उत्तराखंड में एक साल में हेली सेवाओं का हुआ काफी विस्तारः त्रिवेन्द्र

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में वेबिनार के माध्यम से दूसरे हेलीकॉप्टर समिट का शुभारंभ किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार तथा फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन में देश में हेली सेवाओं की स्थिति एवं संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने ‘‘हेलीकॉप्टर द्वारा क्षेत्रीय संपर्क में मजबूती और आपात स्थिति में अवसर‘‘ पर अपने विचार भी रखे।
  • उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वेबिनार के माध्यम से दूसरे हेलीकॉप्टर समिट का किया उद्घाटन
  • नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने राज्यों को दिया हेली सेवाओं को सुदृढ़ करने का भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। प्रदेश की सीमाएं दो देशों से जुड़ी हैं। राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जौली ग्रांट एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तथा पंतनगर एयरपोर्ट ग्रीन एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 50 हेलीपैड स्थापित हैं, जबकि राज्य में अतिरिक्त हेलीपैडों की स्थापना के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया जा रहा है। पिछले वर्ष राज्य में देश के पहले हेलीकॉप्टर समिट का आयोजन किया था, जो सफल रहा था। इस सम्मेलन में कई सुझाव भी प्राप्त हुए थे। इसकी एसओपी तथा गाइड लाइन भी जारी की गई थी। विगत एक वर्ष में हेली सेवाओं में काफी विस्तार हुआ है। इस बार कोरोना के कारण वर्चुअल समिट का आयोजन करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि ये संकट जल्द खत्म होगा और शीघ्र जीवन सामान्य होगा।
उन्होंने कहा कि हेली सेवाएं हमारे राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। उत्तराखण्ड उड़ान योजना  2.0 के अन्तर्गत हेलीकॉप्टर सेवाएं आरम्भ करने वाला पहला राज्य है। योजना के अन्तर्गत बेहतर कार्य करने हेतु राज्य को प्रोएक्टिव पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। उत्तराखण्ड में तमाम तरह के आकर्षण है। देवभूमि के साथ-साथ यहा देवस्थान, नेशनल पार्क हिमालय, औली, हर्षिल जैसे सुरम्य प्राकृतिक स्थल है। राज्य में उड़ान सेवा 2.0 के अधीन पवन हंस द्वारा देहरादून, टिहरी, श्रीनगर हेली सेवा आरम्भ की गई है। राज्य में बरसात में कई दिक्कतें होती हैं। आपात स्थिति में हेली सेवा बेहतर सेवा है। अभी पिथौरागढ़ में आयी आपदा के दौरान 55 लोगों को हेलीकॉप्टर द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। उत्तराखण्ड आपदा के लिहाज से बहुत संवेदनशील रहा है। इसलिए किसी तरह की आपदा में राहत और बचाव कार्यों में हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कई लोगों की जान बचा रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में हल्द्वानी, अल्मोड़ा, धारचूला को भी उड़ान योजना से जोड़ा जायेगा। गौचर के साथ गुप्तकाशी तथा बड़कोट के लिए सेवा आरम्भ करने के प्रयास किये जा रहे हैं। कोरोना के संक्रमण से बचाव हेतु यात्रियों को पूर्ण रूप से स्क्रीनिंग की जा रही है तथा भारत सरकार की सभी गाइडलाइन्स का पालन किया जा रहा है। उड़ान योजना से प्रदेश देश के कई प्रमुख शहरों से सीधी हवाई सेवाओं से जुड़ा है। देहरादून अब बेंगलरू, हैदराबाद, वाराणासी, मुंबई, जयपुर, अमृतसर जैसे शहरों से सीधी फ्लाइट से जुड़ा है। पंतनगर एयरपोर्ट को ग्रीन एयर पोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह राज्य का पहला ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट होगा। इसके लिए भूमि चयनित कर ली गई है। पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर भी सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। पंतनगर कृषि प्रधान जनपद होने के कारण यहां के एग्रोवेस व फ्रोजन उद्योग, राइस मिलो ऑफ सीजन सब्जियों, फलों व फूलो को विदेशों में निर्यात करने से किसानों को भी अच्छा फायदा होगा। सम्मेलन में प्राप्त तकनीकी सुझावों पर ध्यान देकर प्रदेश में इससे सम्बन्धित योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर केन्द्रीय नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने कहा कि देश में एवियेशन के क्षेत्र में सरकारी व निजी क्षेत्र ने बेहतर कार्य किया है। कोरोना काल में मेडिसिन एवं मेडी उपकरण आदि लाने व ले जाने में ये सहयोगी बने हैं। देश के विभिन्न भागों में इसके विकास एवं मजबूती की व्यापक संभावनायें तलाशे जाने की भी उन्होंने बात कही। उन्होंने कहा कि हेली सेवायें आम आदमी दायरे के आयें, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए अन्य खर्चों में कमी करने पर बल दिया। हेली सेवाओं के लिये सहस्त्रधारा हैलीपैड को मॉडल हैलीपैड बताते हुए उन्होंने राज्यों को हेली सेवाओं की मजबूती के लिए पूरा सहयोग का भरोसा दिया। सम्मेलन में तकनीकी सत्र के दौरान भी विषय विशेषज्ञों द्वारा अपने सुझाव रखे गये।