Page 331

सरनीमल बाजार में सीवर लाइन चोक, व्यापारी परेशान

0

राजधानी दून की जर्जर सीवर लाइनों से खड़ी होने वाली परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। हालत ये है कि दून के व्यस्ततम सरनीमल बाजार पिछले सात दिनों से सीवर लाइन चोक पड़ी हुई है और इस कारण सारा सीवर सड़कों पर बह रहा है। इससे यहां से गुजरने वाले लोगों को तो परेशानियों का सामना करना ही पड़ रहा है साथ ही व्यापारियों का तो दुकानों पर बैठना भी दुभर हो गया हैं।

स्थानीय व्यापारियों ने शनिवार को इस संबंध में जल संस्थान के अधिकारियों को शिकायत कर समस्या के समाधान की मांग की। व्यापारियों ने बताया कि एक सप्ताह पहले क्षेत्र की सीवर लाइन चोक हो गई है। जिससे चोक वाले स्थान पर सीवर ओवर फ्लो होकर सड़क पर बह रहा है। अब जब भी खरीदार दुकानों के अंदर घुस रहे हैं तो यह गंदगी उनके पैरों में लगकर दुकानों को गंदा कर रही है। इसके अलावा सड़क पर सीवर बहने से आने वाली दुर्गंध ने व्यापारियों का दुकान पर बैठना मुश्किल कर दिया है।

व्यापारी हर्ष गांधी ने बताया कि, “बाजार में सीवर के एक दो घरेलू कनेक्शन हैं, कुछ रेस्टोरेंट संचालकों ने इन घरेलू कनेक्शनों में ही अपने व्यवसायिक सीवर कनेक्शन जोड़ दिए हैं। सीवर के साथ इन लाइनों में अन्य सामग्री भी बहाई जा रही है, जिस कारण लाइन चोक हो गई।”

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता मनीष सेमवाल ने बताया कि, “अभी शिकायत नहीं आई हैं, लेकिन रविवार को टीम भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा, लाइन को ठीक करने के साथ यदि किसी ने व्यवसायिक कनेक्शन जोड़ रखा है, उनके कनेक्शन काटकर कार्रवाई की जाएगी।” 

देहरादून में “सड़क सुरक्षा सेमिनार” का आयोजन

0

आज दिनांक 25 नवंबर, 2017  को उत्तराखंड पुलिस द्वारा परिवहन विभाग के सहयोग से आयोजित “सड़क सुरक्षा सेमिनार” का उद्घाटन अनिल के. रतूड़ी,पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। 

अनिल के. रतूड़ी,पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रदेश बनने के 17 वर्षों में जिस प्रगति से औद्योगिक विकास हुआ है उसके अनुपात में सड़कों का विस्तार नहीं हुआ है। राज्य बनने के बाद वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। किसी भी राज्य का प्रतिबिम्ब वहां की यातायात व्यवस्था है हम यातायात व्यवस्था में सुधार एवं सड़क सुरक्षा के लिये प्रतिबद्ध है। इस सेमिनार के माध्यम से जनता से संवाद करने का प्रयास किया गया है। जब तक जनता जागरूक नहीं होगी तब तक हम सकरात्मक स्तर तक नहीं पहुंच पायेंगें। विश्व में  सबसे अधिक 25 वर्ष से कम आयु की युवा पीड़ी भारत में है।सड़क दुर्घटनओं में सबसे अधिक मृत्यु 18 से 35 वर्ष के युवाओं की हो रही है। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि सड़क सुरक्षा के प्रति अपने में जागरूकता लायें तथा यातायात नियमों का पालन करें। मुझे आशा है कि इस सेमिनार के माध्यम से आपके साथ समय साझा कर हम किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकेगें।

अशोक कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि, “हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। सड़क दुर्घटनाओं में देश में लगभग 1.5 लाख तथा उत्तराखण्ड राज्य में लगभग 1000 लोग अपनी कीमती जान गंवाते हैं। आपराधिक घटनाओं से जितनी मृत्यु हो रही है इससे 5 गुना अधिक मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं से हो रही है। जिससे परिवार और समाज को अपूरणीय नुकसान पहुंचता हैइसलिये प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह यातायात के नियमों का पालन करे और अन्य लोगों को भी जागरूक करे।”  प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण नशे में वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाईल फोन का प्रयोग करना, रैस/ओवर स्पीडिंग, ओवर लोडिंग, वाहनों की खराब दशा व उनका फिटनेस का न होना, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, खराब रोड़ इन्जीनियरिंग, चालक की लापरवाही/मानवीय त्रुटि, पहाड़ी मार्गों पर पर्याप्त संकेत चिन्हों का न होना है। जिसमें यातायात समस्या के समाधान हेतु निम्न बिन्दु दिये गयेः-

DSC_3259

Ø  सब-वे/फुट ओवर ब्रिज का निर्माण।

Ø  फुटपाथों का निर्माण मेट्रो रेल हेतु कार्यवाही।

Ø  रिंग रोड एवं बाईपास मार्गो का निर्माण। सभी स्कूलों/कॉलेजों में पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जानी।

Ø  कस्बा क्षेत्रों में नियमित यातायात पुलिस बल नियुक्त करना।

Ø  नये पार्किंग स्थल विकसित करना। मल्टी स्टोरी स्टैगर/पजल्ड पार्किंग का निर्माण।

Ø  बोटल नेकों का चौड़ीकरण किया जाना।

Ø  रेलवे क्रासिंगों के ऊपर रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाना।

उत्पल कुमार, मुख्य सचिव उत्तराखण्ड ने कहा कि, “परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा के सम्बन्ध में स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाये जाये। दुघर्टनाओं सम्भावित क्षेत्रों एवं जाम ग्रसित क्षेत्रों का अध्ययन कर उनके समाधान हेतु सभी विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें।”

त्रिवेन्द्र सिंह रावत,माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड द्वारा इस अवसर पर यातायात निदेशालय उत्तराखण्ड पुलिस की वेबसाईट लांच की गई। सेमिनार का समापन करते हुये अपने सम्बोधन मे कहा कि देश के विकास में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका है। जैसे कि आकड़े बता रहे हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में अधिक मृत्यु युवा वर्ग की हो रही है। इन सड़क दुर्घटनाओं से परिवार को ही नही अपितु देश को भी भारी नुकसान हो रहा है। मैं युवा वर्ग से अपील करना चाहूंगा कि वे अपने माता-पिता, शिक्षको व पुलिस की बात सुनें तथा यातायात के नियमों का पालन करते हुये उन्हें अपने जीवन में लागू करें।

एसआइटी नहीं खुलवा सकी डीपी का मुंह

0

रुद्रपुर: चार-पांच घंटे की पूछताछ के बाद भी एसआइटी पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह का मुंह नहीं खुलवा सकी। पूछताछ के दौरान डीपी सिंह अपने पुराने बयानों पर ही डटे रहे। गुरुवार को एनएच मुआवजा घोटाले में फरार चल रहे पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह ने एसएसपी कार्यालय में सरेंडर किया था। दोपहर तीन बजे से उनसे एसआइटी ने पूछताछ की। साथ ही एनएच घोटाले से जुड़े कई सवाल पूछे। शाम सात बजे तक हुई पूछताछ के दौरान एसआइटी उनसे कुछ खास राज नहीं उगलवा सकी। पूछताछ के दौरान डीपी सिंह अपने पुराने बयानों पर ही अड़े रहे। करीब चार-पांच घंटे हुई पूछताछ के बाद शाम सात बजे उन्हें सिडकुल चौकी भेज दिया गया। एसआइटी अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में उन्होंने कुछ खास नहीं बताया। वह अपने पूर्व में दिए गए बयानों पर ही कायम रहे।
एनएच मुआवजा घोटाले में सरेंडर करने के बाद पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह को सिडकुल चौकी के हवालात में रखा गया था। शुक्रवार की सुबह नैनीताल कोर्ट ले जाने से पहले सीओ स्वतंत्र कुमार ने उनसे 15 मिनट तक पूछताछ की। एनएच मुआवजा घोटाले में फरार चल रहे पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह ने सरेंडर तो कर दिया, लेकिन पूछताछ में उन्होंने कुछ नहीं बताया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अगर डीपी सिंह ने अपना मुंह खोला तो कई सफेदपोश बेनकाब हो सकते हैं। उनके सरेंडर के बाद कई नौकरशाह और सफेदपोशों के माथे पर बल पड़ने लगे हैं।

मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर फंसी कांग्रेस नेत्री

0

रुद्रपुर: नोटबंदी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली कांग्रेस नेत्री फंस गई है। मामले में शुक्रवार को कोतवाल ने उनसे पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। बीते दिनों कांग्रेसियों ने नोटबंदी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान एक कांग्रेस नेत्री ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इसका वीडियो वायरल हुआ तो मामला एसएसपी दफ्तर तक पहुंच गया। विधायक राजकुमार ठुकराल ने एसएसपी से मिलकर आरोपी कांग्रेसी नेत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही भाजपा नेता दिलीप अधिकारी ने कोतवाली पुलिस को तहरीर भी सौंपी थी। मामले में शुक्रवार को पुलिस ने कांग्रेसी नेत्री को पूछताछ के लिए कोतवाली बुलाया। जहां पर कोतवाल ने उनसे पूछताछ कर उनके बयान लिए। कोतवाल तुषार बोरा ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए कांग्रेसी नेत्री से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं।

  प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली कांग्रेसी नेत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से गुहार लगाई है। शुक्रवार को वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिली और पूरा मामला बताया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन देते हुए उच्च अधिकारियों से वार्ता करने की बात कहीं।

घोटाले में शामिल बड़े मगरमच्छों को बचाने में जुटी एसआइटीः हरीश रावत

0

रुद्रपुर। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एनएच मुआवजा घोटाले की जांच हाई कोर्ट की देखरेख में कराए जाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही एसआइटी बड़े मगरमच्छों को बचाने में जुटी है। पूर्व सीएम ने कहा कि कुमाऊं आयुक्त ने इस मामले को उजागर किया तो उन्होंने ही अपनी सरकार में इसकी जांच शुरू कराई। बोले, इस घोटाले के प्रमुख दोषी तो एनएचएआइ के अधिकारी हैं, जिनकी मौजूदगी में इतना बड़ा घोटाला हो गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। केंद्र के एक प्रभावी मंत्री के पत्र के बाद इस मामले से एनएचआइ के अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई। उन्होंने कहा कि सीबीआइ की जांच पर भी कतई भरोसा नहीं है। एसआइटी राज्य सरकार के अधीन होने से राजनैतिक दबाव में है। ऐसे में इसकी जांच हाई कोर्ट के न्यायधीशों की निगरानी में कराए जाने की उन्होंने मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार पूरी तरह फ्लाप साबित हुई है। केंद्र सरकार संसद सत्र टालकर जनता के प्रति जवाबदेही से बच रही है। केंद्र ने अभी जो विमान खरीद का सौदा किया है, वह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा घोटाला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कहती है कि न खाएंगे-न खाने देंगे, पर हालत यह हैं कि केंद्र के मंत्रियों के पुत्रों की संपत्ति एक साल में ही सैकड़ों गुना हो गई। इसकी जांच के लिए कोई तैयार नहीं है। रावत बोले, केंद्र ने नोटबंदी कर सबसे बड़ा घोटाला किया। रावत प्रदेश सरकार पर भी जमकर बरसे। बोले, प्रदेश के मुखिया जीरो टालरेंस की बात कर रहे हैं, पर इनके तमाम मंत्री बड़े घोटाले में लिप्त हैं। मुख्यमंत्री मुझसे मंत्रियों के नाम पूछ रहे हैं, जबकि सरकार के एक मंत्री के कारनामे अखबारों में पटे पड़े हैं। मुख्यमंत्री पहले उनके खिलाफ कार्रवाई करें, तो मैं बाकी मंत्रियों के नाम भी बताने को तैयार हूं।

निलंबित पीसीएस अफसर नगन्याल चल रहे भूमिगत

0

रुद्रपुर: एनएच 74 मुआवजा घोटाले में निलंबित डिप्टी कलेक्टर एनएस नगन्याल आज तक एसआईटी के हाथ नहीं लगे हैं। वह पांच नवंबर को एसआईटी के छापे के बाद से भूमिगत चल रहे हैं। वहीं डाटा एंट्री आपरेटर भी फरार चल रहा है। गौरतलब है कि बीती पांच नवंबर को निलंबित पीसीएस अफसर नगन्याल के देहरादून स्थित सरकारी आवास पर एसआईटी का छापा मारा था। उस वक्त से नगन्याल भूमिगत चल रहे हैं। एसआईटी ने उसी दिन निलंबित चल रहे पीसीएस अफसर भगत सिंह फोनिया को गिरफ्तार किया था। यहां बता दें कि एनएच घोटाले में उक्त पीसीएस अफसर निलंबित किए गए थे। हालांकि छापे के बाद एसआईटी ने नगन्याल की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किए। उन पर बैकडेट में जमीनों की 143 करने का आरोप है। उनके हस्ताक्षरों के मिलान की एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह के आत्मसमर्पण के बाद अब एसआईटी नगन्याल की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर सकती है। वहां फरार चल रहे डाटा एंट्री आपरेटर अर्पण की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी लगी हुई है। आरोप है कि डाटा एंट्री आपरेटर के खाते में बड़ी रकम का लेन देन हुआ है, जिसका वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। डाटा एंट्री आपरेटर के मोबाइल की कॉल डिटेल भी एसआईटी के पास है। हालांकि अभी कई और अफसरों, कर्मचारियों एवं किसानों की गिरफ्तारियां होनी हैं, लेकिन उससे पहले एसआईटी अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। बाजपुर तहसील क्षेत्र की जांच अब रफ्तार पकड़ रही है। बाजपुर में चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों में अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जमीनों की 143 करने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। इसके अलावा जांच आगे बढ़ी तो अन्य सफेदपोशों पर भी कानून का शिकंजा कसा जा सकता है।

जब एक युवा ने एमएनसी की नौकरी छोड़ की ”संस्कृति” की शुरुआत

0

शिक्षा एक ऐसा धन है जो बांटने से कम नहीं होता बढ़ता जरुर है, ऐसे ही एक युवा पिछले दस सालों से बच्चों के लिए शिक्षा का ऐसा माध्यम बन चुके हैं जो शायद स्कूल और कालेजों से हटकर हैं।  हम बात कर रहे हैं जोगिंदर रोहिला की जिन्होंने साल 2007 में अपने घर में लाइब्रेरी खोलकर यह नेक शुरुआत की थी और आज अलग-अलग राज्यों में इनकी लगभग 20 लाइब्रेर बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रही हैं।

32 साल के जोगिंदर रोहिला वैसे तो बहादुरगढ़ हरियाणा के रहने वाले हैं लेकिन आजकल वह देहरादून में रह रहे हैं।यू तो जोगिंदर ने एशिया, यूरोप और साउथ अमेरिका जैसे देशों में टीसीएस जैसी मल्टीनेशनल कंपनी में भी काम किया है, लेकिन अब वह एक एंटरप्रेन्योर की तरह काम रहें हैं।

sanskriti

जोगिंदर की अपनी एक आईटी कंपनी है, इसके अलावा वह अपने एनजीओ ‘संस्कृति’ के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं।साल 2007 में उन्होंने पहली लाइब्रेरी अपने घर में खोल कर इसकी पहल की थी। फिर वह ना रुके ना झुके, बस आगे बढ़ते गए और आज भारत के अलग-अलग कोनों में उनकी 20 से भी ज्यादा लाइब्रेरी चल रही हैं।

जोगिंदर रोहिला से टीम न्यूजपोस्ट की खास बातचीत में उन्होंने बताया कि, “वह बहुत नीचे स्तर से शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाना चाहते थे” और इसी सोच के साथ उन्होंने ‘संस्कृति’ एनजीओ की शुरुआत की।जोगिंदर मानते हैं कि, “किसी भी काम को करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरुरत होती और दृढ़ता से किया कोई भी काम असफल नहीं होता।”

बीस से भी अधिक लाइब्रेरी के बाद जोगिंदर लाइब्रेरी की संख्या सौ तक पहुंचाने की चाहत रखते हैं।जोगिंदर की ख्वाहिश है कि वह ‘संस्कृति करियर गाइडेंस’ के माध्यम से कम से कम 10 हजार बच्चों तक पहुंचे और उन्हें शिक्षित कर सकें। देहरादून में रहते हुए जोगिंदर जल्द ही उत्तराखंड में भी अपनी लाइब्रेरी शुरु करने वाले हैं जिसमें से एक दून में तो दूसरा पहाड़ी गांव डूंगा में स्थापित करने की कोशिश कर रहें है।जोगिंदर के इस पहल में उनके परिवार व दोस्तों ने उनका पूरा सहयोग किया।

15977631_1338869339485960_6366658581329767816_n

आपको बतादें कि जोगिंदर द्वारा खोली गई लाइब्रेरी में बच्चें बिना किसी शुल्क के किताबें पढ़ सकते हैं और शिक्षित हो सकते हैं।जोगिंदर से यह पूछने पर कि क्या इन लाइब्रेरी से समाज में कुछ बदलाव आ रहा? जोगिंदर का कहना था कि, “मेरे हिसाब से लाइब्रेरी का होना बच्चों के लिए एक अलग मौका है अपने विषय से हटकर कुछ अलग पढ़ने का। एक ऐसा जरिया है जो हर बच्चें को पसंद होता है।बहुत से बच्चे लाइब्ररी में जाते हैं और पढ़ाई करते है जिससे उनकी रिडिंग स्किल बेहतर होती है।”

जोगिंदर द्वारा खोली गई लाइब्रेरी ना केवल बच्चों के लिए बल्कि उनके मां-बांप के लिए भी बड़ी उपलब्धि है जिसके माध्यम से वह अपने बच्चों को और अधिक शिक्षित बना सकते हैं। ‘संस्कृति’ एनजीओ के अलावा जोगिंदर ने हाल में ही अपनी पहली किताब ‘ड्रिम्स ‘भी लॉंच की है जिसके लिए टीम न्यूजपोस्ट उनहें बहुत सारी शुभकामनाएं देता है।

उत्तराखंड में टिहरी और पौड़ी के गांव सबसे प्यासे

0

गंगा-यमुना का मायका उत्तराखंड के गांवों को पीने के लिए पानी भी मयस्सर नहीं है। केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की रिपोर्ट भी इसकी तस्दीक कर रही है। प्रदेश के 39,282 गांव-मजरों में से करीब 56 फीसदी, यानी 21,706 में ही मानक के अनुसार पेयजल मिल पा रहा है, इसमें सबसे खराब स्थिति टिहरी और पौड़ी जिले की है। यहां क्रमश: 21 और 32 फीसदी ही बस्तियों को पर्याप्त पानी मिल रहा है।

नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट (एनआरडीडब्यूपी) के तहत जारी आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर चौंकाने वाली है। मानकों के अनुसार, प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 40 ली. के हिसाब से पानी की उपलब्धता होनी चाहिए, लेकिन उत्तराखंड के 44 फीसदी गांव-मजरों की स्थिति दयनीय है। टिहरी और पौड़ी के अलावा राजधानी देहरादून, हरिद्वार, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। यहां भी आधी से ज्यादा बस्तियां पेयजल के लिए हर रोज संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि कुमाऊं के जिलों में हालात कुछ बेहतर हैं, लेकिन यहां सर्वाधिक संकटग्रस्त जिला अल्मोड़ा है। टिहरी की जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि टिहरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहली बार पांच साल का प्रोजेक्ट ‘पानी’ तैयार किया गया है, इसमें उन क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, जहां पर पानी की खासी कमी है।

पानी के लिए तरसती बस्तियां 
जिला – बस्तियां
टिहरी – 78.49
पौड़ी – 67.47
देहरादून – 59.53
हरिद्वार – 49.11
चमोली – 49.76
रुद्रप्रयाग – 47.46
अल्मोड़ा – 35.35
उत्तरकाशी – 34.96
चंपावत – 27.28
पिथौरागढ़ – 23.78
बागेश्वर – 17.28
नैनीताल – 13.88
यूएस नगर – 4.59

अब उत्तराखंड के सभी बंदी होंगे कंप्यूटर प्रशिक्षित

0

राज्य कारागार के सभी बंदी अब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के छात्र होंगे। इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र देहरादून के द्वारा प्रमुख सचिव आनंद वर्धन की पहल पर उत्तराखंड राज्य के विभिन्न कारागारों के बंदियों के लिये निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा का अभियान प्रारम्भ किया जा रहा है। बंदियों को शिक्षित समाज को हिस्सा बनाने की दिशा में शनिवार को शिविर का आयोजन किया गया।

जिला कारागार देहरादून में आयोजित हुआ इग्नू प्रवेश शिविर, इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र देहरादून के उपनिदेशक डाॅ. रंजन कुमार एवं सहायक क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. जगदम्बा प्रसाद के दिशा निर्देशन में संचालित किया गया। शिविर का आयोजन कारागार अधीक्षक महेन्द्र सिंह ग्वाल एवं जेलर राकेश वर्मा के द्वारा कारागार परिसर में किया गया जिसमें लगभग 200 बंदियों ने प्रतिभाग किया।

शिविर के प्रारंभ में कारागार अधीक्षक एमएस ग्वाल ने बताया कि कारागार में बंदियों के सर्वांगीण विकास हेतु कारागार के भीतर ही इग्नू अध्ययन केन्द्र संचालित होता है। जिसमें लगभग एक दर्जन शैक्षणिक एवं रोजगारपरक कार्यक्रम बंदियों हेतु उपलब्ध हैं। इग्नू के उपनिदेशक डाॅ. रंजन कुमार ने इंतिहास के विभिन्न प्रसंगों का उदाहरण देते हुए बंदियों को प्रेरित किया कि शिक्षा के द्वारा जीवन में मूलभूत परिवर्तन संभव हैं एवं कारागार बंदियों हेतु दूरस्थ शिक्षा आजादी की लड़ाई के समय से अबतक जीवन परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष इग्नू द्वारा बड़े स्तर पर बंदियों को कंप्यूटर प्रशिक्षित किया जाएगा।

सहायक क्षेत्रीय निदेशक डाॅ.जगदम्बा प्रसाद ने बंदियों को इग्नू के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कारागार में रहते हुए अध्ययन करने से न सिर्फ समय का सदुपयोग होता है बल्कि भविष्य में रोजगार पाने की संभावनाओं का बड़ा द्वार भी खुल जाता है। तत्पश्चात इग्नू के अधिकारियों द्वारा बंदियों की शिक्षा के प्रति विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। शिविर में इग्नू के विभिन्न कार्यक्रमों में बंदियों ने प्रवेश लिया। कंप्यूटर शिक्षा के लिए सूचना तकनीकी में प्रमाण पत्र एवं कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम चलाये जायेंगे।

कंप्यूटर प्रशिक्षण कारागार देहरादून परिसर में उपलब्ध कंप्यूटरों के द्वारा परिसर के भीतर ही चलाया जायेगा। कृषि में रूचि रखने वाले बंदियों हेतु जैविक कृषि में प्रमाणपत्र, मधुमक्खी पालन में प्रमाणपत्र आदि कार्यक्रम संचालित होंगे। इसके अलावा शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए बीए, बीकाॅम एवं जैसे कई विषयों में स्ताकोत्तर डिग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। अधिक पढे़ लिखे बंदियों हेतु स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। कारागार अधीक्षक ने बताया कि देहरादून कारागार में लगभग 500 बंदियों को इग्नू के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रवेश दिया जायेगा। 

स्कूली बच्चों को दिखाई राजू बजरंगी

0

देहरादून। सिद्धबली प्रोडक्शन की फिल्म ‘राजू बजरंगी’ एक हफ्ते की स्क्रीनिंग के अंतिम दिन शनिवार को सहसपुर ब्लॉक के राजकीय मध्यमिक इंटर कॉलेज के बच्चों एवं जैन समाज से जुड़े लोगों ने फिल्म का आनंद उठाया।

फिल्म प्रोड्यूसर शिवनारायण रावत ने बताया कि फिल्म को बहुत लोगों ने पसंद किया है, इसको देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि अब इस फिल्म को मॉल में भी प्रदर्शित किया जाएगा। फिल्म देखने पहुंचे वैश्य समाज के पदाधिकारी सोहन लाल गुप्ता ने कहा कि फिल्म के माध्यम से एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि जहां आज के दौर में कमर्शियल फिल्में बन रही हैं, वहां इस तरह की धार्मिक फिल्म बनाना पने आप में काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि वे इस फिल्म को अपने प्रयासों से मॉल में भी प्रदर्शित करवाएं।
फिल्म के प्रोड्यूसर शिवनारायण रावत ने कहा कि एक हफ्ते में फिल्म को देखने कई स्कूलों के बच्चे आए, जिनमें हिल फाउंडेशन, आर्यन स्कूल एवं एशियन स्कूल शामिल थे। उन्होंने कहा कि फिल्म को बहुत ही बढ़िया रिस्पॉस मिला है। जल्द ही फिल्म को मॉल में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे यह फिल्म और अधिक लोग देख सकेंगे।