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रैगिंग के मामलों में छात्र के साथ नपेंगे संस्थान

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देहरादून,  बीडीएस में नए सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों की यदि सीनियर छात्र रैगिंग करते पाए गए तो न सिर्फ रैगिंग कमेटी उन्हें एक साल के लिए निष्कासित कर सकती है बल्कि डेंटल कॉलेज की मान्यता तक जा सकती है। भारतीय दंत परिषद ने रैगिंग को लेकर देशभर के डेंटल कॉलेजों को सख्त चेतावनी दी है। उनसे 31 अक्तूबर तक रैगिंग रोकने को उठाए गए कदम की जानकारी मांगी है। अगर कॉलेज इस अवधि में जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

परिषद ने सरकारी और प्राइवेट डेंटल कॉलेजों से कहा है कि जिनकी रिपोर्ट समय पर नहीं आएगी, उनके नाम सार्वजनिक करने के अलावा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के समक्ष भी रखे जाएंगे। ताकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। कॉलेजों को जारी निर्देश के अनुसार शैक्षिणक संस्थानों में रैगिंग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने और विद्यार्थियों को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सख्ती से नियम लागू किए जा रहे हैं।हर वर्ष प्रवेश के दौरान न सिर्फ छात्र बल्कि उनके माता-पिता को भी एक शपथ पत्र रैगिंग को लेकर देना पड़ता है। इसी सिलसिले में परिषद ने सभी कॉलेजों से रैगिंग रोकने के लिए किए गए उपायों की रिपोर्ट मांगी है।

भारतीय दंत परिषद की सचिव डॉ. सब्यसाची साहा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को हर वर्ष की रिपोर्ट डीसीआइ की ओर से सौंपी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है कि कॉलेज प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही वजह है कि अब इन्हें 31 अक्तूबर तक का वक्त दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट जमा नहीं होती है तो ऐसे कॉलेजों की मान्यता तक खत्म की जा सकती है। कॉलेज परिसर में रैगिंग के खिलाफ साइन बोर्ड व पोस्टर लगाने, हॉस्टल वाडर्न का नंबर साझा करने और कॉलेज के सदस्यों को विद्यार्थियों का काउंसलर बनाने जैसे कदम उठाने को भी कहा गया है। 

समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सहेजे द्वाराहाट और स्याल्दे बिखौती का मेला

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‘ओ भिना कसिकै जानूं द्वारहाटा’ जैसे कुमाऊं के लोकप्रिय लोक गीतों में वर्णित और कत्यूरी शासनकाल में राजधानी रहा द्वाराहाट अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-प्रदेश में प्रसिद्ध है। उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले में रानीखेत तहसील मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर दूर गेवाड़ घाटी में स्थित इस छोटे से कस्बे में 8वीं से 13वीं शदी के बीच निर्मित महामृत्युंजय, गूजरदेव, मनिया, शीतला देवी व रत्नदेव आदि अनेक मंदिरों के अवशेष आज भी अपनी स्थापत्य कला से प्रभावित करते हैं। मंदिरों के चारों ओर अनेक भित्तियों को कलापूर्ण तरीके से शिलापटों अलंकृत किया गया है।

द्वाराहाट में मौजूद वर्ष 1048 में निर्मित बद्रीनाथ मंदिर समूह में तीन मन्दिरों को मिलाकर बना है। प्रमुख मंदिर में सम्वत 1105 अंकित काले पत्थर की विष्णु की मूर्ति स्थित है। स्थानीय नदी खीर गंगा के तट पर निर्मित एक अन्य वनदेव मन्दिर मध्य हिमालय के प्राचीन विकसित फांसना शैली के मन्दिरों में से एक है, जिसे पीड़ा देवल शैली के नाम से भी जाना जाता है। 13वीं शताब्दी में निर्मित तीसरा गुर्जर देव मन्दिर मध्य हिमालय में नागर शैली मंदिरों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पंचायतन शैली में निर्मित यह मन्दिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है जिसका अधिष्ठान एवं जंघा भाग देव प्रतिमाओं, नर्तकों एवं पशु प्रतिमाओं से अलंकृत है। इस मन्दिर के स्थापत्य व ध्वसांवशेषों से ज्ञात होता है कि यह अत्यन्त भव्य मन्दिर था। कचहरी मन्दिर समूह में 11वीं से 13वीं शताब्दी में बने कुल 12 छोटे-बड़े अर्धमण्डप युक्त मूर्ति विहीन मन्दिर हैं। ए

क कुटुम्बरी मन्दिर की उपस्थिति 1960 तक बताई जाती है, पर अब यह अस्तित्व में नहीं है। इसकी वास्तु संरचनाओं के अवशेष निकटवर्ती घरों में किए गये निर्माणों में दिखते हैं। 11-12वीं शताब्दी में बना मनियान मन्दिर समूह नौ मन्दिरों का समूह है। इनमें से चार मन्दिर आपस में जुड़े हुए हैं। इनमें से तीन मंदिरों में जैन तीर्थकारों की तथा शेष में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां इतिहास की एक नई धारा की ओर इशारा करती हैं। इसी दौर में निर्मित मृत्युजंय मन्दिर समूह का प्रमुख मन्दिर भगवान शिव-मृत्युजंय को समर्पित है। नागर शिखर शैली में निर्मित यह पूर्वाभिमुखी मन्दिर त्रि-रथ योजना में निर्मित है, जिसमें गर्भगृह, अंतराल और मंडप युक्त है। मन्दिर परिसर में एक मन्दिर भैरव का तथा दूसरा छोटा मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था है। 11-13वीं शताब्दी में निर्मित रतनदेव मन्दिर समूह भी नौ मन्दिरों का समूह रहा है, पर अब इसमें छह मन्दिर ही बचे हैं। इनमें से ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश को समर्पित तीन मन्दिर एक सामूहिक चबूतरे पर स्थित हैं। जिनके आगे उत्तरमुखी मंडप है जो सम्भवत् थे।

कुमाऊं के एक अन्य लोकप्रिय लोक गीत-‘अलबेरै बिखौती मेरि हंसि रिसै गे’ में वर्णित द्वाराहाट के प्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती (यानी विषुवत संक्रान्ति) के मेले में आज भी ग्रामीण परिवेश की झलक मिलती है। पाली पछाऊँ क्षेत्र की परंपरागत लोक संस्कृति को पेश करने वाले इस मेले का माहौल आसपास के गांवों में फूलदेई के त्योहार से ही बनना प्रारंभ हो जाता है, द्वाराहाट से आठ किमी दूर प्रसिद्ध शिव मंदिर विमांडेश्वर में इसकी औपचारिक शुरुआत हो जाती है।

आगे मेला वैशाख माह की पहली तिथि तक द्वाराहाट बाजार तक पहुंच जाता है। मेले के दौरान गांवों में एक खास अंदाज में एक-दूसरे के हाथ थाम और कदम से कदम मिलाते हुए कुमाऊं के प्रसिद्ध लोक नृत्यों झोडे, चांचरी, छपेली आदि का परंपरागत वस्त्रों व अंदाज में लोग आनंद लेते मिल जाते हैं। मेले में द्वाराहाट बाजार की मुख्य चौक पर रखे एक खास पत्थर-ओड़ा को भेटने यानी छूने की एक खास परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस बारे में जनश्रुति है कि शीतला देवी के मंदिर से लौटने के दौरान एक बार किसी कारण दो गांवों के दलों में खूनी संघर्ष हो गया। हारे हुए दल के सरदार का सिर खड्ग से काट कर जिस स्थान पर गाड़ा गया वहां स्मृति चिन्ह के रूप में एक पत्थर रख दिया गया, जिसे ही ‘ओड़ा’ कहा जाता है। तभी से बनी ‘ओड़ा भेटने’ की परम्परा के अनुसर इस ओड़े पर चोट मार कर ही मेले में आगे बढ़ा जा सकता है। पहले इसके लिए ग्रामीणों को अपनी बारी आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इसके लिए अब आल, गरख और नौज्यूला धड़ों के बीच एक सुव्यवस्थित व्यवस्था तय कर दी गई है। लोक नृत्य और लोक संगीत से लकदक इस मेले में अब भी रात-रात भर भगनौले जैसे लोकगीत अजब समां बाँध देते हैं। जिसे देखने-सुनने को पर्यटक भी दूर-दूर से पहुंचते हैं।

अब गढ्ढों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए अफसर होंगे जिम्मेदार

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सड़क पर गड्ढे हादसों का सबब बनते आ रहे है। किसी की जान जाने का अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन पुलिस ने दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कमर कसते हुए इसके लिए एनएचएआइ को जिम्मेदार ठहरा कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। सीओ ने एनएचएआइ को पत्र लिख कर हादसों का सबब बन रही सड़कों की दशा सुधारने के लिए कहा है।

सड़क की दुर्दशा पर नजर डाले तो बिलासपुर से लेकर पंतनगर तक हालत खराब है। खराब सड़कों के चलते आए दिन हादसों में लोग अनायस ही काल का ग्रास बन रहे है। सड़क पर गड्ढों से बचने के लिए लोग वाहन का स्टेयरिंग मोड़ देते है, जिसके चलते आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है। लेकिन सड़कों की दशा में कोई सुधार हादसों के बाद भी नहीं दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ रहे हादसों के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए एनएचएआइ को पत्र लिख एनएच 74 पर रामपुर रोड से पंतनगर तक खस्ताहाल सड़क से हो रही परेशानी को दूर करने के लिए कहा है। सड़क की दशा सहीं न होने की दशा में दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी एनएचएआइ की होगी। साथ ही दशा न सुधारने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दे दी है।

किच्छा मार्ग पर इंदिरा चौक से लेकर भूतबंगला तक सिंगल सड़क की काम कर रही है, जिससे वहां पर दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कार्यदायी संस्था द्वारा सड़क को यहां पर अधूरा छोड़ा गया है। सीओ ने उसे भी बनवा मार्ग पर आवाजाही खोलने को कहा है।

स्वतंत्र कुमार, सीओ सिटी ने बताया कि एनएचएआइ के पीडी को पत्र लिख कर दुर्घटना का कारण बन रही सड़कों की दशा सुधारने को कहा है। इस पर एनएचएआइ के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कर्नल संदीप कार्की, पीडी एनएचएआइका कहना है कि, “भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण प्रोजक्ट में काफी देर हो रही है। रामपुर-काठगोदाम मार्ग पर कार्यदायी संस्था कार्य को तैयार है। भूमि उपलब्ध होने के बाद काम की गति दिखाई देगी। साथ ही तीन करोड़ का प्रपोजल एनएचएआइ हेडक्वार्टर गया है। कुछ ही दिनों में प्रपोजल की मंजूरी मिलने की संभावना है। दो माह के अंदर रुद्रपुर से लेकर लालकुआं तक गड्ढे सड़क पर दिखाई नहीं देंगे।”

अब्बास-मस्तान के साथ काम करेंगे अक्षय कुमार

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अक्षय कुमार के कैरिअर में खिलाड़ी फिल्म से पहली बड़ी सफलता दिलाने वाली निर्देशक जोड़ी अब्बास मस्तान की अगली फिल्म में अक्षय कुमार हो सकते हैं। ऐसा हुआ, तो 13 साल बाद अक्षय कुमार इस निर्देशक जोड़ी के साथ काम करेंगे। 13 साल पहले 2004 में सुभाष घई के बैनर में बनी फिल्म एतराज में अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर ने मुख्य भूमिकाएं की थीं और अब्बास मस्तान की जोड़ी ने इस फिल्म का निर्देशन किया था।

‘एतराज’ के अलावा अब्बास मस्तान की फिल्म अजनबी में अक्षय कुमार के साथ बाबी देओल, करीना कपूर और बिपाशा बसु ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। अब्बास मस्तान के निर्देशन में बनी पिछली फिल्म ‘मशीन’ में उनका बेटा मुस्तफा बतौर हीरो लांच किया गया था, लेकिन बाक्स आफिस पर ये फिल्म सुपर फ्लाप रही। टिप्स कंपनी में अब्बास-मस्तान के साथ रेस की दो सफल कड़ियां बनाने के बाद जब सलमान खान को रेस 3 के लिए कास्ट किया गया, तो निर्देशन की जिम्मेदारी अब्बास-मस्तान की जगह रेमो डिसूजा को सौंप दी गई। अब्बास मस्तान ने अक्षय कुमार को जिस फिल्म का प्रस्ताव दिया है, उसमें एक हीरो की अलग अलग 12 भूमिकाएं हैं।

अक्षय को ये प्रस्ताव पसंद आया है, लेकिन अभी तक उन्होंने अंतिम फैसला नहीं किया है। अक्षय कुमार इस वक्त फरहान अख्तर की कंपनी की फिल्म ‘गोल्ड’, टी सीरिज की फिल्म ‘मुगल’ के अलावा करण जौहर के साथ बन रही फिल्म ‘केसर’ में बिजी हैं। रिलीज के लिए तैयार अक्षय कुमार की फिल्मों में आर बाल्की की ‘पैडमैन’ और शंकर की ‘रोबोट 2.0’ हैं। ये दोनों फिल्में अगले साल रिलीज होंगी।

सोनम कपूर की दो नई फिल्में

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सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर अगले साल (2018) के लिए दो नई फिल्में साइन करने की खबर को शेयर किया है, लेकिन इन दोनों फिल्मों को लेकर कोई डिटेल्स नहीं दी है। साथ ही सोनम ने अपनी आने वाली तीन फिल्मों का जिक्र किया है, जिसमें एक फिल्म उनकी बहन रेहा कपूर द्वारा बनाई जा रही ‘वीरां दी वैडिंग’ है, जिसमें वे पहली बार करीना कपूर खान के साथ काम कर रही हैं। स्वारा भास्कर और शिखा तल्सानिया भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। शशांक खेतान इसका निर्देशन कर रहे हैं और फिल्म अगले साल मई में होगी।

सोनम की इस लिस्ट की दूसरी फिल्म ‘पैडमैन’ है, जिसमें वे अक्षय कुमार के साथ हैं। आर बाल्की इसके निर्देशक हैं। ये फिल्म 2018 में अप्रैल में रिलीज होगी। इस लिस्ट की तीसरी फिल्म राजकुमार हीरानी की फिल्म है, जो संजय दत्त की जिंदगी पर है और इसमें वे अपनी पहली फिल्म सांवरिया के बाद रणबीर कपूर के साथ नजर आएंगी और ये फिल्म अगले साल 30 मार्च को रिलीज होगी।

सोनम ने जिन दो फिल्मों का जिक्र किया है, उनमें से एक फिल्म को लेकर कहा जा रहा है कि विधु विनोद चोपड़ा की प्रोडक्शन कंपनी में बनने जा रही इस फिल्म में सोनम पहली बार अपने पिता के साथ काम करने जा रही हैं। दूसरी फिल्म को लेकर संकेत हैं कि इस फिल्म में विनोद मेहरा के बेटे रोहन मेहरा की जोड़ी होगी।

नौ साल बाद संवासिनी के घर का लगा पता

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काशीपुर, राजकीय नारी निकेतन में रह रही संवासिनी पिंकी की पहचान काशीपुर के रूप में हुई है। किशोरी रामनगर रेलवे स्टेशन पर करीब नौ साल पहले पुलिस को मिली थी जिसे देहरादून भेज दिया गया था।

रामनगर रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2008 में पुलिस को करीब सात साल की एक लड़की मिली थी। पुलिस ने पूछताछ की, मगर मूकबधिर होने के कारण वह कुछ बता नहीं सकी। पुलिस ने लड़की को नारी निकेतन हल्द्वानी भेज दिया जहां पर वह करीब दो साल रही। इसके बाद लड़की को नारी निकेतन, देहरादून भेज दिया गया है।

करीब डेढ़ साल पहले ऋतु शर्मा की मूक बधिर विशेषज्ञ के पद तैनाती की गई तो निकेतन में रहने वाली लड़कियों व बच्चों के नाम व पते लगाने में जुट गई। उन्होंने जब रामनगर से मिली किशोरी से इशारों में बात की तो किशोरी ने अपना नाम पिंकी बताया। पिता का नाम मदन व माता का नाम मीना निवासी सिनेमा हाल के पास बताया। निकेतन के अफसरों ने पुलिस विभाग से संवासिनी के बारे में पता बताने को कहा।

पुलिस ने जब रिक्शा यूनियनों से पूछताछ की तो पता चला कि पिंकी के पिता मदन लाल बाजपुर रोड स्थित दीपक सिनेमा के पास अंडे व पकौड़ी की ठेली लगाते थे। करीब 8-10 साल पहले मदन की मौत हो गई। पिंकी के भाई मनोज रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाता था। वह 8-10 साल पहले परिवार के साथ मुरादाबाद चला गया, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा ने बताया कि पिंकी की बहन का नाम ऋतु है। बताया कि पिंकी घर से गुरुद्वारा के लिए निकली थी और वह भटक कर रामनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी।

राजकीय नारी निकेतन, देहरादून में करीब डेढ़ साल में मानसिक रूप से विक्षिप्त 80 महिलाओं को उनके घर पहुंचाया गया। 225 बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। मूक बधिर विशेषज्ञ ऋतु शर्मा के साथ पिंकी से पूछताछ की तो उसने काशीपुर का पता बताया। यदि परिवार को जानकारी मिल जाएगी तो पिंकी को उसके घर पहुंचा दिया जाएगा।

तानाशा गल्फार को दिखाया प्रशासन ने आईना 

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किच्छा-टोल वसूली की अनुमति के बाद भी काम अधूरे छोड़ तानाशाही दिखा रही गल्फार कंपनी की प्रशासन ने गलतफहमी दूर कर दी। प्रशासन दो टूक में कहा कि 25 अकूटबर से शेष काम शुरू हो जाने चाहिए, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हाईवे का काम बंद कर टोल वसूलने में मशगूल गल्फार कंपनी को अब काम बंद करना मंहगा पड़ सकता है। कंपनी यदि 25 अक्टूबर तक मार्ग का शेष काम शुरू नहीं करती तो प्रशासन उसके द्वारा देवरिया में की जा रही टोल वसूली पर ताला लगा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारी ने कंपनी को शेष बचे काम की सूचि के साथ बुधवार को अपने दफ्तर में तलब किया है।

दोराहा से सितारगंज तक निर्माणाधीन एनएच -74 का आज भी 20 प्रतिशत से अधिक काम शेष पड़ा हुआ है। सर्वाधिक कार्य किच्छा, रुद्रपुर व गदरपुर में बकाया है। कंपनी को बीते कुछ माह से जब से मार्ग से टोल वसूलने का काम मिला है, तब से उसने बकाया काम को ताक पर रख दिया है। कंपनी काम रोकने के पीछे कहीं जमीन न उपलब्ध न होना तो कहीं खनन सामग्री की अनुपलब्धता होने का राग अलापा जा रहा है। कंपनी द्वारा आधे-अधूरे काम को छोड़ने से क्षेत्रवासियों को जहां असुविधा हो रही है, वहीं कई लोग जानलेवा दुर्घटनाओं का भी शिकार हो चुके है।

इस संबध में जन शिकायतें मिलने पर एसडीएम ने कंपनी को नोटिस भेज काम शुरू करने को कहा गया, कंपनी ने इसे हर हाल में एक अक्टूबर से शुरू करने का भरोसा दिलाया, पर अब अक्टूबर माह में भी चंद दिन ही शेष बचे है, पर कंपनी ने मार्ग पर दोबारा कहीं भी काम शुरू नहीं किया है। जागरण ने 23 अक्टूबर को इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया, इस पर जिलाधिकारी ने मामले को अब गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को आदेशित किया है कि यदि गल्फार प्रशासन के नोटिस के बाद भी अब 25 अक्टूबर से मार्ग का शेष काम पूरा नहीं करती तो इसके द्वारा देवरिया गांव में बने टोल प्लाजा पर टोल की वसूली रोक दी जाए, जिलाधिकारी ने कंपनी को 25 अक्टूबर को ही मार्ग के शेष बचे काम की सूचि के साथ अपने दफ्तर में तलब किया है।

एनसी दुर्गापाल, एसडीएम ने कहा कि, “मेरे द्वारा गल्फार कंपनी को काम अधूरा छोड़ने पर नोटिस जारी किया गया था, कंपनी ने एक अक्टूबर से शेष काम शुरू करने का भरोसा दिलाया गया। पर 23 अक्टूबर तक कोई काम शुरू नहीं किया गया, कंपनी अब यदि बकाया काम शुरू नहीं करती तो जिलाधिकारी के निर्देशानुसार कंपनी की टोल प्लाजा से की जा रही वसूली रोक दी जाएगी।”

नगर निगम में शामिल होने से ग्रामीणों में रोष

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नैनीताल, भीमताल ब्लॉक के निकाय से सटी ग्राम पंचायतों को भवाली पालिका और भीमताल नगर पंचायत में शामिल किया जा रहा है। जिसके विरोध में सभी जनप्रतिनिधि लामबंद हो गए हैं।

दरअसल, भीमताल ब्लॉक के निकाय से सटी ग्राम पंचायतों को भवाली पालिका और भीमताल नगर पंचायत में शामिल किया जा रहा है। इसके चलते ग्रामीणों में बेहद रोष है। जिसके चलते क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों ने जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी।

जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश बिष्ट और ब्लॉक प्रमुख गीता बिष्ट के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रधान और बीडीसी सदस्य जिला मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सरकार के निकायों के विस्तार वाले फैसले के विरोध में हाथों में तख्तियां उठार्इ थी। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार गांवों का वजूद मिटाने को आमादा है। निकायों में शामिल होने से ग्रामीणों पर टैक्स लादे जाएंगे, मनरेगा खत्म होगी।

उनका कहना है कि शहरीकरण से गंदगी बढ़ेगी और यहां की संस्कृति भी प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने जबरन गांवों को निकाय में शामिल किया तो आंदोलन के साथ ही कोर्ट का सहारा लिया जाएगा।

सरकार से मदद न मिलने से निराश ब्लाइंड क्रिकेट

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देहरादून,प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए दून पहुंचे इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम के बल्लेबाज दीपक मलिक ने कहा कि सरकार को ब्लाइंड क्रिकेट को भी सामान्य क्रिकेट जितनी तवज्जो दी जानी चाहिए।

दीपक मलिक ने बताया कि, “टीम ने वर्ष 2014 में दक्षिण अफ्रीका में हुए वनडे वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके बाद वर्ष 2016 में केरल के कोच्चि में हुए एशिया कप में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा और खिताब पर कब्जा जमाया। इसी साल आयोजित टी-20 वर्ल्ड कप में भी ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने गजब का खेल दिखाया और वर्ल्ड कप अपने नाम किया। इसी प्रतियोगिता में वेस्टइंडीज के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए दीपक मलिक ने ताबड़तोड़ 121 रन की शतकीय पारी खेली और गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट भी झटके।”

उन्होंने बताया कि, “चिंता का विषय यह है कि आज सामान्य क्रिकेट की अपेक्षा ब्लाइंड क्रिकेट बहुत पिछड़ा हुआ है। खिलाड़ी सरकार व बीसीसीआई से मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। हां, टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद बीसीसीआई ने कुछ मदद जरूर की, लेकिन ये काफी नहीं थी। आज खिलाड़ी अपने खर्चे के दम पर प्रैक्टिस करते हैं। ब्लाइंड क्रिकेट के लिए स्टेडियम की सुविधाएं नहीं है। हम इस संबंध में सरकार व बीसीसीआई से कई बार मांग भी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।” बता दें कि दीपक मलिक इंडियन टीम में ऑलराउंडर होने के साथ हरियाणा की टीम के कप्तान भी हैं। 

रेगुलर मोड में पढ़ाई कर सकेंगे सीबीएसई के फेल छात्र

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देहरादून, सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से जुड़े स्कूलों में बीते साल फेल हुए छात्रों के लिए अच्छी खबर है। बोर्ड ने उन्हें अपना भविष्य संवारने का एक और मौका दिया है। फैसले के तहत बीते साल फेल हुए छात्रों के पास इस साल संस्थागत रूप से यानि रेगुलर मोड में स्कूल से पढ़ाई पूरी करने का मौका होगा। बोर्ड का यह फैसला दासवीं और 12वी दोनों बोर्ड से जुड़े छात्रों के लिए प्रभावी होगा।

सीबीएसई द्वारा हाल ही में लिए गए इस फैसले के मुताबिक जो छात्र बीते साल दासवीं या फिर 12वीं बोर्ड परीक्षा में फेल हो गए थे, उन्हें इस साल भी रेगुलर मोड में पढ़ने का मौका दिया गया है। ऐसे छात्र अपने पुराने स्कूल या फिर नए स्कूल में एडमिशन प्राप्त कर दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। बोर्ड ने स्कूलों को नए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो छात्र 2017 में दसवीं और बारहवीं में फेल हो गए थे वे रेग्युलर कैंडिडेट के रूप बोर्ड से मान्यता प्राप्त किसी भी स्कूल में फ्रेश एडमिशन हासिल कर रेगूलर मोड में पएत्राई कर सकते हैं। बोर्ड के नियमों पर गौर करें तो अभी तक फेल हुए छात्र केवल प्राइवेट मोड में अपनी पढ़ाई आगे बढ़ा सकते थे। लेकिन इस फैसले के बाद बोर्ड ने फेल छात्रों को स्कूल में बाकी बच्चों के साथ ही पढ़ाई करने का मौका प्रदान किया है।

सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन देहरादून रीजन के क्षेत्रीय अधिकारी रनबीर सिंह ने बताया कि, “बोर्ड का मकसद है कि बच्चे को शिक्षा का पूरा अधिकार मिले, नियमों के तहत प्राइवेट मोड में परीक्षा देने का प्रावधान अभी भी है। लेकिन स्कूल अपने विवेक पर छात्र को रिएडमिशन के तहत दाखिला देता है तो ऐसे बच्चे रेगूलर मोड में पढ़ाई करेंगे। बोर्ड को इसपर कोई आपत्ति नहीं है।”

31 अगस्त से पहले स्कूलों को रिएडमिशन अथवा डायरेक्ट एडमिशन का पूरा ब्यौरान रीजनल आॅफिस भेजना होगा।