बजट की चुनौती : सारा भार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के कंधों पर

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अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान पहली बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विधानसभा में बजट पेश करेंगे। बजट सत्र के दौरान उनकी सरकार में इससे पहले वित्त्त मंत्री प्रकाश पंत को ही बजट दस्तावेज की अटैची पकडे़ सभी ने देखा है लेकिन इस बार मुख्यमंत्री खुद इस भूमिका में दिखेंगे। प्रकाश पंत के असामायिक निधन के बाद वित्त विभाग मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ही पास है। संसदीय कार्यमंत्री बतौर जरूर मदन कौशिक का साथ उन्हें मिलेगा। हालांकि इसके लिए अभी अलग से आदेश होने बाकी हैं।
– तीन साल के कार्यकाल में पहली बार बजट पेश करेंगे मुख्यमंत्री
– प्रकाश पंत के निधन के बाद वित्त्त विभाग सीएम के ही पास
प्रकाश पंत जब तक रहे, वित्त और संसदीय कार्यों के संबंध में मुख्यमंत्री को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं रही। दोनों विभागों में प्रकाश पंत का बेहतर काम हर बार दिखा। हालांकि बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने स्तर पर जनता का फीडबैक लेने का काम भी करते थे। इसके लिए बाकायदा अभियान चलाया जाता था और जनता के सुझावों को बजट में शामिल किया जाता था। इसके बावजूद बजट तैयार करने में प्रकाश पंत की अलग भूमिका रेखांकित होती थी। इस बार पता नहीं हैं, तो मुख्यमंत्री बतौर वित्त मंत्री इस चुनौती का सामना करेंगे। इसके लिए उन्होंने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बजट सत्र फरवरी माह के आखिर में आयोजित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जल्द ही लोगोें से बजट पर रायशुमारी भी करने जा रहे हैं। उन्हें राज्य की माली हालत भी देखनी है, तो जनअपेक्षाओं का भी ख्याल करना है। खास तौर पर उन स्थितियों में जबकि बजट सत्र के कुछ दिन बाद ही त्रिवेंद्र सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। साथ ही, 2022 के विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं रह गए हैं। मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के रूप में हाल ही में आलोक भट्ट की नियुक्ति हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ भी सरकार को मिलेगा।
इन स्थितियों के बीच यह तय है कि बजट सत्र में संसदीय कार्य मंत्री की भूमिका इस बार भी कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ही निभाएंगे। संसदीय कार्य मंत्रालय प्रकाश पंत के निधन के बाद स्थायी तौर पर किसी को आवंटित नहीं किया गया है। अब तक हुए विधानसभा के दो सत्रों में मदन कौशिक ने ही इस भूमिका में बखूबी काम किया है। मुख्यमंत्री स्तर पर उन्हें सत्र से पहले कार्यवाहक जिम्मेदारी दी जा रही है।