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तो खुला कांग्रेस के नेता के कार्यालय में चोरी का राज़

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15 तारीक को प्रातः कांग्रेसी नेता सूर्यकान्त धस्माना के ई.सी.रोड़ स्थित कार्यालय में घुसकर तीन अज्ञात बदमाशों ने तमंचे के बल पर उनके दो नौकरों धर्मेन्द्र प्रसाद व उसके भाई को बाँधकर सूर्याकान्त धस्माना के दराज से बीस हजार रुपये तथा उनके नौकर के जेवरात लूटकर ले गये। दिन दहाड़े शहर के बीचों-बीच घटी इस घटना से हड़कम्प मच गया, इस पर एसएसपी के निर्देशन में एस.पी. सिटी व क्षेत्राधिकारी डालनवाला के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक डालनवाला के नेतृव्व में टीमों का गठन किया गया।

घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान आस-पास के कैमरे व लोगोM से की गई गहन पूछताछ से एक सफेद सैन्ट्रो से बदमाशों का भागना पाया गया। जिसके मालिक सूरज रावत, निवासी डाकरा कैन्ट, देहरादून का होना पाया गया। जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होने बताया कि उपोक्त वाहन OLX  के माध्यम से सुरेन्द्र नामक व्यक्ति को बेचा जा चुका है । जब उनसे सुरेन्द्र नामक व्यक्ति के घर की जानकारी की गई तो उनके द्वारा दिये गये पते पर सुरेन्द्र नामक व्यक्ति का रहना नही पाया गया ।

इसके उपरान्त पुलिस द्वारा मामूर मखबिर व सर्विलाइन्स के माध्यम से सुरेन्द्र को अमरोहा में रहना विदित हुआ वहाँ जाकर पुलिस टीम ने जानकारी की तो पता चला कि आजकल सुरेन्द्र कुछ बदमाशों के साथ रहकर संदिग्ध गतिविधियों को अनजाम दे रहा है तथा घटना में सेन्ट्रो कार का प्रयोग करता है । कल शाम मुखबिर खास की सूचना पर सुरेन्द्र उपरोक्त को कतीनपानी नेपाली फार्म के पास गिरफ्तार किया गया।

अभियुक्त के कब्जे से घटना में प्रयुक्त सेन्ट्रो कार व लूटे गये रुपयों में से अभियुक्त के हिस्से के 5000 रु0 बरामद हुये । पूछताछ में अभियुक्त ने बताया कि वह पहले सूर्यकान्त धस्मानाके यहाँ प्लम्बर का काम करता था।  जकल आर्थिक रुप से परेशान चल रहा था तो आरिफ उर्फ मस्तकीम निवासी बिजनौर, फईम तथा मिनुत  के साथ मिलकर धस्माना जी के यहाँ लूट का प्लान बनाया । घटना के दिन तीनों के साथ मिलकर धस्माना के यहाँ लूट का प्लान बनाया । घटना के दिन लूट में 20,000 रुपये, एक चैन, दो  अंगुठी, एक जोड़ी टाँप्स, एक मांगटीका व चांदी का सिक्का मिला था, जिसमें  हिस्से में आठ हजार रुपये व एक चांदी का सिक्का आया था।

दीपावली पर्व पर इस वर्ष भी अग्निशमन दल के वाहन भागते रहे

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दीपावली पर्व पर इस वर्ष भी अग्निशमन दल के वाहन भागते रहे। दीपावली की रात शहर में 14 स्थानों पर अग्निकाण्ड की घटना हुई। अधिकतर आग लापरवाही से आतिशबाजी के छोडने पर लगी। समय 11:23 बजे अखाडा चौक के पास एक फर्नीचर के गोदाम में आग लगी। जिस पर तुरन्त अग्निशमन के वाहन घटनास्थल पर दौड पडे। घटनास्थल पर ऊपरी मंजिल में जाने का एक ही रास्ता था जो कि बन्द रखा गया था। पहली मंजिल पर एक बच्चा फंस गया था, जिसको कि मकान के छत के रास्ते निकाला गया। संकरी गलियां होने के कारण तथा सड़क पर बेतरतीब वाहन खडे होने के कारण अग्निशमन के बडे वाहनों को घटनास्थल पर पहुंचने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा । इसके बाद अग्निशमन के 6 वाहनों द्वारा अग्निशमन कार्य किया गया। आवासीय भवन होने के कारण उसके गैस सिलेण्डरों को अग्निशमन कर्मियों ने अपनी जान जोखिम डालकर निकाला । आग को निकटतम भवनों में पहुंचने से रोक दिया गया । इसके बाद अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में 4 घण्टे की अथक परिश्रम के बाद आग को बुझाया गया । प्रथमदृष्टया आग का कारण जलते राकेट का गोदाम गिरना प्रतीत होता है । जनता द्वारा भी अग्निशमन विभाग के त्वरित कार्यवाही एवं जोखिम के दृष्टिगत प्रशंसा की गई।

दीपावली की रात्रि रेलवे स्टेशन के सामने पुराने बस अडडे के सामने लकडियों के ढेर आग लग गई । तिलक रोड में घर आग लगने पर घण्टाघर पर तैनात फायर यूनिट को रवाना किया गया, जिसने आग को नियंत्रित किया। प्रगति विहार नेहरू कालोनी तथा पण्डितवाडी में कारों में आग लग गई जिसको अग्शिमन यूनिटों द्वारा बुझाया गया । इसके अतिरिक्त आर0जी0एम0 प्लाजा के पास, रायपुर थानों के एक घर में , चक्खुवाला में घर मे एवं तिलक रोड पर एक घर ने आग लगने पर अग्निशमन द्वारा बुझाया गया। आतिशबाजी जंगलो में गिरने से जंगलों में भी आग लग गयी। मैगी प्वांइट के पास , बलबीर रोड , बसन्त विहार एवं खुडबुडा मोहल्ला में भी आग लगने की सूचना पर दमकल वाहन दौडते रहे।

अग्निशमन अधिकारी शिवप्रसाद ममगाई द्वारा बताया कि यद्यपि अग्निशमन यूनिटें हर समय तैयारी की दशा में रहती है परन्तु इस वर्ष विशेष सतर्कता रखी गई थी। यूनिटें रात भर नगर के अलग अलग स्थानों पर तैनात रही इसलिए किसी घटना पर समय रहते नियंत्रण कर लिया गया । उन्होंने नागरिक सुरक्षा कर्मियों को अग्निशमन दल के साथ कन्धे से कन्धे मिलाकर कार्य करने पर धन्यवाद ज्ञापित किया गया । अग्निशमन कर्मियों के अनुसार धनतेरस से ही अग्निशमन यूनिटें शहर के विभिन्न स्थानों पर तैनात हो गई थी, जो दीपावली की रात्रि तक लगातार नियुक्त रही । उपनियंत्रक नागरिक सुरक्षा द्वारा भी अग्निशमन के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा गया कि अग्निशमन एवं आपात सेवा सदैव जीव रक्षा कार्यों में तत्पर रहती है, जिसमें कुछ वर्षों से काफी आधुनिकीकरण देखने मिला है, परन्तु विभाग को और अधिक आधुनिक उपकरणों को बनाने की आवश्यकता है। अग्निशमन विभाग के मनीष पन्त द्वारा बताया की वर्तमान में फायर स्टेशनों की कमी को देखते जनपद देहरादून के डोईवाला एवं त्यूनी में कमशः फायर स्टेशन एवं फायर यूनिट खोले जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है । जिसमें मा0 मुख्यमंत्री जी द्वारा सहमति भी व्यक्त की गई है।

उपनिदेशक तकनीकी श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा बताया गया कि, “वर्तमान में उत्तराखण्ड द्वारा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म कय कर लिया गया है, जिसको इस वर्ष अंत तक अग्निशमन विभाग को मिलने सम्भावना है। इससे 32 मीटर ऊँची इमारतों में अग्निशमन एवं जीव रक्षा कार्य करने में सुविधा रहेगी । इसके अतिरिक्त अन्य आधुनिक उपकरणों हेतु भी प्रस्ताव शासन के माध्यम से विश्व बैंक को उपलब्ध कराया गया है।”

शीतकाल के लिये बंद हुए गंगोत्री धाम के कपाट

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गंगोत्री धाम के कपाट शुक्रवार को बंद कर दिए गए। इसके बाद कल मुखवा में मां गंगा की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। अगले छह महीने तक वहीं मां गंगा की पूजा होगी। वहीं, शनिवार को केदारनाथ धाम और यमुनोत्री के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे।

शुक्रवार सुबह गंगोत्री धाम में साढ़े आठ बजे उदय बेला पर पूजा अर्चना के बाद गंगा जी की मूर्ति से मुकुट उतारा गया। इस बीच श्रद्धालुओं ने मां गंगा की भोग मूर्ति के दर्शन किए। दोपहर करीब 11.40 बजे धनु लग्न अभीजीत मुहूर्त की शुभ बेला पर कपाट बंद  किए गए।

इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने विशेष पूजा व गंगा लहरी का पाठ किया। डोली में सवार होकर गंगा की भोगमूर्ति जैसे ही मंदिर परिसर से बाहर निकली तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।

धुन और परंपरागत ढोल दमाऊं की थाप के साथ तीर्थ पुरोहित गंगा की डोली को लेकर शीतकालीलन प्रवास मुखवा गांव के लिए पैदल रवाना हुए। रात्रि विश्राम मुखवा के निकट दुर्गा मंदिर में होगा। भैया दूज के दिन 21 अक्टूबर को मुखवा स्थित गंगा मंदिर में गंगा की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। शीतकाल में यहीं पर मां गंगा की पूजा अर्चना होगी।

वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट भी भैया दूज के दिन 21 अक्टूबर को दोपहर एक बजकर 25 मिनट पर बंद होंगे। यमुना जी की उत्सव मूर्ति शीतकालीन पड़ाव खरसाली गांव के लिए रवाना होगी। करीब पांच किलोमीटर का सफर तय करने के बाद इसे इसी दिन यमुनोत्री मंदिर में स्थापित कर दिया जाएगा।

अब पहाड़ का पानी और जवानी दोनों यहां के काम आयेगी: नरेंद्र मोदी

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शुक्रवार को गोवर्धन पूजा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा केदार नाथ के दर्शन करने पहुंचे। सुबह देहरादून से केदारनाथ पहुंचे प्रधानमंत्री ने केदारपुरी में की योजनाओं की नींव रखी। इस मौके पर केदारनाथ पहुंचे लोगों को पीएम ने अपने चित परिचित अंदाज़ में संबेधित किया। मोदी ने कहा कि “मुझे ख़ुशी है कि इतने कम समय में साढ़े 4 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु बाबा के चरणों में माथा टेकने आये। मुझे पूरा विश्वास है कि अगले वर्ष 10 लाख यात्री केदारनाथ आएंगे। पुननिर्माण में देश धन की कमी नहीं रखेगा”

वहीं इस मौके पर पीएम ने कुछ राजनीतिक रंग बिखेरते हुए कहा कि “आपदा के दौरान मैं खुद को रोक नहीं पाया और उस समय की सरकार से प्रार्थना की थी कि गुजरात सरकार को केदारनाथ के पुनर्निर्माण का कार्य दे दें”। गौरतलब है कि 2013 में आपदा के समय गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने आपदा की ज़िम्मेदारी उठाने की पेशकश की थी लेकिन तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने ये पेशकश ठुकरा दी थी।

वहीं उत्तराखंड के लिये बड़ी समस्या पलायन को भी पीएम ने छुआ। पीएम ने कहा कि “हमारे यहां पहाड़ों की एक पुरानी कहावत है कि पहाड़ो का पानी और पहाड़ो की जवानी कभी पहाड़ों के काम नहीं आती, हमने ये कहावत बदलने का बीड़ा उठाया है। हमारी सरकार उस दिशा में काम कर रही है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी दोनों पहाड़ के काम आये”।

इस मौके पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंक्त्रीगण अदिकारियों समेत बड़ी संख्या में आम लोग पीएम को सुनने के लिये पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का ये दूसरा केदारनाथ दौरा रहा। अपने लोकप्रिय अंदाज़ में मोदी ने लोगों का तो काफी उत्साह बढ़ाया अब उत्तराखंड के लोगों को यही उम्मीद होगी की केंद्र और राज्य दोनो सरकारें मिलकर इन वादों को अमली जामा पहनाये।

 

नरेंद्र मोदी पहुंचे जौलीग्रांट एयरपोर्ट भव्य स्वागत में उतरे उत्तराखंड के नेता

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ऋषिकेश, उत्तराखंड में बीजेपी सरकार बनने के बाद आज तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवभूमि पधारे हैं। पीएम मोदी वायुसेना के विशेष विमान से जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। उनके स्वागत के लिये वहां मौजूद राज्यपाल केके पॉल, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुके देकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

राज्यपाल, मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष के अलावा 22 मंत्री व भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। यहां से पीएम सेना के एमआई 17 हेलीकॉप्टर से केदारनाथ के लिए रवाना हुए। वहां बाबा केदार के दर्शन के बाद केदारपुरी पुनर्निर्माण की आधारशिला रखेंगे। पीएम के साथ सूबे के मुखिया भी केदारनाथ के लिए रवाना हुए हैं।

गोवर्धन पूजा के दिन लगता है अन्नकूट का प्रसाद

गोवर्धन पूजा अथवा अन्नकूट हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। दीपावली के दूसरे दिन सायंकाल गोवर्धन पूजा का विशेष आयोजन होता है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है।
भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन इन्द्र का मानमर्दन कर गिरिराज पूजन किया था। इस दिन मन्दिरों में अन्नकूट किया जाता है। अन्नकूट एक प्रकार से सामूहिक भोज का आयोजन है, जिसमें पूरा परिवार एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करता है। इस दिन चावल, बाजरा, कढ़ी, साबुत मूंग, सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में भी अन्नकूट बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। सायंकाल गोबर के गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है।
गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती हैं जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख- समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गो माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में हल जोतकर अनाज उगाता है। इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की।

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वेदों में इस दिन वरुण, इन्द्र, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है। इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा होती है। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाया जाता था।
महाराष्ट्र में यह दिन बालि प्रतिपदा या बालि पड़वा के रूप में मनाया जाता है। वामन जो कि भगवान विष्णु के एक अवतार है, उनकी राजा बालि पर विजय और बाद में बालि को पाताल लोक भेजने के कारण इस दिन उनका पुण्य स्मरण किया जाता है। यह माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बालि इस दिन पाताल लोक से पृथ्वी लोक आता है। अधिकतर गोवर्धन पूजा का दिन गुजराती नव वर्ष के दिन के साथ मिल जाता है जो कि कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के दौरान मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा उत्सव गुजराती नव वर्ष के दिन के एक दिन पहले मनाया जा सकता है और यह प्रतिपदा तिथि के प्रारम्भ होने के समय पर निर्भर करता है।
इस दिन प्रात: गाय के गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में गोवर्धन बनाया जाता है। अनेक स्थानों पर इसके मनुष्याकार बनाकर पुष्पों, लताओं आदि से सजाया जाता है। इनकी नाभि के स्थान पर एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रख दिया जाता है। फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट देते हैं। शाम को गोवर्धन की पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, फूल, खील, बताशे आदि का प्रयोग किया जाता है। पूजा के बाद गोवर्धनजी की जय बोलते हुए उनकी सात परिक्रमाएं लगाई जाती हैं। परिक्रमा के समय एक व्यक्ति हाथ में जल का लोटा व अन्य जौ लेकर चलते हैं। जल के लोटे वाला व्यक्ति पानी की धारा गिराता हुआ तथा अन्य जौ बोते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।
अन्नकूट में चंद्र-दर्शन अशुभ माना जाता है। यदि प्रतिपदा में द्वितीया हो तो अन्नकूट अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन सन्ध्या के समय दैत्यराज बलि का पूजन भी किया जाता है। गोवर्धन गिरि भगवान के रूप में माने जाते हैं और इस दिन उनकी पूजा अपने घर में करने से धन, धान्य, संतान और गोरस की वृद्धि होती है। आज का दिन तीन उत्सवों का संगम होता है। इस दिन दस्तकार और कल-कारखानों में कार्य करने वाले कारीगर भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी करते हैं। इस दिन सभी कल-कारखाने तो पूर्णत: बंद रहते ही हैं, घर पर कुटीर उद्योग चलाने वाले कारीगर भी काम नहीं करते। भगवान विश्वकर्मा और मशीनों एवं उपकरणों का दोपहर के समय पूजन किया जाता है।

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गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची। एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने मईया यशोदा से प्रश्न किया कि आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं । कृष्ण की बातें सुनकर यशोदा मैया बोली हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? यशोदा ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।
श्री कृष्ण की माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछड़े समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र के मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।
इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता। अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं । ब्रह्मा जी के मुख से यह सुनकर इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी, इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने श्री कृष्ण की पूजा कर उन्हें भोग लगाया।
सातवें दिन श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को नीचे रखा और ब्रजवासियों से कहा- अब तुम प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व मनाया करो। तभी से यह पर्व अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।

बीसीसीआई-यूपीसीए ही रणजी मुकाबले पर असमंजस में

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Dehradun
Stadium

भले ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र के बीच होने वाले रणजी मुकाबले को रायपुर स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में कराने के लिए तैयारियों में जुटने के दावे कर रही हो, लेकिन स्थिति ये है कि अब तक इस मुकाबले को खुद बीसीसीआई व यूपीसीए (उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन) के बीच ही असमंजस बना हुआ है। इतना ही नहीं, उत्तराखंड के पास भी अब तक बीसीसीआई की ओर से कोई लिखित पत्र नहीं मिला है।

अब बात बीसीसीआई की करें तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर यूपी व महाराष्ट्र के बीच 24 अक्टूबर से शुरू होने वाला मुकाबला लखनऊ में होना दिखाया जा रहा है। जबकि, उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की वेबसाइट पर मैदान दून का राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम है। जबकि, सुनने में बात आ रही है कि अंदरखाने में यूपीसीए इस मुकाबले को मेरठ में आयोजित करने की तैयारी कर रही है। अब सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड को अब तक बीसीसीआई ने रणजी मुकाबला आयोजित कराने के लिए कहा ही नहीं।

सिर्फ उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने कहा था कि वह इस मैच का आयोजन दून में करेंगे। जबकि, नियम ये है कि यदि बीसीसीआई दून में मुकाबला कराती तो बाकायदा उनकी टीम यहां आकर पूरा निरीक्षण करती, साथ ही राज्य सरकार को मैच संपन्न कराने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कराने के लिए कहती। जबकि, ऐसा कुछ तो हुआ ही नहीं, राज्य सरकार के मुताबिक अगले पांच दिन के बाद यहां रणजी मुकाबला खेला जाना है।

उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव दिव्य नौटियाल का कहना है कि, “इस मुकाबले का आयोजन करने के लिए बीसीसीआई ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को कहा है, उत्तराखंड को नहीं। यूपी ने उत्तराखंड से कहा है कि वह इस मुकाबले को दून में कराएंगे। लेकिन, अभी ऐसा कुछ भी होने की उम्मीद नहीं है।”

पाकिस्तान में आमिर की फिल्म को लेकर उत्साह

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बहुत दिनों बाद पाकिस्तान के सिनेमाघरों में आमिर खान की फिल्म रिलीज होने जा रही है। इस बार दीवाली पर रिलीज होने वाली आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म सीक्रेट सुपर स्टार को पाकिस्तान में रिलीज करने की जोरशोर से तैयारियां चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार, लाहौर, कराची और इस्लामाबाद के 40 से ज्यादा मल्टीप्लेक्स थिएटरों में इस फिल्म को रिलीज किया जा रहा है।

इन मल्टीप्लेक्स के बाहर फिल्म के बड़े कटआउट लगाए गए हैं और फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्साह देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बात का इंतजार हो रहा है कि पाकिस्तान का सेंसर बोर्ड फिल्म को कब देखकर इसे रिलीज करने के बारे में कोई फैसला करेगा। उम्मीद है कि सोमवार तक फिल्म सेंसर बोर्ड से क्लीयर हो जाएगी।

फिल्म में आमिर खान हैं और ये एक मुस्लिम परिवार की कहानी है, इस वजह से इस फिल्म को लेकर वितरकों में ज्यादा उत्साह है। आमिर खान की पिछली फिल्म दंगल को पाकिस्तान में इसलिए रिलीज नहीं किया गया था, क्योंकि पाक के सेंसर बोर्ड ने जन गण मन.. वाले सीन को हटाने के लिए कहा था और आमिर खान ने ऐसा करने से मना कर दिया था। थिएटरों मे न रिलीज हो पाने के बाद पाकिस्तान के बाजार में दंगल की बीस लाख से ज्यादा पाइरेटेड कापियां बिकी थीं।

टाइगर जिंदा है का पहला पोस्टर जारी

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दीवाली के मौके पर सलमान खान की आने वाली फिल्म टाइगर जिंदा है का पहला पोस्टर आज सोशल मीडिया पर जारी किया गया। इस पोस्टर में सलमान खान अकेले नजर आ रहे हैं।

tiger zinda poster

सूत्रों के मुताबिक, फिल्म के अगले पोस्टर में सलमान के साथ कैटरीना कैफ भी होंगी। नवंबर के पहले सप्ताह में फिल्म का ट्रेलर लांच हो जाएगा। सलमान खान-कैटरीना कैफ की जोड़ी की इस फिल्म का निर्माण यशराज में हुआ है और निर्देशन अली अब्बास जाफर ने किया है।

ये फिल्म 22 दिसंबर को रिलीज होगी। फिल्म में सलमान-कैटरीना के साथ परेश रावल और अंगद बेदी भी हैं। ये फिल्म 2012 में यशराज के लिए कबीर खान द्वारा निर्देशित फिल्म एक था टाइगर की सिक्वल के तौर पर बनाई गई है।

सीएम ने हल्द्वानी शहर को दी 20 करोड़ की सौगात

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CM to interact directly with people

हल्द्वानी,  दिवाली के मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहर को 20.13 करोड़ रुपये की सौगात दी। इसके साथ ही रानीबाग चित्रशिला घाट पर ढाई करोड़ की लागत से बनने वाले विद्युत शवदाह गृह, सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के सामने सड़क चौड़ीकरण एवं पार्किंग, जेल रोड व पनचक्की चौराहे पर म्यूजिकल फव्वारे लगाने की भी घोषणा की।

नगर में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा, वह भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। केदारनाथ में जिस तरह एक साल में एक ही जगह तीन-तीन पुल बन गए, इस तरह के चौंकाने वाले मामले खुल रहे हैं। उनकी सरकार इस तरह के घोटाले पर कड़ी कार्रवाई करेगी।

2019 तक हर घर को बिजली और 2022 तक हर व्यक्ति को छत उपलब्ध कराने का भी वादा किया। एजुकेशन के क्षेत्र में सीपेड़ व निफ्ट जैसे संस्थानों को एक साल के भीतर खोलने की घोषणा की। इसमें विधायक बंशीधर भगत, नवीन दुम्का, संजीव आर्य, महेश नेगी, राम सिंह कैड़ा, प्रदेश महामंत्री गजराज बिष्ट, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट शामिल रहे।

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी 20 अक्टूबर को केदारनाथ पहुंचेंगे, वहां पर पांच योजनाओं का शिलान्यास करेंगे।