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रुड़की में पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़, बदमाश घायल

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रुड़की, रुड़की में सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र के पीर बाबा कॉलोनी के पास पुलिस और बदमाश के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में बदमाश को गोली लगी और उसे उपचार के लिए सिविल अस्पताल से हरिद्वार जिला अस्पताल भेजा गया है।

शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे गश्त के दौरान चेतक पुलिस को बाइक सवार एक युवक पर शक हुआ। जैसे ही पुलिसकर्मियों ने युवक को रोका तो बाइक सवार ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग की सूचना के बाद सीओ रुड़की एसके सिंह, सिविल लाइन कोतवाली प्रभारी एवं एसएसआई हरपाल सिंहमय फोर्स मौके पर पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और बदमाश के बीच लगातार फायर होते रहे। इस गोलीबारी में पुलिस की गोली बदमाश के पैर में लगी। पुलिस ने घायल बदमाश को सिविल अस्पताल भिजवाया, फिर वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पुलिस को बदमाश के पास से एक तमंचा और नकदी बरामद हुआ। मौके पर पहुंचे एसपी देहात मणिकांत मिश्र ने बताया कि बदमाश वरुण कुमार बिष्ट उर्फ़ काका मूल निवासी चमसील गोचर जिला चमोली रुड़की में आसफ नगर में रह रहा था। उसने 14 फरवरी को सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र में साढ़े तीन लाख रुपये की लूट की थी। उसके बाद से वह फरार था।

हड़ताल प्रदेश: अब विद्रोह की राह पर राज्य के प्राथमिक शिक्षक

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(देहरादून) उत्तराखंड में दिन पर दिन हो रही हड़तालों में अब एक और अध्याय जुड़ने जा रहा है। आदर्श विद्यालयों को पीपीपी मोड पर देने के सरकार के निर्णय, शिक्षकों से जबरन ब्रिज कोर्स की बाध्यता समाप्त करने, बीआरसी सीआरसी प्रकरण, छात्रवृत्ति आवेदनों की आॅनलाइन जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोपने का प्रथतिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ ने शिक्षकों के साथ ही अधिकारियों की भी एसआईटी जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों में जल्द मानकानुसार शिक्षकों की तैनाती करने की मांग भी संघ ने सरकार से की है। मांगे पूरी न होने पर संघ ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

संघ का कहना है कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार अपनाया जा रहा है।

  • प्रशिक्षित शिक्षकों से जबरन ब्रिज कोर्स अथवा डीएलएड की बाध्यता पर भी असंतोष है।
  • प्रदेश में सीमेट, निदेशालयों, एसएसए आदि में शिक्षकों को नहीं रखा जाता है तो संघ इसे स्वीकार करेगा, लेकिन मात्र सीआरसी को हटाया जाता है तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।
  • आदर्श विद्यालयों को पीपीपी मोड पर दिए जाने का भी पुरजोर विरोध किया है।
  • समाज कल्याण छात्रवृत्ति आवेदन पत्रों को ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोपने का भी संघ ने विरोध किया।

शिक्षकों की एसआईटी जांच पर शिक्षकों का कहना था कि जांच का स्वागत है, लेकिन मात्र प्राथमिक शिक्षकों को अपमानित किया जा रहा है। संघ ने सरकार से मांग की कि विभाग के अधिकारी व कार्मिकों के प्रमाणपत्रों की एसआईटी जांच भी की जानी चाहिए। फर्जी नियुक्तियों के खिलाफ जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए। 

बहरहाल शिक्षकों की मांगों की लिस्ट और उनके तेवर देखकर ये तो कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार और शिक्षकों के बीच टकराव तय है। लेकिन ये भी तय है कि अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा खामियाज़ा छात्रों को भरना पड़ेगा।

शहीद बेटे के नाम को आगे बढ़ाते पिता ब्रिगेडियर गुरुंग

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देहरादून, लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग भारतीय सेना में अपने ही पिता ब्रिगेडियर पी एस गुरुंग की यूनिट में तैनात थे, और करगिल युद्ध शुरू होने पहले प्री वार के समय लाइन-ऑफ-कंट्रोल पर अपने फ़र्ज़ को अंजाम दे रहे थे, कि अचानक दुश्मन की एक गोली उनके सीने जा लगी, मगर गोली लगने के बाद भी भारतीय सेना द्वारा दी गई जिम्मेदारी से पीछे ना हटते हुए आखिरकार शहीद हो गए।

उनके शहीद होने की खबर उनके पिता ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग को मिली पर बेटे की शहीद होने की खबर सुनकर उनकी आँखों में आसू का एक कतरा भी नहीं आया, बल्कि बेटे के देश पर कुर्बान होने की खबर सुनकर उनका सीना गर्व से  चौड़ा हो गया।लेफ्टिनेंट गुरुंग तो चले गये मगर उनके पिता ने अपने बेटे के नाम को हमेशा के लिए जिंदा रखने का फैसला कर लिया, और एक ऐसे ट्रेंनिग सेंटर की शुरुआत कि, जिसने कई जरूरतमंद बच्चो को सेना में जाने के लिए रास्ते खोल दिये।

ब्रिगेडियर गुरुंग ने अपने बेटे की पेंशन से एक बॉक्सिंग इंस्टीट्यूट खोला जहाँ पर उन्होंने पैसों की कमी से त्रस्त बच्चों को बॉक्सिंग और सेना में जाने की ट्रेंनिग देना शुरू कर दिया जिसके तहत अब तक 62 बच्चें उनसे ट्रेंनिग लेकर भारतीय सेना का हिस्सा बन चुके हैं, और इसके अलावा कई और बच्चें सेना जाने की तैयारी कर रहे हैं।

boxing

यह देश का एकमात्र ट्रेंनिग इंस्टीट्यूट हैं जो शहीद लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग की पेंशन से  चल रहा हैं। इस नेक कार्य में सहायक के रूप में अपना योगदान देने वाले बॉक्सिंग कोच नरेश गुरुंग कहते है कि, “इंस्टीट्यूट में 76 बच्चें ट्रेंनिग ले रहे। जिसमें से कुछ एक नेशनल बॉक्सिंग में सलेक्ट हो चुके हैं। साथ ही कुछ एक इसकी तैयारी में है। तो बाकि उनके मकसद के अनुसार देश सेवा में सेना में जाने की तैयार हो रहे हैं।”

नरेश गुरुंग की माने तो अब उनका जीवन का भी उद्देश्य ब्रिगेडियर साहब की तरह ही हैं ,जिसमें वो ऐसा ही नेक कार्य में लगकर लेफ्टिनेंट गौतम साहब की तरह ही बच्चों को प्रोत्साहित कर खेल कोटे में तैयार में भारतीय सेना में शामिल करवाने में जुटे हैं।

उधर शहीद गौतम गुरुंग इंस्टीट्यूट में अपनी प्रतिभा को निखार रहे बच्चों मे से वरुण का कहना है कि, “जैसा माहौल यहा है और कही देखने को नहीं मिला है, जहाँ निशुल्क कोंचिंग होने के बावजूद इतनी शिद्दत के साथ ब्रिगेडियर सर और गुरुजनों द्वारा पूरे निष्ठा के साथ उनको बॉक्सिंग तैयार कर सेना के लिए तैयार किया जा रहा हैं।  सिखाने का जुनून यहाँ मिलता हैं उससे इतनी ताकत आती हैं कि,जीवन में कोशिश करने वाले कि कभी हार नहीं होती।”

शहीद गौतम मेमोरियल में आकर ब्रिगेडियर गुरुंग की शरण ले रहें इन बच्चों और ब्रिगेडियर गुरुंग और उनकी टीम के इस जज्बे को हम सलाम करते हैं।

राजनीति: सच साबित हो रही है 2 महीने पहले भाजपा के बारे में अफवाह

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देहरादून, जब कहीं आग लगती है तो धुआ उठना स्वाभाविक ही होता है 2 माह पहले एकाएक कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कोटद्वार के आसपास के गांव को उत्तराखंड में मिलाने की बात की थी जिस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने इसे बीजेपी की सोची-समझी चाल बताया था, जिसमें उत्तर प्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों को आपस में मिलाने की बीजेपी की योजना का खुलासा किया था।

समय के साथ-साथ यह मामला पीछे चला गया और लोगों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन एक बार फिर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सहारनपुर में इस मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर कांग्रेस सहित उत्तराखंड क्रांति दल ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं और कहीं ना कहीं रोजगार की तलाश में हजारों की संख्या में लगे लोगों के मन में भी एक अंजाना सा डर बन सा गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि भाजपा पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलना चाहती है अौर पहाड़ की राजधानी पहाड़ में हो की मांग कहीं ना कहीं भाजपा के लिए अब पास बनती जा रही है।

इन सभी बातों की पुष्टि सहारनपुर मे बालाजी धाम के कार्यक्रम मे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंच पर अपने सहारनपुर प्रेम से जता दी अौर कहा कि वो सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाने के पक्षधर रहे हैं और कहां कि इसके लिए उनके द्वारा व्यक्तिगत प्रयास भी किए गये, मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच पर इस बयान के मायने निकाले जा रहे हैं।

जानकार भी मानते हैं कि संभलकर बोलने वाले सीएम रावत ने इसे ऐसे ही तो नहीं कहा होगा। बीते 2 माह पहले जब कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बिजनौर के कुछ गांवों को उत्तराखंड में मिलाने की पैरवी की थी। तब इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं हुई थी। हालांकि भाजपा ने तब भी इस पर कोई रिएक्ट नहीं किया।

बहरहाल, पहले कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत और फिर स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयानों से लगता है कि भाजपा पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का भूगोल बदलना चाहती है। भाजपा ऐसा कर पहाड़ पर राजनीतिक निर्भरता को समाप्त करने के साथ ही मैदानी क्षेत्र में वाहवाही लूटना चाहती है। लेकिन जनभावनाओं के सवालों पर राज्य की जनता मुखर होने लगी है राजनीतिक दल भी

”होरी ऐगे” गीत के साथ वापसी कर रहे हैं नरेंद्र सिंह नेगी

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पिछलो दिनों बीमारी के चलते संगीत की दुनिया से गायब रहे गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी होली के मौके पर वापसी कर रहे हैं।ये बात उत्तराखंड के लोगों के लिये होली पर तोहफे जैसी रहेगी।

pahadi dagdya production

गढ़वाली होली गीत होरी ऐगे के साथ नरेंद्र सिंह नेगी एक बार फिर अपने प्रशंसकों के बीच आ रहे हैं। इस गाने का विडियो और प्रोडक्शन पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन ने किया है। हालांकि यह प्रोडक्शन हाउस नया है लेकिन इसमें काम करने वाले सारी टीम काफी पहले से उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा के लिए काम कर रही हैं।

इस गाने के बारे में अपने चाहने वालों के बीच नेगी दा से मशहूर नरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि “अपनी तबीयत की वज़ह से काफी समय से मैं कैमरा और गायकी से दूर था लेकिन अपने बेटे कविलास के प्रयासों से मैं एक बार फिर श्रोताओं के बीच आ रहा हूं और आशा है इस विडियो को भी उतनी ही सराहना मिलेगी जितनी मेरे दूसरे गानों को मिली है। नेगी जी ने कहा कि “पिछले 40-42 साल से मै गायकी मे हूं पर यह खास है क्योंकि लंबे अंतराल के बाद मेै फिर कैमरे के सामने हूं।” उन्होंने कहा वैसे तो यह गाना मैने पहले गाया है लेकिन इसकी री-रिकॉर्डिंग और विडियो अब शूट किया गया है। होली का रंग और गुलाल इस गाने में पूरी तरह से दिखाई देगा और मै आशा करता हूं यह लोगो को पसंद आएगा।” 

गाने की शूटिंग के बारे में बात करते हुए पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन के टीम सदस्य गोविंद नेगी ने बताया कि “होरी ऐगे होली पर आधारित विडियो है जिसकी शूटिंग गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में हुई है।मंदिर के प्रांगण में पारंपरिक पहाड़ी घरों को ध्यान में रखते हुए गाने की शूटिंग हुई है।”  दरअसल इस गाने की शूटिंग की तैयारी नेगी दा की तबियत खराब होने से पहले से चल रही थी।

पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन द्वारा बनाऐ गए होरी ऐगे के इस विडियो की खास बात यह है कि शायद यह पहला ऐसा रिजनल विडियो होगा जिसमें 60-70 लोगों ने भाग लिया है। इस गाने को रिकॉर्ड करने के लिए सोनी एएस-2, माक-3,जीएच-5 ल्यूमिक्स कैमरों का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन टीम के सदस्यों ने नंदा ध्याण बिदै नाम से एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है जिसने यूट्यूब से काफी सराहना बटोरी थी।

pahadi dagdya production team

गोविंद होरी ऐगे वीडियो शूट के सफर को याद करते हुए कहते हैं कि “इसको शूट करने के दौरान हमारे लिए बड़े क्रू को संभालना चुनौतीपूर्ण था।रीजनल स्तर पर हमारा भी यह पहला विडियो है जिसमें इतने लोगों ने काम किया है। हालांकि शूटिंग का हमारा अनुभव शानदार रहा।

होरी ऐगे के इस वीडियो में कलाकारों के अलावा खुद नरेंद्र सिंह नेगी दिखाई देंगे जो काफी लंबे समय बाद किसी विडियो में नज़र आऐंगे। होरी ऐगे गाना नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा लिखा और गाया गया है और यह गाना पहले भी इन्होंने गाया था जिसकी री-रिकॉर्डिग फूल एचडी में की गई है।

इस गाने को नए रंग-रुप में दर्शकों को लाने वाले पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन में बहुत से लोगों ने सहयोग किया है। गाने का डायरेक्शन कविलास नेगी और गोविंद नेगी ने किया है। सिनेमोटोग्रॉफी गोविंद नेगी, हरीश भट्ट और चंद्रशेखर चौहान ने किया है।कुछ शॉट ड्रोन कैमरे से भी लिए गए है जिसे युवी नेगी ने ऑपरेट किया है। कोरियोग्रॉफी सोहन चौहान और सेंडी नेगी, प्रोडक्शम मौनेजर अब्बू रावत, एसिसटेंट डायरेक्टर सोहन चौहान, प्रोडक्शन पहाड़ी दगड्या प्रोडक्शन और प्रोडयूस बलूनी क्लासेस ने किया है।इसके अलावा इस पूरे प्रोडक्शन में रजनीकांत सेमवाल ने विशेष सहयोग किया है।

गौरतलब है कि नरेंद्र सिंह नेगी को उत्तराखंड का गढ़ रत्न कहा जाता है और होली पर एक बार फिर हम राज्य के गली मौहल्लों में नेगी दा की आवाज़ सुन सकेंगे। इस वीडियो के लिये आपको कुछ दिन और इंतज़ार करना है, 26 फरवरी को यूट्यूब पर रिलीज़ कर दिया जाएगा।

क्यों छिनी इन नेताओं की सुरक्षा?

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केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के 10 बागी कांग्रेसी विधायकों 2016 में दी गई विशेष सुरक्षा को वापस ले लिया है। गौरतलब है कि इन विधायकों को ये सुरक्षा  2016 में उस समय हरीश रावत सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के बाद केंद्र सरकराकी तरफसे दी गई थी।

यद कदम विद्रोही कांग्रेस के विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में आने के करीब 20 महीनों के बाद उठाया गया है। जिन 10 विद्रोही कांग्रेस नेताओं को सुरक्षा दी गई थी उनमे में हरक सिंह रावत, विजय बहुगुणा, शैला रानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा ‘काऊ’, प्रदीप बत्रा, रेखा आर्य, सुबोध उनियाल, प्रणव सिंह चैंपियन और अमृता रावत शामिल थे। 2016 में विद्रोह के बाद के राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान गृह मंत्रालय ने नेताओं के खिलाफ खतरे की बात का तर्क देकर उन्हें विशेष सुरक्षा कवर प्रदान किया था।

हालांकि, ये सुरक्षा कवर इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के कई महीनों बाद तक जारी रहा। इन सभी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में चुनाव लड़ा और उनमें से अधिकांश को फिर से चुन लिया गया और नई सरकार में मंत्री भी बन गए। सुरक्षा कवर वापस लेने के बारे में विधायकों का कहना है कि केंद्र की दी गई सीआईएसएफ के जवानों की सुरक्षा को 5 फरवरी को वापस ले लिया गया था और अब राज्य में अपनी सरकार है और हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सुरक्षा की आवश्यकता तब थी क्योंकि हमें डर था कि कांग्रेस सरकार और इसके सदस्य हमारे विरोध के लिए कुछ भी कर सकते हैं।”

 

 

प्रदेश की बेटियों ने विदेश में नाम किया रोशन

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(देहरादून) उत्तराखंड की बेटियां देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने हुनर का जलवा बिखेर रही हैं। इस बार प्रदेश की बालिकाओं ने दक्षिण एशियाई रूरल गेम्स में अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया। राजधानी देहरादून की दो सगी बहनें, मनीषा और रश्मि ने दौड़ प्रतियोगिताओं में स्वर्ण व रजत पदक हासिल किया।
गुरुवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों को जानकारी देते हुए खिलाड़ियों के कोच प्रवीण सुहाग ने बताया कि नेपाल में बीते 16 से 18 फरवरी को साउथ एशियन रूरल गेम्स का आयोजन किया गया था। खेलों में दक्षिण एशियाई देशों में भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश ने प्रतिभाग किया था। इसमें उत्तराखंड की बालिकाओं ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। प्रदेश की राजधानी देहरादून के शिमला बाईपास से सटे झीवरहेड़ी इलाके में गरीब परिवार की दो सगी बहनों मनीषा पाल और रश्मि पाल ने अंडर 17 वर्ग में 1500 मीटर और 800 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किया। इसी वर्ग में उत्तरकाशी जनपद की बालिका रेखा चौहान ने 100 मीटर की स्पर्धा में रजत पदक जीता। बालकों की अंडर-14 स्पर्धा में रोहित चंद्र कुनियाल ने न केवल स्वर्ण पदक जीता बल्कि बेस्ट एथलीट भी चुने गए।
सरकार नहीं ले रही सुध
प्रदेश की इन प्रतिभाओं को लेकर सरकार ने अभी तक प्रत्साहन बढ़ाने को कोई कदम नहीं उठाया है। कोच प्रवीण सुहाग ने बताया कि इन प्रतिभाशाली गरीब बच्चों ने देश और प्रदेश का सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है लेकिन नेपाल से लौटने के बाद से अभी तक प्रदेश सरकार ने प्रतिभागियों की कोई सुध नहीं ली है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश सचिव आजाद अली से मिलकर मामले में सहयोग करने की अपील की है। आजाद ने प्रदेश सरकार से प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए सभी खेल प्रतिभाओं को तत्काल सम्मानित और आर्थिक मदद करने का आश्वासन दिया है।

रोबोटिक आॅटोमेशन व सोलर आॅटोमेशन तकनीक होंगे फूड व फार्मा इंडस्ट्री में लाभकारी

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(हरिद्वार) गुरुवार को मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इण्डिया की प्रबंधन टीम ने पतंजलि योगपीठ और पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क, पदार्था का दौरा किया। मित्सुबिशी इलैक्ट्रिक इंडिया ने अपने विश्व स्तरीय स्वचालित उत्पादों का प्रदर्शन किया, जो खाद्य और फार्मा उद्योग के लिए पूर्ण उपयुक्त सिद्ध हो सकती हैं। पतंजलि व मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक इण्डिया की प्रबंधन टीम के मध्य तकनीकी सेवाओं और सीएसआर गतिविधियों के विषय में विस्तृत चर्चा हुई।
पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क के प्रबंध निदेशक अचार्य बालकृष्ण ने आधुनिक तकनीक से लैस आॅटोमेशन व्हीकल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ने कहा कि उक्त वाहन तकनीक के मानकों पर उच्च गुणवत्तायुक्त तथा आधुनिक सुविधाओं से लैस है। उन्होंने कहा कि पतंजलि ने समाज को स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए सदैव प्रयासरत है। फूड तथा फार्मा इंडस्ट्री के लिए मित्सुबिशी के स्वचालित उत्पाद महत्वपूर्ण साबित होंगे। पतंजलि मित्सुबिशी इलैक्ट्रिक इण्डिया के साथ तकनीक के क्षेत्र में बेहतर सेवाएं प्रदान करने पर विचार कर रही है। उक्त टीम ने एडवांस रोबोटिक्स फाॅर आॅटोमेशन तथा सोलर आॅटोमेशन तकनीक का भी प्रदर्शन किया। कहा कि मित्सुबिशी की तकनीक को पतंजलि अपनी विविध गतिविधियों में प्रयोग कर फूड इंडस्ट्री तथा औषध निर्माण कार्य में गुणात्मक सुधार करेगी। मित्सुबिशी इशुजु की टीम का नेतृत्व में योशियुकी कुवाई तथा एस. श्रीराम शामिल रहे।

जियोलोजिकल सूचना प्रणाली से लैस हरिद्वार बना दूसरा जिला

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(हरिद्वार) जिलाधिकारी दीपक रावत की उपस्थिति में कुमांऊ विश्वविद्यालय के प्रो. जेएस रावत, प्रो.नरेश पन्त ने जनपद हरिद्वार में जियोलोजिकल सूचना प्रणाली तैयार कर जिला योजनाओं की प्लानिंग बनाने के लिए जनपदीय अधिकारियों को कार्यशाला के माध्यम से जागरूक किया।
इस मौके पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि भारत सरकार के न्यू इण्डिया और डिजिटल इण्डिया के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत और राज्य सरकार के सहयोग से जीआईएस के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया है। सरकारी तंत्र में जियोग्राफिकल सूचना तकनीकी के प्रयोग से कार्यो में पारदर्शिता आयेगी और अलग योजनाओं में एक ही स्थान पर बार-बार होने वाले कार्यों में डुप्लीकेसी समाप्त होगी। इससे पूर्व जनपद नैनीताल को उक्त तकनीकी से युक्त किया जा चुका है। हरिद्वार को जीआईएस पू्रक बनाना हमारा लक्ष्य है। प्रशासनिक कार्यों एवं जिला विकास के कार्यों में भौगोलिक सूचना प्रणाली का प्रयोग करते हुए विभागों को योजनाएं बनानी होंगी। विभागों को इस प्रणाली के साथ कार्य करने के लिए दक्ष बनाना सरकार की मंशा है। शासन स्तर पर विभागाध्यक्षों एवं जिला स्तर पर सीडीओ को जीआईएस प्रणाली विकसित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। कार्याशाला का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से किया गया।
प्रो. रावत ने कार्याशाला में विभागों को जीआईएस के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि प्रत्येक विभाग का डाटा जिसमें उस विभाग द्वारा दी जा रही सुविधा, निर्माण, संसाधनों एवं मानव संसाधनों की उपलब्धता, किये जा चुके कार्य, किये जाने वाले कार्य, संचालित सेंटरों जैसे सीएचसी, पीएचसी, एम्बुलेंस व अन्य वाहन, पुलिस थाने, विद्यालय, विभागों में उपलब्ध वाहनों, शौचालयों, मार्गो, नहरों आदि की पूरी सूचना डिजिटल रूप में आॅनलाइन होगी। किसी भी विभाग सम्बंधी जानकारी जुटाने के लिए अधिकारी या कार्यालय से पत्राचार करने के स्थान पर मात्र आॅनलाइन साइट पर जा समस्त सूचनायें प्राप्त की जा सकती हैं। जिले में स्थापित प्रत्येक सरकारी संस्थानों के सम्बंध में भौतिक लोकेशन सहित सूचना प्राप्त की जा सकेगी।
प्रो. रावत ने सभी विभागों को सूचनाएं फीड करने एवं प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई एंव साॅफ्टवेयर प्रोग्राम भी साझा किया। जिसमें विभाग अपने विभागों सम्बंधी सूचनायेें सुरक्षित कर सकते है। बैठक में सीडीओ स्वाती भदौरिया, सहायक नगर आयुक्त नरेंद्र भण्डारी, अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी प्रशासन बीके मिश्र, सीएमओ अशोक कुमार गैरोला सहित समस्त विभागीय कार्यालयाध्क्ष उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह में पहली बार दिखी उत्तराखंडी परिधानों की झलक, राज्यपाल ने किया आगाह

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राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एचएनबी उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को उपाधियां वितरित की। ये समारोह इसलिये भी खास रहा कि पहली बार राज्य में उत्तराखंडी परिधानों को पहनकर कोई भी दीक्षांत समारोह हुआ। दीक्षांत समारोह में प्रयुक्त वेशभूषा को भारतीय संस्कृति व उत्तराखण्डी परम्पराके अनुरूप बनाया जा रहा है। इसके लिये तीन डिजाईन तैयार की गई हैं। राज्यपाल व मुख्यमंत्री से निर्देश प्राप्त कर किसी एक डिजाईन को जल्द ही पूरी तरह ढाल लिया जायेगा। इस डिजाइन को बनाने के लिये ग्राफिक ऐरा युनिवर्सिटी के फैशन डिजाइन विभाग के छह छात्रों की एक टीम ने काम किया है। इसके साथ साथ डॉ ज्योति छाबड़ा, कोकिला भंडारी ने भी टीम के साथ करीब  तीन महीने कड़ी मेहनत कर ये डिजाइन तैयार किये हैं। तैयार तीन डिजाइनों में से दो आने वाले अतिथियों के और एक छात्रों के परिधान के हैं।

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वहीं स्वास्थ सेवाओं को लेकर राज्यपाल ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्याप्त सुधार नहीं हो पाया है। नीति आयोग की स्वास्थ्य सूचकों पर रिपोर्ट का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इसमें नवजात मृत्यु दर, लिंग अनुपात आदि में उत्तराखण्ड की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में कुल 234 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई।