रिंगाल मैन राजेन्द्र का प्रयोग, रिंगाल से बनाया राज्य पक्षी मोनाल

0
335
रिंगाल

पहाड़ में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। रिंगाल मैन राजेन्द्र बड़वाल ने अपनी बेजोड़ हस्तशिल्प कला से रिंगाल के विभिन्न उत्पादों और पहाड़ की हस्तशिल्प कला को नयी पहचान और नयी ऊंचाई प्रदान की है।

चमोली, देहरादून से लेकर मुंबई तक रिंगाल मैन राजेन्द्र बड़वाल के बनाये गये उत्पादों के हर कोई मुरीद हैं। पिछले साल राजेन्द्र ने रिंगाल से उत्तराखंड के पारम्परिक वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ बनाकर एक नया अभिनव प्रयोग करके अपने हुनर का लोहा मनाया था। रिंगाल के ढोल दमाऊ के बाद रिंगाल मैन राजेन्द्र ने अपनी बेजोड़ हस्तशिल्प कला से राज्य पक्षी मोनाल बनाया है। रिंगाल के मोनाल को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित और हतप्रभ है। हर कोई रिंगाल मेन राजेन्द्र बड़वाल की तारीफ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सीमांत जनपद चमोली के दशोली ब्लाॅक के किरूली गांव निवासी राजेंद्र बड़वाल विगत 15 सालों से अपने पिताजी दरमानी बड़वाल के साथ मिलकर हस्तशिल्प का कार्य कर रहें हैं। उनके पिताजी पिछले 46 सालों से हस्तशिल्प का कार्य करते आ रहे हैं। राजेन्द्र पिछले पांच सालों से रिंगाल के परम्परागत उत्पादों के साथ साथ नये-नये प्रयोग कर इन्हें मॉडर्न लुक देकर नये डिजाइन तैयार कर रहे हैं। उनकी ओर से बनाई गयी रिंगाल की छंतोली, ढोल दमाऊ, हुडका, लैंप शेड, लालटेन, गैस, टोकरी, फूलदान, घोंसला, पेन होल्डर, फुलारी टोकरी, चाय ट्रे, नमकीन ट्रे, डस्टबिन, फूलदान, टोपी, वाटर बोतल, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, पशुपतिनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिरों के डिजायनों को लोगों ने बेहद पसंद किया और खरीदा। इससे राजेन्द्र को अच्छा खासा मुनाफा भी हुआ। राजेन्द्र बड़वाल की हस्तशिल्प के मुरीद उत्तराखंड में हीं नहीं बल्कि देश के विभिन्न प्रदेशों से लेकर विदेशों में बसे लोग भी हैं।

क्या है रिंगाल ?

रिंगाल बांस प्रजाति का पौधा है। इसे बौना बांस भी कहा जाता है। हालांकि बांस काफी मोटा होता है। रिंगाल उसकी तुलना में बहुत बारीक होता है।