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सोनम कपूर इस बीमारी से हैं त्रस्त

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अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर का कैरिअर इस वक्त जहां सफलता के शिखर पर माना जा रहा है, वहीं हाल ही में वे एक ऐसी बीमारी से त्रस्त हो गईं, जिसका कनेक्शन पर्यावरण में आए बदलाव से है। सोनम कपूर ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी इस परेशानी का जिक्र करते हुए एक पोस्ट लिखी है, जिसमें सोनम कपूर ने बताया है कि उनको सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है और ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ।

सोनम कपूर जिस बीमारी का शिकार बताई जा रही हैं, मेडिकल की भाषा में इसे ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। ब्रोंकाइटिस सांस से जुड़ी एक ऐसी बीमारी मानी जाती है, जो ब्रोन्कियल नलिकाओं (ब्रांकाई), की परतों की सूजन की वजह से होती है। सामान्य भाषा में इसे छाती की सर्दी भी कहा जाता है। जानकार डाक्टरों का कहना है कि ब्रोंकाइटिस की बीमारी मुख्य रूप से दो तरह की होती है। एक, ये एक्यूट होती है, यानी एक से तीन सप्ताह की अवधि के बीच इसका असर कम होने लगता है और दूसरा क्रोनिक यानी लगातार दो वर्षों तक, हर साल कम-से-कम तीन माह तक रहने वाली बीमारी।

सोनम कपूर ने अपनी पोस्ट में इसे भयावह अनुभव बताया है और साथ ही ऋचा चड्ढा की एक पोस्ट का भी उल्लेख किया है, जिसमें ऋचा चड्ढा ने लिखा था कि उनको भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऋचा ने तल्खी भरे अंदाज में लिखा था कि क्या मेरे अलावा किसी और को मुंबई के ऊपर धुंध दिख रही है? ऐसा लग रहा है कि हम पाउडर खा रहे हैं।

सोनम कपूर इन दिनों अपनी बहन रेहा की फिल्म ‘वीरां दी वैडिंग’ में बिजी हैं और इसके अलावा 26 जनवरी को अक्षय कुमार के साथ उनकी फिल्म ‘पैडमैन’ रिलीज होगी, तो 30 मार्च को संजय दत्त की जिंदगी पर बनी बायोपिक फिल्म, जिसमें उनकी जोड़ी ‘सांवरिया’ के बाद एक बार फिर रणबीर कपूर के साथ होगी।

शुरु होने जा रही नई फिल्मों में सोनम की एक फिल्म शैली चोपड़ा (निर्माता विधु विनोद चोपड़ा की बहन) के निर्देशन में होगी, जिसमें वे पहली बार अपने पापा अनिल कपूर के साथ काम करेंगी और फिल्म में भी उनकी बेटी का रोल करेंगी। इस फिल्म का टाइटल ‘एक लड़की को देखा तो…’ रखा गया है।

अल्ट्रा हाई डेंस‌िटी फार्मिंग से काश्तकारों को होगा दोगुना मुनाफा

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उत्तरकाशी जनपद के सेब व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्यान विभाग द्वारा अल्ट्रा हाई डेंस‌िटी फार्मिंग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत छोटे क्षेत्र में अत्याधिक मात्रा में सेब के पौधे लगाए जाएंगे। जिससे कम भूमि वाले किसान भी अब सेब उत्पादन के क्षेत्र में कदम रख सकेंगे। इस तकनीक के तहत व्यावसायिक प्रजाती के सुपर चीप, रेड चीप, गेल गाला, स्कारलेट गाला सेब उगाए जा सकते हैं। जिसे बेचकर काश्तकार कम लागत में दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं। राज्य योजना के अंतर्गत लागू इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।

सहायक उद्यान अधिकारी एनके सिंह ने बताया कि, “अभी तक 20 नाली भूमि में सेब के केवल 100 पेड़ ही लगाए जाते थे लेकिन अल्ट्रा हाई डेंस‌िटी (अत्याधिक घनत्व) तकनीक का प्रयोग करने से काश्तकार कम क्षेत्र में बहुत ज्यादा पेड़ लगा सकते हैं। जिसमें किसान की लागत में कमी आने के साथ ही उसका मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा। इस तकनीक के तहत पौधों के रुट स्टॉक (मूल वृंत) में बदलाव लाकर पेड़ के आकार को छोटा कर दिया जाता है, जिससे पेड़ केवल ढाई से तीन फुट की ऊंचाई तक ही बढ़ता है।”

आमतौर पर सेब के पेड़ में फल आने में चार से पांच साल तक का समय लग जाता है लेकिन इन पेड़ों में एक साल बाद ही फल आने लगते हैं।योजना के पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर मोरी क्षेत्र के देवजानी गांव में इस तकनीक का प्रयोग शुरू किया गया है। यहां पर विभाग द्वारा काश्तकार एसएस रावत की 20 नाली भूमि में 1100 सेब के पौधे लगाए हैं। करीब 12 लाख के इस प्रोजेक्ट के लिए 80 प्रतिशत धनराशी विभाग तथा 20 प्रतिशत धनराशी काश्तकार द्वारा लगाई गई है।

इसमें विभाग द्वारा सोलर फैंसिंग, ओलावृष्टी से बचाव के लिए सुरक्षा जाल, टपक सिंचाई यंत्र आदि भी लगाए गए हैं। आराकोट, नौगांव क्षेत्र के कुछ किसानों के यहां भी इस योजना के तहत कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर किसान इस तकनीक को अपनाते हैं तो वे कम खर्च में ही बगीचे की सुरक्षा, सिंचाई, खाद, दवाई आदि कार्य कर उच्च गुणवत्ता के अधिक फल प्राप्त कर सकते हैं। 

केएमवीएन कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल शुरु

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नैनीताल- दिवाली बोनस नही मिलने से गुस्साए कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारियों ने संविदा कर्मियों को नियमित करने समेत अन्य मांगों को लेकर बेमियादी कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। संयुक्त कर्मचारी महासंघ केएमवीएन के बैनर तले कर्मचारी निगम मुख्यालय में एकत्र हुए और सरकार व निगम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही धरने पर बैठ गए।

इस मौके पर महासंघ अध्यक्ष दिनेश गुर्रानी ने कहा कि निगम के इतिहास में मजबूत वित्तीय स्थिति के बाद दिवाली बोनस नही दिया गया। जीएमवीएन में 2008 के संविदा कर्मी नियमित हो गए, जबकि केएमवीएन में 2001 से संविदा कर्मचारियों को नियमित नही किया गया। ऊपर से निगम प्रबंधन ने हाल ही संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति को विज्ञापन जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञापन निरस्त करने, वेतन विसंगति दूर करने व संविदा कर्मियों की नियमित नियुक्ति के आदेश जारी नही होने तक आंदोलन किया जाएगा।

एसएसपी से मिलीं आशाएं, लगाई न्याय की गुहार

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देहरादून। उत्तराखंड आशा यूनियन की आंदोलनकारी महिलाओं ने पुलिस के व्यवहार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इसे लेकर आशाओं ने एसएसपी निवेदिता कुकरेती से मिलकर न्याय की गुहार लगाई और अपना पक्ष रखा।

गुरुवार को आशाएं न्याय की गुहार लगाने एसएसपी कार्यालय पहुंची। आशा यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे ने एसएसपी से बताया कि गत मंगलवार को सरकार के प्रति रोष स्वरूप कुछ आंदोलनकारी महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ गई थीं। इस दौरान पुलिस और आशाओं के बीच तनातनी का माहौल बन गया। कुछ पुलिस कर्मियों ने आंदोलनकारी महिलाओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। जिसे लेकर आशाओं में नाराजगी है।
उन्होंने एसएसपी से कहा कि आशा महिलाएं हमेशा से ही कानून और शांति का पालन करती रही हैं। यही कारण है कि वह अपना आंदोलन शांतिपूर्वक करती हैं। इस मौके पर यूनियन ने एसएसपी को एक पत्र भी सौंपा। वहीं एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने आशाओं से कहा कि कानून सर्वोपरि है। किसी को भी शांति भंग करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने आशा महिलाओं को भरोसा दिलाया कि बावजूद इसके वह उनकी शिकायत की छानबीन करेंगी। साथ ही इस पर गंभीरता से विचार भी किया जाएगा। इससे पूर्व आशा वर्करों ने गुरुवार को भी अपना आंदोलन जारी रखा। विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के प्रति नारेबाजी की। इस अवसर पर अंजू थापा, स्नेहलता, नीलम वर्मा, लोकेश, परविंदर, सुनीता चौहान, मीना जखमोला, हंसी नेगी, नीरज यादव आदि मौजूद रहे।

नाव खरीद में बड़े घोटाले का अंदेशा

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हरिद्वार। आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली नावों के परीक्षण के दौरान एक बड़ी खामी देखने को मिली। नाव इतनी भारी है कि उन्हें उठाने के लिए क्रेन की जरूरत पड़ रही है। आपदा प्रबंधन टीम के अधिकारियों द्वारा करीब 24 लाख रुपये की कीमत से खरीदी गई दो नावों में जिलाधिकारी दीपक रावत ने बड़ी खामियां पाई हैं।

दरअसल, डीएम दीपक रावत ने जब करीब 24 लाख रुपये की कीमत से खरीदी गई इन दो नावों का प्रदर्शन देखा तो पाया कि इन नावों का प्रयोग आपदा के दौरान नहीं किया जा सकता। जिलाधिकारी ने बताया कि डेमोंस्ट्रेशन के दौरान उन्होंने पाया कि नाव को उठाने में करीब 24-25 लोगों के साथ ही क्रेन की मदद लेनी पड़ रही थी। ऐसी स्थिति में इसका आपदा के दौरान इस्तेमाल करना संभव नहीं है। डीएम ने कहा कि इन नावों की खरीददारी में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि धन का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए इसकी जांच कराई जाएगी। डीएम ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन नावों को यहां से भिजवा दिया जाएगा और इनका इस्तेमाल टिहरी झील जैसे स्थान पर होगा, जहां सही से इनका उपयोग हो सके।

निर्माण एंजेसी की होगी जिम्मेदारी तय

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देहरादून। शिक्षा विभाग में हो रहे निर्माण कार्यो को लेकर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने एक बार फिर अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर जरूरी दिशा निर्देश जारी किए। शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि शिक्षा विभाग में चल रहे निर्माण कार्य को करने वाली एजेंसी ये विश्वास दिलाएगी कि 10 साल तक सरकारी भवनों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं पाई जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने शिक्षा निदेशालय में शिक्षा महकमे से सभी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्री ने अधिकारियों से शिक्षा महकमे में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की कार्यों में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता को लेकर काम्प्रोमाइज नहीं किया जाएगा। साथ ही जो भी एजेंसी काम करे उनसे 10 सालों तक काम की प्रतिभूति ली जाए। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सरकारी काम में आ रही किसी भी प्रकार की दिक्कत को तुरंत उन्हें सूचित करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जमीन आदि को लेकर किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकल रहा हो तो उनके संज्ञान में मामले को डाला जाए। आपको बता दें कि शिक्षा मंत्री ने विभाग के काम के लिए भविष्य में एक ही एजेंसी को काम देने की बात की है। साथ ही उन्होंने कंस्ट्रक्शन क्वालिटी को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद उन्होंने एक ही एजेंसी से निर्माण कार्य करवाने के निर्देश दिए हैं। अब उन्होंने निर्माण एजेंसी से 10 साल तक काम को लेकर एश्योर करने को कहा है।

तीर्थ नगरी में बढ़ते प्रदूषण से फैल रही बीमारियां

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ऋषिकेश। उत्तराखंड में बार-बार मौसम अपना रंग बदल रहा है। पर्यावरण प्रदूषण की वजह से स्थिति और अधिक भयावह दिखने लगी है। लोगों को सुबह नौ बजे तक सर्दी का अहसास और इसके बाद तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के इस उतार चढ़ाव का असर स्वास्थ्य पर भी साफ दिख रहा है। खांसी, बुखार, सांस आदि के मरीजों में खासा इजाफा नजर हो रहा है।

लगातार बढ़ते प्रदूषण से आम जन ही नहीं, बल्कि मौसम भी बीमार हो रहा है। आधी रात के बाद अचानक सर्दी हो जाना, सुबह नौ बजे के बाद तेज धूप से मई-जून के महीने जैसी स्थिति बनने का कारण प्रदूषण ही है। इस प्रदूषण से ही मौसम में बदलाव हो रहा है। इस समय मौसम के बदलाव से हवा में संक्रमण फैल रहा है। इसकी चपेट में आकर लोग बीमार हो रहे हैं। बुखार, खांसी, सांस की बीमारियों लोग पीड़ित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो मौसम के उतार चढ़ाव के कारण एडिनो, राइनो वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। हवा में इसका फैलाव हो रहा है। सांस के रोगी जल्द इसकी चपेट में आ जाते हैं। इस समय सबसे अधिक ब्राउंसोलाइटस वायरल का संक्रमण है। यह बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे बच्चों में बुखार आना, खांसी, सांस तेज चलना आदि की समस्या हो जाती है। निर्मल आश्रम अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अमित अग्रवाल के अनुसार इस मौसम में सावधानी रखना बहुत जरूरी है। बुखार, खांसी, सांस आदि की समस्या पर घर में आराम करें, बाहर जाना ही पड़े तो मुंह पर रुमाल आदि रखें ताकि संक्रमण न हो।

एक बार फिर दून में होगी ”राजपुर नेचर फेस्टिवल” की धूम

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देहरादूनः दून घाटी की विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का प्रदर्शन करने वाला बहुप्रतिक्षित ”एनवल राजपुर नेचर फेस्टिवल” राजपुर रोड के क्रिस्चियन रिट्रीट सेंटर में 4 नवंबर से शुरू होकर तीन दिन तक जारी रहेगी। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ईको-टूरिज्म विंग और उत्तराखंड फॉरेस्ट डिर्पाटमेंट कार्पोरेशन ने राजपुर कम्यूनिटी के इस पहल, को अपना समर्थन देने का फैसला किया हैं। इस इवेंट में कई हैरिटेज वॉक, नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग टूर,सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ तीन संगठन – तितली ट्रस्ट, नेचर इनिशिएटिव और आईएनटीईसीई भी इस कार्यक्रम का समर्थन करेंगे।

रिनु पॉल, राजपुर कम्युनिटी इनिशिएटिव की अध्यक्ष, ने कहा कि, “इस साल हम कई स्किल डेवलपमेंट एक्टिविटी का आयोजन करने जा रहे हैं, जिसमें शहर के जेल के एक कर्मचारी सदस्य से मिट्टी के बर्तन, ओरिगामी, कांच के घर, पेंटिंग और पक्षीयों के घर बनाने के लिए ट्रेनिंग लेना भी शामिल होगा। इसके अलावा, स्टार गेजिंग की तरफ से एक प्रस्तुति होगी जहां बच्चों को हमारी आकाशगंगा और विभिन्न ग्रहों के बारे में सीखना होगा।”

इस पूरे कार्यक्रम का एक और आर्कषण होगा ”पारंपरिक खाने का एक्जिबिशन” और ”देहरादून फोटोग्राफी क्लब द्वारा एक फोटो एक्जिबिशन” जिसकी थीम होगी राजपुर का इतिहास जिसमें राजपुर और आसपास की बेहतरीन फोटो की प्रदर्शनी होगी।

 

अंधेरे गलियारों में ज्ञान की रोशनी बिखेर रहा ”रूम टू रीड” अभियान

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देहरादून। कुसुमा देवी (35) ने पहली बार अपना नाम लिखा तो आंखें नम हो गईं। उन्होंने अपनी 10 वर्षीया शिक्षक व बेटी अंजू को गले लगा लिया। अंजू रूम टू रीड अभियान से जुड़े प्राथमिक विद्यालय ननूरखेड़ा में कक्षा तीन की छात्रा है। यह संस्था शिक्षा विभाग से अनुबंध के तहत प्रदेश के तीन जनपदों में अब तक 764 पुस्तकालय स्थापित कर चुकी है।

रूम टू रीड ने विश्वभर में 20,000 पुस्तकालयों का निर्माण पूरा किया है। इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए संस्था ने प्राथमिक विद्यालय ननूरखेड़ा में प्राथमिक विद्यालय ननूरखेड़ा में मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सह-संस्थापक एरिन गंजू व कंट्री डायरेक्टर सौरव बैनर्जी की अगुवाई में एक समारोह का आयोजन किया। जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बच्चों के बीच वह भी बच्चे बन गए और उनका उत्साह देख गदगद दिखाई दिए। उन्होंने शिक्षक-छात्रों से फीडबैक किया। हर किसी ने स्कूल लाइब्रेरी में एक नई किताब दी।
दरअसल अंजू की मां कुसुमा देवी और पिता रामचंद्रन पासवान दिहाड़ी मजदूर और दोनों ही अशिक्षित हैं। स्कूल द्वारा की गई पहल और मौजूदा संसाधनों ने इस परिवार के बीच शिक्षा की अलख जगाई। उस पर स्कूल लाइब्रेरी और पढऩे की ललक ने सदियों पुरानी एक परंपरा को तोडऩे में अहम भूमिका निभाई।
रूम टू रीड की चीफ डेवलपमेंट व कम्यूनिकेशन ऑफिसर गीता मुरली कहती हैं कि शुरुआत हमेशा मुश्किल होती है, विशेषकर एक ऐसे देश में जहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। पुस्तकालयों में पढऩे की आदत को विकसित करने के लिए बच्चों को अतिरिक्त ध्यान देने के लिए शिक्षकों को समझना मुश्किल काम है। हालांकि, अनुभव बताता है कि बदलाव सबसे बड़ा प्रेरक है। यदि कोई बच्चा जानता है कि कैसे पढऩा और लिखना है, तो वह स्वयं अध्ययन करता है और तब उस पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि संस्था स्कूलों में पुस्तकालय स्थापित करने में सहायता करती है। यह भी देखा जाता है कि क्या छात्र वास्तव में किताबें पढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों की पठन क्षमताओं का परीक्षण भी समय-समय पर किया जाता है।

जनवरी में होने वाले स्कीइंग प्रतियोगिता के लिए तैयारियों में जुटा औली

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औली। चमोली में अंतरराष्ट्रीय एफआईएस रेस का आयोजन 15 जनवरी से 21 जनवरी, 2018 में किया जायेगा। इसमें विभिन्न प्रकार की स्कीइंग प्रतियोगिताएं की जायेंगी। इस प्रतियोगिता में पाये अंक के आधार पर ही खिलाड़ी ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करेंगे। एफआईएस रेस के आयोजन की तैयारियों के बारे में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बुधवार को सचिवालय में बैठक की।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता के लिए फूल प्रूफ इंतजाम किये जायें। उन्होंने यह भी कहा कि देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए औली के स्लोप का इस्तेमाल किया जाय। इस स्लोप के जरिये बर्फ में होने वाले खेलों को किया जा सकता है। बर्फ न होने की स्थिति में मशीन से बर्फ बनायी जाये। औली के स्लोप को टूरिस्ट डेस्टीनेशन के रूप में विकसित किया जाये। एफआइएस (इंटरनेशनल फेडेरेशन आॅफ स्कीइंग) रेस के सफल आयोजन के बारे में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि उपकरणों की मरम्मत और स्लोप का कार्य तय समय में पूरा किया जाये। बताया गया कि आयोजन समिति सहित अन्य समितियों का गठन हो गया है। रोपवे, स्की लिफ्ट, चेयर कार के सुरक्षा प्रमाण पत्र के लिये कार्यवाही की जा रही है। औली में पहले से ही मौजूद उपकरण पम्प हाउस, स्नो मेकिंग मशीन, मोबाइल गन्स, हस्की ग्रूमर, एवरेस्ट ग्रूमर, स्नो स्कूटर, स्नो बीटर, पोमा स्की लिफ्ट, लेक आदि को दुरूस्त किया जा रहा है। जोशीमठ-औली रोड मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। बताया गया की औली देश का पहला एफआईएस से मान्यता प्राप्त स्थल है। एफआईएस रेस से लगभग 30 स्थानीय प्रतिभागी और बड़ी संख्या में देशी-विदेशी प्रतिभागी भाग लेंगे।
बैठक में विंटर गेम्स एसोसिएशन आॅफ उत्तराखण्ड के पूर्व अध्यक्ष एस.एस.पांगती, वर्तमान अध्यक्ष एस.पी.चमोली, सचिव वित्त अमित सिंह नेगी, सचिव खेल भूपिंदर कौर औलख, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।