंद्र कुमार की अंतिम फिल्म के तौर पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘क्रीना’ का म्यूजिक लांच मुंबई में एक समारोह मे किया गया। अरबाज खान और जरीन खान इस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर फिल्म की पूरी टीम मौजूद थी।

समारोह में दो मिनट का मौन रखकर इंद्र कुमार को श्रद्धांजलि दी गई। कुछ ही समय पहले दिल का दौरा पड़ने से अभिनेता इंद्र कुमार का निधन हो गया था। उनकी इस अंतिम फिल्म का निर्माण हरविंद सिंह चौहान और अर्चना चौहान ने किया है। श्यामल के मिश्रा इस फिल्म के निर्देशक हैं। दिलीप सेन ने इसमें संगीत दिया है।

फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में दीपशिखा नागपाल और शाहबाज खान, सुधा चंद्रन, ट्यूनिशा शर्मा, सुदेश बैरी के साथ पर्थ सिंह चौहान हैं। इस फिल्म की रिलीज डेट अभी तय नहीं है। माना जा रहा है कि दिसंबर में इसे रिलीज किया जाएगा।

हेमा मालिनी के गोदाम में चोरी की वारदात

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अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमा मालिनी के गोदाम में चोरी का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के अंधेरी में स्थित हेमा मालिनी के गोदाम से काफी कीमती समान चोरी हो गया, जिसकी कीमत 90,000 के लगभग बताई गई है।

जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया है और पुलिस ने इसकी जांच शुरु कर दी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को वहां काम करने वाले एक नौकर पर शक है, जो चोरी की वारदात के बाद से गायब बताया जा रहा है। हेमा मालिनी इन दिनों देश में नहीं हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, वे मास्को में हो रहे भारतीय फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने के लिए गई हैं। चोरी की घटना हेमा मालिनी के मैनेजर को पता चली और मैनेजर ने ही पुलिस में मामला दर्ज कराया।

कहा जाता है कि इस गोदाम में हेमा मालिनी द्वारा शोज में इस्तेमाल होने वाले ड्रेसेज और ज्वैलरी का काफी सामान रखा हुआ था, जिसे चोरी किया गया। हेमा मालिनी रविवार को मुंबई लौट रही है।

कंगना पर रितिक ने तोड़ी चुप्पी

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कंगना के साथ चल रहे विवाद पर रितिक रोशन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में रितिक रोशन ने इस केस को लेकर अपना पक्ष सामने रखा। कल ही इस मामले को लेकर रितिक के पिता राकेश रोशन की पहली प्रतिक्रिया आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि, हमारा परिवार कभी स्तर गिराकर बातचीत नहीं करेगा।”

आज रितिक रोशन ने जारी अपने बयान में खुद को इस मामले में बेकसूर बताते हुए दो बड़ी बातें कहीं। उनका कहना है कि वे कंगना से कभी निजी तौर पर नहीं मिले। उनकी मुलाकातें फिल्मों के सेट पर या समारोह में फिल्मों को लेकर हुई। दोनों ने ‘काइट’ और ‘कृष 3’ में साथ काम किया था, कंगना ने अपने दावों में रितिक के साथ 2014 में पेरिस में हुई मुलाकात का उल्लेख किया है। रितिक का दावा है कि 2014 में वे देश से बाहर कहीं नहीं गए। इस बात की जांच उनके पासपोर्ट से हो सकती है। कंगना पर 1400 मेल भेजने को लेकर रितिक रोशन के वकील मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम शाखा में नई शिकायत दर्ज करा चुके हैं और इसके लिए रितिक ने अपना लैपटाप और मोबाइल भी साइब्रर क्राइम में दर्ज कराया है।

रितिक रोशन ने अपने बयान में कहा है कि, “उनकी चुप्पी को गलत तरीके से लिया गया और इसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ा। मैं खुद को बचाने के लिए कोई सफाई नहीं दे रहा हूं। जांच में सब सामने आ जाएगा। इस मामले में वे पिछले चार सालों से प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं, झगड़ना मेरे स्वाभाव में नहीं है। मेरा तलाक भी हुआ, लेकिन वहां भी झगड़े जैसी कोई बात नहीं हुई।” वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि इस मामले की जांच जल्दी हो और सब कुछ साफ हो जाए।

उधर कंगना की बहन रंगोली द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से रितिक रोशन पर हमले जारी रहे। 2014 में रितिक की ब्रेन सर्जरी का जिक्र करते हुए रंगोली ने उनको पागल तक कह डाला। इससे पहले वे अंकल कहकर रितिक की मजाक उड़ा चुकी हैं। रंगोली ने रितिक के तलाक को भी मुद्दा बनाया और कहा कि रितिक के किसी दोस्त के साथ ही उनकी पत्नी के संबंधो की बात मीडिया में थी। याद रहे कि कंगना से जुड़े मामले में रितिक से तलाक ले चुकी सुजैन खान ने अपने पूर्व पति का बचाव करते हुए कंगना के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

पंजाब से उत्तराखंड को मिलेगी 802 मिलियन यूनिट बिजली

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देहरादून। अक्टूबर से मार्च तक उत्तराखंड को पंजाब से रिटर्न बैंकिंग के तहत 802 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। वर्तमान में सूबे की मांग राज्य की परियोजनाओं से उत्पादित और अन्य स्रोतों से प्राप्त बिजली से पूरी हो जा रही है। लिहाजा फिलहाल बैंकिंग के माध्यम से बिजली नहीं ली गई।

दरअसल, सूबे की जल विद्युत परियोजनाओं से मांग का एक तिहाई से भी कम बिजली उत्पादन होता है। केंद्रीय पूल, टेंडर, बाजार और अन्य स्रोतों से जरूरतभर की बिजली जुटानी पड़ती है। सर्दियों में नदियों का जलस्तर कम होने से बिजली उत्पादन गिरता है। लिहाजा बिजली की कमी को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कार्पाेरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) बैंकिंग करता रहा है। पिछले चार साल से सर्दियों में हरियाणा से बिजली ली जाती रही और फिर गर्मी में पांच फीसद अधिक लौटाई गई। लेकिन, पिछले एक साल में तीन गैस आधारित परियोजनाओं से लंबी अवधि का करार हुआ। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने बिजली की उपलब्धता की गणना की और उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को निर्देश दिए कि बैकिंग के माध्यम से गर्मियों में पहले बिजली दी जाए और फिर सर्दियों में ली जाए। पंजाब के साथ हुए करार में तय हुआ कि रिटर्न बैंकिंग में 11 फीसद अधिक बिजली दी जाएगी। अप्रैल से सितम्बर तक बिजली पंजाब को दी गई और अब अक्टूबर से मार्च तक वापस ली जाएगी। यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एवं प्रवक्ता एके सिंह ने बताया कि बिजली की मांग और उपलब्धता का अनुमानित शेड्यूल पहले ही बन जाता है। जिस दिन बिजली की कमी की आशंका होगी, बैंकिंग से बिजली ली जाएगी।
ट्रांसमिशन लाइनें ओवर लोड
ट्रांसमिशन लाइनों के ओवरलोड होने के कारण जितनी बिजली पंजाब को देने के लिए प्रस्तावित थी, पंजाब उससे कम ही ले सका। ऐसी स्थिति में यूपीसीएल ने शेष बिजली को ग्रिड के माध्यम से बाजार में बेचा।
एडवांस बैंकिंग की स्थिति
अप्रैल और मई, 43.77
जून, 96.17
जुलाई, 270.66
अगस्त, 209.39
सितंबर, 111.60
कुल, 731.55
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रिटर्न बैंकिंग का शेड्यूल
अक्टूबर, 74.40
नवंबर, 54.00
दिसंबर, 148.80
जनवरी, 241.80
फरवरी, 134.40
मार्च, 148.80
कुल, 802.20
(नोट : सभी आंकड़ मिलियन यूनिट में)

अब पलायन रोकने के लिए गांव की अनोखी पहल

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पिथौरागढ़, राज्य बनने और पलायन रोकने के तमाम सरकारी प्रयास विफल हो चुके हैं। पहाड़ से पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिथौरागढ़ जिले से प्रतिमाह साढ़े तीन परिवार की दर से गांवों से पलायन हो रहा है। सरकारी प्रयास और नेताओं के वादे झूठ साबित हो चुके हैं। पलायन को लेकर अब खुद ग्रामीण भी परेशान हो चुके हैं। चीन सीमा से लगे मुनस्यारी तहसील के चौना गांव की महिलाएं अब गांव से पलायन रोकने को कमर कस चुकी हैं। महिलाएं इसके लिए गांव के परिवारों को शपथ दिला रही हैं।

महिलाओं का कहना है कि, “पलायन से गांव के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है, प्रकृति ने गांव को बहुत कुछ दिया है, ग्रामीणों ने इसी खेती-बाड़ी से बच्चों को पढ़ा-लिखा कर आगे बढ़ाया है। आज गांव सड़क और बिजली से जुड़ गया है। ऐसे में अब पलायन होना गांव के लिए आसन्न संकट है।”

यह निर्णय महिलाओं ने गांव में आयोजित सत्यनारायण की कथा में लिया। कथा श्रवण के बाद महिलाओं ने मौजूद लोगों से गांव छोड़ कर अन्यत्र नहीं जाने की शपथ दिलाई। चौना गांव तहसील मुनस्यारी मुख्यालय से लगभग नौ किमी की दूर है। गोरी नदी किनारे भदेली से लेकर लगभग छह हजार फीट की ऊंचाई तक स्थित चौना गांव में एक दशक पूर्व बिजली तो लगभग सवा साल पूर्व सड़क भी पहुंच गई है। गांव में रोजगार के नाम पर अभी केवल कृषि कार्य ही है। रोजगार की तलाश में या फिर नौकरी पाने वाले लोग गांव से पलायन कर रहे हैं।

चौना गांव में विगत एक दशक के बीच चालीस परिवार गांव छोड़ चुके हैं। एक दशक पूर्व तक गांव में 120 परिवार रहते थे। अब परिवारों की संख्या 80 हो चुकी है। आर्थिक रूप से थोड़ा सक्षम होने वाले ग्रामीण भी मुनस्यारी, पिथौरागढ़ या फिर हल्द्वानी में बस रहे हैं। ऐसे परिवारों को पलायन से रोकने के लिए गांव की महिलाएं प्रयास कर रही हैं। गांव को बचाने के लिए आगे आई देवकी देवी और हरुली सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि, “गांव से ही उनकी पहचान है जिस तरह लोग गांव छोड़ कर जा रहे हैं उसका अंतर नजर आने लगा है। गांव में होने वाले तीज-त्योहारों में संख्या घट रही है। पूर्वजों की थाती को इस तरह त्यागना उचित नहीं है।”

इसे ध्यान में रखते हुए महिलाओं को ही इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। गांव की अधिकांश महिलाएं पलायन नहीं करने की शपथ ले रही हैं।आज के युग की चकाचौंध से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले युवा भी महिलाओं की इस पहल पर साथ देने लगे हैं। गांव के युवा पुष्कर चिराल, नवीन ज्येष्ठा, धरम सिंह चिराल, भगवत फस्र्वाण और प्रेम सिंह का कहना है कि बाहर जाकर छोटी-मोटी नौकरी के बजाय गांव में ही व्यावसायिक फसलों और फलों का उत्पादन कर सुख से रह सकते हैं। गांव से पलायन रोकने के लिए वह साथ देंगे।

डिजिटल गांवों से आएगी विकास की बयार

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विकासनगर। ग्रामीण क्षेत्रों को भारत की मुख्य धारा में शामिल कर गांवों तक विकास की बयार ले जाने के लिए तहसील क्षेत्र की शाहपुर-कल्याणपुर पंचायत में चल रहे प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल अभियान के तहत संचालित प्रशिक्षण शिविर के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

समापन के अवसर पर मौजूद कॉमन सर्विस सेंटर के जिला समन्वयक प्रियांक रोहिला ने कहा कि ग्रामीणों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाना जरूरी है जिससे कि गांवों से आने वाली विकास की बयार राष्ट्र के विकास में सहायक हो सके। कहा कि राष्ट्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रत्येक गांव को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जोड़ना जरूरी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के चलते प्रतस्पर्धा बढ़ी है। इस दौर में वही राष्ट्र विकास की गति को पकड़ सकता है, जो तकनीकी रूप से सशक्त हो।
उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक को तकनीकी ज्ञान होना जरूरी है, इसके लिए ग्रामीणों तक तकनीकी ज्ञान का पहुंचना जरूरी है।गांवों के डिजिटल होने से ही विकास की बयार आएगी जिससे राष्ट्र का संपूर्ण विकास होगा। सेंटर के संचालक सुनील कुमार ने ग्रामीणों को डिजिटल इंडिया की जानकारी देते हुए बताया कि इस मुहिम की सफलता युवाओं पर निर्भर करती है, यदि प्रत्येक गांव का प्रत्येक युवा तकनीकी शिक्षा लेगा तो गांव, समाज व राष्ट्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। कहा कि वैश्विक ग्राम के साथ ही डिजीटल ग्राम की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए ग्रामीण युवा ही सशक्त माध्यम है। प्रशिक्षण के तहत 14 वर्ष से 60 वर्ष तक के महिला पुरुषों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान ग्राम प्रधान ललिता देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य सावित्री सैनी, सतीश कुमार, राजकुमार, जवाहर सिंह, रमेश कुमार सैनी, अंकित तोमर आदि मौजूद रहे।