जहां पशुओं के लिए चारा-पत्ती काटना भी अपराध, वहां देवदार काटकर रिजॉर्ट बनाने की किसने दी छूट?

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नकल

यूकेएसएसएससी पेपर लीक कांड में गिरफ्तार हुए हाकम सिंह रावत का मोरी स्थित सांकरी के पास देवदार की लकड़ी से बना आलीशान रिजॉर्ट भी खूब चर्चाओं में है।

करोड़ों की कीमत के देवदार की कीमती लकड़ी से बना यह रिजॉर्ट कई सवाल खड़े कर रहा है कि जिस गोविंद पशु विहार की परिधि में 40 गांव के लोग काला पानी की सजा भुगत रहे हैं, वहां एक नकल माफिया को प्रशासन ने कैसे खुली छूट दे दी ?

गोविंद जीव विहार राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल 958 कि.मी. है। इस वन्यजीव अभयारण्य की ऊंचाई समुद्र तल से 1,400 से 6,323 मीटर (4,593 से 20,745 फीट) तक है। यहां गांव के लोगों को पशुओं के लिए चारा-पत्ती तक काटना अपराध है। वहां देवदार के सैकड़ों पेड़ काटकर इस रिजॉर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस करीब 60-70 कमरे और बैठक हॉल भी बनाया गया है। इससे गोविन्द वन्य जीव विहार व स्थानीय प्रशासन की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।

अब एसटीएफ और राजस्व पुलिस के जांच के बाद गोविंद वन्य जीव विहार व स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है। विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी फीता डालकर अवैध भूमि पर कार्रवाई करने में जुटे हैं।

हाकम सिंह ने मोरी में बहुत सी अवैध संपत्तियां भी अर्जित की हैं। इसके चलते उसके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी की गई। अब पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी उसकी संपत्तियों की जांच करने पहुंचे तो सभी चौंक गए। जिस जमीन पर उसका आलीशान रिजॉर्ट खड़ा है, उसके लिए उसकी अपनी भूमि 15 फीसदी ही है। 85 फीसदी जमीन तो उसने वाइल्ड लाइफ (जंगलात )की कब्जाई है।

अब जिन राजस्व के अधिकारियों ने जांच की, वह पहले भी वहां तैनात रहे थे। इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने कभी भी रिसॉर्ट को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।

एस एडीएम पुरोला का कहना है

एसडीएम देवानंद शर्मा ने बताया कि रिजॉर्ट निर्माण के लिए गोविंद वन्यजीव विहार के साथ राजस्व, लोनिवि की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। राजस्व विभाग की टीम ने हाकम सिंह के रिजॉर्ट के समीप बनाए गए उसके सेब के दो बगीचे सील कर दिए हैं। एसडीएम ने बताया कि यह बगीचे भी सरकारी भूमि पर बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग भी अपने स्तर से नोटिस चस्पा कर कार्रवाई शुरू कर रहा है।

बिल्ली के गले में कौन बांधेगा घंटी-

उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग के पेपर की कांड में मुख्य आरोपित हाकम सिंह रावत का नाम जितना चर्चाओं में है, उससे कहीं अधिक काली कमाई से बनाए गए मोरी विकासखंड के चित्र गांव में अवैध रिजॉर्ट का है। मालूम हुआ है कि 10 करोड़ से अधिक लागत से बना आलीशान रिजॉर्ट गोविंद वन्य जीव विहार की परिधि में है जहां 85 फीसद भूमि सिविल और गोविंद जीव विहार की है।

सूत्रों का कहना है कि रिजॉर्ट तोड़ने को लेकर जिला प्रशासन और गोविंद जी बिहार के बीच रार है। तोड़ने के लिए अभी फिलहाल अभी कोई तैयार नहीं हो रहा है।

यह कहावत तो सभी ने सुनी होगी कि आखिर बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा ? शायद हाकम सिंह के रिजॉर्ट तोड़ने के लिए भी यही कहावत सही बैठ रही है।