बुद्ध पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी

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Pilgrims took holy dip on buddh purnima
Pilgrims
हरिद्वार। वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर लाखों की संख्याओं ने हरकी पैड़ी ब्रह्म कुण्ड समेत गंगा के तमाम घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। स्नान के पश्चात लोगों ने दान-पुण्य आदि कर्म किए। स्नान पर्व पर भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
बुद्ध पूर्णिमा (वेसाक या हनमतसूरी) बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था।
ऐसा किसी अन्य महापुरुष के साथ आज तक नहीं हुआ है।दुनिया में बुद्ध पूर्णिमा विशेष पर्व है। वैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। हिन्दू धर्मावलंबियों का मानना है कि महात्मा बुद्ध, विष्णु के नौवें अवतार हैं, जबकि बुद्ध धर्म इससे इत्तेफाक नहीं रखता है, उसकी स्वतंत्र मान्यता है।  देश के कई प्रांतों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। तड़के से आरम्भ हुआ स्नान का सिलसिला दिन भर जारी रहा। स्नान के पश्चात लोगों ने दान-पुण्य आदि कर्म किए तथा बौध मंदिरों में जाकर दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
स्नान पर्व पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एसएसपी जन्मेजय खण्डूरी ने सम्पूर्ण मेला क्षेत्र को 6 जोन व 18 सेक्टरों में बांटकर जोन व सेक्टर प्रभारियों की नियुक्ति की थी। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से जल पुलिस की 3 टीमों के साथ बम निरोधक दस्ता व डॉग स्क्वायड की भी तैनाती की थी। यातायात पुलिस व बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए थे। बावजूद इसके यातायात व्यवस्था भीड़ के आगे चरमरा गई। स्नान पर्व पर भारी वाहनों के प्रवेश पर पुलिस प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने के बाद भी समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया।
देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक इस बार स्नान पर्व पर शनि केतु के साथ मंगल व राहु का संयोग भी बना, जो 205 वर्षों के बाद पड़ा। बताया कि इस संयोग में स्नान करने और दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व होता है। स्नान पर्व के कारण तीर्थनगरी में खासी चहल-पहल दिखाई दी।