कैबिनेटः लॉक डाउन में उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन उद्योग को दी बड़ी राहत

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उत्तराखंड में लॉक डाउन के दौरान भारी नुकसान में चल रहे पर्यटन कारोबारियों को त्रिवेन्द्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई कैबिनेट बैठक में पर्यटन गतिविधियों और होटल रेस्टोरेंट संचालकों को बिजली के फिक्स डिमांड चार्ज में रियायत दी गई है। इसी तरह उद्याेंगों को भी फिक्स डिमांड चार्ज में तीन महीने की छूट (स्थगित कर) दी गई है। हालांकि ये चार्ज उन्हें तीन महीने बाद अदा करना पड़ेगा। रियायत के तौर पर उन्हें इन तीन महीनों का ब्याज नहीं देना होगा।
कैबिनेट मंत्री एवं शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि लॉक डाउन अवधि में बिजली के विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को ब्याज और अधिभार में छूट दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में 3400 से अधिक होटल हैं, जहां एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इसलिए बिजली के फिक्स चार्ज में सभी होटल एवं रेस्टोरेंट कारोबारियों को फिक्स डिमांड चार्ज में तीन महीने छूट दी गई है। आन लाइन विद्युत देय पर 1% की छूट होगी। इस तरह अधिभार पर अप्रैल से जून तक 3 माह तक छूट होगी, जिससे राज्य पर 17 करोड़ 64 लाख रुपये का भार पड़ेगा। इसी तरह उद्योगों से लिये जाने वाले विद्युत पर फिक्स चार्ज तीन माह के लिए स्थगित किया गया है। इस अवधि पर फिक्स डिमांड चार्ज पर ब्याज नहीं लगेगा। इस पर सरकार पर आठ करोड़ का व्यय भार होगा।
– पर्यटन गतिविधियाें, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को बिजली के फिक्स डिमांड चार्ज में छूट
– उद्योगों से बिजली पर लिये जाने वाला फिक्स चार्ज तीन माह के लिए स्थगित किया गया
सरकार के इस कदम का पर्यटन जगत के लोगों ने स्वागत किया है। उत्तराखंड होटल एसोसियेशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहा कि, “हम कैबिनेटः और खासतौर पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में और राहत इस क्षेत्र के लोगों को मिलेगी।”
कैबिनेट के अन्य फैसले इस प्रकार हैंः 
  • इसके अलावा एक अहम प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है, जिसके अनुसार स्वास्थ्य विभाग में जिला और निदेशालय स्तर के लिपिक वर्ग को एक संवर्ग माना गया। इससे इनके प्रमोशन में आने वाली अड़चन दूर होंगी।
  • केंद्र सरकार की कृषि उपज, पशुधन संविदा खेती एवं सेवा अधिनियम 2018 को नोडल एक्ट मानते हुए अध्यादेश लाया जाएगा। इससे कृषकों को अनेक प्रकार की सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • वायलर अधिनियम 1923, वायलर जांच की छूट सीमा अप्रैल से जून तक तीन माह के लिए बढ़ाई गई है। इस बीच इंस्ट्रक्टर या थर्ड पार्टी से जांच की जा सकती है।