साहित्य, लेखन के क्षेत्र में देशभर में उत्तराखंड ने बनाई पहचान : राज्यपाल

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राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि साहित्य,लेखन,कला व संस्कृति के क्षेत्र में देशभर में उत्तराखंड ने पहचान बनाई है। आने वाले समय में यह प्रदेश साहित्य और लेखन का केंद्र बनकर उभरेगा। विशेषकर युवा पीढ़ी में किताबें पढ़ने की प्रवृत्ति को बढ़ाने की जरूरत है।

शनिवार को मधुबन होटल में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने वैली ऑफ वर्ड्स, इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के 6वें संस्करण का शुभारंभ के मौके पर यह बातें कहीं। राज्यपाल ने हिन्दी की कहानियों पर आधारित पुस्तक ‘तद्भव’, 40 किताबों की समीक्षा वाली पुस्तक समीक्षा और फेस्टिवल के प्रथम दिन के कवर का विमोचन किया। तीन दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल में देश-विदेश के साहित्यकार प्रतिभाग कर रहे हैं। इस आयोजन में राज्य सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग ने भी हिस्सेदारी की है और फेस्टिवल के माध्यम से देश और दुनिया में उत्तराखंड की कला एवं संस्कृति को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि हमारा साहित्य हमारी समृद्ध धरोहर है और हमारे राष्ट्र और समाज के चिंतन का प्रतिबिम्ब है। आज के समय में हमारे बच्चों और युवाओं को साहित्य के प्रति सजग और सक्रिय रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि साहित्य के माध्यम से हमारी राष्ट्रीय विरासत, इतिहास, धरोहर और राष्ट्रहित का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाना जरूरी है।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और इंटरनेट ने सूचनाओं को सर्वसुलभ तो किया है, लेकिन लोगों को किताबों से दूर भी किया है। उन्होंने कहा कि विशेषकर युवा पीढ़ी में किताबें पढ़ने की प्रवृत्ति बहुत कम हो गयी है जिस पर उन्हें ध्यान देने की जरूरत है।

इस तरह के आयोजनों से युवाओं में किताबों के प्रति रुचि और उनके लिए मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के केंद्र के रूप में विख्यात देहरादून और उत्तराखंड, आने वाले समय में साहित्य एवं लेखन का केंद्र बनकर उभरेगा। पिछले कुछ समय में दून में साहित्य, लेखन, कला एवं संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों के आयोजन में बढ़ोतरी हुई है और देशभर में उत्तराखंड ने पहचान बनाई है। यहां अनेक साहित्यकार और कलाविद् हुए हैं जिसका लाभ हमें उठाने की जरूरत है।

राज्यपाल ने कहा कि इस फेस्टिवल में युवाओं को उपयोगी चर्चा सत्र और साहित्य उपलब्ध कराना आयोजकों की दूरदर्शिता और रचनात्मकता को दर्शाता है। हमारे बच्चों, युवाओं के लिए साहित्य और कला का रचनात्मक वातावरण तैयार करना सराहनीय पहल है।

राज्यपाल ने फेस्टिवल में विभिन्न सहयोगी संस्थाओं और सरकारी विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। फेस्टिवल के शुभारंभ के अवसर पर वैली आफ वर्ड्स के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने फेस्टिवल की विस्तृत जानकारी दी।

इस कार्यक्रम में पोस्टमास्टर जनरल अमित खर्कवाल,मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड भास्कर पंत,निदेशक संस्कृति बीना भट्ट,वैली ऑफ वर्ड्स की चेयरमेन रश्मि चोपड़ा, राजेन्द्र डोबाल,ज्योति धवन,अनूप नौटियाल सहित फेस्टिवल में आए अनेक लेखक, कवि, चिंतक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।