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अब केंद्र सरकार की वेबसाइट पर अपलोड होगा छात्रवृत्ति आवेदन

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देहरादून। अब छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने में राज्य सरकार की लचर व्यवस्था आड़े नहीं आएगी। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य के छात्रवृत्ति आवेदन को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्णय लिया है, जिससे कि छात्रों को समय से छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा सके।
अब तक राज्य में सभी वर्गों के छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति के लिए किए जाने वाले आवेदन राज्य सरकार की वेबसाइट पर अपलोड होते हैं। जब भी छात्रवृत्ति का पैसा छात्र-छात्राओं के खाते में भेजने की बारी आती है तो अत्यधिक लोड आने के बाद विभाग की वेबसाइट ही ठप हो जाती है। ऐसे में महीनों तक वेबसाइट ठप होने के कारण छात्रों को छात्रवृत्ति से मोहताज रहना पड़ता है। कई बार तो छात्रवृत्ति न आने के कारण छात्र अगले वर्ष में प्रवेश तक नहीं ले पाते। साथ ही समय से पैसा न मिलने से आए दिन छात्रों का समाज कल्याण कार्यालय पर हंगामे प्रदर्शन भी देखने को मिलते हैं। इस समस्या को देखते हुए अब केंद्र सरकार के निर्देश पर अगले साल से
छात्रवृत्ति के लिए साइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। इस संबंध में एक दिन पहले समाज कल्याण निदेशालय की ओर से प्रदेश के सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। बैठक में अधिकारियों को नए सॉफ्टवेयर पर काम करने की जानकारी दी गई। विभाग की मानें तो इस संबंध में शीघ्र आदेश कर दिए जाएंगे। अगले साल से यह व्यवस्था लागू होगी

समाज कल्याण विभाग ही भिक्षावृत्ति प्रतिबंधित से बेखबर

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देहरादून। भले ही समाज कल्याण निदेशालय ने दो साल पहले उत्तराखंड राज्य में भिक्षावृत्ति पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा दिया हो। लेकिन, दून के जिला समाज कल्याण विभाग इससे अंजान है। विभाग को अब तक ये तक पता नहीं चला कि भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लग चुका है। इस संबंध में आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में इस बात का खुलासा हुआ है।

आरकेडिया ग्रांट ग्राम निवासी आरटीआई कार्यकर्ता वीरू बिष्ट ने जिला समाज कल्याण दून कार्यालय से आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी कि उत्तराखंड में भीख मांगने पर रोक का अधिनियम कब लागू किया गया। विभाग में दर्ज आंकड़ों के अनुसार देहरादून व हरिद्वार जिले में भिखारियों की संख्या कितनी है। सरकार ने भीख मांगने वालों के पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की है। साथ ही विभाग ने इन लोगों के लिए कौन-कौन सी योजनाएं चला रखी हैं। इसके अलावा कार्यकर्ता ने आरटीआई के तहत विभाग से आठ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। हैरत की बात है कि बाकी सूचना देना तो दूर की जिला समाज कल्याण कार्यालय ने इस बात से ही साफ इन्कार कर दिया कि उत्तराखंड राज्य में भीख मांगने पर रोक संबंधी अधिनियम कार्यालय में धारित ही नहीं है। इसके अलावा न ही विभाग के पास भिखारियों की संख्या उपलब्ध है और न कार्यालय को भिखारियों के पुनर्वास के लिए कोई बजट प्राप्त हुआ है। जबकि, स्थिति ये है कि जिला प्रशासन व पुलिस की ओर से लगातार भिखारियों पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद जब आरटीआई कार्यकर्ता ने अपील दायर की तो तब जाकर विभाग ने माना की उनसे गलती हुई है।
इस मौके पर समाज कल्याण निदेशक मेजर योगेंद्र यादव पहले इस संबंध में पूरी जानकारी एकत्रित की जाएगी। इसके बाद कारणों की पड़ताल करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

पहाड़ों में कम से कम डेढ़ लेन की होंगी सड़कें

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को सिंगल लेन सड़कों से निजात दिलाने के लिए लोनिवि की एडीबी यूनिट ने कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 22.42 करोड़ रुपये (करीब 350 मिलियन डॉलर) का ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और पहले फेज में कम से कम एक हजार किलोमीटर सड़कों के सुधारीकरण का कार्य किया जाएगा।

एडीबी यूनिट के परियोजना निदेशक एसके बिड़ला के अनुसार राज्य में राज्य राजमार्गों के सुधारीकरण का कार्य प्रस्तावित है। तय किया गया है कि परियोजना में पर्वतीय क्षेत्र की सड़कों को कम से कम डेढ़ लेन व मैदानी क्षेत्र की सड़कों को दो लेन चौड़ा किया जाए। इस समय राज्य में करीब 2200 किलोमीटर सड़कें सिंगल लेन हैं। इस समय भले ही एक हजार किलोमीटर की सड़कों के सुधारीकरण प्रस्तावित है, लेकिन सरकार से मांग की जाएगी कि यह सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि अधिक से अधिक सड़कों को आदर्श स्थिति में लाया जा सके। परियोजना में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने के लिए इसकी स्वीकृति की मांग केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
एडीबी यूनिट के परियोजना निदेशक एसके बिड़ला के मुताबिक अकसर देखा जाता है कि जमीन अधिग्रहण में लंबा वक्त लग जाता है और इससे कार्य पूरा करने की वास्तविक अवधि में इजाफा हो जाता है। इससे एडीबी जैसी वित्त पोषण वाली संस्थाओं में रेटिंग भी खराब हो जाती है। विश्वपटल पर इससे संबंधित देश व राज्य की छवि भी धूमल होती है। इस परियोजना में काम शुरू करने से पहले जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी की जाएगी। सड़क सुधारीकरण में वन भूमि व निजी भूमि भी जद में आएगी। लिहाजा, हर स्तर पर तैयारी कर जमीन अधिग्रहण की औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। जब यह काम पूरा हो जाएगा, तब एडीबी से ऋण लेकर परियोजना को तय समय के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में महिला आर्थिकी की रीढ़ हैंः डीएम

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पौड़ी। जनपद पौड़ी गढ़वाल में दीनदयाल अन्त्योदय योजना के अधीन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका गतिविधियों के संचालन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण गौरीकोट में आयोजित किया गया।

जिलाधिकारी सुशील कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने विभिन्न स्वयंसेवी सहायता समूहों की महिलाओं से कहा कि वे खेती को कलस्टर के रूप में अपनाकर अपनी आय आगामी पांच वर्षों में दोगुनी करने के लिए कृत संकल्पित हों। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं ही आर्थिकी की रीढ़ हैं। जिनका सामाजिक और आर्थिक उन्नयन करने के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। उन्होंने गौरी समूहों के तृतीय स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि इस समूह ने वर्ष 2014 में जहां 10 नाली बंजर भूमि पर खेती कर अपने समूह को आर्थिक रूप से मजबूत किया है। वहीं अब यह समूह सौ नाली क्षेत्रफल में कृषि, पशुपालन, मुर्गी तथा मत्स्य पालन एवं बेमौसमी सब्जी उत्पादन कर अपनी आर्थिकी को और सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तरीय समिति के गठन के बाद पंचायत स्तर पर समितियों का गठन कर समूहों को सुदृढ़ बनाया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, मृदा परीक्षण के साथ ही कृषि यंत्रिकरण एवं उवर्रकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही निर्देशित किया। उन्होंने केवीके भरसार के कृषि विशेषज्ञों को इन समूहों को खेती की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी समूह तभी सफलता प्राप्त कर सकता है, जब उस समूह के सदस्यों को योजनाओं की जानकारी व दृढ़ ईच्छा शक्ति और सबकी सहभागिता से कार्य करने का संकल्प हो। प्रशिक्षण कार्यशाला में जिलाधिकारी ने पंजाब नेशनल बैंक द्वारा सीसीएल के तहत गौरी समूह को पचास हजार रुपये की स्वीकृति का पत्र समूह की अध्यक्षा मालती देवी को भेंट किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के उद्देश्यों को लेकर जिला मिशन प्रबंधक व अपर परियोजना निदेशक सुनिल कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास करने के लिए विभागीय अधिकारियों को समूहों के साथ बैठकर विस्तृत चर्चा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा वजली जिसके तहत 17 समूह कार्यरत हैं। उन्होंने इन गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को ग्रामीण पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए यहां पर दो हट्स बनाने तथा मत्स्य तालाबों का विकास करने के अलावा स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की बात भी कही। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी रवनीत चीमा ने महिलाओं द्वारा बंजर भूमि को आबाद करने और उससे अपने परिवार का भरण पोषण कर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ करने पर बधाई दी। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे और अधिक क्षेत्रफल में अच्छा उत्पादन कर क्षेत्र को किसी प्रमुख उत्पादन के लिए प्रसिद्ध करने के लिए कार्य करने करें। उन्होंने दलहन व तिलहन के अलावा सोयाबीन की खेती कर आर्थिकी बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में महिलाएं किसी से कम नहीं हैं और अब खेती को कलस्टर के रूप में और अधिक क्षेत्रफल में ज्यादा उत्पादन कर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर सकती हैं। प्रशिक्षण कार्यशाला में बैंक सुविधाओं, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल बीमा, कृषि यंत्रिकरण, उवर्रकों की आपूर्ति तथा बंजर भूमि को खेती के लिए उपयोग में लाने के लिए लीज की व्यवस्था जैसे विषयों पर विभागीय अधिकारियों द्वारा स्वयं सेवी समूहों के सदस्यों को विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर लीड बैंक प्रबंधन नंदकिशोर, आरसेटी प्रबंधक जेएस मर्तोलिया, उप महाप्रबंधक नाबार्ड बृजेंद्र सिंह नेगी, सहायक निबंधक सहकारिता सुमन कुमार, डीएसटीओ निर्मल शाह, खंड विकास अधिकारी पौड़ी पीके त्रिवेदी, बीडीओ कोट सुरेंद्र नौटियाल, गौरी समूह को प्रबंधक अनिल रावत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केशर सिंह नेगी, शैलेंद्र नौटियाल, रेखा देवी, जानकी देवी, माया देवी, लक्ष्मी देवी, चंद्रा देवी, मालती देवी, मोहनी, निर्मला, प्रमिला समेत क्यार्क व सिरोली क्षेत्र के स्वयं सेवी समूहों की महिला सदस्य उपस्थित रहे।

गढ़वाली फिल्म बौड़िगी गंगा 5 जनवरी से होगी प्रदर्शित

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ऋषिकेश। ड्रिम्स अनलिमिटेड फिल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले निर्मित गढ़वाली फिल्म बौड़िगी गंगा अगामी पांच जनवरी से ऋषिकेश में प्रदर्शित की जाएगी। गढ़ संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल महासभा ने फिल्म के प्रमोशन में हर संभव सहयोग की घोषणा की है। कैलाश गेट मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित एक होटल में रविवार को आयोजित बैठक में उत्तराखंडी संस्कृति के लोगों को फिल्म देखने के लिए अधिक से अधिक आर्कषित करने के लिए मंथन किया गया।

बैठक में फिल्म के निर्माता/निर्देशक अनिरुद्ध गुप्ता ने कहा कि फ़िल्म को ऋषिकेश रामा पैलेस में 5 जनवरी से प्रदर्शन हेतु सेंसर बोर्ड समेत सभी कार्यवाही पूरी की जा चुकी है। फ़िल्म के गीतकार और पटकथा लेखक अरुण बड़ोनी के अनुसार फ़िल्म के गीत मन को छूने वाले हैं।

महासभा के महामंत्री और फ़िल्म में पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभा रहे उत्तम असवाल ने कहा कि बौड़िगी गंगा फीचर फिल्म आज की युवा पीढ़ी की पसंद के हिसाब से बनाई गई है, जिसमें अधिकतर कलाकार युवा है। समाजिक कार्यकर्ता हर्षित गुप्ता ने फ़िल्म में क्षेत्रीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के लिए फ़िल्म निर्माता अनिरुद्ध गुप्ता के प्रयासों की सराहना की।

भाजपा कार्यसमिति में हुआ मंथन,सरकार के कार्यों की बनी रुप रेखा

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हल्द्वानी- कार्यसमिति की बैठक संगठन को मजबूती देने के साथ ही सरकार की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी भी निर्धारित करेगी, सीएम रावत ने कहा कि कार्यसमिति से जहां सरकार को दिशा मिलेगी वहीं कार्यसमिति के माध्यम से सरकार के बिते हुए कार्यकाल और आगामी रणनीतियों पर बी विचार किया जा सकेगा।

हल्द्वानी में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के अलावा मंत्री विधायक समेत 260 सदस्य बैठक में भाग ले रहे हैं। संगठन के तीन महीने के कार्य की समीक्षा जहां बैठक का एजेन्डा रखा गया है वहीं तीन महीनों के कार्यक्रम की रूपरेखा भी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यसमिति की बैठक निर्धारित है। इसमें पिछले तीन महीने के कार्यों की समीक्षा होगी। इसमें अगले 3 महीने के कार्य की रूपरेखा तय की जाएगी। सभी को निर्धारित कार्यक्रम की जिम्मेदारी भी की जाएगी ताकि संगठन मजबूत हो सके। साथ ही सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया जाएगा।

बाईपास ना बनने पर बिफरे व्यापारी

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गदरपुर- बाईपास का निर्माण शुरू कराने को लेकर 15 दिसंबर को आमरण अनशन पर बैठे दो व्यापारी नेताओं को पुलिस ने जबरन उठा कर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। आधी रात के बाद की गई इस कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने बाजार बंद कराकर रोष का इजहार किया तथा थाने पहुंच कर थानाध्यक्ष पर चूडिय़ां फेंकी। थानाध्यक्ष व व्यापारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। यही नहीं पांच अन्य व्यापारी रविवार को आमरण अनशन पर बैठ गए।

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गदरपुर में बाईपास निर्माणाधीन है, जिसका कार्य लंबे समय से रुका हुआ है। बाईपास न होने के कारण गदरपुर में जाम की स्थिति रहती है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसे लेकर समाजसेवी राजकुमार सिंधी व राजीव पपनेजा मुख्य मार्ग पर हजारी लाल पेट्रोल पंप के समीप आमरण अनशन पर बैठ गए थे। यहां बता दें कि हाईकोर्ट ने गदरपुर में अतिक्रमण हटाने के आदेश दे रखे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि बाईपास शुरू हो जाए तो नगर में जाम की समस्या खत्म हो जाएगी। पुलिस अनशन स्थल पर पहुंची तथा दोनों आमरण अनशन कारियों को जबरन उठा कर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। आरोप है कि जबरन उनका अनशन तुड़वा दिया गया। कहा कि जिला प्रशासन व एनएचएआई के अधिकारी बाईपास का निर्माण कार्य जानबूझ कर लटकाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ाई लड़ेंगे। वहीं राजकुमार सिंधी ने कहा कि जब तक गदरपुर में बाईपास शुरू नहीं हो तब तक एनएच 74 पर टोल वसूली रोकी जाए।

बंद घरों में चोरियां करने वाले गिरोह का पर्दाफाश 

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नीरज अग्रवाल, निवासी 14 आशिमा विहार ने थाना क्लेमनटाऊन, देहरादून मे तहरीर दी कि 8/12/17 को दिन मे जब वे अपनी माताजी के साथ महंत इन्दिरेश अस्पताल गये थे, जहां पत्नी का इलाज चल रहा था, तो दो घंटे बाद जब घर आये तो घर की लॉबी का ताला टूटा हुआ था एवं कमरे की आलमारियां खुली पड़ी थी और घर में सारा सामान बिखरा पड़ा था। आलमारी से मेरा कैनन कैमरा, आभूषण व कुछ नकदी चोरी हो गयी थी। सूचना पर थाना क्लेमनटाऊन ने तहरीर के आधार पर मु.अ.स 183 /17 धारा 454 / 380 भा.द.वि बनाम अज्ञात अभियुक्त पंजीकृत किया गया।

शहर क्षेत्र में हो रही चोरियों / नकबजनी की घटनाओं के कारण जनता के मध्य भय का माहौल पैदा हो गया था । संगीन घटनाओं की गम्भीरता को देखते हुए थाना क्लेमेन्टाउन ने पुलिस टीम गठित करी जिसके बाद टीम ने घटनास्थलों के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली एवं घटनास्थल के आसपास निवासरत किरायेदारों/लोगों से गहनता से जांच /पूछताछ की गयी एवं घटना के दिन जनपद से बाहर जाने वाले वाहनों की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली एवं थाना क्षेत्र में मुखबिर मामूर किये गये ।

फुटैज में एक वाहन घटना के दिन घटना स्थल के पास खड़ी दिखायी दी एवं संदिग्ध प्रतीत हुई । जिस आधार पर सुरागरसी -पतारसी करते हुये उक्त वाहन के मालिक का नाम /पते जानकारी, की गयी तो उक्त वाहन पूजा, जहांगीरपुरी, दिल्ली के नाम पर होना पाया गया । जिसके पश्चात तुरन्त थाना क्लेमनटाऊन से एक टीम दिल्ली रवाना हुई एवं दिल्ली में सुरागरसी पतारसी करते हुये मालूमात हुआ कि कार कमल चलाता है, जो चोर गिरोह का सदस्य है ।

पुलिस टीम ने जहांगीरपुरी क्षेत्र से वाहन एवं तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। जिनके पास से आशिमा विहार क्लेमनटाऊन से चोरी हुआ माल एवं अन्य कुछ जेवरात बरामद हुये, जिन्हें माल सहित गिरफ्तार किया गया एवं तीनों अभियुक्तगणों को आज प्रात: गिरफ्तार थाना क्लेमनटाऊन लाया गया ।

चुनाव नतीजों पर कांग्रेस-भाजपा के नेता कर रहे जीत के दावे

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हरिद्वार, गुजरात व हिमाचल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आज का दिन कांग्रेस-भाजपा के लिए बेहद खास है। क्योंकि इसी दिन गुजरात-हिमाचल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने जा रहे हैं। देश की दो बड़ी पार्टियां कांग्रेस-भाजपा की साख इस चुनाव में दाव पर लगी है।

चुनाव परिणाम से पहले विभिन्न चैनलों के एग्जिट पोल सर्वे के मुताबिक, दोनों राज्यों में बीजेपी को बहुमत मिलता दिख रहा है लेकिन ये एग्जिट पोल स्टीक हों ये जरूरी नहीं है। एग्जिट पोल के बाद जहां बीजेपी के खेमे में खुशी की लहर है वहीं कांग्रेसी इन एग्जिट पोल को सिरे से नकार रही है।

चुनाव नतीजों को लेकर हरिद्वार में भी नेताओं के बीच खासी चर्चाए सुनाई दीं। दोनों दलों के नेता अपनी पार्टी की सरकार बनने का दावा करते नजर आए। इन दोनों प्रदेशों के चुनाव नतीजे जहां भाजपा के लिए खासा मायने रखते हैं वहीं कांग्रेस के लिए भी चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है। यदि कांग्रेस चुनाव हारती है तो यह राहुल गांधी की सीधे तौर पर हार होगी।

ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये चुनाव साख बचाने जैसा है। यदि भाजपा के पक्ष में परिणाम नहीं आते तो नोटबंदी व जीएसटी का इसे बड़ा कारण कहा जा सकता है। हालांकि हरिद्वार में भाजपा नेता अपनी पार्टी की पूर्ण बहुमत के साथ जीत के लिए प्रतिज आश्वस्त दिखाई दिए। कांग्रेसी भी जीत का दावा करते दिखाई दिए, किन्तु कहीं न कहीं अपने चेहरे पर हार का डर भी स्पष्ट झलकता हुआ दिखाई दिया। बहरहाल कुछ घंटे ही नतीजों के आने में बचे हैं।

वनाधिकार कानून के मामले में उत्तराखंड बहुत पीछे

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देहरादून। उत्तराखंड में वनाधिकार कानून को लागू करने में अब तक की सरकारें लापरवाह और उदासीन हैं। वन क्षेत्र में सदियों से निवास करने वाले समूहों व समुदायों का उत्पीडऩ तक किया जा रहा है। सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक मामले में बेहद दयनीय जीवन जीने वाले समुदायों पर अब तक की सरकारें विशेषकर वन महकमा दमनकारी ही रही हैं।

उत्तरांचल प्रेस क्लब सभागार में वन पंचायत संघर्ष मोरचा, वन जन श्रमजीवी यूनियन की तरफ से आयोजित सम्मेलन में वनाधिकार कानून 2006 पर गंभीर मंथन हुआ। देश के कोने कोने से आए वनवासियों ने अपना दर्द बयां किया।
रिटायर्ड आईएएस चंद्र सिंह व पर्यावरणविद् वीरेंद्र पैन्यूली ने कहा कि वनवासियों के प्रति सभी सरकारे क्रूर रही हैं। वनाधिकार कानून 2006 बनने के बाद भी हालात बेहतर नहीं हुए हैं। केंद्र और राज्यों की सरकारों का रवैया पूरी तरह से नकारात्मक रहा है। इसलिए अब संघर्ष के जरिए ही हालात बदलने की कोशिश होनी चाहिए। किसान सभा के सुरेंद्र सिंह सजवाण ने कहा कि वन पंचायतों को लेकर अभी भी हुकूमत पशोपेश में है। वह सरमाएदारों व कारपोरेट को तो हर तरह से मदद दे रही है लेकिन वनवासियों की उपेक्षा कर रही है। वनवासियों की समस्याएं पहाड़ जैसी हैं जिनके बारे में कोई स्पष्ट नीति नहीं है। वनाधिकार अधिनियम को लागू करने की इच्छा किसी स्तर पर नहीं दिख रही। अशोक चौधरी व तरुण जोशी ने कहा कि उत्तराखंड समेत बिहार, झारखंड, बंगाल, उत्तरप्रदेश में वनवासियों पर कहर बरपाया जा रहा है। भूमि के साथ ही आजीविका छीनी जा रही है। सरकारों का रवैया पूरी तरह से उपेनिवेशावादी मानसिकता वाला है। हमें आज भी नागरिक नहीं माना जा रहा है। संवैधानिक हर हकूक नहीं दिये जा रहे हैं। रोमा एनके शुक्ला, मौहम्मद शफी, मौहम्मद मीर ने कहा कि वन गुर्जरो को बेदखल किया जा रहा है। उन पर बे सिरपैर के आरोप जड़े जा रहे हैं। इसके पीछे बड़ी साजिश काम कर रही है। प्रदेश भर में वनाधिकार अधिनियम को लागू नहीं किया गया है।