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मसूरी विंटरलाईन कार्निवाल की तैयारियां तेज

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देहरादून। मसूरी विंटर कार्निवाल की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसमें कर्इ खास कार्यक्रमों को जगह देने के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ताकि उत्तराखंड पर्यटन का विकास तेजी से हो। विंटर कार्निवल 25 से 30 दिसम्बर तक चलेगा, जिसका शुभारंभ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत करेंगे।

जानकारी देते हुए जिला साहसिक खेल अधिकारी सीमा नौटियाल ने बताया कि इस विंटर कार्निवाल में रात और दिन में अलग-अलग कार्यक्रम चलेंगे। कवि सम्मेलन और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के साथ ही मशहूर गायक हंस राज हंस भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। आयोजन के तहत पहले दिन 25 दिसम्बर को सर्वे ग्राउंड लंढौर से शोभा यात्रा शुरू होगी, जो लाइब्रेरी चौक पर जाकर समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि 26 से 30 दिसम्बर तक अभिनेता टॉम आल्टर की स्मृति में 21 किमी हाफ मैराथन, पर्यटकों के लिए नेचर वॉक, बार्ड वाचिंग, स्केटिंग, जूडो-कराटे, बच्चों के लिए गेंम्स, फैंसी ड्रेस वहीं प्रतियोगिता 200 साल पुराने इतिहास की तस्वीर प्रदर्शनी, नुक्कड़ नाटक का आदि का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रात्रि में होने आयोजनों में पद्मश्री बसंती बिष्ट की जागर की प्रस्तुति, लोक नाटक वीरभद्र माधो सिंह भंडारी का मंचन, उत्तराखंडी रामछौल नाइट, कव्वाली नाइट और मैजिक शो आदि आकर्षण का केंद्र होंगे। कवि अशोक चक्रधर का कवि सम्मेलन और हंसराज हंस की स्टार नाइट भी दर्शकों को लुभाएंगी। साथ ही 28 से 30 दिसम्बर तक फूड फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा, इसमें पहाड़ी व्यंजन के स्टाल्स लगाए जाएंगे। 29 दिसम्बर को खाना-खजाना के चर्चित शेफ संजीव कपूर इसमें भाग लेंगे।

बिना पद और पगार के काम कर रहे चिकित्सक

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देहरादून। आयुर्वेद विश्वविद्यालय में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि यहां न तो शिक्षक हैं और न ही सुविधाएं। इन सबसे बढ़कर जिन चिकित्सकों को संबद्ध कर फैकल्टी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उनकी संबद्धता भी प्रभारी सचिव आशुष शिक्षा ने समाप्त कर दी, लेकिन इसके बाद भी विवि उन्हें कार्यमुक्त नहीं कर रहा। हालात यह है कि बीते एक माह से संबद्ध चिकित्सकों को वेतन तक नहीं मिल पाया है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय के तीनों परिसर के हर विभाग में नियमानुसार एक प्रोफेसर दो एसोसिएट प्रोफेसर और तीन असिस्टेंट प्रोफेसर होने चाहिए। मुख्य परिसर हर्रावाला में केवल एक नियमित प्रोफेसर है बाकी दो अन्य परिसरों से संबद्ध संवद्ध हैं। मुख्य परिसर में बीएएमएस के 120 छात्र छात्राएं पढ़ रहे हैं। इनके प्रवेश हेतु सीसीआईएम को भेजे फेकल्टी डाटा में जो जानकारी मुहैया कराई गई है वो असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में संबद्ध चिकित्साधिकारी हैं, जिनकी सम्बद्धता बीते माह ही प्रभारी सचिव आयुष शिक्षा हरवंश चुघ के आदेश से संमाप्त हो गई है। लेकिन, विवि के पूर्व कुलपति ने इन्हें कार्यमुक्त होने से रोक लिया है, जिसके बाद चिकित्सकों को न तो मूल तैनाती मिली और न ही विवि में कार्य का वेतन। संबद्धता समाप्त होने के कारण बीते माह से वेतन भी अटक गया है। जबकि, सीसीआईएम को कागजों में फैकल्टी की पगार दिखाई जा रही है।
कुछ ऐसा ही हाल विवि के दोनों परिसर गुरुकुल एवं ऋषिकुल हरिद्वार का भी है। गौर करने वाली बात है कि गुरुकुल परिसर में इन्ही संबद्ध चिकित्सकों के सहारे एमडी पाठ्यक्रमों की मान्यता ली गई है और कई के निर्देशन में शोध प्रबंध लिखे जा रहे है। सत्र मध्य में इन चिकित्सकों को हटाने से छात्रों के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हालात यह हैं कि छात्र तो छात्र रोगियों के लिए परेशानी खड़ हो गई है। शासन के इस कदम के बाद छात्रों की सारी कक्षाएं बाधित हो गई है, वहीं अस्पताल परामर्शदाता चिकित्सक विहीन हो गए हैं।
मुख्य परिसर हर्रावाला में बीए एमएस की 60 सीटों के सापेक्ष दो बैच चल रहे हैं, जिनको पढ़ाने के लिए नियमानुसार 17 नियमित शिक्षक व अस्पताल में सात कंसल्टेंट होने चाहिए इसी प्रकार गुरुकुल परिसर में 60 बीएएमएस और 22 एमडी की सीटों में भी कुल 32 शिक्षकों की आवश्यकता है, जो अभी स्नातकोत्तर उपाधिधारक टीचिंग कोड धारित संबद्ध चिकित्साधिकारीयों से पूरी की जा रही है, लेकिन यदि अभी सीसीआईएम का अकस्मात निरीक्षण हो जाए, तो इन तीनों कालेजों की मान्यता चली जाएगी।
विवि के कुलसचिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ ने बताया कि शासन ने चिकित्साधिकारियों की समबद्धता समाप्त कर दी थी, लेकिन पूर्व कुलपति ने फैकल्टी की कमी का हवाला देते हुए इन्हें बहाल रखने का अनुरोध किया था। वेतन संबंधी प्रकरण संज्ञान में है। इस बाबत शासन को दोबारा पत्र भेजा जा रहा है।

पर्यटकों के आने से व्यापारियों के खिले चेहरे

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चकराता। चकराता क्षेत्र में पर्यटकों के आने से बाजारों में रौनक लौटने लगी है, जिससें व्यवासाय में बढ़ोत्तरी होने से व्यापारियों के चेहरे खिल उठे हैं।

हिमपात नहीं होने से चकराता क्षेत्र के बाजारों से रोनक गायब हो गई थी, इसके चलते वहां पर्यटकों का आना कम सा हो गया और जिसका सीधा असर उनके व्यवसाय पर होने लगा, लेकिन जैसे ही हिमपात होना शुरू हुई, पर्यटकों आगमन तेजी से शुरू हो गया और छावनी बाजार क्षेत्र के व्यापारियों के चेहरे खिल उठे। पर्यटकों के आने से होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली। बारिश के चलते क्षेत्र के मार्ग बंद होने के कारण चकराता क्षेत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आने वालो पर्यटकों की आमद शून्य हो गई थी, जिससे व्यापारी व होटल व्यापारी बहुत परेशान हो गए थे।
बीते दो दिनों से पर्यटकों का आवागमन बढ़ा है और पर्यटक स्थल गुलजार होने के साथ स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौट आई है, जो गुरुवार को छावनी बाजार चकराता में पर्यटकों की काफी संख्या देखने को मिली। पर्यटक स्थल टाइगर फॉल, चुरानी, राम ताल गार्डन, चिलमिरी में चहल पहल देखने को मिल रही है। छावनी बाजार के होटल मालिक विवेक अग्रवाल का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटकों की इतनी संख्या दिखाई दी है। उन्होंने कहा कि तीन माह से क्षेत्र में एक भी पर्यटक नजर नहीं आ रहे थे, जिससे पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह ठप था, लेकिन दो दिनों से उनके आने से राहत मिली है। मौसम सुहाना है और पर्वतीय क्षेत्रों का नजारा बहुत ही सुंदर और विहंगम है, जिससे चलते सैलानी भी खुश नजर आ रहे हैं।

सरकार से तीन माह में मांगा शपथ पत्र

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने गंगा नदी के उदगम गौमुख में भूस्खलन होने व झील बनने से खतरा होने से संबंधित मामले पर सरकार को तीन सप्ताह में प्रति शपथपत्र जबकि याचिकाकर्ता दिल्ली निवासी अजय गौतम को पूरक शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधुवक्ता परेश त्रिपाठी द्वारा जवाब दाखिल किया गया। जवाब में जिलाधिकारी उत्तरकाशी के सचिव आपदा प्रबंधन को भेजी आधिकारिक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें भागीरथी नदी क्षेत्र में किसी तरह का भूस्खलन होने व झील बनने की रिपोर्ट को खारिज किया है। साथ ही कहा है कि भागीरथी ने कोई रास्ता नहीं बदला है। कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट व फोटॉग्राफ भी संलग्न किए हैं। याची द्वारा पूरक शपथपत्र पत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा तो खंडपीठ ने अगली सुनवाई दस जनवरी नियत कर दी।

एजीबीएएस रखेगा हाजिरी पर नजर

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देहरादून। केंद्रीय आयुष मंत्रालय अब देश भर के आयुष कॉलेजों की निगरानी करेगा। इन कॉलेजों में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) ने एजीबीएएस (आधार जीपीएस बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम) लगाने के निर्देश जारी किए हैं।

एजीबीएएस से काम कर रहे कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, सीसीआईएम काउंसिल से जुड़ जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस सिस्टम के लागू होने के बाद केंद्रीय अधिकारी कॉलेज पर सीधे नजर रख सकेंगे। अस्पताल में डॉक्टर कब आ रहे हैं, कितने मरीज देख रहे हैं, प्रोफेसर, कर्मचारी समय पर आ रहे हैं या नहीं इसकी निगरानी अब दिल्ली में बैठे अधिकारी करेंगे। आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार उपस्थिति प्रणाली में यह नई व्यवस्था देशभर में शीघ्र अपनाई जाएगी। इसमें सभी आयुर्वेदिक, यूनानी कॉलेजों के शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मियों का डाटा आधार से सत्यापित किया जाएगा। सेंट्रल कॉउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन के अलावा आयुष मंत्रालय उपस्थिति को नियमित मॉनिटर करेगा। कॉलेज में कार्य करने वाले शिक्षक, नान टीचिंग स्टाफ, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ एवं पीजी छात्र ‘एजीबीएस’ में पंजीकृत रहेंगें। यह एक मोबाइल एप है जो एंड्रॉयड मोबाइल में इंस्टाल होगा। पंजीकरण के समय इन कॉलेजों के प्राचार्य तीन एंड्रॉयड मोबाइल का एप होना सुनिश्चित करेंगे। स्टाफ की समय पर उपस्थिति को संस्था के प्रधान सुनिश्चित करेंगे। मोबाइल एप पर रजिस्ट्रेशन के समय फैकल्टी डाटा के साथ आधार नंबर लिंक करना अनिवार्य होगा। जानकार मानते हैं कि यह आयुष की गिरती शिक्षा प्रणाली को सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम है। देखना होगा कि यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहता है या सही ढंग से क्रियान्वित भी हो पाता है।

भूजल बोर्ड पर पड़ा आवेदनों का बोझ

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देहरादून। एनजीटी के आदेश के मुताबिक 31 दिसम्बर तक भूजल दोहन करने वाले उद्योग, होटल, स्कूल-कॉलेज, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, आवासीय परियोजनाओं आदि को केंद्रीय भूजल बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन करना है। ताकि भूजल दोहन नियंत्रित किया जा सके और यह आंकड़ा भी स्पष्ट हो पाए कि भूजल दोहन की स्थिति किस प्रदेश में कैसी है।

वहीं, उत्तराखंड में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की डेडलाइन समाप्त होने को है। बावजूद इसके अभी तक महज एक हजार के आसपास ही आवेदन आ पाए हैं। हालांकि, भूजल बोर्ड इन्हीं आवेदनों के बोझ तले दबा नजर आ रहा है। इसकी वजह है आवेदनों के सत्यापन व उन्हें पास करने की जिम्मेदारी का भार महज तीन अधिकारियों पर है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का ही आकलन मानें तो अभी करीब 35 हजार और आवेदन प्राप्त होने हैं। वहीं, बोर्ड सितम्बर माह में प्राप्त हुए आवेदनों का ही निस्तारण कर पाया है, जबकि अभी अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर के आवेदनों का निस्तारण किया जाना शेष है, ऐसे में यदि आखिरी समय में आवेदनों की संख्या एकदम से बढ़ी तो बोर्ड अधिकारियों पर बोझ और बढ़ जाएग। भूजल बोर्ड के क्षेत्रीय प्रमुख अनुराग खन्ना का कहना है कि उनके कार्यालय में 22 पद स्वीकृत हैं, जबकि स्थाई रूप से छह कार्मिक ही कार्यरत हैं और भूजल दोहन के आवेदनों के निस्तारण का जिम्मा उनके अलावा सिर्फ अन्य दो अधिकारियों के पास है।
डेडलाइन बढ़ाने के संकेत नहीं
बोर्ड के क्षेत्रीय प्रमुख खन्ना के अनुसार एनजीटी की डेडलाइन अभी 31 दिसम्बर है। फिलहाल इसके आगे बढ़ने के कोई संकेत नहीं मिल रहे। लिहाजा, बेहतर इसी में है कि जो प्रतिष्ठान एनजीटी के आदेश के दायरे में आ रहे हैं, वह भूजल दोहन को लेकर ऑनलाइन आवेदन कर लें।
मैदानी क्षेत्रों में ही प्रतिष्ठानों की संख्या 31 हजार पार
एनजीटी के निर्देश के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या जनगणना 2011 के अनुसार 68 हजार के पार है, जबकि सबसे अधिक भूजल का दोहन देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर व नैनीताल जिले में किया जाता है और यहां एनजीटी के निर्देश के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 31 हजार 500 से अधिक है। मैदानी क्षेत्रों में ही भूजल दोहन की बात स्वीकार की जाए और यह माना जाए कि यहां के कम से कम 25 फीसद प्रतिष्ठान ही भूजल का दोहन कर रहे हैं, तब भी यह आंकड़ा 7800 से अधिक होना चाहिए। हालांकि, भूजल बोर्ड में राज्य से 35 हजार आवेदन मिलने की उम्मीद है।
इस श्रेणी के लिए भूजल दोहन का आवेदन जरूरी
यदि उद्योग (फैक्ट्री, वर्कशॉप आदि) स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस आदि भूजल दोहन कर रहे हैं तो उन्हें इससे पहले केंद्रीय भूजल बोर्ड में आवेदन करने की अनिवार्यता की गई है।

हाईकोर्ट ने फ्लाई ओवर के मामले में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को किया तलब

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देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट के दून स्थित फ्लाई ओवरों की स्थिति पर जवाब तलब करने पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी असहज हो गए हैं। अधिकारियों की चिंता बल्लीवाला फ्लाई ओवर को लेकर ज्यादा है क्योंकि इस पर डेढ़ साल में हुई सड़क दुर्घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए।

हाईकोर्ट ने गुरुवार को जिस याचिका की सुनवाई करते हुए फ्लाई ओवरों के बारे में जवाब तलब किया है उसमें कहा गया है कि बल्लीवाला फ्लाई ओवर नियमों के विपरीत फोर लेन की जगह टू लेन बनाया गया है। इसी कारण हादसे हो रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के राजमार्ग यूनिट के अधिकारियों ने बड़ी आसानी से इस बात का जवाब तैयार कर लिया कि बल्लीवाला व बल्लूपुर फ्लाई ओवरों पर अब कोई काम शेष नहीं है। सिर्फ बल्लीवाला फ्लाई ओवर में नाले का कुछ मीटर हिस्सा स्थानीय लोगों के विवाद के चलते बन नहीं पा रहा। हालांकि, बात जब बल्लीवाला फ्लाई ओवर को फोर लेन से टू लेन बनाने की आई तो अधिकारियों की कलम रुक गई और इसका हल निकालने के लिए सभी प्रमुख अभियंता के पास पहुंचे। काफी मंथन के बाद जवाब तलाश गया कि जमीन अधिग्रहण के चलते सरकार ने फ्लाई ओवर को टू लेन में बनाने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि दून में बल्लीवाला फ्लाई ओवर का शिलान्यास भी अन्य के साथ मार्च 2013 में किया गया था। तब यह भी मामला उठा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के मुताबिक राजमार्ग पर निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की अनुमति जरूरी है। इसके चलते लंबे समय तक काम भी अटका रहा। डेढ़ साल बाद जब केंद्र सरकार की एनओसी मिली तो उसमें स्पष्ट किया गया था कि बल्लीवाला फ्लाई ओवर के लिए फोर लेन की संभावना तलाशी जाए। बावजूद इसके राज्य के अधिकारियों ने फ्लाई ओवर का निर्माण टू लेन में किया। 

टस्कर के हमले से किसान गंभीर रूप से घायल

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हरिद्वार। भेल क्षेत्र में जंगली जानवरों का उत्पात रूकने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन जंगली जानवर भेल व उसके सटे क्षेत्र में जंगल से निकलकर उत्पात मचाते रहते हैं। विगत दिनों एक टस्कर हाथी ने रात्रि में फाउंड्री गेट पर पहुंचकर रास्ते में जमकर उत्पात मचाया था। इतना ही नहीं टस्कर ने एक आटो को भी पलट दिया था। इसके अलावा गुलदार की आए दिन दस्तक से भी क्षेत्रवासी खासे परेशान हैं। जंगली जानवरों की दस्तक के कारण रात्रि के समय भेल निवासी घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं। ऐसी ही एक घटना ने गुरुवार सुबह रानीपुर को फिर से क्षेत्र में दहशत फैला दी। एक टस्कर हाथी ने क्षेत्र में रौ किनारे एक बुजुर्ग किसान पर हमला कर दिया। हाथी ने बुजुर्ग को सूंढ़ से उठाकर पटक दिया और पैर से कुचलने का प्रयास किया। किसान की आवाज सुनकर आसपास खेतों की रखवाली कर रहे लोगों ने शोर मचाया। जिसके चलते टस्कर किसान को छोड़कर जंगल की तरफ भाग निकला। गंभीर रूप से घायल किसान को कनखल के रामकृष्ण किशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बता दें कि रोशनाबाद कचहरी के पीछे नदी किनारे ज्वालापुर व आस पास के किसान खेती करते आ रहे हैं। ज्वालापुर के मौहल्ला कैथवाड़ा निवासी मकसूद अहमद ने भी इस क्षेत्र में सरसो की फसल लगाई है। गुरुवार की सुबह मकसूद शौच के लिए जा रहा था। तभी अचानक टस्कर आ धमका। टस्कर किसान के पीछे दौड़ पड़ा। खेत की बाड़ में फंसकर गिरने के बाद किसान को हाथी ने सूंढ से उठाकर पटक दिया और पैर रखकर कुचलने का प्रयास किया। आवाज सुनकर आसपास रखवाली कर रहे किसानों ने शोर मचाया। तब टस्कर हाथी जंगल की तरफ भाग निकला। घायल को कनखल के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हाथी व अन्य जंगली जानवरों के आए दिन भेल क्षेत्र में आने से लोग भय में जीने को मजबूर हैं।

डीएम ने दिए चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश

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रुद्रपुर। जिलाधिकारी डाॅ नीरज खैरवाल ने कहा कि चिकित्सक किसी भी गलती को सुधारने की संभावना नगण्य होने के कारण सभी डाॅक्टर्स अपनी जिम्मेदारियों एवं दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करें। उन्होंने चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का कार्य प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन से जुड़़े होने के कारण इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत जनपद में शत-प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में न होने को गंभीरता से लेते हुए शत-प्रतिशत प्रसव चिकित्सालयों मे ही करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने अस्पतालों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आशा, एएनएम द्वारा किए गए प्रयासों की डिटेल शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश सीएमओ को दिए। जसपुर तथा बाजपुर में 12-12 प्रतिशत प्रसव घरों में ही होने के कारणों का गहनता से अध्ययन करते हुए जाॅच आख्या उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले प्रसवों का मिलान जन्म प्रमाण पत्र के हिसाब से जांच कर एक सप्ताह के अन्दर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत निर्धारित समय सीमा के अन्दर भुगतान करने, योजना के अन्तर्गत निर्धारित समय के बाद भी लम्बित भुगतान वाले प्रकरणों की जांच करते हुए सम्बन्धित कर्मियों/अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने मीजल्स-रूबेला कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए रूद्रपुर में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 12 प्रतिशत कम लक्ष्य प्राप्त होने के कारण छूटे हुए बच्चों का शतप्रतिशत टीकाकरण करने हेतु पुनः कार्य योजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में योजनाओं के क्रियान्वयन की पूरी जानकारी न दे पाने के कारण मुख्य चिकित्साधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे बैठकों में पूर्ण जानकारियों एवं कार्य योजनाओं के साथ बैठकों में प्रतिभाग करना सुनिश्चित करें।
मुख्य चिकित्साधिकारी एसके साह ने बताया कि मिजिल्स-रूबेला कार्यक्रम के अन्तर्गत जनपद में 526020 लक्ष्य के सापेक्ष 547522 बच्चों का टीकाकरण किया गया है जोकि लक्ष्य का 104 प्रतिशत है। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ अमिता उप्रेती, डाॅ सुनीता रेतूड़ी, डाॅ अविनाश खन्ना आदि उपस्थित रहे।

नगर क्षेत्र में गांवो के आने से नाराज प्रधानों का हंगामा

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रुद्रपुर, ग्रामीण इलाकों को नगर क्षेत्र में शामिल किए जाने के फैसले से नाराज प्रधानों का गुस्सा कलक्ट्रेट में फूटा। प्रशासन की मनमर्जी से नाराज प्रधानों ने यहां जमकर नारेबाजी की और प्रशासन को कोसा। इसके साथ ही अपर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा।

प्रधानों का कहना था कि ग्राम निधि के खातों को अभी तक राज्य वित्त एवं चौदहवें वित्त में नहीं शामिल किया गया है। जबकि दो माह पूर्व राज्य वित्त शासन द्रारा हर इलाके को आवंटित कर दिया गया था। इसको लेकर हमने बार बार आग्रह किया, लेकिन डीपीआरओ ने इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की। रुद्रपुर ब्लाक की कुल ग्राम सभाएं नगरीय क्षेत्र में शामिल हो रही है और उन क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों ने पहले भी आपत्ति की थी कि ग्रामीण इलाकों को नगर निगम या नगरीय क्षेत्र में शामिल न किया जाए। बावजूद इसके प्रशासन ने हमारी मांग को दरकिनार कर दिया।

ग्राम सभाओं में राज्य वित्त एवं चौदहवें वित्त को न देते हुए नगरीय क्षेत्रों में लाने वाली ग्राम सभाओं के साथ अन्याय किया है। जिसकी वजह से ग्राम सभाओं में जनहित के कार्य रुके हुए है।

यहां अगर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानों ने राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त ग्राम निधि के खातों में डलवाने की मांग की। इस दौरान आशीष कुमार, पूजा देवी, किशन, मन मोहन सिंह, हरीश जोशी, रवि चौधरी, महेश गंगवार, मदन लाल, संजय सिंह, शिवशंकर, राम पाल, लक्ष्मी दत्त जोशी, राम सिंह, प्रेम पाल, राम स्नेही, पंकज राघव, शिव शंकर चौहान, भोला, मनीष गर्ग, राजन ठुकराल, राजीव आदि थे।