ई बैंकिंग को बढ़ावा देगी सरकार; पर क्या हम हैं तैयार कैशलेस इकाॅनमी बनने को?

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नोटबंदी के चलते लोगों को हो रही परेशानी से बचने के लिये राज्य सरकार ने ई-बैंकिग को बढ़ावा देने की तैयारी कर ली है। इसके लिये मुख्य सचिव ने सोमवार को सभी जिलाअधिकारियों को ई-बैंकिग और उस से जुड़ी सेवाओं के बारे में लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने  प्रदेशभर के जिलाधिकारियों से कहा कि भारत सरकार तथा नीति आयोग के निर्देशानुसार बदलते दौर में देशभर के साथ ही प्रदेश में भी ई-बैंकिग लेन-देन प्रणाली प्रभावी कर दी गयी है। इसका प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों को ई-बैंकिग के माध्यम से जोडना है। उन्होनें कहा कि

  • ई-बैंकिग लेन-देन पर कोई भी रोक नहीं है।
  • कोई भी व्यक्ति आरटीजीएस, एनईएफटी, आईएमपीएस, पेटीएम, मोबाइल बैंकिग आदि के जरिए पैसे का लेन-देन कर सकता है।
  • किसी भी खाते के संचालन के लिए आधार नम्बर लिंक होना जरूरी है।
  • अभियान चलाकर सभी जिलाधिकारी विभिन्न बैंकों से समन्वय करते हुए शत-प्रतिशत खाताधारकों के आधार लिंक करायें।

उन्होनें कहा कि अब डिजीटल पैमेन्ट का समय आ गया है। इसके लिए प्री-पेड कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड को बढ़ावा दिया जाये साथ ही इसकी जानकारी विभिन्न शिविरों के माध्यम से लोगों को दी जाये। जागरूकता शिविरों के आयोजन के लिये बैंक अधिकारी एवं उत्तराखण्ड के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का सहयोग लिया जाए। डिजीटल पैमेन्ट की प्रक्रिया नीति आयोग की वेबसाईट से प्राप्त की जा सकती है। नीति आयोग की मंशा के अनुसार कैशलैस ट्रांजेक्शन होना है।

किसानों की सुवाधा के लिये किसानों को पैक्स में अंकित खातों को जिला काॅपरेटिव बैंक खाते खुलवाकर उनके रूपे कार्ड बनाने एवं उसके वितरण को भी अभियान के तहत चलाये जायेंगे, ताकि किसानों द्वारा डेबिट कार्ड के माध्यम से भी नकदी का आदान-प्रदान किया जा सकें।

इन सब कोशिशों से लोगों को राहत पहुंचाने की बात तो हो रही है लेकिन यहां कुछ मूल सवाल हैं जिनका जवाब तलाशना राज्य और देश को कैशलेस इकाॅनमी बनाने के लिये जरूरी है:

  • इन सभी सेवाओं के सुचारू रूप से चलने के लिये दुरुस्त आई टी सिस्टम होना बेहद जरूरी है। मौजूदा समय में 3जी और 4 जी जैसी सुविधाऐं शुरू तो कर दी गई हैं लेकिन अबी ये बड़े शहरों में सही तरह से स्थापित नहीं हो पाई हैं।
  • ज्यादातर कार्ड स्वाईपिंग मशीनें बिजली से चलती हैं। ऐसे में जिन इलाकों में बिजली की किल्लत है वहां किस तरह इनके उपयोग को प्रचलन में लाया जायेगा
  • दूर दराज के इलाकों और अशिक्षित लोगों को डिजिटल प्लेटफार्म चलाने की जानकारी देना चुनौती भरा रहेगा।
  • क्योंकि किसी भी डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर आपकी सारी वित्तिय जानकारी रहेगी इसलिये इसे अति सुरक्षित रखने की जरूरत है। लेकिन क्या साइबर क्राइम और हैकिंग के इस दौर में हमारे पास ये सुरक्षा ढांचा मौजूद है।

इसमें कोई दो राय नही है कि कैशलेस इकाॅनमी होना आज के समय की मांग है और दुनिया के काफी देश इस तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये ये जरूरी है कि इस राह में हमारे समने कौनसी चुनौतियां हैं और उन से कैसे निपटा जायेगा।