गौरीकुंड भूस्खलन हादसे में लापता लोगों की खोज जारी, बाजार में अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए चुनौती

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गौरीकुंड

उत्तराखंड के केदारनाथ यात्रा पड़ाव के गौरीकुंड में हुए हादसे में अभी तक बीस लोग लापता चल रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासन भी हरकत में है और राजमार्ग किनारे किये अतिक्रमण को हटाया जा रहा है।

अब तक पचास से ज्यादा अस्थाई दुकानों को हटाया जा चुका है और अभी भी बाकी है, लेकिन गौरीकुंड मुख्य बाजार में किये गये अतिक्रमण को हटाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां पर आपदा के बाद से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है, जिस कारण यात्रा के समय भारी दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा इन दुकानों का गंदा पानी सीधे मंदाकिनी नदी में जा रहा है। ऐसे में मंदाकिनी अपने उद्गम से ही मैली हो रही है। इस सबके बावजूद प्रशासन गौरीकुंड मुख्य बाजार से अतिक्रमण नहीं हटा रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गौरतलब है कि गौरीकुंड में हुए हादसे का सबसे बड़ा कारण, अतिक्रमण बताया जा रहा है, जिसके बाद से ही प्रशासन पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं और अब गौरीकुंड से लेकर सोनप्रयाग तक अतिक्रमण हटाया जा रहा है। यहां करीब दो सौ से ज्यादा दुकानें अतिक्रमण करके अस्थाई खुली हुई हैं, जबकि कुछ लोगों ने पक्की दुकानों का निर्माण किया है। केदारनाथ यात्रा शुरू होने पर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों और नेपाल से भारी संख्या में लोग केदारनाथ यात्रा पड़ावों में छोटा-मोटा रोजगार करने को आते हैं। जहां स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता है, वहीं बाहरी राज्यों के लोगों और नेपाली मूल के लोगों को आसानी से रोजगार मिल जाता है।

इसका प्रमुख कारण यह है कि नेपाली मूल के साथ ही बाहरी राज्यों से आये लोगों से मनमाना किराया वसूला जाता है। सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुंड राजमार्ग के किनारे ये लोग अस्थाई टेंट लगाकर दुकानें खोल देते हैं, वहीं इनसे व्यापार संघ शुल्क वसूल करता है। जबकि जिन स्थानीय व्यक्तियों ने राजमार्ग किनारे अतिक्रमण करके पक्के निर्माण किये हैं, वे लाखों का किराया वसूल करते हैं। यहां के लोग उन्हें उतना पैसा नहीं दे पाते हैं, जबकि बाहरी राज्यों एवं नेपाली मूल के लोग उन्हें मनमाना किराया दे देते हैं।

गौरीकुंड में जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पर मार्ग काफी संकरा है। संकरे मार्ग पर पहले ही वाहनों के आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऊपर से यहां पर स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण करके दुकानें बनाई हुई थीं। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पर तीन पक्की दुकानें बनी थीं। पहाड़ी से चट्टान टूटने पर दुकानों का मलबा सीधे मंदाकिनी नदी में जा गिरा। तीन दुकानों के भीतर करीब अब तक 23 लोग बताए जा रहे हैं, जो मंदाकिनी नदी में समा गए। इनमें तीन लोगों के शव मंदाकिनी नदी से बरामद किए गए हैं। बाकी की तलाश जारी है।

उप जिलाधिकारी उखीमठ जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि गौरीकुंड और सोनप्रयाग में किये अस्थाई अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। मार्ग पर अतिक्रमण किये जाने से आवागमन में भारी दिक्कतें हो रही हैैं, जबकि कुछ दिन पहले हुए हादसे में अतिक्रमण की गई दुकानों के ऊपर चट्टान टूटने से बड़ी घटना हो गई। लापता लोगाें की खोज जारी है।

आपदा के दस साल बाद भी नहीं हुआ सोनप्रयाग-गौरीकुंड चौड़ीकरण-

सोनप्रयाग-गौरीकुंड 5 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण का कार्य आपदा के दस साल बाद भी नहीं हो पाया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर कभी कोई ध्यान नहीं दिया, जबकि शासन-प्रशासन से लेकर सरकार भी सोयी ही रही। मात्र केदारनाथ के विकास पर ध्यान दिया गया। केदारनाथ के विकास को लेकर रात-दिन एक किया जा रहा है, मगर सड़क मार्ग से गौरीकुंड पहुंचने के लिए यात्रियों को किन मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है।

इस पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। यहां तक कि ऑल वेदर सड़क का निर्माण कार्य सोनप्रयाग तक किया गया है और सोनप्रयाग से गौरीकुंड पांच किमी हिस्से को छोड़ा गया है। सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग काफी संकरा है। इस मार्ग वाहनों की आवाजाही बहुत मुश्किल हो पाती है। पहाड़ी से हर समय खतरा बना रहता है। यदि सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जाता या डेंजर प्वाइंट को ठीक किया जाता या फिर अतिक्रमण हटाया जाता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।

गौरीकुंड बाजार से समय रहते अतिक्रमण हटाने की जरूरत-

केदारनाथ आपदा के बाद गौरीकुंड से लेकर सोनप्रयाग तक लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। खासकर गौरीकुंड बाजार में ही अतिक्रमण करके दुकानें बनाई गई हैं। इन दुकानों का लोगों ने पक्का निर्माण किया हुआ है, जबकि अतिक्रमण वाली जगहों पर पक्का निर्माण किया जाना बिना प्रशासन के मिलीभगत से संभव नहीं है। इसके अलावा अस्थाई दुकानें भी बनाई गई हैं। यहां भी भूस्खलन का बहुत बड़ा खतरा बना है। इन दुकानों का गंदा पानी सीधे मंदाकिनी नदी में जा रहा है, जिससे मंदाकिनी नदी भी मैली हो रही है और नदियों को स्वच्छ रखने के दावे भी हवाई साबित हो रहे हैं। केदारनाथ धाम के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में अतिक्रमण किये जाने से यात्रा के समय काफी दिक्कतें तीथयात्रियों को होती हैं। प्रशासन को समय रहते गौरीकुंड बाजार से भी अतिक्रमण हटा देना चाहए, अन्यथा यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है।

उद्गम से फैली हो रही मंदाकिनी-

मंदाकिनी नदी अपने उद्गम स्थल से ही मैली हो रही है। केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में मां गौरा का मंदिर है और केदारनाथ डोली के केदारनाथ धाम जाते और आते समय एक रात्रि प्रवास यहीं पर होता है। यहां मुख्य बाजार में अतिक्रमण करके खोली गई दुकानों का गंदा पानी सीधे मंदाकिनी नदी में जा रहा है, जिस कारण उद्गम स्थल से ही मंदाकिनी नदी मैली हो रही है। जब यह अतिक्रमण हो रहा था, तब भी प्रशासन सोया हुआ था और अब जब सबका अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो गौरीकुंड बाजार में किये अतिक्रमण को नहीं हटाया जा रहा है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन पर गौरीकुंड बाजार के व्यापारियों से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।