रुद्रप्रयागः सौगात भरा रहा डीएम के लिए गुरुवार का दिन

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मंगेश घिल्डियाल
ठेठ गढ़वाली अंदाज से पहचान बनाए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल को गुरुवार का दिन दोगुनी खुशियां लेकर आया। पहली खुशी उन्हें सुबह उठकर अपनी शादी की सालगिरह का मिला। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों के संदेशों का तांता लगा रहा, जबकि दोपहर बाद उनके चाहने वालों को उनके स्थानान्तरण की सूचना मिली तो उन्होंने डीएम को फोन करने के साथ ही सोशल मीडिया पर पुनः बधाई दी।
– सुबह शादी की सालगिरह की बधाई तो दोपहर बाद स्थानान्तरण की बधाइयों का लगा रहा तांता
– 23वें जिलाधिकारी के तौर पर मंगेश घिल्डियाल ने किया जिले का चहुंमुखी विकास
–  तीन साल में केदार यात्रा में आई बढ़ोतरी तो लोगों को मिला रोजगार 
17 मई, 2017 को रुद्रप्रयाग जिले के 23वें जिलाधिकारी के तौर पर मंगेश घिल्डियाल ने कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने तीन वर्ष तक रुद्रप्रयाग जिले में अपनी सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने केदारनाथ यात्रा का बेहतर संचालन करवाया तो दूसरी ओर युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। उनके कार्यकाल में हरेक व्यक्ति खुश नजर आया। ऐसे में उनके स्थानान्तरण पर हर व्यक्ति बधाई दे रहा है। आज जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल की शादी की सातवीं सालगिरह है। सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी उनके प्रसंशकों को लगते ही बधाइयों का तांता लग गया। सात वर्ष पूर्व 21 मई, 2013 में रुद्रप्रयाग के वर्तमान डीएम मंगेश घिल्डियाल की शादी ऊषा घिल्डियाल के साथ हुई थी। डीएम मंगेश घिल्डियाल और ऊषा घिल्डियाल का छः साल का बेटा श्रेयस घिल्डियाल है, जो कि रुद्रप्रयाग में ही अन्य बच्चों के साथ एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है।
प्राइमरी से सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश में चौथी रैंक का सफर तय करने वाले आईएएस मंगेश घिल्डियाल का जन्म पौड़ी जिले के धुमाकोट तहसील में पड़ने वाले डांडयू गांव में हुआ। उनकी माता गृहणी और पिता प्राइमरी स्कूल में अध्यापक हैं। आम पहाड़ी बच्चों की तरह ही मंगेश की प्राइमरी शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में हुई। माध्यमिक शिक्षा के लिए मंगेश गांव से पांच किमी दूर राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय पटोटिया जाते थे। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर से की और बीएससी राजकीय स्नातकोत्तर रामनगर से किया। बीएससी के बाद एमएससी फिजिक्स डीएसबी कैंपस नैनीताल कुमाऊं यूनिवर्सिटी से किया। उन्होंने एमएससी फिजिक्स से किया। गेट के एग्जाम में सेलेक्शन के बाद इंदौर से लेजर साइंस में एमटेक किया। फाइनल इयर 2006 में डीआरडीओ में साइंटिस्ट के रूप में तैनाती हो गई। इसके बाद तो फिर कदम आगे बढ़ते गये और जाॅब के साथ ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की।
मंगेश का पहली बार में 131वीं रैंक के साथ आईपीएस में सेलेक्शन हुआ, लेकिन ये उनकी मंजिल नहीं थी। वर्ष 2011 में सिविल सर्विसेज परीक्षा में देश में चौथी रैंक हासिल की। मंगेश चाहते तो आईएफएस बनकर विदेश सेवा में जा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपना कैडर उत्तराखंड ही चुना और पहाड़ के युवाओं के लिए एक रोल माॅडल बनने के साथ ही जनता के बीच भी अपने मिलनसार और सादगी भरे स्वभाव के कारण प्रदेश में जनता के सबसे चेहते नौकरशाह बन गये।