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14 सालों में नहीं बन पाई पैंग गांव के लिए सड़क

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गोपेश्वर, चमोली जनपद के विकास खंड जोशीमठ के ग्राम सभा रैणी पल्ली के पैंग गांव के ग्रामीण आज भी सड़क की बाट जोह रहे हैं। गांव के लिए बनने वाला पैदल पुल के लिए धन तो आया पर उसका आज तक पता नहीं की कहां खर्च हुआ। जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
रैणी पल्ली की पूर्व प्रधान व भाजपा महिला मोर्चा की जिला मंत्री नंदी राणा जो कि पैंग गांव की है। कहती है कि 2003 में जब वे रैणी की प्रधान थी तो तब से वे पैंग गांव के लिए सड़क की मांग करती आ रही है। लेकिन 14 वर्ष का लंबा समय गुजर गया है लेकिन अभी तक गांव के लिए सड़क बनने की दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई है। सड़क के अभाव में आज भी ग्रामीण 05 किमी पैदल चल कर गांव तक पहुंचे है।
यही नहीं ग्रामीणों की अधिकांश खेती बाड़ी मुरेंडा गांव में जो कि ऋषिगंगा के पल्ली पार है। यहां जाने के लिए ग्रामीणों को पहले चार किमी पैदल चल कर रैणी आना पड़ता है और फिर रैणी से 4 किमी पैदल खड़ी चढ़ाई चढ कर मुरेंडा जाना पड़ता है। उन्होंने इन दोनों गांवों को जोड़ने के लिए पैदल पुलिस की भी मांग की थी लेकिन अभी तक वह पुलिया भी नहीं बन पाई है। इस गांव में लगभग 250 से अधिक परिवार निवास करते हैं लेकिन इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अविलंब गांव के लिए सड़क का निर्माण किया जाए। 

गूगल स्टार का परपोता चलाता है टैक्सी

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पिथौरागढ़- परदादा गूगल पर छाए हैं और परपोता टैक्सी चला कर जीवन यापन कर रहा है। अपने परदादा को मिले सम्मान से उसकी खुशी का ठिकाना नहीं है, परंतु अपने परदादा के नाम पर खोले गए पर्वतारोहण संस्थान में वह केवल एक छोटी नौकरी की ही चाह रखता है। ताकि रोजी-रोटी चलती रहे।

महान सर्वेयर पं. नैन सिंह रावत के परिवार में उनका एकमात्र वंशज कवींद्र रावत है। जो नैन सिंह रावत का परपोता है। पिथौरागढ़ जिले के एक छोटे से कस्बे मदकोट में रहने वाले कवींद्र रावत इस समय टैक्सी चलाकर अपना जीवन-यापन करते हैं। शनिवार को अपने परदादा की जयंती पर गूगल पर मिले सम्मान से वह गदगद हैं। बोले, आज जिस स्थान पर उनका नया मकान है, वहीं पर पुराना मकान था। उनके परदादा उसी मकान में रहते थे। घर में उनकी फोटो है। उनके  कार्यों के बारे में सभी लोग जानते हैं।

कवींद्र बताते हैं कि उसके परदादा के नाम पर मुनस्यारी में पर्वतारोहण संस्थान खुला है। उस संस्थान में उन्होंने अपने परदादा का हवाला देते हुए छोटी-मोटी नौकरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन दो साल बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।  अब उन्हें आस बंधी है कि इस संस्थान में नौकरी मिल जाएगी तो दो वक्त की रोजी-रोटी का बंदोबस्त हो जाएगा।

34 साल बाद महासंयोग, छठ पूजा के पहले दिन सूर्य का रवियोग

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Hindu devotees offer prayers to the Sun god during the Hindu religious festival "Chhat Puja" in the northern Indian city of Chandigarh November 1, 2011. Hindu devotees worship the Sun god and fast all day for the betterment of their family and society during the festival. REUTERS/Ajay Verma (INDIA - Tags: RELIGION SOCIETY)

हरिद्वार,  हिन्दू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तक चलता है। बिहार से शुरू हुआ यह पर्व अब पूरे देश में खासकर उत्तर व पश्चिम भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को परिवार के सुख और समृद्धि के लिए मनाया जाता है।
इस बार छठ पूजा पर्व 24 अक्टूबर से आरम्भ हो रहा है। चार दिनों का छठ पर्व दिवाली के बाद आता है। इस बार का छठ पर्व कई मायनों में खास है क्योंकि 34 साल बाद एक महासंयोग बन रहा है। दरअसल इस बार की छठ पूजा के पहले दिन सूर्य का रवियोग बन रहा है, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाला यह पर्व चार दिन का छठ नहाय खाय के साथ शुरू होता है।
छठ पूजा कैसे शुरू हुई इसके बारे में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। प्रियव्रत जो पहले मनु माने जाते हैं, उनकी कोई संतान नहीं थी। प्रियव्रत ने कश्यप ऋषि से संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। महर्षि ने पुत्रेष्ठि यज्ञ करने को कहा। इससे उनकी पत्नी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन यह पुत्र मृत पैदा हुआ। पुनः व्रत रखने पर उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
वहीं, एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में कौरवों से अपना सारा राज-पाट हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था तब दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुईं थी। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव की पूजा की थी।
जोशी ने बताया कि इस बार चार दिनों तक चलने वाला यह छठ पर्व 24 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरू होगा। छठ पूजा का शुभ मुहूर्त सूर्यादय 06.41 बजे सुबह और सूर्यास्त में 06.05 बजे शाम। 25 अक्टूबर को खरना, 26 अक्टूबर को सांझ का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को सूर्य को सुबह का अर्ध्य के साथ यह त्योहार संपन्न होगा।

100 साल पूरे किये 3 कुमाऊं के गौरवपूर्ण इतिहास ने, आर्मी चीफ पहुंचे पिथौरागड़

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भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट में से एक और ब्रटिश भारतीय सेना की पहली कुमाऊंनी बैटेलियन 3 कुमांऊ राइफ्लस VS आज 100 साल पूरे कर लिये।इस रेजिमेंट की स्थापना अक्टूबर 23,1917 में अल्मोड़ा के करीब हुई थी। इस मौके पर रेजिंमेंट से जुड़े करीब 600 पूर्व सैनिक जिनमे अफसर और सैनिक सभी पिथौरागड़ में रेजिमेंट के साथ जश्न में शामिल हो रहे हैं।

इस मौके पर थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत पिथौरागड़ पहुंचे।जेनरल रावत ने कहा कि कुमाऊंनी जवान हर परिस्थिति में अपना मनोबल बनाए रखते हैं। हर परिस्थिति को अपने अनुकूल कर लेते हैं। तृतीय कुमाऊं रायफल्स ने इसे साबित किया है।
रविवार को तृतीय कुमाऊं रायफल्स के परेड मैदान में आयोजित समारोह में शिरकत करने पहुंचे थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने रेजीमेंट के 100 साल के इतिहास को गौरवशाली बताया। कुमाऊं रायफल्स के उल्लेखनीय कार्यों का हवाला देते जनरल रावत ने कहा कि अपनी स्थापना के एक साल के भीतर ही इस रेजीमेंट ने युद्ध में भाग लेकर वीरता का परिचय दिया। विभिन्न अभियानों में सफलता के झंडे गाड़ कर अपने पराक्रम को दिखाया। 58 आतंकवादियों को मार गिराया। रेजीमेंट ने कई बार वीर चक्र, शौर्य चक्र, चीफ ऑफ़ आर्मी सम्मान से सम्मानित होने का गौरव पाया है।

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अपने 100 साल के इतिहास में इस रेजिमेंट ने की तरह के इलाकों में और आजादी से पहले और उसके बाद की ऑपरेशनस में हिस्सा लिया है। इसके साथ साथ रेजिमेंट ने संयुक्त राष्ट्र में भी अपनी सेवाऐं दी हैं।

जानकार बताते हैं कि पहले विश्व युद्ध के समय सैनिकों की कमी महसूस हो रही थी। ये देखा गया कि भारी संख्या में कुमाऊंनी युवा गढ़वाल और अन्य रेजिमेंट में भर्ती हो रहे हैं लेकिन उनके मन में अपने खुद के झंडे तले लड़ने की चाह थी। लंबे समय और प्रयासों के बाद ये सपना हकीकत बन सका।

1857 में कुमाऊंनी लोगों ने कालू सिंह माहरा के नेतृत्व में ब्रिटिश साम्रज्य के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया था। इसका नतीजे ये रहा कि इसके बाद ब्रिटिश सरकरा ने इस इलाके से भर्ती करना ही बंद कर दिया। हांलाकि इसके बाद भी यहां के लोग नाम बदलकर गढ़वाल और अन्य रेजिमेंट में भर्ती लेते रहे।

इस बैटैलियन का नाम 4/39 गढ़वाल राइफ्ल रखा गया था लेकिन एक महीने के अंदर ही इसे 4/39 कुमाऊं राइफ्ल कहा जाने लगा और आगे चलकर 1/50 कुमाऊं राइफ्लस। ये रेजिमेंट शैरोन की लड़ाी का भी हिस्सा रही। ये लड़ाई सितंबर 19-25,1918 में पहले विश्व युद्ध में लड़ी गई थी और इसी लड़ाी में पहली बार कुमाऊंनी पराक्रम ने अपना झंडा गाड़ा था। 15 मार्च 1922 में इसका नाम बदलकर 1 कुमाऊं और बाद में 3 कुमाऊं रेजिमेंट कर दिया गया था।

 

सेना में भर्ती के लिए अब राज्य की बेटियों का प्रशिक्षण शुरू

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भारतीय सेना की कोर आॅफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी) के लिए बालिकाओं का भर्ती प्रशिक्षण शुरू हो गया है। यूथ फाउंडेशन द्वारा देहरादून और श्रीनगर (चौरास) में बालिकाओं को भर्ती पूर्व प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल की प्रेरणा से संचालित भर्ती प्रशिक्षण में पहली बार बालिकाओं को भी सेना के लिए तैयार किया जा रहा है। बालिकाओं को भर्ती पूर्व प्रशिक्षण के लिए यूथ फाउंडेशन द्वारा राज्य के अलग-अलग जनपदों में सेलेक्शन कैंप आयोजित किए। जिसमें कुल 2269 बालिकाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया। इनमें से अभी तक 607 बालिकाओं का चयन प्रशिक्षण के लिए किया गया है। देहरादून के भगवानदास इंजीनियरिंग काॅलेज बालावाला और श्रीनगर (चौरास) में करीब 300-300 के बैच में इन बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि “अब प्रदेश की बेटियां भी देश की रक्षा करेंगी। भर्ती कैंप में पहुंच रही इन बालिकाओं में देश के प्रति अलग ही जुनून है। प्रशिक्षण केन्द्र में बालिकाओं को भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी जाएगी। सीएमपी भर्ती प्रशिक्षण के साथ ही उन्हें पुलिस के लिए भी तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में बेटियों को बहुत बड़ा योगदान है। आज जरूरत बेटियों की ताकत का सही इस्तेमाल करने की है।” 

गौरतलब है कि इससे पहले भी कर्नल कोठियाल सेना में भर्ती के लिये पहाड़ों के युवाओं को लंबे समय से प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा बतौर निम के निदेशक कर्नल कोठियाल और उनकी टीम ने २०१३ आपदा के बाद केदारनाथ पुनर्निर्माण में काफी अहम भूमिका निभाई थी।

छठ पर्व की तैयारी शुरू — गंगा के तट पर बहेगी पूर्वांचली संस्कृति की बयार

ऋषीकेश में पुर्वान्चालियो के पर्व छठ की तैयारियां पूरी हो चुकी है। सूर्य की उपासना के इस पर्व को मानाने के लीये उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के पूर्वांचली बड़ी संख्या में ऋषीकेश के त्रिवेणी घाट पहुंचते हैं जहां छठ पूजा समिति एक बड़ा आयोजन करती है। इस आयोजन में पूजा की व्यवस्था और लोकगीतों  की अनुपम छठा देखने को मिलती है। इस बार के छठ पूजा महोत्सव की सारी तेयारिया पूरी हो गयी हैं। त्रिवेणी घाट को श्रधालुओं के स्वागत के लिये सजाया जा रहा है। ऋषीकेश उत्तराखंड का मिनी पूर्वांचल कहा जाता है। यहाँ गंगा के तट पर छठ की रौनक देखने लायक होती है।

ऋषीकेश के त्रिवेणी के संगम पर सूर्य की उपासना के पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पर्व के लिए देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग ऋषिकेश का रुख करते है जिसको देखते हुए गंगा घाटों की साफ़ सफाई का काम भी पूरा हो चूका है। साथ ही पूजा के लिए गंगा के तटों पर पंडाल बनाये जा रहे है ताकि पूजा के लिए आने वाले लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो। छठ समिति के अध्यक्ष रामकृपाल गौतम ने बताया की “इस साल समिति ने छठ पर्व को सफल बनाने के लिए विशेष इंतजाम किये हैं, पूजा अर्चना के साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है जिससे पूर्वांचली संस्कृति को यहाँ देखा जा सकेगा।”

उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में लोग माँ गंगा के आशीर्वाद के साथ सूर्य देव को अर्क देने गंगा घटपन की तरफ पहुंचते हैं। छठ में विशेष तरह के फल और सब्जियों से सूर्य देव को अर्क दिया जाता है जिनमे जड़ वाले फलो और सब्जियों का महत्व ही अलग है। बिहार से श्रद्धालु ऋषिकेश गंगा में पूजा के लिए आ रहे है। आयोजकों की माने तो इस साल पिछले सालों के मुकलबले ज्यादा श्रद्धालु ऋषिकेश के घाटों पर आएंगे जिनके रुकने से लेकर पूजा तक के सरे इंतजान कर दिए गए है। ऋषिकेश के त्रिवेणी संगम में छठ देखने लायक होती है दूर -दूर से श्रद्धालु छठ मैया को पूजा करने आते है। पूरा ऋषिकेश इन दिनों पूर्वांचल के रंग में रंग जाता। 

“गौ रक्षा” दस्ता बना कांग्रेस-बीजेपी के बीच सियासत का मुद्दा

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उत्तराखंड सरकार का राज्य में गौ हत्या औऱ तस्करी रोकने के लिये खास दस्ता बनाने का फैसला अब राजनीतिक रंग ले रहा है। कांग्रेस ने सरकार पर 2019 लोकसभा चुनावों के चलते राज्य में धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने गौ तस्करी और हत्या रोकने के लिये गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में दो अलग अलग पुलिस दस्ते बनाने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने ये फैसला हरिद्वार इलाके से लगातार आ रही शिकायतों को आधार बना कर किया। बकौल मुख्यमंत्री ये कदम पहले से मौजूद राज्य के गौ हत्या विरोधी कानून के तहत लिया गया है।

लेकिन ये बात कांग्रेस को नहीं भा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि, “ये बीजेपी का हिडेंन एजेंडा है। गौ माता की रक्षा के खिलाफ हम भी नही हैं। लेकिन इसके लिये खास तौर पर पुलिस के दस्ते बनाना केवल बीजेपी के सांप्रदायिक रूप को ही दिखाता है। “

वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस का राजनीतिक दिवालियापन करार दे रही है।  पार्टी के प्रवक्ता देवेंद्र भसीन के मुताबिक ” इस फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत होगा। साफ बात ये है कि गौ तस्करी के विषय में हरिद्वार संवेदनशील जगह है औऱ प्रशासनिक सुविधा के लिेये उघमसिंह नगर में सेंटर हबनाया जा रहा है। इस मामले को ध्रुवीकरण या 2019 के चुनावों से जोड़कर देखना गलत होगा”।

 बहरहाल इस मामले पर दोनो ही पार्टियां राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप तो कर रही हैं पर देखना ये होगा कि इस कवायद से गायों की रक्षा के लिये कितने कारगर कदम उट पाते हैं।

चार माह से आर्थो सर्जन की राह ताक रहा ट्रामा सेंटर

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जौनसार-बावर परगने सहित पछवादून क्षेत्र में दुर्घटना होने पर आकस्मिक सुविधा मुहैया कराने वाला सीएचसी परिसर का एकमात्र ट्रामा सेंटर की सुविधाएं पिछले चार माह से पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है।

सेंटर में तैनात एकमात्र आर्थो सर्जन का तबादला होने के बाद अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं की गयी है। हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से सेंटर की ओपीडी भी ठप हो गई है। अब हड्डी संबंधी रोगों के उपचार के लिए मरीजों को देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है। जौनसार में आए दिन बड़े सड़क हादसे होते रहते हैं, ऐसे में सीएचसी विकासनगर का ट्रामा सेंटर ही घायलों को उपचार दे पा रहा था।
दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील परगने जौनसार-बावर सहित पछवादून व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले को आकस्मिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सीएचसी विकासनगर में ट्रामा सेंटर का निर्माण किया गया था। दो वर्ष पूर्व सेंटर में एक आर्थोपेडिक सर्जन की नियुक्ति करने के बाद सेंटर मरीजों को उपचार की सुविधा देने लगा था।
सेंटर में मौजूद चिकित्सक का चार माह पूर्व तबादला कर दिया गया। जिससे सेंटर से मिलने वाली सुविधाएं ठप हो गई हैं। जबकि चिकित्सक की तैनाती के बाद से ही ओपीडी सुविधा भी मिलने लगी थी। इसके साथ ही सेंटर में कूल्हे के प्रत्यर्पण, स्पाइन कॉड के आप्रेशन सहित कई छोटे बड़े आप्रेशन की सुविधा भी मिलने लगी थी। खासकर वाहन दुर्घटनाओं में घायल लोगों को त्वरित उपचार मिलने से राहत मिलनी शुरु हुई थी। जौनसार-बावर क्षेत्र में हाल में ही हुई वाहन दुर्घटनाओं में ट्रामा सेंटर घायलों के लिए मददगार साबित भी हुआ।
पिछले दो वर्षों में ट्रामा सेंटर में हड्डी रोग से संबधित तीन सौ के करीब छोटे बड़े आप्रेशन सफलता पूर्वक हुए थे। लेकिन जून माह के अंत से चिकित्सक नहीं होने के चलते ट्रामा सेंटर की सुविधाएं ठप पड़ी हुई हैं। जिसके चलते हड्डी संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए स्थानीय मरीजों को देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है। उधर, सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. केके शर्मा ने कहा कि ट्रामा सेंटर में आर्थो सर्जन की नियुक्ति के लिए सीएमओ कार्यालय के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

शाहिद कपूर की नई फिल्म का टाइटल तय हुआ

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‘टायलेट एक प्रेमकथा’ के निर्देशक श्रीनारायण सिंह की शाहिद कपूर के साथ बनने जा रही फिल्म का टाइटल अब तय हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, फिल्म का टाइटल ‘बत्ती गुल,मीटर चालू’ रखा गया है। जब ये फिल्म शुरु हुई थी, तो इसका टाइटल रोशनी बताया गया था। अब कहा जा रहा है कि टाइटल फिल्म का कार्यवाहक टाइटल था। अब फिल्म का टाइटल अंतिम तौर पर तय हुआ है।

शाहिद कपूर की ये फिल्म उत्तर भारत, खास तौर पर यूपी में बिजली चोरी के मुद्दे पर आधारित है और शाहिद इस फिल्म में पहली बार एक वकील का रोल कर रहे हैं। अभी तक इस फिल्म में शाहिद के साथ होने वाली हीरोइन का नाम तय नहीं है, लेकिन इसके लिए कैटरीना कैफ से लेकर कृति सेनन और दीपिका के नामों की चर्चा है।

ये फिल्म इस साल के अंत तक लखनऊ में शुरु होगी। लखनऊ के अलावा बनारस और कानपुर में फिल्म की शूटिंग होगी। शाहिद कपूर इस वक्त संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का प्रमोशन कर रहे हैं। 1 दिसंबर को रिलीज होने जा रही पद्मावती में पद्मावती के पति और महाराजा रतन सिंह की भूमिका शाहिद कपूर ने निभाई है।

पांव में मोच के चलते श्रद्धा कपूर को मिला आराम

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श्रद्धा कपूर के पांव में मोच लगने के कारण डाक्टरों ने उनको दो सप्ताह तक घर पर पूरी तरह से आराम करने को कहा है। श्रद्धा ने सोशल मीडिया पर पांव में मोच आने और डाक्टरों द्वारा आराम करने की सूचना शेयर की गई, लेकिन उन्होंने इसकी वजह का उल्लेख नहीं किया।

सूत्रों के हवाले से पता चला है कि बैडमिंटन स्टार शायना नेहवाल की जिंदगी पर बन रही फिल्म के लिए हैदराबाद में बैडमिंटन की ट्रेनिंग के दौरान श्रद्धा के पैरों में मोच आ गई। मोच आने के बाद भी श्रद्धा ने ट्रेनिंग जारी रखी। इतना ही नहीं, इसी अवस्था में वे शायना के घर पर भी गईं और बाहुबली प्रबास के साथ अपनी फिल्म ‘साहो’ की शूटिंग में भी हिस्सा लिया।

दर्द ज्यादा बढ़ जाने के बाद वे मुंबई लौटीं और अब वे पूरी तरह से आराम कर रही हैं। श्रद्धा कपूर की हाल ही में फिल्म ‘हसीना’ रिलीज हुई थी, जिसे बाक्स आफिस पर अच्छा रेस्पांस नहीं मिला।