Page 416

31 अक्टूबर से फिर श्रीहरि के हाथों होगी सृष्टि की सत्ता

0

दीपावली के पश्चात सबसे बड़ा पर्व देवोत्थान एकादशी होता है। प्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवोत्थान एकादशी के साथ ही चार माह से भगवान शंकर के हाथों से संसार की सत्ता भगवान विष्णु के हाथों आ जाती है। देवोत्थान एकादशी को देव दीपावली भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार 31 अक्टूबर को देवउठनी एकादशी है, लेकिन 13 अक्टूबर से देवगुरु बृहस्पति पश्चिामास्त हैं, जो कि देवउठनी एकादशी के सात दिन बाद 7 नवम्बर को पूर्व दिशा में उदित होंगे और आगामी तीन दिन बाल अवस्था में रहने के बाद 10 नवम्बर को बालत्व निवृत्ति होगी। 16 नवम्बर को सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। इन समस्त दोषों की निवृत्ति के पश्चात 19 नवम्बर से शादियों की शुरुआत होगी। वैसे देव उठनी एकादशी को किसी मुहुर्त की जरूरत नहीं होती। देवोत्थान एकादशी स्वंय सर्वार्थ सिद्धि योग होता है। देवोत्थान एकादशी के साथ चार माह से बंद पड़े मंगल कार्यों की भी शुरुआत हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप जोशी के अनुसार इस बार इस साल नवंबर में 19, 22, 23, 24, 28, 29 और 30 नवम्बर को विवाह के विशिष्ट मुहूर्त हैं। दिसम्बर में 3, 4, 10, 11 और 12 दिसम्बर को विवाह मुहूर्त बन रहे हैं। 15 दिसम्बर से 14 जनवरी, 2018 तक मलमास रहेगा। मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त शुरू होते हैं, किंतु इस बार जनवरी में कोई मुहूर्त नहीं है। 22 जनवरी को बसंत पंचमी को देवलग्न होने के कारण विवाह आयोजन कर पाएंगे, लेकिन लग्न शुद्धि के शुभ मुहूर्त फरवरी में ही मिलेंगे। फरवरी में 4, 5, 7, 8, 9, 11, 18 और 19 तथा मार्च में 3 से 8 और 11 से 13 मार्च को शादियों के मुहूर्त हैं।

देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी विवाह का भी शास्त्रों में वर्णन है। इसे तुलसी विवाह एकादशी भी कहा जाता हैै। मान्यतानुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन तुलसी जी और विष्णु जी का विवाह कराने की प्रथा है। तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। ये त्योहार दिवाली के 11 दिन बाद मनाया जाता है और इस वर्ष तुलसी विवाह का शुभ दिन 31 अक्टूबर को है। मान्यता है कि इस दिन तुलसी शालिग्राम विवाह कराने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन नए चावल, रुई, शकरकंद, सिगाड़ा, बेर, गन्ना, आंवला आदि का दान देना विशेष फलदायी होता है।

एकादशी व्रत के सबंध में जोशी के अनुसार एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यांसियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। 

जल प्रजाति संरक्षण के लिये डब्लूआईआई देगा ट्रैनिंग

0
वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्लूआईआई) आने वाले दिनों में उत्तराखंड समेत अन्य राज्योें के वन कर्मियों को नदियों में पाये जाने वाले जीवों के संरक्षम के लिये ट्रेनिंग देगी। गौरतलब है कि  केंद्र सरकार के नेशनल मिशन फॉर गंगा क्लीनिंग ने डब्लूआईआई को गंगा और उसकी सहायक नदियों में मिलने वाले जल जीवों के संरक्षण के लिये प्लान बनाने का जिम्मा दिया है। इसी के तहत संस्थान उत्तराखंड के साथ साथ उत्तरा प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन कर्मियों और अधिकारियों को ट्रैनिंग देगा।
संस्थान के मुताबिक इस ट्रैनिंग में खासतौर पर जल प्रजातियों जैसे कि डोलफिन, घड़ियाल, कछुओं के संरक्षण करने के लिये सही करीके सुखाने पर ज़ोर रहेगा। इसके साथ साथ सभी अधिकारियों को मध्यप्रदेश के चंबल राष्ट्रीय पार्क ले जाया जायेगा। ये पार्क लुप्त होने की कगाप पर पहुंचे चुके जल जीवों के संरक्षण का हब माना जाता है। केंद्र सरकार ने 25 करोड़ के इस प्रॉजेक्ट को पिछले साल डब्लूआईआई को दिया था।

संस्थान के निदेशक वीबी माथुर कहते हैं कि, ”अभी डब्लूआईआई ने जल्द ही एक प्रोजेक्ट बायोडायर्वसिटी कन्जरवेशन एंड गंगा रिजुविनेशन नाम से चलाया है जिसके स्पॉंसर मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिर्सोसेस,रिवर डेवलेपमेंट और गंगा रिजुविनेशन हैं।” उन्होंने कहा कि, “इस प्रोजेक्ट की मुख्य बात है स्टेकहोल्डरों में क्षमता बढ़ाना,जिसेक अंर्तगत अलग-अलग डिर्पाटमेंट के ऑफिसर जैसे कि फॉरेस्ट,फिशरी,एग्रीकल्चर,ईरिगेशन और रुरल डेवलपमेंट जैसे विभागों को ट्रेनिंग दी जा रही, जिसके माध्यम से एक्वेटिक बायोडायर्वसिटी का संरक्षण स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ किया जा सके।”

इसके अलावा वीबी माथुर ने कहा कि, “ग्राम पंचायत की मदद से “गंगा प्रहारी या गंगा की सुरक्षा के लिए युवाओं” की पहचान की जा रही है,जिनकी मदद से पानी में रहने वाले जीव विशेषकर डॉल्फिन, कछुओं, मगरमच्छ आदि से जल संरक्षण, उनका बचाव और पुनर्वास में मदद की जा रही है।”

कैबिनेट बैठक में मिली नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों को मंजूरी

0

देहरादून। केदारनाथ धाम में बनाई जा रही नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों के लिए 16 बिंदुओं की गाइडलाइन को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉंसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत होने वाले निर्माण कार्यों के लिए ऑनलाइन डोनेशन की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ में नई केदारपुरी का शिलान्यास किया था। त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल ने नई केदारपुरी की कार्ययोजना पर अपनी मुहर लगा दी। वहीं राज्य के पर्वतीय जिलों में अब राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग के इर्द-गिर्द 200 मीटर के दायरे में स्थित राजस्व गांव अब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। यानी इन राज्यमार्गों के दोनों ओर अब वाणिज्यिक-व्यावसायिक भवनों के साथ ही एक से ज्यादा आवासीय भवनों के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना जरूरी होगा। उक्त 200 वर्गमीटर के भू-भाग में सिर्फ एकल या संयुक्त परिवार के आवासीय भवन और 30 वर्ग मीटर तक एक व्यावसायिक दुकान को मानचित्र पास कराने से छूट मिलेगी। वहीं राज्य में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को विस्थापन की स्थिति में भवन निर्माण के लिए तीन लाख के बजाए चार लाख रुपये दिए जाएंगे। विधायकों को विधायक निधि से कराए जाने वाले कार्यों में राहत दी गई है। अब निर्माण कार्यों में सिंगल प्रोजेक्ट कॉस्ट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने का निर्णय लिया गया है।

त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल की सचिवालय में बुधवार देर शाम तक चली बैठक में आपदा प्रभावितों, विधायकों को राहत दी गई तो खडिय़ा के खनन को ई-टेंडङ्क्षरग से बाहर कर पुरानी व्यवस्था बहाल करने समेत कई अहम फैसले लिए गए। सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी ने नई केदारपुरी के निर्माण कार्यों को अंजाम देने और उसके अनुश्रवण को लेकर कार्ययोजना बनाई गई है। मंत्रिमंडल ने इस पर अपनी मुहर लगा दी। सीएसआर से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को लेकर जिंदल औद्योगिक समूह के साथ राज्य सरकार एमओयू करेगी। इसके लिए बैंक में खाता खोला जाएगा। पर्यटन सचिव को निर्माण कार्यों का नोडल अधिकारी बनाया गया है। निम एक कार्यदायी संस्था के तौर पर काम करेगा। बर्फबारी के दौरान निर्माण कार्यों के लिए दरें तय की जाएंगी। केदारनाथ विकास प्राधिकरण के साथ सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड भी उक्त कार्यों के लिए जुड़ेंगे। प्राधिकरण के कार्यालय केदारनाथ व गुप्तकाशी में होंगे। केदारनाथ में स्मृति वन भी बनाया जाएगा। निर्माण कार्यों समेत तमाम मामलों में फैसले लेने के लिए मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
ब्रिडकुल का रूप ले चुके राज्य अवस्थापना विकास निगम में 46 पद बढ़ाने और पहले से मौजूद तीन पद घटाने का मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया। पुनर्गठन के बाद ब्रिडकुल का संरचनात्मक ढांचा 223 पद का हो गया है। इसमें उप महाप्रबंधक के दो, परियोजना प्रबंधक का एक और कनिष्ठ अभियंता के सात पद सृजित किए गए हैं। निर्माण व पर्यवेक्षण मुख्य महाप्रबंधक, आइटी महाप्रबंधक व पीपीपी मोड महाप्रबंधक के पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। प्रेस ब्रीफिंग में नए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह व वित्त सचिव अमित नेगी मौजूद थे।

कैबिनेट के फैसले:

  • विधायक निधि से कराए जाने वाले कार्यों की सिंगल प्रोजेक्ट कॉस्ट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख
  • विधायक निधि से वर्क ऑर्डर पर कराए जाने वाले निर्माण कार्य की सीमा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये
  • आपदा प्रभावित परिवारों को विस्थापन होने पर भवन निर्माण को तीन लाख के बजाय मिलेंगे चार लाख रुपये
  • विधानसभा का शीतकालीन सत्र भराड़ीसैंण में सात दिसंबर से 13 दिसंबर तक
  • गंगा नदी पर उत्तरकाशी में गंगोरी से बढ़ेती चुंगी के 10 किमी क्षेत्र और हरिद्वार से लक्सर तक 50 किमी क्षेत्र को बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण (फ्लड प्लेन जोनिंग) की अंतिम अधिसूचना जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी
  • ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (ब्रिडकुल) में 46 नए पदों के सृजन और तीन पुराने पद खत्म करने को अनुमति
  • उपखनिजों में ई-टेंडङ्क्षरग की व्यवस्था से खडिय़ा का खनन बाहर, खडिय़ा खनन की पुरानी व्यवस्था यथावत
  • ग्राम मोहकमपुर में हरिद्वार मार्ग पर स्थित भूखंड पर प्रस्तावित फिलिंग स्टेशन के लिए भूमि की गहराई में मानक से 2.23 मीटर की कमी को शिथिल करने पर मुहर
  • पूर्व मुख्य सचिव एस रामास्वामी के कार्यों को सराहा, नए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का किया स्वाग

भाजपा के वरिष्ठ नेता हरबंश कपूर ने किया छठ महोत्सव का शुभारंभ

ऋषिकेश, त्रिवेणी के संगम पर छठ महोत्सव का आगाज हो चुका है विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में पूर्वांचली तीर्थ नगरी ऋषिकेश पहुंचकर गंगा नदी के तट पर सूर्य की उपासना के पर्व को बड़ी धूमधाम से मना रहे हैं। बाहर से आए इन श्रद्धालुओं के लिए छठ समिति ऋषिकेश ने सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। त्रिवेणी घाट पर एक भव्य पंडाल बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था भी की गई है, जिसका शुभारंभ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता हरबंश कपूर ने दीप जलाकर किया।
chath
कार्यक्रम के पहले दिन ऋषिकेश के विभिन्न स्कूलों से आए छात्र छात्राओं ने अपनी प्रस्तुति के जरिए समा बांध दिया। एसबीएम पब्लिक स्कूल के छात्र छात्राओं ने गढ़वाल की संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए बाहर से आए पूर्वांचली और विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू कराया।  इस अवसर पर बोलते हुए हरबंस कपूर ने कहा कि, “ऋषिकेश एक ऐसा स्थान है जहां विभिन्न राज्यों की संस्कृति को करीब से महसूस किया जा सकता है और हर तीज त्यौहार यहां के रंग में समा जाता है।”
कल्चरल प्रोग्राम के जरिए एसबीएम में स्कूल के शताक्षी पुरोहित, टीया गोयल, सृष्टि उपाध्याय, मनीषा गुप्ता ,संजना आदि ने समा बांध दिया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने इन बच्चों का उत्साह वर्धन किया

गिरिजा देवी के देहांत से शोकाकुल बाॅलीवुड

0

भारतीय शास्त्री संगीत की प्रख्यात गायिका गिरिजा देवी के देहांत पर बालीवुड की दिग्गज हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में खास तौर पर ठुमरी गाने के लिए विश्व प्रसिद्ध गायिका गिरिजा देवी का कल रात कोलकाता में निधन हो गया था, वे 88 वर्ष की थीं।

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उनके निधन पर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ अपनी फोटो भी शेयर की। लता जी ने अपने संदेश में लिखा कि, “उनके साथ हमारे करीबी संबंध थे और वे बहुत महान गायिका तथा एक महान महिला थीं।”

गीतकार जावेद अख्तर ने अपने संदेश में लिखा कि, उनके यूं चले जाने से भारत का शास्त्रीय संगीत हमेशा के लिए सूना हो गया है, संगीत की दुनिया में वे अपनी गायिकी के जादू से बनी रहेंगी।”

संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने कहा कि, “उनके जाने से भारतीय संगीत को अपूर्णीय क्षति हुई है।”

मशहूर बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया ने कहा कि, “ये हमारे संगीत के लिए काला दिन जैसा है, जब वे हमारे बीच नहीं रही।”

भजन गायक अनूप जलोटा ने गिरिजा सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, “वे संगीत की उपासक थीं और उन पर सरस्वती मां का वरदान था।” गायिका शुभा मुदगल ने कहा कि, “वे संगीत की एक मिसाल थीं।”

ईशा देओल की बेटी का नाम राध्या

0

ईशा देओल की बेटी का नाम रख दिया गया है, ईशा की मां हेमा मालिनी के मुताबिक, बेटी का नाम ‘राध्या’ रखा गया है। हेमा मालिनी ने कहा कि, “इस नाम का सुझाव उन्होने दिया, जिसे परिवार ने खुशी से मान लिया।”

ईशा देओल ने 20 अक्तूबर को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में बेटी को जन्म दिया। 23 अक्तूबर को ईशा अपनी पहली संतान के साथ घर आ गईं। हेमा मालिनी ने बताया कि जल्दी ही राध्या के आने की खुशी में वे करीबी दोस्तों के लिए एक पार्टी देंगी। हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के न आने को लेकर कहा कि, “वे अपने फाम हाउस पर हैं और जल्दी ही मुंबई आ रहे हैं।”

हेमा मालिनी के मुताबिक, धर्मेंद्र ने फोन पर ईशा से बात की। एक बार फिर दादा बनकर वे बहुत खुश हैं, कहा जा रहा है कि बाबी भी अपनी भांजी को देखने के लिए ईशा के घर गए हैं।

तुम्हारी सुलू का एक और पोस्टर जारी

0

17 नवंबर को रिलीज होने जा रही विद्या बालन की फिल्म ‘तुम्हारी सुलू’ का एक और पोस्टर आज सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया। ये फिल्म का तीसरा पोस्टर है, जिसे रिलीज किया गया है।

फिल्म का ट्रेलर लांच हो चुका है और अब रिलीज की तैयारियां तेज हो गई हैं। फिल्म की टीम का कहना है कि अभी दो और पोस्टर रिलीज किए जाएंगे। सभी पोस्टरों में विद्या बालन को ही प्राथमिकता दी गई है।

सुरेश त्रिवेणी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विद्या बालन एक रेडियो जाकी का रोल कर रही हैं, जो अपनी आवाज के जादू से लोगों में लोकप्रिय हो जाती है। फिल्म में उनके साथ मानव कौल और नेहा धूपिया हैं। तुनज गर्ग, अतुल कसबेकर और टी सीरिज ने मिलकर ये फिल्म बनाई है।

पुलिस की अवैध वसूली का वीडियो हुआ वायरल

0

उधमसिंहनगर में पुलिस द्वारा अवैध वसूली करना आम बात है, मगर मामला तक ज्यादा सुर्खियों में आया जब एक वाहन से वसूली करने पर कुछ लोगों ने उसका वीडियों बना दिया, जिसमें सिपाही से कुछ लोग पैसे लेने की बात कर रहे हैं और ट्रेफिक सिपाही उन लोगों से मुंह छुपाकर बागता हुआ दिख रहा है, तभी वहीं सिपाही को घिरा देख ट्रेफिक इन्सपेक्टर पहुंच जाता है जो बीच बचाव करता है और मामले को रफा दफा करने की बात कहता है, जिसकी पुरी वीडियों अब चर्चाओं में है।

काशीपुर रोड का है जहां यातायात पुलिस के सिपाही ने एक ट्राले वाले से पांच सौ रुपये बतौर घूस के लिए। यह आरोप लगाकर लोगों ने सिपाही के साथ जमकर अभद्रता की, बीच बचाव को पहुंचे टीएसआई यशवंत पाल से भी अभद्रता की गई, इस मामले की पुरी वीडियो वहां खडे लोगों ने बना ली।

वीडियो के वायरल होने पर एसएसपी सदानंद दाते ने संज्ञान लेते हुए यातायात पुलिस के सिपाही को निलंबित कर दिया। साथ ही टीएसआई से भी पूछताछ की, एसएसपी का कहना है कि, “कानून हाथ में लेकर अभद्रता करने वालों को भी चिह्नित किया जा रहा है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी, यदि सिपाही वसूली कर रहा था तो उसकी शिकायत की जानी चाहिए थी।”

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें कुछ युवकों ने बाइक पर सवार यातायात पुलिस के आरक्षी अमित गिरी पर ट्राले से पांच सौ रुपये वसूलने का आरोप लगाकर उसके साथ बदसलूकी शुरू की। उसकी नेम प्लेट पर बैच नंबर देखने के लिए हाथ बढ़ाया तो सिपाही ने नेम प्लेट उतार कर जेब में रख ली। युवक सिपाही से पांच सौ रुपये का नोट वापस मांग रहे थे।

वीडियो में सिपाही पर्स निकालता दिख रहा है, सिपाही ने हेल्मेट पहन रखा है, लेकिन युवक जबरन उसका हेल्मेट उतरवा रहे हैं। अंतत: सिपाही हेल्मेट उतार देता है, लोग दिन में लूट मचाने का आरोप लगाते हैं। यह लोग सिपाही की तलाशी लेने की बात भी कहते हैं। टीएसआई यशवंत पाल भी मौके पर दिखाई देते हैं, लेकिन गुस्से में लोग टीएसआई से भी अभद्रता करते हैं। हाथापाई होने पर सिपाही गिरी भागता है तो दो तीन युवक उसके पीछे दौड़ते हैं। वह एक शोरूम में घुस जाता है। इस बीच टीएसआई एक व्यापारी नेता से मदद मांग कर उनकी कार में बैठकर चले जाते हैं।

सात करोड़ की बार्ज खरीदकर भूल गए ‘सरकार’

0

टिहरी, आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहे उत्तराखंड जैसे राज्य में पैसे की बर्बादी का इससे बड़ा नमूना और क्या होगा कि सात करोड़ की लागत से तैयार कराई गई बार्ज बोट (माल ढुलाई) में छेद हो गया है, यह बोट अब चलने लायक नहीं रह गई है। दो साल पहले सिर्फ उद्घाटन वाले दिन ही बार्ज झील में तैरी। इसके बाद यह खड़ी हुई तो कभी नहीं चल पाई। यह अलग बात है कि अफसरों के लिए यह मसला गंभीर नहीं है। उनकी नजर में बोट थोड़ी खराब है, जिसकी मरम्मत के बाद संचालन होने लगेगा, लेकिन दो साल में बार्ज क्यों नहीं चली। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

दरअसल, टिहरी झील बनने के बाद प्रतापनगर ब्लाक के सत्तर से ज्यादा गांवों की करीब डेढ़ लाख आबादी अलग-थलग पड़ गई। जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए यहां के लोगों को 120 किलोमीटर की दूरी अतिरिक्त तय करनी पड़ती है। इसमें करीब चार घंटे लग जाते हैं। जबकि झील को पार कर यह दूरी सिर्फ 50 किलोमीटर रह जाती है। ऐसे में माल ढुलाई के लिए पर्यटन विभाग ने इस बार्ज को तैयार किया। 28 अक्टूबर 2015 को भव्य समारोह कर इसका उद्घाटन किया गया। उस दिन बार्ज का संचालन किया गया। इसके बाद कभी यह नौबत नहीं आई। झील के जलस्तर में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। जब पानी कम हो जाता है तो बार्ज नीचे डूबी चट्टान से टकरा जाती है। यही वजह है कि एक जगह खड़े रहने से यह क्षतिग्रस्त हो गई। छेद होने से इसमें पानी का रिसाव भी होता है। जिसे बार-बार उलीचना पड़ता है।

बार्ज तो खरीदा, पर नहीं बनाए रास्ते 
स्थानीय लोगों का कहना है कि माल ढुलाई के लिए इलाके में सड़कों की भी जरूरत है। दरअसल बार्ज से सामान को उस पार उतारने के बाद उसे ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बार्ज तैयार कराने से पूर्व लिंक रोड बनाई जानी चाहिए थीं। दूसरी ओर बोट संचालन से जुड़े और कोटी कॉलोनी व्यापार मंडल के अध्यक्ष कुलदीप पंवार कहते हैं कि, “यदि बोट संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों को दी जाती तो स्थिति कुछ और होती, यह तो सरासर अफसरों की लापरवाही है।” मामले में जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी गढ़वाल सोबत सिंह का कहना है कि, “झील में खड़े रहने के कारण बार्ज बोट थोड़ा खराब हुई है, जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी और इसके बाद संचालन किया जा सकेगा।”

आयोग ने लिया मसूरी वॉल्वो न चढ़ पाने का संज्ञान

0

देहरादून, मानवाधिकार आयोग ने 15.63 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी वॉल्वो बसों के मसूरी न चढ़ पाने का मामला संज्ञान लिया है। आयोग ने इसको लेकर प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया तो आयोग को गोलमोल जवाब थमा दिया गया। आयोग अध्यक्ष जगदीश भल्ला व सदस्य डॉ. हेमलता ढौंडियाल की खंडपीठ ने जवाब को खारिज करते हुए अब मुख्य अभियंता को मूल पत्रावलियों के साथ व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होने को कहा है। मामले में सुनवाई की अगली तिथि चार नवंबर तय की गई।

मसूरी रोड के अंधे मोड़ों व हेयर क्लिप बैंड को दुरुस्त करने के नाम पर जो 15.63 करोड़ रुपये खर्च किए, उसके बाद भी वॉल्वो बसें मसूरी नहीं चढ़ पा रही हैं। जबकि अब अधिकारियों ने वॉल्वो को मसूरी चढ़ाने के लिए 44.72 करोड़ रुपये का नया इस्टीमेट तैयार किया है।

वहीं, जब लोनिवि ने उत्तराखंड परिवहन निगम अधिकारियों की मौजूदगी में वॉल्वों बसों का ट्रायल के रूप में संचालन कराया तो पता चला कि मार्ग अभी भी वॉल्वो बसों के लिए उपयुक्त नहीं है। पता चला कि 34 और स्थलों पर चौड़ीकरण की जरूरत है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए लोनिवि प्रांतीय खंड से जवाब मांगा था और खंड के अधिशासी अभियंता ने जवाब दिया कि मसूरी रोड पर कार्य करने से पहले वाहनों की औसत स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जबकि अब 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। इस तरह उन्होंने यह भी बताने का प्रयास किया कि मोड़ों को दुरुस्त करने में अब तक खर्च की गई राशि निरर्थक साबित नहीं हुई। आयोग ने इसी जवाब को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि, अधिकारी वास्तविक स्थिति पर पर्दा डाल रहे हैं, देखने वाली बात यह है कि चार नवंबर को होने वाली व्यक्तिगत सुनवाई में लोनिवि के मुख्य अभियंता क्या जवाब दाखिल करते हैं।