सड़क का अभाव, घायल महिला को कंधे पर लादकर पहुंचाया अस्पताल

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गोपेश्वर। पहाड़ से पलायन रोकने के नारे व दावे खोखले व बेमानी लगते है। वर्षों से सड़क की मांग कर रहे किमाणा गांव के ग्रामीण अभी तक सड़क महरूम है। यहां दुर्घटना के समय घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए न कोई साधन है न सही रास्ता।
गुरुवार को चमोली जिले के जोशीमठ ब्लाॅक के उर्गम घाटी के किमाणा गांव की एक 52 वर्षीय विजया देवी पत्नी नारायण सिंह कुंवर दोपहर बाद अपने मवेशियों को चारापत्ति लेने पास की के जंगल में गई थी। जहां उसका पैर फिसल गया और वह खाई में जा गिरी और गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला को ग्रामीणों ने किसी तरह से निकाल कर घर तक पहुंचाया लेकिन गांव में अस्पताल न होने के कारण उन्हे उपचार के लिए चिकित्सालय तक पहुंचाना मुसीबत हो गया। यह गांव आज भी सडक से बंचित है।
चौदह किमी की खडी चढाई पार कर के गांव तक पहुंचा जा सकता है। ऐसे में घायल विजया देवी को मुख्य सडक तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए एक मुसीबत का सबब बन गया। गांव के कुछ जागरूक युवाओं ने गांव में ही रखी गये स्टेचर पर महिला को बांध कर उसे कंधे पर लाद कर उन्हे मुख्य सडक मार्ग तक पहुंचाया जहां से उसे गोपेश्वर जिला चिकित्सालय लाया जा जा रहा है जो देर रात तक गोपेश्वर पहुंचेगी।
क्षेत्र के युवा प्रदीप भंडारी की यह पहली घटना नही है। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटना घट चुकी है। ग्रामीण दसको से गांव को सडक से जोडने की मांग करते आ रहे है लेकिन अभी तक उनकी मांग पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है। जिसका नतीजा यह है कि ग्रामीण सडक व चिकित्सा के अभाव में दम तोड रहे है। ग्रामीण आज भी विकट व दुर्गम रास्ते से गांव पहुंचने के लिए विवश है।