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उत्तराखंड में नदियों के 1 किलोमीटर दायरे में नहीं डाला जाएगा कूड़ा

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ऋषिकेश। जमीनी स्तर पर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की सरकारी कवायद की हकीकत को देखकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड की मुख्य नदियां और उनकी सहायक नदियों के दोनों किनारे पर 1 किलोमीटर के दायरे में कोई कूड़ा नहीं दिखना चाहिए इसके लिए संबंधित जिलों के डीएम और उप जिलाधिकारियों  को व्यक्तिगत रुप से जिम्मेदारी देते हुए 1 सप्ताह का समय दिया है। गंगा की सफाई के लिए तमाम दावे तो किए जाते हैं लेकिन  इन दावों की जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है वर्तमान में नमामि गंगे प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार तमाम कदम उठाने की बात तो कर रही है लेकिन अपने ही घर में गंगा मैली होती जा रही है।बात करें ऋषिकेश की तो यहां भी गंगा में लगातार गंदे नालों का गिरना जारी है साथ ही इसके सहायक नदियां शहर भर के कूड़े से लबालब भरी है। अब हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद गंगा के 1 किलोमीटर के दायरे मकोड़ा प्रतिबंधित करने के आदेश को सभी जिला अधिकारी और उप जिला अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर दी है जिन्हें 1 हफ्ते के अंदर यह कार्य करके दिखाना है। वहीँ ऋषिकेश एसडीएम हरगिरि का कहना है की शासन के हर निर्देश का पालन किया जायेगा जिससे गंगा निर्मल हो सके।

अगर बात करें उत्तरकाशी से लेकर ऋषिकेश तक की तो गंगा में और उसकी सहायक नदियों में लगातार कूड़ा सीवरेज और गंदे नालों को डाला जाता है लेकिन अभी तक राज्य सरकार इस और ठोस कदम नहीं उठा पाई है। ऋषिकेश में ही बड़ी आबादी के चलते चंद्रभागा सॉन्ग और खारा स्रोत सारा कूड़ा करकट गंगा में समा जाता है जिसको लेकर लगातार पर्यावरणविद अपनी चिंता जता चुके हैं। लोगों की माने तो गंगा के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं ही काफी नहीं है जबतक हर कोई खुद से इस मुहीम के लिए आगे नहीं आएगा तब तक गंगा की तस्वीर नहीं बदल सकती।  लाखों लोगों की आस्था गंगा से जुड़ी है लेकिन करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी गंगा के जल में प्रदूषण साफ देखा जा सकता है अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ी उम्मीद बनी है की गंगा और उसकी सहायक नदियां कूड़े से मुक्त होगी।

कुष्ठ रोगियों को बेघर करने के मामले में हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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नैनीताल। हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा कुष्ठ रोगियों के घर तोड़ने का मामला नैनीताल हाईकोर्ट में पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस वीके बिष्ट की खंडपीठ ने हरिद्वार के डीएम और प्रदेश के कुष्ठ रोग अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा कि आखिर आपने इन असहाय लोगों के पुनर्वास के लिए क्या किया है। दोनों को 28 दिसंबर को जवाब कोर्ट में पेश करना होगा। मामले के अनुसार 23 सितंबर को राष्ट्रपति के दौरे से पहले हरिद्वार जिला प्रशासन ने चंडी घाट के पास बने कुष्ठ रोगियों के घरों पर बुल्डोजर चला दिया था। जिसमें 12 टिन शेड, छह पक्के मकान और शौचालय कांप्लेक्स शामिल है। हालांकि जिला प्रशासन ने इन्हें तोड़ते समय दोबारा से निर्माण कराने की बात कही थी, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी कुष्ठ रोगियों के उजड़े आशियाने नहीं बनाए गए। जिसके खिलाफ हरिद्वार निवासी केशो चौधरी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

परिजनों ने पुलिस पर लगाया बेटी के उत्पीड़न का आरोप

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(रामनगर)। दो दिन पूर्व घर से फोटो स्टेट करने गई युवती के लापता होने के मामले में परिजनों ने पुलिस पर छोटी बेटी के उत्पीड़न का आरोप लगाया। इस संबंध में परिजनों ने पूर्व महिला आयोग की उपाध्यक्ष के घर पहुंचकर आप-बीती सुनाई।
बुधवार को ग्राम सावल्दे निवासी नीमा देवी ने पूर्व महिला आयोग की उपाध्यक्ष अमिता लोहनी को बताया कि उसकी पुत्री हेमा रविवार को घर से फ़ोटो कॉपी कराने बाज़ार गई थी। जो संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। परिजनों ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज करने की कार्रवाई की। मंगलवार को उसकी बेटी हेमा का फोन उसकी छोटी बेटी सीमा के मोबाइल में आया। हेमा ने बताया कि वो किसी होटल में है। इस बीच उसका मोबाइल बन्द हो गया। जब वह यह बताने कोतवाली गई तो विवेचना कर रही दरोगा सिमरन ने उसे कमरे में मुर्गा बनाया और बहन को भगाने का आरोप लगाते हुए हाथ खड़े करने को कहा। इसके बाद वह कमरे में उसे बन्द करके चली गई। बाद में दूसरे दरोगा ने आकर कमरा खोलकर बाहर भेजा। इससे घबराकर वह महिला आयोग के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसएसपी से दरोगा की शिकायत करने की बात कही है।

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को सूचना न देना पड़ा भारी, लगा 25 हजार का जुर्माना

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(विकासनगर) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर में तैनात लोक सूचना अधिकारी/प्रभारी चिकित्साधिकारी को सूचना आयोग के आदेश के बाद भी समय पर सूचना न देना भारी पड़ गया। मामले को गंभीरता सेे लेते हुए उत्तराखंड सूचना आयोग ने तत्कालीन प्रभारी चिकित्साधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए इसकी भरपाई दिसंबर व जनवरी के वेतन से वसूल किए जाने के आदेश पारित किए हैं।
गौरतलब हो कि विकासनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता भास्कर चुग द्वारा एक आरटीआई डाली गई थी। सूचना समय पर नहीं तो मामले की शिकायत उत्तराखंड सूचना आयोग में की गई, जहां आयोग ने सुनवाई के दौरान सीएचसी विकासनगर के तत्कालीन प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. बीके ढोंडियाल को मार्च 2016 में शिकायतकर्ता को निःशुल्क निरीक्षण करवाने के आदेश पारित किए थे। इसके बावजूद शिकायतकर्ता को लोक सूचना अधिकारी द्वारा निरीक्षण के उपरांत अपीलकर्ता द्वारा चिन्हित किए गए पृष्ठों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा के तहत 250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25 हजार की शास्ति अधिरोपित की गई। साथ ही महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय डांडा लखोंड, सहस्त्राधारा रोड, देहरादून को डा. बीके ढोंडियाल के दिसंबर 2017 व जनवरी 2018 वेतन से शास्ति की धनराशि वसूल करने के आदेश दिए हैं।

लिंक हावड़ा सहित आधा दर्जन गाड़ियां लेट, काठगोदाम रि-शड्यूल​

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देहरादून। घने कोहरा पड़ने के कारण दून आने जाने वाली लंबी दूरी की लगभग आधा दर्जन गाड़ियां अपने निर्धारित समय से काफी विलंब से पहुंची। लिंक एक्सप्रेस के विलंब होने के कारण देहरादून काठगोदाम एक्सप्रेस को रिशडयूल किया गया है। जिस कारण यात्रियों व उसके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी।

बुधवार को लंबी दूरी की कई गाड़ियां अपने निर्धारित समय से काफी विलंब से देहरादून पहुंची। इलाहाबाद से चलकर देहरादून आने वाली वाली लिंक एक्सप्रेस सात घंटे देरी से आई। जिस कारण देहरादून काठगोदाम को 21 दिसम्बर को एक बजे रवाना किया जाएगा। नई दिल्ली से देहरादून आने वाली नंदा देवी एक्सप्रेस अपने तय से से 1:30 मिनट देरी से आइ। मदूरई से देहरादून आने वाली चेन्नई एक्सप्रेस आठ घटे विलंब से पहुंची। नई दिल्ली देहरदून आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस एक घंटे लेट आई। वाली दून हावड़ा एक्सप्रेस का देहरादून आने का समय 7:35 है जो छह घंटे की देरी से आइ। हवाड़ा से आने वाली उपासना एक्सप्रेस चार घंटे की देरी विलंब से पहुंची। अमृतसर देहरादून लाहौरी एकसप्रेस दो घंटे विलंब से आई। बांद्रा देेहरादून भी अपने तय समय से एक की देरी से दून पहंची। गाड़ियों की लेटलतीफी के कारण यात्रियों व उसकों परिजनों को इंतजार में परेशानी उठानी पड़ रही है।स्टेशन अधीक्षक सीताराम सोनकर ने बताया कि मैदानी इलाकों में घने कोहरे पड़ने के कारण लंबी दूरी की कई गाड़ियां अपने तय समय से विलंब चल रही है। बताया कि लिंक एक्सप्रेस लगभग 7 घंटे लेट आई। जिसके चलते 21 दिसम्बर को एक बजे देहरादून काठागोदाम को रवाना किया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग की और से सावधानी बरती जा रही हे। जिस कारण यात्रियों और उसके परिजनों को दिक्कतें हो रही है। उन्होंने बताया कि देहरादून से जाने वाली गाड़ियों को अन्य सभी गाड़ियों को समय से रवाना किया जा रहा है। ताकि यात्रियों को ज्यादा परेशानी न हो। 

बंड मेले में दिखी गढ़वाल की संस्कृति

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गोपेश्वर। बुधवार को सात दिवसीय बंड मेले का आगाज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ हुआ। मेले में गढ़वाल की संस्कृति, विरासत और परंपराओं की झलकियां देखने को मिली। मेले का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी शाह ने बंड भूमियाल देवता के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर दिया।
मेले का उद्घाटन करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि बंड मेले ने बहुत कम समय में पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है इसके लिए बंड संगठन के समस्त पदाधिकारी बधाई के पात्र है। कहा कि मेले लोगों के मिलन के केंद्र होते है जहां पर अलग-अलग क्षेत्रों से आयी बहिने, बहुऐं मिलती है तथा एक दूसरी की यादों को ताजा करती है। कहा कि मेलों से आम लोगोें को काफी सहुलियत मिलती है। अपनी संस्कृति से भी पहचान होती है।
इस मौके पर थराली विधायक मगन लाल शाह ने कहा कि मेले हमारी सांस्कृति धरोहरों को जीवित रखती है साथ ही विकास के पोषक होते हैं। कहा कि बंड मेले नें अल्प समय में ही जिस तेजी से पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बनायी है उसके पीछे यहां के लोगों का सबसे बडा योगदान है। कहा कि बंड मेले नें आज भी अपनी संस्कृति को जीवित रखा है।
मुख्य अतिथि ने मेले में लगे विभिन्न विभागों के स्टालों का भी उद्घाटन किया। मेले के पहले दिन सरस्वती शिशु विद्या मन्दिर व जवाहर नवोदय विद्यालय के बच्चों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से हर किसी का मन मोहा। इस अवसर पर मेलाधिकारी उपजिलाधिकारी परमानंद राम, बंड विकास संगठन के अध्यक्ष शम्भू प्रसाद सती, महामंत्री हरिदर्शन सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, संरक्षक गंजेद्र राणा व रमेश बंडवाल, कोषाध्यक्ष बिहारी लाल बंडवाल, विजय मलासी, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी आदि मौजूद थे।

अब रोडवेज बसोंं में भी लगेगा डस्टबिन,गंदगी फैलाने पर देना होगा जुर्माना

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कर्मशियल गाडियों और परिवहन की बसों में डस्टबिन अनिवार्य होने के बाद रोडवेज बसों में इनकी शुरूआत कर दी गई है।मंगलवार को 20 वोल्वो बसों में  डस्टबिन को लगाया गया।यह डस्टबिन ड्राइवर की सीट के पास रखे जाएंगे और यात्रियों को यात्रा के दौरान बताया जाएगा कि कूड़ा इसी में डालें।इसके अलावा बस गंदी करने पर यात्रियों पर जुर्माने का प्रावधान भी किया जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने एक दिसंबर से चौपहिया और इससे ऊपर की श्रेणी के सभी वाहनों में डस्टबिन होना अनिवार्य कर दिया है। परिवहन विभाग को आदेश भी दिए गए हैं कि जिन वाहनों में डस्टबिन नहीं मिलेगा, उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र न दिया जाए। वाहनों की चेकिंग करने व डस्टबिन न पाए जाने पर उन्हें सीज या जुर्माना लगाने के आदेश दिए गए।

विभाग ने फिटनेस में यह प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन अभी सड़कों पर वाहन में डस्टबिन को लेकर चेकिंग नहीं की जा रही। सरकार के आदेश रोडवेज बसों पर भी लागू होते हैं, लिहाजा परिवहन निगम ने डस्टबिन की खरीद शुरू कर दी है। महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि पहले चरण में मंगलवार को दून में 20 वाल्वो बस में डस्टबिन को लगाया गया है। धीरे-धीरे प्रदेश के समस्त डिपो में सभी श्रेणी की बसों में डस्टबिन लगाए जाएंगे।

चार वाहन किए सीज

हाई बीम और लाइटों को लेकर परिवहन विभाग की टीम ने मंगलवार रात पुलिस के साथ प्रेमनगर में चेकिंग अभियान चलाया। एआरटीओ अरविंद पांडे और सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह के निर्देशन में अभियान के दौरान चार गाड़ि‍यां सीज की गईं और 15 का चालान किया गया। एआरटीओ पांडे ने बताया कि किसी गाड़ी में हाईबीम थी तो किसी की लाइट टूटी हुई थी। चार गाड़ियां ऐसी मिलीं जिनकी ड्राइवर साइड की लाइट बंद थी।

मुक्त विवि बना खेवनहार, प्राइवेट छात्रों को दाखिले का मौका

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(देहरादून)। अगर आप किसी कारण से अभी तक स्नातक या परास्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी करने के लिए आवेदन से चूक गए हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने ऐसे छात्रों को एक ओर मौका दिया है। विवि ने ग्रीष्मकालीन सत्र में आवेदन नहीं कर पाने वाले छात्रों के लिए शीतकालीन सत्र में आवेदन करने का अवसर प्रदान किया है। छात्र बीए, एमए, बीकॉम व एमकॉम विषयों में दाखिला लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
10 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन
उत्तराखंड में व्यक्तिगत परीक्षा प्राइवेट एग्जामिनेशन प्रणाली की समाप्ति के बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने बीए, एमए, बीकॉम व एमकॉम प्रथम वर्ष के ऐसे अभ्यार्थियों जो किन्ही कारणों से ग्रीष्मकालीन सत्र 2017-18 में प्रवेश नहीं ले पए थे। उनके लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया है। ऐसे छात्र 26 दिसंबर से 10 जनवरी 2018 तक संबंधित पाठ्क्रमों में दाखिला ले सकते हैं। शीतकालीन सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों की परीक्षा जून 2018 में होगी। मुक्त विवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. राकेश रयाल ने बताया कि छात्र दाखिले संबंधित सूचनाएं व आवेदन पत्र आदि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित अध्ययन केंद्रों और विश्वविद्यालय वेबसाइड से प्राप्त कर सकेंगे।
प्राइवेट परीक्षा बंद होने के बाद मुक्त विवि को दी थी जिम्मेदारी
दरअसल, भारत में प्राइवेट यानि व्यक्तिगत परीक्षा का कोई विधिक आधार नहीं है। यूजीसी ने भी देश में कानूनी रूप से केवल रेगूलर और डिस्टेंस एजुकेशन को ही वैध माना है। ऐसे में प्रदेश में प्राइवेट मोड में परीक्षा देने वाले हजारों छात्रों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया था। जिसके लिए सीधे तौर पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को ही जिम्मेदार माना जा रहा था।
प्रदेश में दो विश्वविद्यालय करा रहे थे प्राइवेट परीक्षा
उत्तराखंड में कुमाऊं विश्वविद्यालय और श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय प्राइवेट मोड में यूजी और पीजी कोर्स में डिग्री प्रदान करने का कार्य कर रहे थे। आंकड़ों पर गौर करें तो दोनों विवि में कुल डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं प्राइवेट एग्जाम के लिए पंजीकृत थे। आयोग के प्राइवेट परीक्षा को अवैध करार देने के बाद राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल के निर्देशों के बाद इन लाखों छात्रों को सरकार ने उत्तराखंड मुक्त विवि में पंजीकृत करने का निर्णय लिया था। जिसके बाद मुक्त विवि ने दोनों विश्वविद्यालयों के छात्रों को अपने यहां पंजीकृत करा दिया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय इस साल पहली बार मुक्त विवि ने छात्रों के परीक्षा का आयोजन करने जा रहा है। प्रदेश भर में प्राइवेट विद्यार्थियों को दूरस्त शिक्षा के माध्यम से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के निर्णय का अध्ययन केंद्र संचालक अनिल सिंह तोमर ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से अब प्राइवेट मोड में डिग्री लेने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होगा। साथ ही उन्हें मुक्त विवि के माध्यम से न सिर्फ डिग्री हासिल होगी बल्कि उन्हें निरंतर अध्ययनरत रहने का भी मौका मिलेगा। 

”माटी-मैन” जो मिट्टी से भरते हैं तस्वीरों में जान

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रुद्रप्रयाग के सरकारी स्कूल में 49 वर्षीय केमिस्ट्री शिक्षक जय कृष्ण पैन्यूली एक आदर्श उदाहरण है कि किस तरह सीमित संसाधनों के साथ अपने जूनुन को कैसे पूरा किया जा सकता है। हालांकि कैमिस्ट्री के शिक्षक होने के साथ-साथ, पैन्यूली को हमेशा से चित्रकला अपनी ओर आकर्षित करती थी और अपने सपनों का पूरा करने के लिए उन्होंने उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी से कैनवास चित्रकारी शुरू की।अपनी पेटिंग को बनाने के लिए वह अलग-अलग क्षेत्र जैसे कि केदारनाथ, गैंरसैंण, नीती घाटी, बद्रीनाथ, जोशीमठ, श्रीनगर और टिहरी आदि की मिट्टी का प्रयोग मे लाते है।

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ना केवल देश के बल्कि उन्होंने दुबई, थाईलैंड, सिंगापुर और मलयेशिया जैसे कुछ विदेशी देशों का दौरा किया और इन देशों से मिट्टी लेकर आए। कैमिस्ट्री के इस शिक्षक की मिट्टी का उपयोग करके चित्रों को बनाने की कला यूं तो देखने में सरल लगती है लेकिन इसके लिए परफेक्शन की जरुरत होती है। दरअसल इस पेंटिंग को बनाने के लिए मिट्टी को पानी के साथ मिलाकर कैनवास पर तीन से चार कोट लगया जाता है जब तक कि वह सही रंग नहीं देता। पेड़ो से निकलने वाले रस को भी मिट्टी और पानी के साथ मिलाया जाता है। यह मिट्टी के प्रति उनका प्यार ही था कि उन्होंने खुद को “माटी” का उपनाम दिया और उन्हें यह पसंद है कि लोग उन्हें ”माटी” नाम से पुकारे।

टीम न्यूज़पोस्ट से हुई जय कृष्ण पैन्यूली की बातचीत में उन्होंने बताया कि, ”वह साल 2009 से पेटिंग कर रहे हैं।हमेशा से कला में रुचि रखते थे लेकिन जीवन की भागदौड़ और संसाधनों की कमी से उन्हें अपने जूनुन को पाने में थोड़ वक्त लग गया। साल 2009 से पेटिंग शुरु करने के बाद वह अब पेंटिंग को हर रोज लगभग दो घंटे का समय देते हैं। पैन्यूली ने बताया कि वह पेटिंग को बनाने के लिए मिट्टी के साथ-साथ पत्तों का रस,राख,कोयला,गौमूत्र और गोबर का इस्तेमाल करते हैं।इनकी पेटिंग की सबसे खास बात है इसमें इस्तेमाल होने वाला सब कुछ प्राकृतिक है और जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता उससे इनकी पेटिंग तैयार होती है। जय कृष्ण ने बताया कि ”शुरुआत में वह पोर्ट्रेट बनाते थे लेकिन अब उनका ज्यादा फोकस पर्यावरण और पहाड़ी क्षेत्र की जीवन शैली को बनाने में रहता है। पैन्यूली कहते हैं कि यू तो चित्रकारी बहुत ही महंगा काम है लेकिन जब आप मिट्टी से चित्रकारी करते हैं तो यह उतनी महंगी नहीं रह जाती।”

पैन्यूली ने बताया कि ”देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनियों के आयोजन और उपस्थित होने के बाद,अब वह गाय-गोबर और गाय-मूत्र के साथ पेंट कर रहे हैं। कलाकार ने कहा, “मैंने सफलतापूर्वक मटर के छिलकों के साथ प्रयोग किया है और अब मैं गाय के गोबर से बनाई गई पेंटिंग पर काम कर रहा हूं।”

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खर्गेड में सरकारी इंटर कॉलेज में एक शिक्षक की तरह रहने वाले पैन्यूली, र्कीतिनगर क्षेत्र में रहते है और अपना पूरा जीवन पहाड़ को समर्पित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “इन पहाड़ियों ने मुझे पहचान और प्रसिद्धि दी है, मैं कभी भी मैदानी इलाकों में नहीं जाना चाहता और जब तक मैं जीवित हूं तब तक छात्रों को अपनी यह कला पढ़ाना जारी रखूंगा।” उन्होंने कहा कि ”अपने छात्रों को इस कला को पढ़ाने के लिए वह हर रोज थोड़ा समय निकालते हैं।”

पैन्यूली से पूछने पर कि वह अपनी बनाई हुई पेंटिंग का क्या करते हैं इसपर उन्होंने कहा कि ”कुछ पेटिंग तो वह प्रदर्शनी के लिए संभाल देते हैं जबकि कुछ वह अपने छात्रों को उपहार के रुप में दे देते हैं।” 

23 गांवों के लोगों को सड़क का इंतजार

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विकासनगर। कालसी व चकराता ब्लाक के 23 गांव आज भी सड़क का इंतजार कर रहे हैं। इन गांवों के लोग आज भी अपने घर तक का सफर पंगडंडियों के सहारे तय कर रहे हैं। यहां रहने वाली 11 हज़ार से अधिक की आबादी रोज़ाना पीठ पर समान ढो कर घरों को पहुँचा रहे हैं।

विकास का रास्ता सड़क से होकर गुजरता है, लेकिन चकराता व कालसी ब्लाक के इन 23 गांवों के लिए सड़क आजादी के 7 दशक बीत जाने के बाद भी सपना है। इन गांवों में रहने वाले लोगों को कृषी उपज से लेकर मरीज़ों को पीठ व खच्चर पर ढोना पड़ रहा है। ग्रामीण सरदार सिंह सिताराम परम सिह नारायण सिंह भारु सिह बारू दत्त का कहना है कि वह राज्य गठन के पूर्व व राज्य गठन के बाद से तारली बोहा धीरोग दिलऊ ढकियारना धोदउ बनसार झूटाया सेरी जगथान बुरायला गडेथा बसाया गांगरो कीटाड कुस्यो कचटा खाती बिनोऊ अस्टा लटऊ चामड़ी आदि गांवों के ग्रामीण सरकारों से सड़क बनाने की गुहार लगा लगा थक चुके है स्कूल जाने के लिए भी बच्चों को कई किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। वह विधायक से लेकर मुख्यमंत्री की चौखट तक गुहार लगा चुके है लेकिन कोई सुध लेने को तैयार नही है। इस मामले में उपजिलाधिकारी चकराता बृजेश तिवारी का कहना है कि सड़क निर्माण शासन स्तर का मामला है।