जेट एयरवेज की सेवाएं बंद,सड़कों पर उतरे पायलट

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नई दिल्ली। जेट एयरवेज वित्तीय परेशानियों के दौर से गुजर रही है। कंपनी के कर्जदारों ने अब और कर्ज देने से इनकार कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि जेट एयरवेज को 17 अप्रैल को अपना फ्लाइट ऑपरेशन बंद करना पड़ा।

”हमें जनवरी से सैलेरी नहीं मिली। तीन महीने हो गए हैं। हम कैसे अपना परिवार चलाएं। हम एक-दो नहीं दो हजार पायलट हैं, तीन हजार एयरक्रॉफ्ट इंजीनियर हैं, और दूसरे सपोर्टिंग स्टॉफ मिलाकर करीब 16 हजार हैं। यदि कैटरिंग, होटल्स, टूरिस्ट एजेंसी सहित दूसरे तमाम सहायक कारोबार से जुड़े लोगों को जोड़े तो करीब एक लाख परिवार जेट एयरवेज की मौजूदा हालात से परेशान हो गए हैं। पायलट के लिए दूसरी नौकरी ढूंढना इतना आसान नहीं होता। देश की दूसरी एयरलाइन्स अब हमें 30 से 50 फीसदी सैलरी पर ही नौकरी देने की बात कर रही है लेकिन वो भी मिलना इतना आसान नहीं है।” ये कहना था जेट एयरवेज में पायलट जीएस चीमा का, जो पिछले 24 साल से जेट एयरवेज में पायलट है। इससे पहले चीमा भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट रह चुके हैं। जीएस चीमा अपने साथी पायलट के साथ गुरुवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे।
जीएस चीमा ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हमें जेट एयरवेज को इन हालात में देखना होगा। सैलेरी नहीं मिलेगी। नौकरी रहेगी या नहीं, इसकी आशंका बनी रहेगी। भविष्य को लेकर इतनी अनिश्चितता पहले कभी नहीं हुई लेकिन हम हारे नहीं हैं। हमारी सरकार से मांग है कि जेट एयरवेज जैसे ब्रॉन्ड को बचाएं। हमारी नौकरियों की हमें परवाह नहीं। हम तो कहीं और नौकरी ढूंढ लेंगे लेकिन जेट एयरवेज के बंद होने से पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर में भारत को लेकर एक गलत संदेश जाएगा। जेट पायलट जीएस चीमा की मानें तो जेट भारत के एविएशन सेक्टर में निजीकरण का प्रतीक रही है और सरकार को इसे बचाने की पूरी कोशिश करना चाहिए।
मौजूदा हालात में जेट को फिर से ऑपरेशन करने के लिए 1500 करोड़ रुपये की जरूरत है। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि सरकार बैंकों के माध्यम से यह पैसा लगा सकती है। वहीं किंगफिशर मामले में विजय माल्या से धोखा खा चुके बैंक अब जेट एयरवेज मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। लाखों की सालाना सैलरी लेने वाले जेट एयरवेज के कर्मचारियों के लिए ऐसी दूसरी नौकरी ढूंढना आसान नहीं दिख रहा।