नई टिहरी: एक बार फिर बेरोजगार होंगे ढाई सौ पीआरडी स्वयंसेवक

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पीआरडी
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कोरोना काल में पीआरडी के माध्यम से जनपद में लगभग 261 लोगों को स्वयंसेवकों के रूप में काम मिला, लेकिन अब कोरोना काल में लगे इन पीआरडी स्वयं सेवकों को हटाने काम शुरू होने से ढाई सौ से अधिक स्वयंसेवक एक बार फिर बेरोजगार हो जायेंगे।

  • पीआरडी के माध्यम से स्वयंसेवकों को तैनात कर दिया जाता है 500 रुपये प्रतिदिन का मानदेय
कोरोना काल में निजी सेक्टर में हजारों लोगों की नौकरी जाने से युवाओं ने पीआरडी के माध्यम से रोजगार पाया। जनपद में लगभग 261 युवाओं व युवतियेां को पीआरडी के माध्यम से रोजगार मिला। जनपद में लगभग सवा तीन सौ लोग पीआरडी के माध्यम से रोजगार पा रहे हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे पीआरडी स्वयंसेवकों को हटाने का काम विभाग शुरू करने जा रहा है। जिससे एक बार फिर पीआरडी स्वयं सेवकों को बेरोजगार होना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग में पीआरडी के माध्यम से लगे 10 चालकों, बीडीओ कार्यालयों में लगे 20 कार्मिकों, थानों में लगे 26 स्वयंसेवकों व तहसीलों में लगे 80 स्वयंसेवकों का काम विभाग धीरे-धीरे शुरू करने जा रहा है। जिससे पीआरडी स्वयंसेवकों के सामने एक बार फिर बेरोजगारी मुंह उठाये खड़ी होगी। जिसके लिए उन्हें एक बार फिर रोजगार के लिए निजी सेक्टर में हाथ-पांव मारने को मजबूर होना पड़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी 
जिला युवा कल्याण व पीआरडी अधिकारी डा मुकेश डिमरी का कहना है कि पीआरडी का गठन आपदा के तहत हुआ है। जिसमें स्थानीय लोगों को स्वयं सेवक के रूप में काम पर लगाकर 500 रूपये प्रतिदिन का मानदेय दिया जाता है। काम खत्म होने के बाद वापस लौटना होता है। भले ही नया काम आने पर फिर उन्हें तैनात किया जाता है, लेकिन स्थायी रोजगार के रूप में इसे नहीं देखा जा सकता है। स्वयंसेवकों को वेतन जिला प्लान मद से दिया जाता है। स्वयंसेवकों को नाम, पत्ता व दूरभाष नंबर विभाग के पास दर्ज होता है।