कांग्रेस का हालः दो दिन शांति, बाकी दिन क्रांति

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उत्तराखंड कांग्रेस का हाल अजब है। दो दिन शांति, बाकी दिन क्रांति। जी हां, हाईकमान की नसीहत पर अमल करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता कुछ दिन तो शांत रह गए, लेकिन अब नए सिरे से उनमें जोर आजमाइश शुरू हो गई है। संगठनात्मक मजबूती के मकसद से कांग्रेस ने तीन दिन के खास अभियान की शुरुआत कर दी है लेकिन गुटबाजी बढ़ने से पार्टी का नेतृत्व अपने माथे पर चिंता की लकीरों को भी साफ महसूस कर रहा है।
– संगठनात्मक मजबूती के लिए अभियान लेकिन गुटबाजी से परेशान
– पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का पत्र कर रहा हालत बयान
इन स्थितियों के बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को भेजे पत्र से पार्टी के अंदरूनी हालात साफ नजर आ रहे हैं। इसमें पार्टी के दिग्गज नेता एक साथ ताकत बनने की जगह अलग-अलग दिशाओं में खडे़ हैं। उपाध्याय यदि इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सभी प्रमुख नेताओं को एक साथ बैठक विमर्श करना चाहिए, तो इसकी जरूरत वास्तव में दिखाई भी दे रही है। हाल के ही दिनों में चाहे हरीश रावत हों, प्रीतम सिंह, इंदिरा ह्दयेश हों या फिर किशोर उपाध्याय ही क्यों न हों, सभी के बयानों या कार्यक्रमों से कांग्रेस के घर की दरारें सबको झांकती नजर आई हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को कहना पड़ा है कि कोई समानांतर कार्यक्रम न चलाए, बल्कि पार्टी के कार्यक्रमों का ही हिस्सा बने। प्रभारी की यह टिप्पणी हरीश रावत के लिए मानी गई है, जिन्होंने महंगाई का अपने अंदाज में विरोध कर महफिल लूटी है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की बात करें, तो उनमें धडे़बाजी की तस्वीर कुछ यूं उभरती है। एक तरफ प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश हैं, जिनके साथ प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को भी माना जा रहा है। दूसरी तरफ, पूर्व सीएम हरीश रावत हैं, जो अपने समर्थकों की विशाल फौज के बूते पार्टी के भीतर प्रभावी हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का अपना कोई धड़ा नहीं है, हालांकि उनके कई समर्थक जरूर हैं। उपाध्याय कभी प्रीतम-इंदिरा, तो कभी हरीश रावत के साथ खडे़ दिखाई देते हैं। अपनी इसी स्थिति के कारण उन्होंने यह पेशकश की है कि पार्टी की एकता के लिए वह सभी नेताओं से बात कर सकते हैं।
कांग्रेस ने सात जुलाई से संगठन की मजबूती के लिए लगातार तीन दिन तक बैठक का कार्यक्रम तय किया है। इस पर आज से अमल शुरू हो गया है। पार्टी के उपाध्यक्षों, महामंत्रियों और अन्य पदाधिकारियों के साथ प्रदेश अध्यक्ष अलग-अलग बात करेंगे। यह अभियान उस वक्त शुरू हुआ है, जबकि गुटबाजी से कांग्रेस का माहौल गरम है। ऐसे में तालमेल का रास्ता कैसे निकलेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पार्टी के प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी का कहना है कि पार्टी के बडे़ नेताओं के काम करने का अपना अलग अंदाज है। इसे गुटबाजी नहीं कहा जा सकता। सभी लोग पार्टी की मजबूती के लिए ही काम कर रहे हैं।