पानी की कमी से बचने के लिए अल्मोड़ा के गांव में हुआ पौधारोपण

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(अल्मोड़ा) ”साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा मिल कर बोझ उठाना ” साहिर लुधियानवी की यह कविता हमारी आज की कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

बीते शनिवार को अल्मोड़ा जिले के छयानी गांव, ब्लाक स्यालदे में गांववालों ने मिलकर बिना किसी सरकारी मदद के पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। खास बात यह थी कि इस पौधारोपण में गांव की एक 70 साल की बुजुर्ग ने भी हिस्सा लिया और साथ ही गांव की एक महिला अपने चार साल के बच्चे को लेकर इस मुहिम का हिस्सा बनी।

देव भंडारी आए -दिन ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखंड के साथ मिलकर राज्य के लिए कुछ ना कुछ करते रहते हैं,जैसे कि राजकीय कन्या विद्यालय स्यालदे में एजुकेशन प्रोग्राम। इस बार देव सिंह रावत और आनंदी देवी के नेतृत्व में पौधारोपण किया गया।

देव भंडारी से बातचीत में उन्होंने हमे बताया कि यह शनिवार मेरे लिए खास था क्योंकि एक तो मैं अपने गांव जा रहा था दूसरा गांववालों के साथ पौधारोपण भी करना था। देव ने बताया कि गांववालों के साथ मिलकर इस पौधारोपण में लगभग 200 पेड़ लगाए गए। इसकी सबसे खास बात यह थी कि इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस पूरे कार्यक्रम में सराहनीय कार्य गाँव की नारी शक्ति का रहा जो अपने 4-5 साल के बच्चे को अपने साथ लेकर इस कार्य में योगदान देने  पहुँची थी। ये दर्शाता है की देवभूमि की देवियाँ अगर कुछ ठान ले तो कुछ भी असम्भव नहीं है।

इस पौधारोपण में एक और जरुरी बात यह थी कि इसको करने का मुख्य कारण यह था इससे गांव से कम हो रहे पानी के स्तर को बनाए में मदद मिले। इस बात को ध्यान रखते हुए ज्यादातर पेड़ ऐसे लगाए गए जिससे गांव से कम हो रहे पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद मिले। इसमें बांझ के तीस पेड,बड के पांच,पीपल के पांच,बांस के बीस,रींगाल के बीस, रीठ के पांच, उत्तिश के बीस, शीशम, हरड़, आवला और बेल पत्र के पेड़ भी शामिल थे।

इस पूरे कार्यक्रम में गांववालों ने पिछले 15 दिनों से अपने सहयोग से गड्ढा खोंदने से लेकर, पेड़ लगाना, पानी डालना सब किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दिल्ली में बसे पहाड़ के युवाओं ने फंड इकट्ठा किया था।

देव भंडारी से यह पूछने पर की आगे और क्या कार्यक्रम किए जाऐंगे ? जवाब मिला, जिस तरह से सभी ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है हमें औऱ बेहतर करने का बल मिला है। भविष्य में हम अपने गांव में एक वॉटर चैंबर बनाने के लिए सोच रहे हैं जिससे गांव में पानी का कमी से जूझने में मदद मिलेगी जो एक बड़ा प्रोजेक्ट होगा जिसके लिए गांववालों को सरकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं, एनजीओ से मदद लेनी पड़ेगी।

इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में देव सिंह रावत के साथ दिल्ली एनसीआर की टीम और गांव की सरपंच आनंदी देवी की गांव की टीम में बड़ी भूमिका निभाई।