अब घोटाले की फाईलों के हस्ताक्षरों की जांच
दो दिन बाद भी नहीं मिला दीपचंद
उत्तरकाशी जिले में भटवाड़ी तहसील के तहत निर्माणाधीन जसपुर पुराली मोटर मार्ग में हुए भूस्खलन में दबे दीपचंद सिंह राणा को अभी तक निकाला नहीं जा सका है। हालांकि प्रशासन पूरे दल बल के साथ बीते दो दिनों से प्रयास कर रहा है, लेकिन मलबा अधिक होने की वजह से सफलता नहीं मिल पाई है।
मंगलवार शाम को 59 वर्षीय पुराली निवासी इस मार्ग से घर जा रहे थे, जब उनके ऊपर पहाड़ से मलबा गिर गया था। जिसकी सूचना उनके पीछे चल रहे ग्रामीणों द्वारा दी गई थी। जिसके बाद से ही प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ व लोनिवि की टीम मलबा हटाकर उन्हें ढूंढने का प्रयास कर रही है।
घटना स्थल पर मौजूद एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि, “भूस्खलन में काफी बड़ी चट्टानें व मलबा गिरा है, जिसे हटाने के लिए उक्त स्थान पर पर्याप्त जगह न होने की वजह से ज्यादातर कार्य एक मशीन व मजदूरों द्वारा ही कराया जा रहा है, जिसमें ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जा रहा है, लेकिन भौगोलिक दिक्कतों के चलते कार्य को पूरा करने में समय लग रहा है।” उन्होंने जल्द ही सर्च ऑपरेशन के पूरा होने की उम्मीद जताई है।
रुड़की में पेड़ से टकराई बस, एक की मौत 25 घायल
रुड़की। शुक्रवार सुबह रुड़की से भगवानपुर जा रही प्रो-लैब कंपनी की एक बस जिसमें लगभग 50 से 55 महिला कर्मचारी सवार थीं, वह किशनपुर के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घटना में कुल 25 महिलाएं घायल हुई हैं। जिसमे से दो की गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर किया है, उपचार के दौरान एक महिला की मौत हो गई है। घायलों का उपचार रुड़की के विभिन्न निजी अस्पतालों में किया जा रहा है।
अगवानपुर स्थित प्रो-लैब कम्पनी बस जो प्रतिदिन की तरह सुबह आठ बजे रुड़की से 50 से अधिक महिला कर्मचारियों को लेकर रवाना हुई। जैसे ही बस किशनपुर के समीप पहुंची तो सामने से आ रहे एक बाइक सवार को बचाने के चक्कर मे सड़क के किनारे खड़े एक पेड़ से जाकर टकरा गई। हादसे में बस में सवार करीब प्रत्येक महिला के हल्की चोटें आई हैं। मौके पर जमा भीड़ ने घायलों को नगर के निजी अस्पतालों में भिजवाया। उपचार के दौरान रामपुर निवासी इसरत की मौत हो गई। घटना की सूचना पाकर अस्पताल में घायलों के परिजनों की भीड़ जमा हो गई।
हादसे में रिहाना परवीन, कृष्णा, सीमा, शिमली, ऊषा, सीमा चौहान, शिल्पा, संगीता शर्मा पार्वती,सहाना, सुरैया, तरन्नुम,सिमरन आदि घायल हैं। हादसे के बाद बस के चालक और परिचालक मौके से फरार हो गए।
टाइगर जिंदा है के साथ रिलीज होगी ये फिल्म
क्रिसमस के मौके पर 22 दिसंबर को रिलीज होने जा रही सलमान खान और कैटरीना कैफ की जोड़ी वाली फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ को टक्कर देने के लिए एक फिल्म सामने आ गई है, जो 22 दिसंबर को ही रिलीज होगी, ये कोई हिंदी फिल्म नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार, ‘टाइगर जिंदा है’ के सामने 22 दिसंबर को बालीवुड की नहीं, बल्कि हालीवुड की फिल्म ‘जुमांजी-वेलकम टू द जंगल’ रिलीज होने जा रही है।
इस हालीवुड फिल्म के हीरो डेवेन जानसन हैं, जो डब्लू डब्लू एफ में द राक के नाम से जाने जाते हैं और प्रियंका चोपड़ा की पहली हालीवुड फिल्म बेवाच में हीरो रहे हैं। जुमांजी एक एडवेंचर फिल्म है, जिसका अब दूसरा पार्ट रिलीज होने जा रहा है। इसका पहला पार्ट 1995 में रिलीज हुआ था और बाक्स आफिस पर इसे बड़ी कामयाबी मिली थी। इसे भारत में अंग्रेजी के अलावा डब करके हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी रिलीज किया जाएगा।
‘द राक’ के अलावा इस फिल्म में जैक ब्लैक, केविन हार्ट, कैरेन जिलियन, निक जोनास और बॉबी कैनावले की भी प्रमुख भूमिकाएं हैं। इसका निर्देशन जेक कास्डन ने किया है।
तुम्हारी सुलू में आयुष्मान खुराना की झलक
रिलीज के लिए तैयार हो चुकी विद्या बालन की नई फिल्म ‘तुम्हारी सुलू’ में आयुष्मान खुराना मेहमान भूमिका में नजर आएंगे। उनके रोल के बारे में अभी बताया नहीं गया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से पता चला है कि वे फिल्म में वे अपना ही रोल करेंगे, यानी परदे पर वे आयुष्मान के तौर पर ही होंगे। फिल्म में उनके सीन विद्या बालन के साथ होंगे और पहली बार उन्होंने विद्या के साथ काम किया है।
आयुष्मान खुराना के लिए ये साल अच्छा रहा। इस साल उनकी दो फिल्में ‘शुभ मंगल सावधान’ और फिर ‘बरेली की बर्फी’ को बाक्स आफिस पर बड़ी सफलता मिली, लेकिन परिणीती चोपड़ा के साथ बनी यशराज की फिल्म ‘मेरी प्यारी बिंदू’ असफल रही। विद्या बालन की फिल्म ‘तुम्हारी सुलू’ का प्रमोशन जारी है और ये फिल्म 17 नवंबर को रिलीज होने जा रही है। सु
रेश त्रिवेणी की बतौर निर्देशक पहली फिल्म का निर्माण ‘नीरजा’ बनाने वाले अतुल केसबेकर और तनुज गर्ग की टीम ने टी सीरिज के साथ मिलकर किया है। विद्या बालन ने इसमें एक आरजे का रोल किया है। फिल्म में उनके साथ मानव कौल और नेहा धूपिया के अलावा असली आरजे मलिश्का भी हैं।
रेशम एवं मधुमक्खी पालन पर डीएम ने दिया बल
पौड़ी। पौड़ी गढ़वाल में भारत सरकार के संकल्प से सिद्धि कार्यक्रम के तहत कृषकों की आय को दो गुनी करने को लेकर आयोजित बैठक में डीएम ने सभी रेखीय विभागों को अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि, उद्यान, पशुपालन, डेयरी, ग्राम्य विकास, आईएलएसपी समेत विभिन्न विभागों को पांच वर्षों के लिए कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।
विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी सुशील कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने सरकार के संकल्प से सिद्धि कार्यक्रम को बेहद गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने सभी विभागों से किसानों को आय में समेकित वृद्धि करने को लेकर पांच सालों के लिए प्रगति कार्य योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से संबंध रखने वाले विभाग कृषकों की आय में वृद्धि करने के लिए ठोस रणनीतियां बनायें। इस मौके पर डीएम ने प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के साथ ही मार्केटिंग तथा वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए कार्य करने को कहा। विभागों को आगामी पांच वर्षों तक के कलस्टर का क्षेत्र बढ़ाने तथा चिन्हीकरण करने पर जोर दिया। सकल घरेलू उत्पाद के लिए झंगोरा, रामदाना, गेहूं, मंडवा, दलहन, तिलहन, अखरोट, सेब, बेमौसमी सब्जी, मसालों की खेती आदि को बढ़ाकर कृषकों की आय बढ़ाने को कहा। उन्होंने पशुपालन, मत्स्य आदि के साथ ही डेयरी विभाग के अधिकारियों के निर्देशित किया कि जनपद के जिन क्षेत्रों में कलस्टर बेस खेती की जा रही है ऐसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिये जाने को कहा। उन्होंने कहा कि ग्राम्या के माध्यम से पैकिंग एवं ब्रीडिंग के प्रोसेसिंग प्लांट लगाकर काश्तकारों को जानकारी उपलब्ध करायें।
डीएम ने रेशम समेत मधुमक्खी पालन से भी काश्तकारो की आय बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने रेखीय विभागों से कहा कि वे बंजर जमीन को टेकअप करते हुए पांच सालों का लक्ष्य तय करें। इस मौके पर सीडीओ रवनीत चीमा, डीएफओ लक्ष्मण सिंह, डीडीओ वेद प्रकाश, एपीडी सुनील कुमार, सीएओ डॉ. डीएस राणा, सीएचओ डॉ. नरेंद्र कुमार समेत रेखीय विभागों के अधिकारी के साथ ही कृषक बंधु स्वयं सहायता समूह, गैर-सरकारी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
केदारनाथ पुनर्निर्माण में पत्थरों का रोड़ा, केंद्र को भेजी रिपोर्ट
देहरादून। केदारनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण कार्यों में पत्थरों का संकट खड़ा हो गया है। मंदिर में पुनर्निर्माण व सुधार कार्य कर रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) विभाग को फर्श निर्माण के लिए पत्थर ही नहीं मिल रहे। दरअसल, केदारनाथ क्षेत्र में जो पत्थर थे, उन्हें पुनर्निर्माण के अन्य कार्यों में प्रयुक्त किया जा चुका है। केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से फिलहाल काम तो रुका है, लेकिन अगले सीजन जब कपाट खुलेंगे तो अधिकारियों को फर्श निर्माण के लिए पत्थर नहीं मिल पाएंगे। एएसआइ देहरादून सर्किल की अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना इस संबंध में संस्कृति मंत्रालय को रिपोर्ट भेज रही हैं।
अधीक्षण पुरातत्वविद् धस्माना के अनुसार केदारनाथ मंदिर में पूरब व उत्तर दिशा के फर्श पर पत्थर लगाने का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। जबकि दक्षिण व पश्चिम दिशा में पत्थर लगाने का काम अभी शुरू किया जाना है। करीब 600 वर्गमीटर भाग पर पत्थर लगाए जाने हैं। एक पत्थर का आकार करीब डेढ़ वर्गफीट है। इस तरह 2000 से अधिक पत्थरों की जरूरत है। तभी मंदिर की सभी दिशाओं के फर्श पर पत्थर लग पाएंगे। पुरातत्व नियमों के अनुसार ऐतिहासिक धरोहरों पर वहीं सामग्री लगाई जाती है, जो पहले रही है। इसके अनुसार फर्श निर्माण के लिए आसपास मिलने वाले पत्थरों का प्रयोग का किया, लेकिन अब आसपास के इलाके के पत्थर भी समाप्त हो चुके हैं। अन्य क्षेत्रों से पत्थर लाने के लिए काम की लागत भी बढ़ जाएगी। लिहाजा, इसका प्रस्ताव बनाकर संस्कृति मंत्रालय को भेजा जा रहा है। ताकि अगले सीजन में कपाट खुलते ही फर्श निर्माण का काम शुरू किया जा सके। एएसआइ की अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना का कहना है कि केदारनाथ में विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते वैसे भी काम करने अनुकूल दिन बहुत कम मिल पाते हैं। लिहाजा, समय पर पत्थरों की तलाश पूरी की जानी जरूरी है। तभी अगले सीजन में काम पूरा किया जा सकेगा।
निचले क्षेत्रों में भी होगी तलाश
एएसआइ की देहरादून सर्किल की अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना के मुताबिक केदारघाटी के निचले स्थानों में मंदिर में प्रयुक्त किए गए पत्थर मिल सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यदि पत्थर मिल पाए तो निर्माण कार्य की जटिलता कुछ कम हो पाएगी।
जनवरी में मोटर साइकिल पर आयेगा रोमांच का “स्नो स्टॉर्म”
जहां एक तरफ उत्तराखंड के बड़े तपके की कमाई चार धाम यात्रा से जुड़ी है वहीं आज हम आपकों मिलवाते हैं एक ऐसे शख्स से जिनका काम चारधाम यात्रा के खत्म होने के बाद शुरू होता है।उत्तरकाशी के तिलक सोनी यात्रा खत्म होते ही अपनी मोटरसाइकिल को औऱ खुद को “स्नो स्टॉर्म” के लिये तैयार करने लगते हैं। जी नहीं ये किसी बर्फीले तूफान का नाम नही है बल्कि पहाड़ों पर बाइकिंग के चाहने वालों के लिये होने वाले राइडिंग रोमांच का नाम है।
तिलक सोनी “वेह्यर ईग्लस डेयर” के बैनर तले अपनी रॉयल ऐनफील्ड बाइक के साथ इस राइडिंग रोमांच की तैयारी में लग जाते हैं। सोनी कहते हैं कि, “सर्दियों में जब सारे पहाड़ बर्फ की चादर से ढके होते हैं, बाइक चलाना जोखिम भर होता है, इस रोमांच के लिये हम ये राइडिंग करते हैं।”

तिलक सोनी के द्वारा, तीन साल पहले, शुरू किया गया यह कारवां बढ़ता चला जा रहा है। जनवरी 2014 में पहले सीजन में 22 बाइक सवारों ने हिस्सा लिया था जो अब बढ़ कर 33 के पार पहुंच गया है। ये बाइकर 26-29 जनवरी के बीच 200 किमी का सफर उत्तराकाशी और गंगोत्री के बीच तय करेंगे। इस रेस की खास बात ये है कि इसमें न सिर्फ आपको रोमांच ही नहीं बल्कि ऐसे मौसम व रास्तों में सुरक्षित बाइक चलाने की अंतर्राष्ट्रीय एक्पर्टों से ट्रेनिंग भी मिलती है। इसमें बाइक का रखऱखाव, मौसम का आंकलन, और कठिन परिस्थितियों में सर्वाइवल शामिल है।
सोनी इस ट्रेनिंग की अहमियत बताते हुए कहते हैं कि, “2017 में रेस के शुरूात में काफी बाइकर बर्फ और पाले के चलते फिसल गये थे। लेकिन ट्रेनिंग मिलने के बाद यह घटनायें कम हुई है।”सफलता पूर्वक रेस खत्म करने पर “एक्सट्रीम वेदर राइडर” का सर्टिफिकेट भी मिलता है।
अगर आप रोमांच और जोखिम से भरे सफर में भाग लेना चाहते है तो इंतजार किस का? जनवरी 2018 में होने वाले “स्नो स्टॉर्म ” के लिये उत्तरकाशी पहुंचे।
दून मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर एमसीआई ने लगाया अड़ंगा
देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के तीसरे बैच की मान्यता पर अड़ंगा लग गया है। एमसीआई ने कॉलेज में फैकल्टी की कमी सहित कई खामियां गिनवाई हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए एक माह का समय दिया है। जिसके बाद एमसीआई की टीम कॉलेज का पुन: निरीक्षण करेगी।
दून मेडिकल कॉलेज को गत वर्ष 150 एमबीबीएस सीट की मान्यता मिली थी। इस साल एमसीआई ने द्वितीय एलओपी (लेटर ऑफ परमीशन)दी। हाल में यहां एमबीबीएस के दो बैच अध्ययनरत हैं। अगले साल अगस्त-सितम्बर में यहां तृतीय बैच के दाखिले होंगे। जिसकी मान्यता के लिए एमसीआई की टीम ने करीब दो माह पूर्व मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का निरीक्षण किया था। जिसमें व्यवस्थाएं अनुकूल नहीं पाई गई हैं। एमसीआई ने फैकल्टी की कमी सहित कई खामियां गिनवाई हैं। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन को कंपलाइंस भेजी गई है। खामियां दूर करने के लिए एक माह का समय दिया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि समय रहते यह सभी खामियां दूर कर ली जाएंगी। एमसीआई द्वारा इंगित की गई खामियों पर काम शुरू कर दिया गया है।
कॉलेज में दाखिले पर रोक नहीं लगी है, बल्कि एमसीआई ने कुछ खामियां इंगित कर इन्हें दूर करने के लिए एक माह का समय दिया है। पिछली दफा भी एमसीआई के तीन निरीक्षण हुए थे। इनमें एक नियमित जबकि दो निरीक्षण कंपलाइंस के तहत किए गए।
– डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता, प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज
तृतीय बैच के दाखिले अगले साल अगस्त में होने हैं। इस बीच खामियां दुरुस्त करने का पर्याप्त समय है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और एमसीआई ने पूर्व में भी कंपलाइंस भेजी है। जिसका वक्त पर समाधान किया गया और मान्यता भी मिली।
– डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा
बच्चा वार्ड बंद होने के कारण इसके बेड चर्म रोग में एडजस्ट करने पड़े हैं। मरीजों के अत्याधिक दबाव के कारण अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं। नया ओपीडी ब्लॉक लगभग बनकर तैयार है। इसी तरह कुछ छोटी-छोटी खामियां हैं, जिन्हें दुरुस्त करते वक्त नहीं लगेगा। मुख्य समस्या फैकल्टी की है।
– डॉ. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल
ये बताई खामियां
-आवश्यक फैकल्टी में 25 फीसद की कमी।
-रेजिडेंट की 14.28 फीसद कमी।
-नेत्र रोग की ओपीडी में मामूली सर्जरी के लिए कक्ष नहीं।
-वार्डों में बेड के बीच दूरी मानकों के अनुरूप नहीं।
-चर्म व यौन रोग से जुड़े बेड नहीं।
-कई वार्ड में की सुविधा ही नहीं।
-माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फोरेंसिक मेडिसन व पैथोलॉजी विभाग निष्क्रिय।
-केंद्रीयकृत पुस्तकालय में 40 के सापेक्ष 30 ही जर्नल।
-अस्पताल में लेक्चर थियेटर नहीं।
-अस्पताल में इंटरकॉम तक की सुविधा उपलब्ध नहीं।
केविएस में अब छात्र ही नहीें स्कूलों को भी मिलेंगे नंबर
देहरादून। स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को तो अंक हमेशा से ही मिलते आए हैं लेकिन अब स्कूलों को भी उनके प्रदर्शन के आधार पर अंक प्रदान किए जाएंगे। खास बात यह कि उनके प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी रैंकिंग भी तय की जाएगी। सात मानकों के आधार पर केविएस के स्कूलों को चार श्रेणियों में ग्रेडिंग प्रदान की जाएगी।
स्कूलों में अकादमिक स्तर को सुधारने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के मकसद से अब स्कूलों को कई मानकों पर अपना प्रदर्शन सुधारना होगा। केविएस से जुड़े स्कूलों में बेहतर संसाधन और सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अब स्कूलों को निर्धारित मानकों पर खरा उतरना पड़ेगा। केवि स्कूलों को सात मानकों के आधार पर रैंकिंग प्रदान की जाएगी। स्कूलों को चार श्रेणियों में रैंकिंग दी जाएगी। रैंकिंग के जरिए स्कूलों के साल भर के प्रदर्शन पर भी नजर रखी जाएगी। अंत में रैंकिंग के आधार पर स्कूलों को खामियों की जानकारी भी मिलेगी ताकि वे अपने प्रदर्शन को बेहतर कर सकें। देहरादून की बात करें तो यहां तकरीबन एक दर्जन केंद्रीय विद्यालय हैं। इन स्कूलों के परीक्षा परिणामों पर गौर करें तो कुछ चुनिंदा स्कूलों का परिणाम बेहतरीन और कुछ स्कूलों का औसत रहता है। रैंकिंग व्यवस्था के बाद इन स्कूलों को अपने प्रदर्शन का आंकलन करने में भी काफी मदद मिलेगी।
सात मानकों पर होगी रैंकिंग
रैंकिंग के पैमाने में केंद्रीय विद्यालयों का आंकलन सात मानकों के आधार पर होगा। स्कूलों को उनके शैक्षिक प्रदर्शन, स्कूल प्रशासन, सामाजिक रूप से भागीदारी, स्कूल अवसंरचना, वित्त ग्रेस अंक व निरीक्षकों द्वारा समग्र पर्यवेक्षण के आधार पर किया जाएगा। खास बात यह कि इन सात मानकों के लिए अलग अलग अंक निर्धारित हैं, इन्हीं अंकों के जोड़ से रैंक प्रदान की जाएगी। रैंक चार श्रेणियों में प्रदान की जाएगी। इनमें बेहतरीन प्रदर्शन (उत्कृष्ट) करने वाले स्कूलों को ‘ए’ श्रेणी, बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूल ‘बी’, अच्छा प्रदर्शन पर ‘सी’ और प्रदर्शन का स्तर मानकों के अंक औसत रहने पर ‘डी’ श्रेणी में रखा जाएगा।
यह है अंक विभाजन
मानक अंक
शैक्षणिक प्रदर्शन 500
स्कूल अवसंरचना 150
स्कूल प्रशासन 120
वित्त 70
सामुदायिक भागीदारी 60
ग्रेस अंक 90
निरीक्षण 10
……….
कुल अंक 1000
……….
प्रतिशत के आधार पर निर्धारित हैं श्रेणियां
प्रतिशत श्रेणी
80-100 प्रतिशत ‘ए’ (उत्कृष्ट)
60-79.9 प्रतिशत ‘बी’ (बहुत अच्छा)
40-59.9 प्रतिशत ‘सी’ (अच्छा)
40 से कम ‘डी’ (औसत)





























































