पिता को याद कर भावुक हुईं वंदना कटारिया

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वंदना

टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वालीं भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी वंदना कटारिया बुधवार को आपने घर हरिद्वार के रोशनाबाद पहुंची। यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।इस दौरान वंदना कटारिया अपने पिता को यादकर भावुक हो गईं।

वंदना ने आज जो मुकाम हासिल किया है कि उसके लिए उन्होंने बहुत संघर्ष किया है। वंदना कटारिया ने खुद अपने संघर्ष की पूरी दास्तान साझा की। उन्होंने बताया कि आज सब भले ही उनकी तारीफ कर रहे हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था कि जब हम बहनें एक जोड़ी जूते आपस में शेयर करके हॉकी खेला करती थीं। वंदना कटारिया ने बताया कि उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो खेलने के लिए एक जोड़ी जूते खरीद सकें। वंदना कटारिया ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि आज वे इस दुनिया में नहीं हैं। आखिरी समय में भी वे अपने पिता को नहीं देख पाईं।

वंदना कटारिया ने बताया कि जब वे टोक्यो से वापस आ रही थीं, तब भी उनके दिमाग में यही चल रहा था कि घर पहुंचकर कैसा महसूस करेंगी? उनके पिता उनके साथ नहीं होंगे। उनके पिता का वो कमरा जहां वो सोते थे। जिस कुर्सी पर बैठकर वो वंदना से बात करते थे, वो सब खाली दिखाई देगा। वंदना कटारिया ने बताया कि जब भी वो अपने पिता से मिलती थीं तो भारत के लिए मेडल की ही बात करते थे। वंदना कटारिया ने कहा कि वो अपने पिता के सपने को एक दिन पूरा करेंगी और भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक में एक दिन जरूर मेडल जीतेगी।

वंदना कटारिया बुधवार को अपने गांव हरिद्वार जिले के रोशनाबाद पहुंचीं। यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की वंदना कटारिया ने अपने नाम एक रिकॉर्ड कायम किया था। वंदना ने एक ही मैच में तीन गोल दागकर इतिहास रचा था। भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने आखिरी ग्रुप मैच में दक्षिण अफ्रीका को 4-3 से हरा दिया था। वंदना ने भारत के लिए चौथे, 17वें और 49वें मिनट पर गोल किया था। इसके अलावा भारत के लिए चौथा गोल नेहा गोयल ने 32वें मिनट पर किया था। वंदना कटारिया भारत की पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में हैट्रिक मारी है।