हेमकुंड साहिब में हेलीपैड निर्माण का विरोध

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    हेमकुंड

    हेमकुंड साहिब-लोकपाल से करीब एक किमी पहले “सामलांगड” तोक में हेलीपैड का निर्माण शुरू हो गया है, जिसे लेकर विरोध भी शुरू हो गया था। अब ग्राम पंचायत भ्यूंडार,ईडीसी भ्यूंडार और वन पंचायत पुलना/भ्यूंडार ने इस हेलीपैड निर्माण पर आपत्ति दर्ज करते हुए निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है।

    नन्दा देवी बायोस्फियर रिजर्व जोन में हेलीपैड निर्माण पर भ्यूंडार घाटी के ग्रामीणों का कहना है कि जहां हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है, वह क्षेत्र न केवल ब्रह्मकमल पुष्प से पटा रहता है बल्कि यहां, ब्लू पॉपी, मासी, टगर, हत्थाजड़ी सहित अनेक किस्म के पुष्प व दुर्लभ जड़ी बूटी विद्यमान हैं।

    यही नहीं निर्माणाधीन स्थल के समीप ही कस्तूरा मृग, हिम तेंदुआ सहित अनेक वन्य प्राणियों का प्राकृतिक निवास भी हैं। यदि इस स्थान पर हेलीपैड का निर्माण होता है तो इससे निश्चित ही दुर्लभ वन्यजीवों के साथ ही बेशकीमती जड़ी-बूटियां भी विलुप्त होगी और प्रकृति पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा।

    भ्यूंडार घाटी के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, डीएफओ नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क, एसडीएम और विधायक बद्रीनाथ को पत्र देकर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल हेलीपैड निर्माण कार्य बन्द कराने की मांग की है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नब्बे के दशक में आपदा प्रबंधन के नाम पर हेमकुंड साहिब में हेलीपैड का निर्माण किया गया है।

    जिलाधिकारी को भेजे इस पत्र पर ग्राम प्रधान शिवराज सिंह चौहान, ईडीसी अध्यक्ष चंद्रशेखर चौहान,सरपंच संजय चौहान व ब्यापार मंडल घांघरिया के अध्यक्ष जयदीप चौहान के हस्ताक्षर हैं।

    हेमकुंड साहिब के समीप बफर जोन में हेलीपैड निर्माण से पर्यावरण और वन्य जीवों का जो नुकसान होगा वो तो होगा ही, लेकिन इसका दूसरा पहलू रोजगार से भी जुड़ा है। वर्तमान में घांघरिया से एक किमी पहले कांजीला में हेलीपैड है, जहां गोविंदघाट से यात्री हेलीकॉप्टर से आवाजाही करते हैं और घांघरिया के स्थानीय व्यवसायियों को भी इसका लाभ मिलता है।

    अब यदि घांघरिया से 5 किमी की दूरी पर सामलांगड में हेलीपैड का निर्माण होता है तो आने वाले समय में निश्चित ही यात्रियों की आवाजाही भी उसी स्थान से होगी। एक ओर गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब-लोकपाल तक रोप वे का निर्माण तो दूसरी ओर हेमकुंड साहिब में हेलीपैड का निर्माण इससे निश्चित ही भ्यूंडार घाटी के सैकड़ो परिवार प्रभावित होंगें।

    नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क के उप वन संरक्षक नंदा बल्लभ शर्मा ने बताया कि भ्यूंडार घाटी में आपदा के बाद पुनर्निर्माण के अनेक प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे, उनमें हेलीपैड का प्रस्ताव भी था। उन्होंने कहा कि अन्य प्रस्ताव पूर्व में ही स्वीकृत हो चुके थे जबकि हेलीपैड निर्माण के प्रस्ताव की स्वीकृति गत अप्रैल माह में मिल चुकी थी।