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‘जाने अपनी पुलिस’ कार्यक्रम के तहत बच्चों को बताई पुलिस की कार्यप्रणाली

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जनपद चमोली पुलिस ने गोपेश्वर में ‘जाने अपनी पुलिस’ कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें स्कूली बच्चों को पुलिस की कार्यप्रणाली, उपकरणों एंव हर्बल गार्डन से रूबरू कराया गया।

पुलिस अधीक्षक चमोली तृप्ति भट्ट के दिशा-निर्देशन में जनपद पुलिस ने जिला मुख्यालय गोपेश्वर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को आयोजित किया। कार्यक्रम के तहत बच्चों को पुलिस स्टेशन, पुलिस लाइन, पुलिस कंट्रोल रूम आदि में भ्रमण कराकर पुलिस की कार्यप्रणाली तथा विभिन्न उपकरणों और उनके कार्य करने के तरीकों से अवगत कराया गया। इसके अलावा नागरिकों के मूलभूत विधिक अधिकारों के संबंध में जानकारी, वायरलेस उपकरण एवं संचार व्यवस्था की जानकारी, महिला हेल्पलाइन एवं महिला/बच्चों के विधिक अधिकारों की जानकारी, यातायात नियमों, साइबर क्राइम एवं आपदा उपकरणों की जानकारी एवं आपदा के समय क्या करें क्या न करें आदि का प्रशिक्षण दिया गया।

इस दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा पुलिस मेस में भोजन भी किया गया। इसके बाद सभी बच्चों को पुलिस लाइन स्थित हर्बल गार्डन में भ्रमण कराकर ओषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी गई। 

तीसरे दिन भी चला अतिक्रमण हटाने का ऑपरेशन

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महाविद्यालय गोपेश्वर की भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध प्रशासन का अतिक्रमण हटाने का अॉपरेशन तीसरे दिन भी जारी रहा। भारी सुरक्षा प्रबंधों के बीच कहीं मशीन से तो कहीं मजदूरों से अतिक्रमण हटाया गया, जिन लोगों के मकान और निर्माण कार्य हटाये जा रहे हैं, उन्होंने मिन्नत और गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन ने किसी की न सुनी।

महाविद्यालय गोपेश्वर की भूमि पर अतिक्रमण करने की शिकायत एक लंबे समय से की जा रही थी। छात्रों ने इसे लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन किया तथा शिक्षा मंत्री तक अपनी बात रखी थी। जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने भी प्रशासन को निर्देश दिए थे कि छात्रों और महाविद्यालय प्रशासन की बात सुनी जाए। प्रशासन के उपर जब छात्रों के प्रदर्शन का दबाव पड़ा तो अब महाविद्यालय की भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो तीसरे तीन भी अतिक्रमण हटाने के लिए भारी पुलिस बल, जेसीबी, मजदूरों को लेकर प्रशासन पहुंचा।

इंटर कॉलेज जाने वाले मार्ग पर जहां से महाविद्यालय की भूमि लगती है वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। उसके बाद निकटवर्ती मकानों पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रही। कहीं पर मशीन तो कहीं पर मजदूरों के माध्यम से अतिक्रमण हटाया गया। इस मौके पर उपजिलाधिकारी परमानंद और पुलिस उपाधीक्षक हरबंस सिंह तथा थानाध्यक्ष कुंदन राम आदि भारी सुरक्षा प्रबंधों के बीच मौजूद रहे। 

रुडकी नगर निगम घपले पर हाईकोर्ट सख्त

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नैनीताल, हाई कोर्ट ने नगर निगम रुड़की के पूर्व चेयरमैन की ओर से नियमों को दरकिनार कर चहेतों को निगम की दुकानें, दुकान व आवासों की छत आवंटन करने को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को तीन माह के भीतर इस घपले में संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने व जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पारित किए हैं।

नगर निगम रुड़की के मेयर यशपाल राणा ने याचिका दायर कर कहा है कि मौजूदा विधायक व पूर्व चेयरमैन प्रदीप बत्रा द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए बिना विज्ञापन जारी किए, बिना नगरपालिका, अब निगम के प्रस्ताव के चहेतों को नगर निगम की दुकानों की छत, आवासों की छत तथा दुकानों का आवंटन कर दिया गया। पूर्व में इस मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की ओर से तीन मार्च 2015 को दी गई रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि हुई।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन माह के भीतर कार्रवाई करने के आदेश प्रमुख सचिव शहरी विकास को दिए हैं।

नासुर बना पलायन का घाव

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पिथौरागढ़, पलायन पहाड के लिए नासुर बन गया है, भले ही पलायन को रोकने के लिए सरकार बडे बडे दावे करती हो मगर योजनाए सिर्फ कागजी तक ही सिमित रहती हैफाइलों से आगे कभी योजनाए बढ़ नहीं पातीं और गांव खाली हो जाते हैं। चीन सीमा से लगे गांवों से होने वाला पलायन तो समझ में आता है परंतु पश्चिमी छोर पर बसे जिले के पहले गांव का खाली होना कई सवाल छोड़ रहा है। बागेश्वर की सीमा से सटा एक गांव महज इस लिए खाली हो गया क्योंकि आज भी बिजली की रोशनी यहां नहीं पहुंच पाई। 56 परिवारों वाले गांव में अब केवल 11 परिवार ही रह गए हैं।

तहसील गणाईगंगोली के अंतर्गत आने वाला सीमा गांव दो जिलों की सीमा पर है। एक तरफ पिथौरागढ़ तो दूसरी तरफ बागेश्वर। आजादी के 71 साल बाद भी इस गांव तक बिजली नहीं पहुंची है। आसपास के गांवों में चार दशक पूर्व बिजली आ चुकी थी। सीमा गांव का नसीब ऐसा रहा कि यहां तक न तो बिजली के तार खींचे और नहीं सड़क बन सकी है। बिजली के चलते गांव से एक-एक कर परिवार पलायन कर रहे हैं। गंगोलीहाट विधायक मीना गंगोला कहती हैं कि सीमा गांव उनका पड़ोसी गांव है। इस गांव के दर्द को उन्होंने जाना है। गांव तक बिजली और सड़क पहुंचाना मेरी प्राथमिकता है। बिजली के लिए ऊर्जा निगम से बात कर दी गई है। सड़क पहुंचाने के लिए सर्वे करा दिया गया है। शीघ्र सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा। गांव से हो रहा पलायन दुखदाई है।

गूगल में निकाली खामी तो मिले 100 डालर

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हल्द्वानी, पहाड़ की प्रतिभाएं देश ही नहीं विश्व में भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। विश्व में आइटी क्षेत्र में पहचान बनाने वालों में हल्द्वानी के साइबर एक्सपर्ट विकास सिंह बिष्ट का नाम भी जुड़ गया है। विकास ने गूगल की एक वेबसाइट में खामी ढूंढी है। गूगल की सिक्योरिटी टीम ने गलती स्वीकारते हुए उसमें सुधार किया है।

साथ ही इस साल गूगल में गलती ढूंढने वाले विश्व के कुल 980 आइटी एक्सपर्ट में 322वीं रैंक में विकास का नाम शामिल किया है। गूगल ने अपने बगहंटर प्रोग्राम के भीतर वलनरेबिलिटी रिवार्ड प्रोग्राम के तहत हाल ऑफ फेम में विकास की प्रोफाइल डालकर प्रोत्साहित भी किया है। इसके साथ ही 100 डालर प्रोत्साहन राशि देने की मेल भी विकास को मिली है। मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के मिर्थी में रहने वाले विकास सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। विकास के पिता चंदन सिंह बिष्ट धारचूला के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं। विकास ने मेरठ से इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन इन साइबर सिक्योरिटी (आइजीसीएस) कोर्स किया है। वर्तमान में विकास इंडियन साइबर डिफेंस एलाइंस संस्था के चीफ ऑपरेशन ऑपरेटर के तौर पर हल्द्वानी में वेब एप्लीकेशन सिक्योरिटी रिसर्च, एथिकल हैकर और ट्रेनर के रूप में काम कर रहे हैं।

विकास ने बताया कि उन्होंने 14 नवंबर को गूगल के कैगिल डॉट कॉम नाम की वेबसाइट पर क्रापसाइट स्क्रिप्टिंग की गलती पकड़ी थी। इस गलती को उन्होंने गूगल की सिक्योरिटी साइट पर भेजा। गूगल की सिक्योरिटी टीम (एडवरडो गूगल सिक्योरिटी टीम) ने गलती को सही माना। इसी के आधार पर उन्हें वलनरेबिलिटी रिवार्ड प्रोग्राम के तहत हॉल ऑफ फेम के तीसरे पेज पर 322वीं रैंक प्रदान की। वह इस साल उत्तराखंड के पहले व्यक्ति हैं, जिसने गूगल में गलती ढूंढी है। विकास ने बताया कि गूगल ने उन्हें भविष्य में अपने सिक्योरिटी प्रोग्राम से जुड़ने के लिए आमंत्रित भी किया है।

टीडीएस पर सात-आठ साल से फन जमाए बैठे 2000 संस्थानों की सूची तैयार

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देहरादून। आयकर विभाग टीडीएस पर सात-आठ साल से फन जमाएं बैठे करीब 2000 संस्थानों की सूची तैयार की है, जो टीडीएस को लेकर जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे और इन पर 3000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। प्रथम चरण में करीब 60 करोड़ रुपये के बड़े डिफॉल्टर डेढ़ दर्जन से अधिक संस्थानों के भुगतान पर रोक लगाने के बाद अधिकारी अब इन 2000 संस्थानों के भुगतान पर रोक लगाने व इनके खाते अटैच करने की तैयारी में जुट गए हैं।

अपर आयकर आयुक्त (टीडीएस) सुमाना सेन के मुताबिक जिन संस्थानों के भुगतान पर कोषागार के माध्यम से रोक लगाई गई या उनके खाते अटैच किए गए, उससे पहले संबंधित संस्थानों को दो-तीन बार नोटिस भी जारी किए गए। इसके बाद भी टीडीएस की डिमांड पूरी न करने पर ही इस तरह की कार्रवाई को बाध्य होना पड़ा है। अगले चरण की कार्रवाई की बात करें तो आयकर अधिकारी (टीडीएस) देहरादून कार्यालय के दायरे में ही करीब 480 करोड़ रुपये के टीडीएस डिफॉल्टर हैं।
अपर आयुक्त सुमाना सेन ने कहा कि भुगतान पर रोक लगाना या खाते अटैच करना अंतिम विकल्प होता है, क्योंकि इससे संबंधित संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और कार्मिकों के वेतन पर भी संकट पैदा हो जाता है। यह बात संबंधित संस्थानों के जिम्मेदार अधिकारियों को भी समझ आए, इसीलिए ही यह कदम उठाना पड़ रहा है।
भुगतान रुकते ही अफसरों ने दी दस्तक
टीडीएस डिफॉल्टर संस्थानों का भुगतान कोषागार के माध्यम रुक जाने के बाद अब अधिकारी आयकर विभाग में दस्तक देने लगे हैं। आयकर अधिकारी (टीडीएस) देहरादून कार्यालय के अनुसार अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, डोईवाला कार्यालय ने 19 लाख रुपये बकाया की अधिकांश राशि जमा करा दी है। अब इस कार्यालय पर महज 96 हजार रुपये ही बकाया है। इसी तरह उप शिक्षाधिकारी रायपुर कार्यालय ने 30 लाख रुपये के टीडीएस बकाए पर उप शिक्षाधिकारी मोनिका बम ने शपथ पत्र दिया है कि जल्द ही बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा या इस संबंध में वाजिब जवाब दाखिल किया जाएगा। इसी तरह टन एंड पावर डिविजन कार्यालय यमुना कॉलोनी 30 लाख रुपये की बकाया राशि पर दो माह का समय मांगा है। इसके अलावा सावित्री शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल हर्रावाला ने करीब तीन लाख रुपये के टीडीएस पर दो लाख रुपये जमा करा दिए हैं। इस पर आयकर विभाग ने इन संस्थानों/कार्यालयों के भुगतान पर से रोक हटाने के निर्देश भी जारी कर दिए। 

हवालात में निकली डीपी की हेकड़ी

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रुद्रपुर, एनएच 74 के भूमि मुआवजे घोटाले के मामले में आत्मसमर्पण करने वाले डीपी सिंह को सिडकुल थाने की हवालात में कटी रात जीवन भर याद रहेगी। तमाम मच्छरों के बीच रात गुजारने वाला डीपी सिंह रात्रि 12 बजे तक तो सो ही नहीं पाए। हवालात में जमीन में बिछाई गई दरी और पुलिस से मिले कंबल में डीपी कसमसाते रहे। वो रात भर करवटें बदलते रहे ताकि उन्हें नींद आ जाए। काफी देर तक डीपी ने हवालात में बैठकर ही सुबह होने का इंतजार किया, लेकिन नींद भी उन्हें सता रही थी।

जिसके चलते डीपी को सुबह चार बजे से करीब छह बजे तक नींद आ गई। इससे पहले डीपी सिंह ने गुरूवार की रात करीब साढ़े आठ बजे सिडकुल की मैस में बने भोजन को खाया। उन्हें मैस की रोटियां, छोले की सब्जी, आलू के गट्टे, चटनी और सलाद दिया गया। मैस का भोजन डीपी को खास पसंद नहीं आया चूंकि डीपी ने मैस की केवल दो ही रोटियां खाईं। डीपी सुबह तक बिना पानी पिए हवालात में रहे।

उन्होंने हवालात में घुसने से लेकर निकलने तक पुलिस के संतरी (पहरा) से कोई डिमांड नहीं की। हालांकि सुबह करीब सात बजे उसे मैस से चाय पिलवाई गई। डीपी सिंह को अस्पताल और कोर्ट ले जाने की कार्यवाही से पहले नाश्ता कराया गया। नाश्ते में उन्हें फिर करीब नौ बजे चाय और ब्रेड पकोड़ा दिया गया। ब्रेड पकोड़ा खाने के बाद डीपी काफी संतुष्ट दिखाई दिए।

डीपी डिप्टी कलेक्टर रहे डीपी सिंह को यह स्वप्न में भी इल्म नहीं होगा कि जिन लोगों को वे अपनी कलम से जमानत देते हैं, एक दिन वो भी अपनी जमानत के लिए दूसरे के आगे खड़ा होना पड़ेगा। अब अगर डीपी को कोई चिंता सताए हुए है तो वो केवल अपनी जमानत की है।

जमानत के बावत डीपी के अधिवक्ता लगे हुए हैं। निलंबित पीसीएस अफसर डीपी सिंह ने सिडकुल चौकी इंचार्ज को घड़ी पहने देख कर कहा कि यदि यही घड़ी वह पहने होते तो दो लाख की बताई जाती। दरअसल, डीपी सिंह ब्रांडेड वस्तुओं के शौकीन रहे हैं।

जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादन का स्तर गिरा

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देहरादून। ठंड बढ़ने पर नदियों में जल प्रवाह कम होने के चलते महीने भर के अंतराल में जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादन आधे से भी कम हो गया है। राज्य की परियोजनाओं से वर्तमान में महज नौ मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि बिजली मांग करीब 35 एमयू बनी है।

खैर, राहत की बात ये है कि बाजार, बैंकिंग, केंद्रीय पूल आदि से मिलाकर बिजली मांग पूरी हो जा रही है, लेकिन अगले कुछ दिनों में बर्फबारी होने और ठंड बढ़ने के साथ-साथ नदियों का जलप्रवाह और कम होगा, इससे निश्चित तौर पर बिजली उत्पादन कम होगा, ऐसे में राज्य में बिजली संकट गहरा सकता है। उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की राज्य में 1284.85 मेगावाट क्षमता की कुल 13 परियोजनाएं हैं। सर्दियों में ग्लेशियरों से कम बर्फ पिघलने से नदियों में जलप्रवाह घटता है, जिससे बिजली संकट की स्थिति बनती है। हालांकि काशीपुर स्थित गैस आधारित परियोजनाओं से लंबी अवधि करार और पंजाब से बैंकिंग के चलते इस मर्तबा अभी तक संकट दूर है। ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता एवं प्रवक्ता एके सिंह का कहना है कि बिजली की कोई कमी नहीं होगी। रिटर्न बैकिंग के रूप में पंजाब से बिजली मिल रही है, अगर जरुरत पड़ी तो बाजार से बिजली खरीद ली जाएगी। 

अवैध खनन से भरे तीन ट्रैक्टर ट्रॉली सीज

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विकासनगर। शुक्रवार को कालसी वन प्रभाग की टीम ने लंघा रोड पर चेकिंग के दौरान अवैध खनन से भरे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली वाहनों को पकड़ कर सीज कर दिया।

शुक्रवार को वन सुरक्षा अधिकारी नवीन जोशी अपनी टीम के साथ लंघा रोड पर चेकिंग कर रहे थे। तभी अवैध खनन से भरे तीन वाहन आते दिखाई दिए। वन विभाग की टीम को देख चालक भागने की कोशिश करने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और तीनों वाहनों को सीज कर दिया गया।
वन सुरक्षा अधिकारी नवीन जोशी का कहना है कि आजकल बढ़ते खनन को रोकने के लिए पुलिस जी जान से मेहनत कर रही है और सफल भी हो रही है। अवैध खनन करने वालों को पकड़ा जा रहा है। इसके बावजूद भी ये खनन मफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। उन्होंने कहा कि खनन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन को सख्त कदम उठाते हुए कठोर नियम बनाना होगा।

कार के खाई में गिरने से सिपाही की मौत, तीन घायल

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विकासनगर। गुरुवार की देर रात टिहरी के ब्राहमण गांव लखवाड़ में शादी समारोह से लौट रहे युवकों की कार जुड्डो क्षेत्र में क्वागी यमुना पुल के पास खाई में गिरने पर एक सिपाही की मौके पर मौत हो गई। जबकि हादसे में टिहरी क्षेत्र के तीन गंभीर घायलों में से दो को विकासनगर से हायर सेंटर रेफर किया गया है। दोनों गंभीर घायलों को महंत इंद्रेश अस्पताल दून में भर्ती कराया गया है।

उत्तरकाशी जिले के थाना मोरी में सिपाही के पद पर तैनात सुंदर सिंह चौहान (35) पुत्र स्व. मोहर सिंह निवासी ग्राम कांडा पोस्ट यमुनापुल जिला टिहरी गढ़वाल, चमन सिंह पुंडीर (35) पुत्र मायाराम निवासी ग्राम तिमलियाल टिहरी गढ़वाल, महीपाल सिंह (38) पुत्र रतन सिंह निवासी ग्राम रणोगी पोस्ट यमुना पुल जिला टिहरी गढ़वाल, वचन सिंह (50) पुत्र राम सिंह निवासी तिमलियाल विकासनगर से कार से टिहरी जिले के ग्राम ब्राहमण लखवाड़ में शादी समारोह में भाग लेने गए थे।
शादी समारोह से वापस विकासनगर आते समय गुरुवार देर रात जब उनकी वैगनआर कार जुड्डो के पास क्वागी यमुना पुल के पास पहुंची कि अचानक अनियंत्रित हो गई। कार को अनियंत्रित होते देख महीपाल ने बाहर छलांग लगा दिया और कार सीधे खाई में जा गिरी। कार से छलांग लगाने पर घायल महीपाल ने फोन से पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना दी और बेहोश हो गया। सूचना मिलने पर तत्काल प्रभारी कोतवाल रामनरेश शर्मा, डाकपत्थर चौकी इंचार्ज शमशेर अली मय पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू उपकरणों की मदद से सौ मीटर गहरी खाई में रेस्क्यू अभियान शुरू किया। हादसे में मौके पर ही मोरी थाने में तैनात कॉन्स्टेबल सुंदर सिंह चौहान की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने सिपाही के शव व दो घायलों चमन व वचन को खाई से बाहर निकाला। पुलिस ने आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां दो घायलों चमन सिंह व वचन सिंह पुंडीर की हालत गंभीर देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया। चौकी प्रभारी डाकपत्थर शमशेर अली के अनुसार शुक्रवार को सिपाही के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।