EXCLUSIVE: उत्तराखंड के परीक्षित मचा रहे वेबसीरीज की दुनिया में धमाल

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आजकल का दौर डिजीटल दौर है और हर कोई मनोरंजन के लिए डिजीटल मीडिया का रुख कर रहा है। डिजीटल मीडिया के इस दौर में टीवीएफ, दि-टाईमलाईर्नस, स्क्रीन पत्ती और बहुत से अलग-अलग चैनल हमारा मनोरंजन कर रहे हैं।

आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही युवा की है जो एक राईटर होने के साथ-साथ कलाकार भी है। हल्द्वानी के परीक्षित जोशी ने अलग-अलग वेब सीरीज में काम किया है और दर्शक उनके काम को खासा सराह रहे हैं।

साल 2016 से अपने काम से लोगों का मनोरंजन करने वाले परिक्षित यू तो मुंबई में रहते हैं लेकिन अपने राज्य उत्तराखंड से वह कभी भी दूर नहीं हुए। साल 2016 में हजारों लोगों में से केवल 20 लोगों को मौका मिला था टीवीएफ के दि राईटर क्लब का हिस्सा बनने का और उन 20 में से एक परीक्षित भी है।

परीक्षित ने ज्यादातर दि स्क्रीनपत्ती के साथ काम किया है। हालांकि उन्होंने, द-टाइमलाइनर्स, TVF Qtiyapa, गर्लियापा के साथ भी कोलेबोरेट किया है, लेकिन शुरु से परीक्षित टीवीएफ नेटवर्क के साथ ज्यादा जुड़े रहे हैं।

अपने इस सफर के बारे में और बात करते हुए परीक्षित हमे बताते हैं कि खैर, अभिनय और मनोरंजन के क्षेत्र में मै पहले से दिलचस्पी रखता था। 2011 में जब मैं 11वीं कक्षा में था तक हमारे पास स्कूल में एक ड्रामा वर्कशॉप थी जिसने मुझे थिएटर और नाटक से परिचित कराया। फिर मैंने 2013 में कॉलेज थिएटर ज्वाइन किया और इसके बाद डेढ़ साल तक मैंने स्टैनिस्लावस्की पद्धति सीखी, इन सबके बाद आज भी मैं हर रोज कुछ नया सीखता हूं।

आपको बतादें कि टीवीएफ में एक लेखक के रूप में ज्वाइन करने के बाद परीक्षित ने निर्देशक के रूप में भी काम करना शुरू किया। कुछ समय सिनेमा को समझने के बाद परीक्षित एक निर्देशक और लेखक के रुप में काम करना चाहते है हालांकि एक्टिंग के क्षेत्र में भी परीक्षित का कोई जवाब नहीं है।

परीक्षित कहते हैं कि, मैंने स्क्रीनपत्ती के लिए कुछ स्केच वीडियो लिखे और को-राइट भी किया हैं। मैं स्क्रीनपत्ती की दो वेबसीरीज ZEROES और WEEKENDS के लिए को-राइटर भी रहा हूं। मैंने द स्क्रीनपत्ती, द टाइमलाइनर्स और गर्लियापा के लिए कुछ वीडियो भी निर्देशित किए हैं।इन सबके अलावा मैं कविता, शॉर्ट स्टोरी और शॉर्ट टू शॉर्ट स्टोरीज लिखने का भी प्रयास करता हूँ।

देश के अलग-अलग राज्यों से शिक्षा पूरी करने की वजह से परीक्षित को काफी एक्सपोज़र मिला जिसकी वजह से उन्हें कम चुनौतियों का सामना पड़ा।

परीक्षित कहते हैं कि मैंने अधिकांश शिक्षा फरीदाबाद से पूरी करने के बाद वह राजस्थान चले गए, फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया, इसलिए मुझे लगता है जो सीधे उत्तराखंड से बाहर जाकर काम ढ़ूढ़ते हैं उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, मेरे लिए शुक्र है कि यह सब ठीक रहा।

अल्मोड़ा के छोटे से गांव स्याल्दे से संबंध रखने वाले परीक्षित आज भी काम से समय निकालकर अपने गांव और अपनी नानी के घर बागेश्वर जाना नहीं भूलते।

परीक्षित इस वक्त सभी युवाओं को फोन के माध्यम से उनके दिलों में अपने लिए जगह बना चुके हैं, इसके बारे में वह हमे कहते हैं कि यह एक खूबसूरत यात्रा रही है, मैं खुद को भाग्यशाली महसूस करता हूं जिसने कम समय में ऐसा काम किया है। मुझे लगता है कि मेरी जड़ें मुझे जमीन से जुड़े रहने में मदद करती है और मैंने अपनी कार्यशैली और अपनी जीवनशैली में इस सादगी की राह पर चलता हूं। मैं वफादारी, ईमानदारी, शांति, दया और सादगी जैसे गुणों को महत्व देता हूं, जो मुझे लगता है कि मैं मुझे अपनी जड़ों से मिला है।

आने वाले समय में परीक्षित कुछ और वेबसीरीज में नज़र आ सकते हैं जो दर्शकों के लिए भी सरप्राइज है। अगर आप इस उत्तराखंडी को फॉलो करना चाहते हैं तो उनके इंस्टाग्राम Parikshit Joshi पर क्लिक करें।