सीबीआई और ईडी की कार्रवाई से कांग्रेस नहीं डरने वाली, आंदोलन जारी रहेगाः करन माहरा

0
177
कांग्रेस

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार के सीबीआई और इडी रेड की कार्रवाई से कांग्रेस डरने वाली नहीं है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए आमजन की आवास बनकर कांग्रेस का लड़ाई जारी रहेगा।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में यह बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और खाद्य पदार्थों पर लगी जीएसटी व अग्निपथ योजना के खिलाफ लगातार आन्दोलन करती रहेगी। चाहे केन्द्र सरकार कितना भी दबाव बना ले कांग्रेस जनहित के कार्यों से पीछे हटने वाली नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में 5 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस की ओर से राजभवन घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

माहरा ने कहा कि देशभर में कांग्रेस के आंदोलन को लेकर भाजपा सरकार डरी हुई है। यही कारण है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आवास के अलावा पार्टी मुख्यालय पुलिस छावनी बना दिया गया है। सरकार कितना भी दबाव बना ले कांग्रेस पार्टी आंदोलन करती रहेगी। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, केन्द्र की मोदी सरकार चाहे जितना मर्जी दबाव डाल लें। हम उससे डरने वाले नहीं है ।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में पिछले 8 साल में महंगाई, बेरोजगारी बेतहाशा बढी है। अब खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाकर जनता की कमर तोड़ी जा रही है। केन्द्र की मोदी सरकार बिना सोचे-समझे अग्निपथ योजना लाई गई है।

उन्होंने भाजपा के घर-घर तिरंगा योजना पर कहा कि भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तिरंगा को फहराने में परहेज करता है।

मातृ मृत्यु दर के मामले बढ़े हैं-

प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने एक अन्य मामले पर कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में स्वास्थ्य सेवा का हाल बेहाल है। उत्तराखंड में पिछले 5 सालों में मातृ मृत्यु दर के मामले बढ़े हैं। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच कुल 798 महिलाओं ने प्रसव के दौरान या प्रसव से जुड़ी मुश्किलों के चलते दम तोड़ा। वर्ष 2016-17 में राज्य में कुल 84 मातृ मृत्यु हुई। 2017-18 में 172, 2018-19 में 180, 2021-20 में 175 और 2020-21 में 187 महिलाओं ने बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया में जान गंवाई। स्वास्थ्य विभाग में 64 प्रतिशत महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। सरकारी अस्पतालों में करीब 60 प्रतिशत बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में मातृ.शिशु मृत्यु दर को रोकना बड़ी चुनौती है।