नंदा की कैलाश विदाई के साथ ही नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा का समापन 

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गोपेश्वर, आखिरकार बीते एक पखवाडे़ से चमोली के सात विकास खंडों के आठ सौ से अधिक गांवों में आयोजित मां नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा नंदा सप्तमी के दिन संपन्न हो गयी। मां नंदा की कैलाश विदाई का यह दृश्य बड़ा ही मार्मिक था। इस अवसर पर हर श्रद्धालु की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी।
मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली गुरुवार सुबह अपने अंतिम पड़ाव गैरोली पाताल से वेदनी बुग्याल में स्थित वेदनी कुंड में पहुंची। यहां पहुंचकर सर्वप्रथम डोली ने वेदनी कुंड की परिक्रमा की। तत्पश्चात मां नंदा की डोली को अपने नियत स्थान पर विराजमान किया गया। मां नंदा की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने मां नंदा को ककड़ी, अखरोट, चूड़ा-खाजा, चूड़ी, बिंदी, सहित श्रृंगार की विभिन्न सामग्री भेंट की। पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा को कैलाश को विदा किया। इस अवसर पर महिलाओं नें नंदा की विदाई के लोकगीत और जागर गाये जिससे सभी श्रद्धालुओं की आंखें छलछला गयीं। एक साल बाद फिर लोकजात आयोजित करने का वचन देने और मां नंदा को कैलाश विदा के साथ नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा संपन्न हो गयी।
भक्तों को आशीष वचन देने के बाद मां नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली वेदनी बुग्याल से आली बुग्याल होते हुये रात्रि विश्राम को बांक गांव लौट आई। इस दौरान पूरा वेदनी बुग्याल मां नंदा के जयकारों से गुंजयमान हो गयी। वेदनी बुग्याल में लोकजात यात्रा के समापन पर लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचे। वेदनी बुग्याल में लोकजात यात्रा के समापन पर चौकी इंचार्ज देवाल जगमोहन पडियार, तहसीलदार थराली सोहन रांगड, टीएस बिष्ट, हीरा सिंह पहाड़ी, रूपकुंड महोत्सव समिति के अध्यक्ष जीत सिंह दानू, सचिव रूपा देवी, सुरेन्द्र सिंह बिष्ट, लोकजागरी हुकुम सिंह बिष्ट, हीरा सिंह गढ़वाली आदि मौजूद थे।