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अपनी मेहनत और लगन से अंकित ने बनाया बाइकिंग में नया रिकॉर्ड

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टीम ऐवोलूय्शन ने अपनी स्टंट बाइकिंग के जरिये काफी नाम कमा लिया है। इस ग्रुप ने कई रिकाॅर्ड अपने नाम किये हैं, और अब इन्होंने एक और रिकाॅर्ड पर जीत हासिल कर ली है। टीम के सबसे युवा सदस्य देहरादून के अंकित भास्कर बहुत पहले से ही आॅटो गियर स्कूटर पर सबसे ज्यादा गोल चक्कर मारने के रिकाॅर्ड पर अपनी नजरे लगाये हुये थे।

आपको बतादें कि रविवार को एफ-1 ट्रेक,ग्रेटर नोएडा पर अंकित ने नया रिकार्ड बना लिया है। इससे पहले यह सबसे ज्यादा सर्कल व्हीली का रिकाॅर्ड दो लोगों के नाम दर्ज था, इनमें एक स्पेन से है तो दूसरा जपान से, दोनों ने ही 101 चक्कर लगा कर ये रिकाॅर्ड हासिल किया था।

Whole Crew of Team Evolution

चार सदस्यों के टीम का सदस्य अंकित कहते हैं कि, “ये सर्कल व्हीली हर कोई अासानी से नहीं कर पाता। इसके लिये बैलैंस औऱ ब्रेक पोइंट बेहद जरूरी है। मैं काफी उत्साहित था औऱ इसे रिकार्ड को बनाने के लिए हप रोज अभ्यास कर रहें थे। शायद मेरी मेहनत और लगन से मैनें अपने सपने को पूरा कर लिया है।उसने व्हीलीस का पुराना रिकॉर्ड जो कि 101 व्हीली का था उसे तोड़ कर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। गौरतलब है कि इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिये उन्होंने 326 व्हीलीस का रिकॉर्ड बनाया जो आनेवाले समय में किसी भी बाइकर के लिये तोड़ना चुनौतीपूर्ण रहेगा”

इस दल के पीछे की ताकत, लक्ष्य खंडूरी का कहना हैं कि, “हांलाकि स्टंट बाइकिंग को खेल नहीं बल्कि रोमांचक खेल माना जाता है पर अंकित एक बेहतरीन खिलाड़ी है। इस खेल की मार्केट पनपने में अभी समय लगेगा पर ये दिन पर दिन देशभर में प्रचलित होता जा रहा है।”

टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से अंकित और उनके पूरे दल को रिकार्ड बनाने पर हार्दिक बधाइयां।

व्यापारी के हत्यारों का अबतक पता नहीं लगा पाई पुलिस

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सिड़कुल क्षेत्र में दुकान पर बैठे व्यापारी को गोली मारने वाले बाइक सवार बदमाशों का कुछ पता नहीं चल सका है। घायल व्यापारी भी घटना की वजह को कुछ नहीं बता पा रहा है। वह अपनी किसी से दुश्मनी या विवाद न होने की बात कह रहा है। निजी अस्पताल से घायल व्यापारी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। जहां पर पुलिस ने उसके बयान दर्ज किये है।

बताते चले कि बीती देर शाम को अजीत चौहान पुत्र ब्रहा्रानंद 50 निवासी गांव रोशनाबाद सिड़कुल अपने घर के नीचे परचून की दुकान में बाइक सवार दो बदमाशों ने गोली मारकर घायल कर दिया था जिसको उपचार के लिए सिड़कुल स्थित मेट्रो अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी लेते हुए बदमाशों को दबोचने के लिए चैंकिग अभियान चलाया था। मगर कोई सफलता पुलिस ने नहीं मिल सकी थी। घायल व्यापारी भी बदमाशों को पहचाने से इंकार कर रहा है। साथ ही वह किसी से दुश्मनी व विवाद न होने की बात कह रहा है। ऐसे में पुलिस के बदमाशों तक पहुंचने की सम्भावना कम होती जा रही है। नि

जी अस्पताल से घायल व्यापारी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां पर सिड़कुल पुलिस ने पहुंचकर कर घायल व्यापारी के बयान दर्ज किया है। घायल व्यापारी अब भी घटना वाले दिन वाला बयान दे रहा हैं कि वह बदमाशों ने नहीं पहचानता और ना ही उसकी किसी से दुश्मनी हैं और ना विवाद। पुलिस के लिए अब समस्या बदमाशों तक पहुंचने में आ रही है। सिड़कुल थाना एसओ कमल मोहन भण्डारी के अनुसार पुलिस अपने स्तर से बाइक सवार बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पुलिस अपने मुखबिरों व अन्य सूत्रों से बदमाशों की निशाख्त कराने का प्रयास में जुटी है।

घायल व्यापारी बदमाशों के सम्बंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहा है और ना ही किसी से दुश्मनी और विवाद की बात कह रहा है। घायल व्यापारी ने दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ शिकायत की है जिसके आधार पर पुलिस ने बाइक सवार अज्ञात दो बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। 

चीला में डूबे छात्र की तलाश जारी

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चीला पिंकनिक के दौरान नहर में डूबे छात्र कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने नहर का जल स्तर कम कराते हुए गोताखोर टीम के साथ छात्र की तलाश में जुटी है।

बताते चलें कि कनखल,डीएवी कक्षा 10, के दो छात्र शिवम कटियार और शुभ बटाला स्कूल मिस कर पिंकनिक मनाने के लिए स्कूटी से चीला गये थे। जहां पर स्नान करने के दौरान छात्र शिवम कटियार नहर में डूब गया। जिसको बचाने का प्रयास उसके दोस्त शुभ बटाला ने किया, मगर सफल नहीं हो सका। दोस्त के डूबने से शुभ बटाला बहुत घबरा गया और चुपचाप किसी को कुछ बताये घर पहुंच गया।

छात्र शिवम कटियार के घर न पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। परिजनों ने शिवम के दोस्तों से सम्पर्क कर उसके सम्बंध में जानकारी लेने का प्रयास किया। मगर दोस्तों ने शिवम के स्कूल में न आने की जानकारी दी, जिसपर परिजन ओर परेशान हो गये। जिन्होंने कनखल थाने पहुंचकर मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर छात्र की तलाश शुरू कर दी।

बताया जा रहा कि वहीं जब शिवम के साथ पिंकनिक मनाने गये दोस्त शुभ बटाला को मालूम हुआ कि परिजन शिवम की तलाश कर रहे हैं और दोस्तों से भी पूछा जा रहा है। इस बात से परेशान होकर शुभ बटाला ने रात को ही परिजनों को सच्चाई बता दी जिसके बाद से कनखल पुलिस गोताखोर टीम के साथ मिलकर छात्र शुभ बटोला की निशानदेही पर डूबे छात्र को तलाश करने में जुटी है। लेकिन अभी तक पुलिस को सपफलता हाथ नहीं लगी है।

पुलिस ने नहर का जल स्तर भी कम कराकर छात्र को तलाश किया गया, उसके बावजूद भी पुलिस के हाथ खाली है। कनखल एसओ अनुज सिंह के अनुसार डूबा छात्र शायद गहरे पानी में चला गया है, जिसको तलाशने में काफी परेशानी आ रही है। पुलिस ने नहर का जल स्तर कम कराते हुए गोताखोर टीम के साथ डूबे छात्र की तलाश में जुटी है।

मुख्य मार्ग के यातायात को सुचारू करने में जुटी पुलिस

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हरिद्वार,  चन्द्राचार्य चैक मार्ग की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने क लिए यातायात पुलिसकर्मी लगातार भरसक प्रयास कर रहे हैं | आये दिन चन्द्राचार्य चैक रानीपुर मार्ग, भगत सिंह चैक सिटी हाॅस्पिटल मार्ग पर जाम की स्थिति से निजात दिलाने के लिए यातायात पुलिसकर्मी नित्त नये यातायात प्लान लागू कर जाम से राहत दिलाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्य मार्ग पर आस पास के काॅलोनियों से निकलने वाले छोटे मार्गों पर यातायात पुलिसकर्मीयों द्वारा बैरिगेट्स रस्सी बांधकर जाम से राहत दिलाने के प्रयास तो किये जाते हैं लेकिन इस प्लान से वाहनों के जाम से राहत नहीं मिल पाती है। क्योंकि आस पास काॅलोनी के लोग नगर के छोटे मार्गो का इस्तेमाल छोटे वाहनों को लाने ले जाने के लिए करते हैं लेकिन यातायात पुलिसकर्मी मुख्यमार्ग पर बैरिगेट्स लगाकर गली के छोटे मार्गो को बंद कर यातायात को सुचारू करने के प्रयास तो करते हैं लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाता है जिसके चलते रानीपुर मुख्य मार्ग पर वाहनों के काफिले लग जाते हैं और ज्यादा जाम लग जाता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुख्य मार्ग के पास से निकलने वाले छोटे मार्गो को बंद नहीं करना चाहिये क्योंकि दुपहिया वाहन चालक इन मार्गो का इस्तेमाल अधिक करते हैं जिससे मुख्य मार्ग की दिक्कतें और ज्यादा बढ़ जाती हैं। शुक्रवार को भी यातायात पुलिसकर्मियों द्वारा छोटे मार्गो पर पुलिस बैरिगेट्स लगाकर बंद तो किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई जिसके चलते शनिवार को छोटे काॅलोनियों के निकलने वाले मार्गो से पुलिस बैरिगेट्स को हटाया गया। उसके बाद ही मुख्य मार्ग के जाम से राहत मिल सकी।

चन्द्राचार्य चौक व्यापार मण्डल के अध्यक्ष मृदुल कौशिक का कहना है कि, “मुख्य मार्ग की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए काॅलोनियों से निकलने वाले छोटे मार्गो को बंद ना किया जाये, क्योंकि काॅलोनीवासी इन संकरी सड़कों का ही इस्तेमाल वाहन लाने ले जाने के लिए करते हैं।” 

मिजिल्स-रूबैला टीकाकरण अभियान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : डीएम

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रूद्रपुर,  जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा कि जिले के शत-प्रतिशत बच्चो को टीकाकरण से लगाया जाए। इस कार्य मे कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल ने मिजिल्स-रूबैला वैक्सिन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जिले में 30 अक्टूबर से अभियान चलाकर मिजिल्स-रूबैला के टीके 09 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों को लगाए जा रहे हैं | जिन सरकारी विद्यालयों व आंगनबाडी केन्द्रो में शत-प्रतिशत टीकारकण नहीं होगा वहां आंगनबाडी कर्मियों का वेतन रोक दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में विद्यालयों में अभिभावकों की भी बैठक की जाए ताकि शत-प्रतिशत बच्चो का टीकाकरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि मलिन बस्तियो व खनन क्षेत्रों में भी अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

जिलाधिकारी ने कहा यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है इसको सफल बनाने मे अधिकारियो के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी रूची ले। उन्होने कहा बाजार मे यह वैक्सीन 2 हजार रुपये में उपलब्ध होती है। भारत सरकार द्वारा यह वैक्सीन निःशुल्क लगाई जा रही है। वैक्सीन लगाने से बच्चो में डायरिया, निमोनिया व आंखो के रोगों से निजात मिलती है। उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रो मे जो बच्चे टीकाकरण से छूट गये है, वहां पुनः टीकाकरण अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि जो आशा कार्यकर्ती टीकाकरण के कार्यो मे सहयोग नहीं दे रही है, उनके खिलाफ कार्यवाही करते हुए उन्हे नोटिस भेजा जाए। उन्होंने कहा कि प्राइवेट विद्यालयो मे जो बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गये है, सम्बन्धित क्षेत्र के खण्ड शिक्षा अधिकारी विद्यालय मे जाकर उनकी सूची उपलब्ध करायेंगे।ताकि उनका टीकाकरण फिर से किया जा सके। उन्होने कहा जिन क्षेत्रो मे टीकाकरण कम हुआ है वहां अधिक ध्यान देते हुए टीकाकरण करे।

विश्व स्वास्थ संगठन के डा. मनु खन्ना ने बताया जनपद मे 5,26,040 बच्चो के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 3,12,050 बच्चो का टीकाकरण किया जा चुका है। 

पहाड़ों में मनाई जा रही “बुग्वाल” यानी पहाड़ी दिवाली

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चित्र: सूरज सिंह रावत
जहां एक तरफ सभी क्रिसमस की तैयारियों में जुटे है, तब उत्तराखंड के जौनसार और जौनपुर में, एक दिवाली मनाई जा रही है। जी हां, ये जानकार शायद आपको यकीन नही होगा लेकिन दिवाली के ठीक एक महीने बाद मनाई जाने वाली यह दिवाली को यहां के लोग बुग्वाल या बग्वाली कह कर बुलाते हैं ।
जौनपुर के कोल्टी गांव जिसमें तकरीबन 60 परिवार हैं लोग इस दिवाली को मनाते हैं। इस पर्व को यहां की भाषा में बुग्वाल/बग्वाली कहतें हैं। यहां मनाये जाने वाला ये तीन दिन का उत्सव महिलाओं के दिल के बहुत करीब है, क्योंकि उनके लिए यह एक सलाना उत्सव होता है जिसमें वो पुरी ठाठ-बाट से हिस्सा लेती हैं। सुमीता देवी जो कि बिरगांव से है कहती हैं कि “इस त्योहार का हमारे दिल में खास स्थान है, हम सब अपने गांव-घर वापस आते हैं ताकि अपने परिवार के साथ थोड़ा समय बिता सके, हम गाने बजाने के साथ ऩृत्य भी करते हैं। हम बेसब्री से बुग्वाल का इंतज़ार करते हैं।” जबकि सारी महिलाएं तरह-तरह के पकवान बनाने में व्यस्त रहती हैं और फिर व्यंजनों को पूरे गांव में बांटती हैं।
खुले आसमान के नीचे आदमियों का जत्था कतार बना कर घर के बाहर खड़ा होकर ढोल बजाता है और साथ में गाता भी है।समय के साथ साथ सालों पुरानी इस परंपरा का प्रचलन भी बदल रहा है। पहाड़ों से हो रहा पलायन इसका एक बड़ा कारण है। गांव के बड़े-बूढों के लिए इस त्योहार के मायने बदल गए हैं, भरत सिंह कहते हैं कि, “यहां का युवा वर्ग पहाड़ों को छोड़कर आस-पास के शहरों में लुभावनी नौकरी के लिए बस गए हैं, जिसमें से बहुत तो त्योहारें में भी वापस नहीं आते” वो बताते हैं कि जब हम बच्चे थे यहां बहुत कुछ होता था जैसे कि पंडाल लगते थे, रोशनी होती थी लेकिन धीरे-धीरे हमारी परंपरा अपनी पहचान खो रही है।”
बुग्वाल/बग्वाली  के पीछे मान्यता ये है कि ये त्योहार योद्धा माधो सिंह भंडारी की वीरता के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, भंडारी वो योध्दा हैं जिन्होने गढ़वाल और तिब्बत की सीमाओं को सील किया था। इस सीमा को आज की मैक मोहन लाइन के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन समय बदल रहा और बड़े-बूढ़ों को यह डर है कि कहीं उनका गांव भी इस परंपरा को भूल ना जाए।

मनरेगा के कार्यों में सामने आईं अनियमितताएं

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देहरादून। गौहरीमाफी ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कार्यों में अनियमितता पकड़ी है। नियमों को दरकिनार भी किया गया और इस बात का भी संशय है कि काम हुए भी या नहीं। जांच कमेटी ने तत्कालीन ग्राम प्रधान के साथ ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के साथ ही उप कार्यक्रम अधिकारी, अवर अभियंता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।

अक्टूबर 2017 में ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गीता कुटीर से प्राथमिक विद्यालय गौहरी प्लॉट तक तार जाल लगाने और सौंग नदी पर बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए 23 लाख रुपये खर्च करना दर्शाया गया है, जबकि तारजाल लगाने का कार्य हुआ ही नहीं। जिला विकास अधिकारी पीके पांडेय ने इसकी जांच सहायक परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, खंड विकास अधिकारी देहरादून सुधा तोमर, सहायक अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग तारिक ज्याद को सौंपी। इसमें पाया गया कि वर्ष 2009-10 में इन कार्यों को एक ही कार्य के रूप में प्रस्तावित किया गया। लेकिन, इन्हें पांच अलग-अलग टुकड़ों में तोड़कर किया गया, जो मनरेगा के नियमों के विरुद्ध है। गीता कुटीर से प्राथमिक विद्यालय गौहरी प्लॉट और सौंग नदी में दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। ऐसा कोई विभागीय आदेश भी नहीं मिला, जिसमें आदेश दिया गया हो कि ये कार्य सौंग नदी पर ही करा दिए जाएं। जांच टीम ने रिपोर्ट में कहा कि ऐसा लगता है कि ये कार्य दोनों स्थलों को एक साथ जोड़कर जानबूझकर प्रस्तावित किए गए। कमेटी ने ये भी आशंका जताई है कि नदी में बरसात के वक्त तेज बहाव और बाढ़ की स्थिति बनती है, जिसकी आड़ में इन कार्यों को करना दिखाया जाए और बाद में ये कहा जाए कि निर्माण बाढ़ में बह गया। मौके पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों की क्षतिग्रस्त स्थिति ही देखने को मिली। लेकिन, तत्कालीन प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी ने बाढ़ से नुकसान की कोई सूचना आपदा नियंत्रण कक्ष को दी गई और न ही इस संबंध में कोई अभिलेख प्राप्त हुआ। इससे यह आशंका और बलवती होती है। जिला विकास अधिकारी पीके पांडेय ने बताया कि जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर दोषियों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उनका स्पष्टीकरण आने के बाद आगे की कार्यवाही होगी। 

23 को आंदोलन करेंगे बिजलीकर्मी

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देहरादून। पे-मैट्रिक्स और पदोन्नत वेतनमान के मसले पर बिजली कार्मिकों ने 23 नवंबर को आंदोलन के कार्यक्रम का ऐलान करने का फैसला लिया है। शनिवार को पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन, ऊर्जा कामगार संगठन, ऊर्जा आफीसर्स, सुपरवाइजर्स एंड स्टाफ एसोसिएशन की संयुक्त बैठक हुई।

वक्ताओं ने कहा कि सातवें वेतनमान के शासनादेश से तमाम विसंगतियां पैदा हो गई हैं, जिनका निस्तारण नहीं होने से कार्मिकों में गुस्सा है। ऊर्जा के तीनों निगम प्रबंधन ने पे-मैट्रिक्स की रिपोर्ट 27 अक्टूबर और पदोन्नत वेतनमान की रिपोर्ट 15 नवंबर को शासन के समक्ष प्रेषित कर दी है। वहीं, पिछले महीने शासन में हुई वार्ता में सहमति बनी थी कि एक महीने के भीतर विसंगतियों को दूर कर दिया जाएगा। लेकिन, अभी तक कोई शासनादेश इन संबंध में जारी नहीं हुआ।
कहा कि पदोन्नत वेतन ऊर्जा निगमों में क्रमश: 9, 14, 19 वर्ष की सेवा पर मिलता था। लेकिन, सातवें वेतनमान के आदेश के बाद इसे 10, 20, 30 वर्ष कर दिया, जो अव्यवहारिक है। साथ ही पे-मैट्रिक्स का निर्धारण भी गलत किया गया है। बैठक में निर्णय हुआ कि 20 नवंबर को तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों से वार्ता की जाएगी और 23 नवंबर तक आदेश जारी नहीं हुआ तो आंदोलन का कार्यक्रम जारी कर दिया जाएगा। बैठक में पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एमसी गुप्ता, ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक बेनीवाल, पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के यूपीसीएल अध्यक्ष संदीप शर्मा, सुपरवाइजर्स एंड स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव दीपक पांडे आदि मौजूद रहे। 

वैली ऑफ वर्डस में ‘खाकी में इंसान’ किताब पर हुई चर्चा

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देहरादून के मधुबन होटल में आयोजित इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में उत्तराखंड पुलिस के एडीजी अशोक कुमार कि किताब ‘खाकी में इंसान’ पर चर्चा की गई।इस किताब कि कहानी एक ऐसे आईपीएस अधिकारी के भावनाओं को व्यक्त करता है जिसने अपना कैरियर हमारी पुलिस को और अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने में लगा दिया और आज भी वह इसके लिए प्रयासरत हैं। अशोक कुमार का जन्म 9 नवंबर 1964 को हरियाणा के पानीपत जिले के गांव कुराना में हुआ है।शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में संपन्न हुई और बी.टेक आई.आई.टी दिल्ली और एम.टेक की उच्च शिक्षा प्राप्त की। 1989 में भारतीय पुलिस सेवा में आए और अपने दो दशक के समय में उन्होंने इलाहाबाद, अलीगढ़, रुद्रपुर, चमोली, हरिद्वार, शाहजहांपुर, मैनपुरी, नैनीताल, रामपुर, मथुरा, पुलिस मुख्यालय देहरादून,गढ़वाल परिक्षेत्र तथा पुलिस महानिरिक्षक,कुमायूं परिक्षेत्र के पद पर रहे हैं।

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यह किताब सूचनापरक तो है पर अशोक कुमार द्वारा किए गए कार्यों का सरकारी लेखा-जोखा, आत्मकथा या अनुसंधान नहीं है। इलाहाबाद से लेकर कुमाऊँ और गढ़वाल परिक्षेत्र के तराई इलाकों तक विभिन्न पदों पर कर्त्तव्यपालन करते हुए इस आईपीएस अधिकारी ने अपने प्रशंसनीय और बेदाग करियर में जो अनुभव बटोरे हैं उसे उसने ‘लीग से हटकर – इंसाफ की डगर’, ‘पंच परमेश्वर या…’ ‘भू- माफिया’ ‘तराई में आतंक की दस्तक’, ‘जेलर जेल में’, ‘अंधी दौड़’, ‘दहेज और कानून’ और ‘पुलिस: मिथक और यथार्थ’ जैसे 16 शीर्षकों के तहत व्यक्त किया है।

पुलिस की कार्य प्रणाली, मित्र पुलिस के श्लोगन, विवेचनाओं में सुधार,पुलिस जवानो के लिए विभाग द्वारा सुधार हेतु कार्य, उत्तराखंड पुलिस के कार्य करने के तरीक़ों के बारे में  व पुस्तक से सम्बंधित सवाल किए गए, जिनका उत्तर देते हुए  अशोक कुमार द्वारा कहा कि अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच गरीब व असहाय लोगों की जिन्दगी में फर्क लाया जा सकता है।हालांकि वर्तमान व्यवस्था में कुछ खामियाँ आ गई हैं फिर भी यदि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों में  दृढ़ इच्छाशक्ति हो, इंसानियत के नजरिए से सोचने की क्षमता हो और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो यही व्यवस्था, यही सिस्टम लोगों की मदद करने में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है। साथ ही कहा कि यदि हम काम न करने के 50 तरीके अपना सकते हैं तो काम करने के भी 50 रास्ते खोज सकते हैं। बस जरूरत है अपने को साहब न समझकर जनसेवक समझने की ।और पीड़ित की दृष्टि से काम करने की।

कछुओं की तस्करी करने वाले दो युवक गिरफ्तार

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हरिद्वार। वन विभाग की टीम दुर्लभ प्रजाति की कुछुओं की तस्करी करने वाले दो आरोपियों को धर दबोचने का दावा किया। हालांकि देर शाम तक वन विभाग की इन दुर्लभ कछुओं की प्रजाति के विषय में विभिन्न जानकारियां जुटाती रही। साथ ही दोनों कछुओं को बेचने वाले दोनों आरोपियों की जांच पड़ताल में वन विभाग की टीम लगी रही।

दुर्लभ प्रजापतियों के कछुये बेचने के आरोपियों की जांच पड़ताल देर शाम तक वन विभाग की टीम करती रही। क्षेत्र में भी कछुओं की तस्करी करने वाले दोनों आरोपियों की चर्चायें लगातार होती रही। वन क्षेत्राधिकारी विपिन नोडियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि कछुआ तस्करों से पूछताछ की जा रही हैं जो कछुये बरामद किये गये है उन कछुओं की प्रजापति को पता करने के लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। पकड़े गये आरोपी कनखल क्षेत्र के हैं एक आरोपी गंगा सफाई अभियान से भी जुड़ा हुआ है। आरोपी अपनी दुकान पर कछुये के बेचने की जानकारियां स्थानीय लोगों द्वारा दी जा रही है। एनजीओ के वोलेन्टियर के द्वारा दोनों आरोपी की शिकायत पर आरोपियों को पकड़ा गया है। वन विभाग की टीम कछुओं की प्रजातियांे एवं इन कछुओं को बेचने के अधिनियमों की जानकारियों में जुटे हुए हैं।
पकड़े गये आरोपियों का कहना है कि यह उन दुर्लभ प्रजापतियों के कछुये नहीं हैं जिनको रखने पर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध हैं। कुछ लोग अपने घरों में कछुओं को पालने का काम करते हैं। वन विभाग की टीम गलत रूप से हमें फंसाने का प्रयास कर रही है।
आरोपियों का कहना है कि जो प्रजाति के कछुये वन विभाग की टीम को मिले हैं उनकी बिक्री पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं होता है। गंगा सफाई से जुड़े कई सदस्य वन विभाग के कार्यालय पर आरोपियों के पकड़े जाने से कार्यालय पर कई घंटे जमे रहे गंगा सफाई अभियान से जुड़े गंगा भक्तों ने भी पकड़े गये युवकों को गलत तरीके से फंसाने के आरोप लगाये।