बिना परमिशन के नहीं उड़ा सकते ड्रोन, ऐसा करने पर होगी कार्यवाही

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देश में डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (डीजीसीए) की अनुमति के बिना ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता है। इसे खरीदने और उड़ाने के लिए डीजीसीए की अनुमति का अनुपालन करना आवश्यक है। हालांकि, 250 ग्राम से कम भार के नैनो ड्रोन को उड़ाने के लिए किसी प्रकार की अनुमति की जरूरत नहीं है। वहीं, 250 ग्राम से दो किलो भार तक के ड्रोन को केवल 40 फीट की ऊंचाई और इंडोर क्षेत्र में बिना अनुमति के उड़ाया जा सकता है। बाहरी क्षेत्र में 40 फीट से अधिक की ऊंचाई में उड़ाने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

प्रदेश में ड्रोन का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। शादी-ब्याह से लेकर शौकिया तौर पर फोटोग्राफी व मनोरंजन के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में सामरिक महत्व के कई संस्थान होने के कारण यह खतरे का कारण भी बन सकते हैं। पूरे देश में ड्रोन के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए ड्रोन के नियमानुसार संचालन के लिए एक नीति तय की गई है। इसमें ड्रोन को वर्गीकृत करने के साथ ही इसे उड़ाने के मानक तय किए गए हैं। इसमें रक्षा संस्थानों और सुरक्षा व कानून-व्यवस्था से संबंधित क्षेत्रों की परिधि में ड्रोन को उड़ाना प्रतिबंधित किया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण के निदेशक अमित सिन्हा ने कहा कि ड्रोन खरीदने और इसे उड़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा तय प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। इस संबंध में सारी जानकारी डीजीसीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ड्रोन के संचालन से पहले ड्रोन का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर और स्वचालित एयरक्राफ्ट आपरेटर परमिट (यूएओपी) प्राप्त कर लिया जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि ड्रोन को ऑपरेट करने वाला पायलट भारत सरकार द्वारा अधिकृत संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया हुआ हो।
ड्रोन निषेध क्षेत्र की सूची डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर उपलब्ध है। ड्रोन की प्रत्येक उड़ान से पहले डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से अनुमति लेना आवश्यक है। डीजीसीए से ड्रोन उड़ाने की अनुमति लेने के बाद संबंधित पुलिस थाने को इसकी सूचना ड्रोन उड़ाने से 24 घंटे देना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन करने पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक वाद दर्ज हो सकता है।