एम्स ऋषिकेश ने चारधाम यात्रियों के लिए बनाया 24×7 एक्सक्लूसिव वॉर्ड

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AIIMS rishikesh to give 24*7 health services to pilgrims
Health Camp Chardham

ऋषिकेश,  राज्य में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश एक एनजीओ के साथ मिलकर सभी चार तीर्थ स्थलों पर चिकित्सा शिविर लगाएगा। शिविर विशेष रूप से हृदय और सांस संबंधी बीमारियों वाले तीर्थयात्रियों को ध्यान में रख कर लगाया जाएगा।

“हम सभी तीर्थस्थलों पर स्वास्थ्य शिविर लगाएंगे जो खासकर दिल की बीमारियों के रोगियों के इलाज के लिए होंगे क्योंकि अधिकांश लोग इतनी अधिक ऊंचाई पर दिल के दौरे के कारण मर जाते हैं। शिविर में काम करने वाले सभी डॉक्टर एम्स के होंगे और कैंप की बाकी सभी व्यवस्था एनजीओ करेगा,” एम्स, ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) हरीश मोहन थपलियाल ने कहा।

एम्स पीआरओ थपलियाल ने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए, “एम्स ऋषिकेश और सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज नामक एक एनजीओ के बीच एक एमओयू साइन किया गया हैं। इस कैंप में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर एम्स के होंगे और एनजीओ चिकित्सा उपकरणों के साथ शिविर स्थापित करने में मदद करेगा।”

वहीं इस बारे में और बात करते हुए एम्स के प्रोफेसर डॉ.मोनज गुप्ता ने हमे बताया कि, “चारधाम यात्रा के शुरु होने के साथ ही हमने अपनी तैयरियां पूरी कर ली है। एम्स ऋषिकेश में चारधाम यात्रियों के लिए एक एक्सक्लूसिव वॉर्ड रखा गया है जहां यात्रियों को किसी तरह की इमरजेंसी के लिए 24×7 सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा हमारे डॉक्टर चारधाम यात्रा के दो मुख्य पड़ाव नारायणकोटी और पीपलकोटी में हर 10 दिन में एक बार दौरा करते हैं और जरुरत पड़ने पर सर्जरी और दूसरे इलाज करते हैं। एम्स ऋषिकेश से जाने वाले डॉक्टरों और नर्सों की टीम 2-3 दिन इन जगहों पर रुक कर यात्रियों का इलाज करते हैं।

प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि, “जहां एक तरफ एनजीओ सिक्स स्टिग्मा चारों धाम में हेल्थ कैंप लगा रहा वहां एम्स ऋषिकेश अपने डॉक्टरों को चारधाम यात्रियों के लिए मुहैया करा रहा है, एनजीओ के पास खुद के डॉक्टर होने के अलावा अगर कुछ सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की जरुरत होती है तो वह एम्स ऋषिकेश उन्हें देता है।”

चमोली पुलिस कंट्रोल रुम के अधिकारियों ने कहा कि 2018 में, बद्रीनाथ जाने के रास्ते में हृदय संबंधी समस्याओं के कारण 32 लोगों की मौत हो गई। रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (डीडीएमओ) ने बताया कि केदारनाथ के लिए, कुल 54 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से 35 लोगों की मौत दिल के दौरे के कारण हुई।

बीते बुधवार को हैदराबाद के 64 वर्षीय एक व्यक्ति की यमुनोत्री में हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई। चारधाम यात्रा कंट्रोल रुम के अधिकारियों ने कहा कि इस साल अब तक मरने वालों की संख्या तीन हो गई है।

रुद्रप्रयाग के डीडीएमओ हरीश शर्मा ने कहा कि, “केदारनाथ धाम में स्वास्थ्य शिविर पहले से ही लगाए गए हैं, जिसमें 84 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो पूरे यात्रा सीजन यानि की छह महीने मरीजों को पूरी देखभाल करने के लिए उपलब्ध हैं।”

बद्री-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह ने कहा, “बद्रीनाथ और केदारनाथ में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए हैं, जिसमें एम्स के डॉक्टर भी आते रहते हैं। तीर्थयात्रियों को सीधे तीर्थस्थल पर पहुंचने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर रुकना चाहिए क्योंकि इतनी ऊंचाई पर हवा के दबाव के कारण यह यात्रियों के लिए घातक हो जाता है। ”