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चुनाव आचार संहिता को लेकर मुख्य सचिव ने ली उच्च स्तरीय बैठक

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मुख्य सचिव एस.रामास्वामी की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में अधिकारियों के साथ विधानसभा चुनावों की तैयारियों के संबंध में बैठक हुई। बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती राधा रतूड़ी ने सभी अधिकारियों को आदर्श आचार संहिता और उसके अनुपालन हेतु भारत के निर्वाचन आयोग के विभिन्न दिशा-निर्देशों के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया। 

बैठक में राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि

  • मंत्रीगणों एवं महानुभावों को उपलब्ध करायी गए वाहनों से लाल बत्तियों को तत्काल हटा दिया जाय।
  • इस बात का ध्यान रखा जाए कि मंत्रीगणों द्वारा राजकीय वाहनों का उपयोग केवल शासकीय कार्य हेतु एवं राजकीय आवास से राजकीय कार्यालय तक ही प्रयोग किया जा रहा हो।
  • राजकीय अतिथि गृहों के प्रयोग हेतु सभी के लिए सामान्य एवं बराबर व्यवस्था की जाए।
  • दायित्वधारियों को प्रदान की जा रही सुविधाओं की निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अधीन तत्काल समीक्षा करते हुए जिन सुविधाओं को हटाना हो उन्हें हटाया जाय।
  • यदि रिहायशी बस्तियों में अतिक्रमण हटाए जाने के कार्य से लोगों का विस्थापन होता हो तो इसे तुरन्त रोक दिया जाए क्योंकि इससे वोटरों का मतदान का अधिकार प्रभावित होता है।
  • विभागों को निर्देश दिये कि विभागों में किसी भी प्रकार का स्थानान्तरण ना किया जाय और यदि किसी का स्थानान्तरण हुआ भी हो तो उसे निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक कार्यमुक्त न किया जाय।
  • वन, वित्त एवं अन्य कई विभागों द्वारा निर्वाचन ड्यूटी से छूट की मांग को अस्वीकार करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि संबंधित जिलाधिकारी द्वारा निर्वाचन ड्यूटी से संबंधित अंतिम फैसला लिया जायेगा। किसी भी विभाग को पूर्ण रूप से निर्वाचन ड्यूटी में छूट नहीं प्रदान की जायेगी। ग्राम्य विकास विभाग को निर्देश दिये गये कि सांसद एवं विधायक निधि से कोई नया फण्ड अवमुक्त न किया जाय और नये कार्य स्वीकृत न किये जाय।
  • विभागों को यह भी निर्देश दिये कि कोई भी विभाग 15 फरवरी, 2017 तक किसी भी प्रकार के विज्ञापन न प्रसारित करें जिससे मतदाओं को प्रभावित किया जा सकता हो।
  • अत्याधिक आवश्यकता होने पर केवल सूचनात्मक विज्ञापन ही प्रकाशित हो सकते हैं परन्तु इनमें किसी भी प्रकार की उपलब्धियों का प्रचार नहीं हो सकता है।
  • बताया गया कि निर्माणकारी विभागों द्वारा नये शुरू किये जाने वाले कार्यों के निविदा विज्ञापनों पर भी 15 फरवरी तक रोक रहेगी।
  • गृह विभाग को निर्देश दिया गया कि यदि पैरोल के किसी प्रकरण पर निर्णय लेना आवश्यक है तो उसे निर्वाचन कार्यालय को संदर्भित किया जाय।
  • ऊर्जा विभाग सहित अन्य विभागों के अधीन निगमों इत्यादि में प्रबन्ध निदेशक आदि पदों को भरने की कार्यवाही न की जाय।
  • यदि कोई प्रक्रिया चल रही हो तो उसका परिणाम निर्वाचन के बाद ही घोषित किया जाय। शिक्षा सहित सभी विभागों को निर्देश दिया गया कि वे अवकाश पर गये कार्मिकों का अवकाश निरस्त करते हुए उन्हें मुख्यालय पर वापस बुलाने का निर्देश दें जिससे उनकी निर्वाचन ट्रेनिंग करायी जा सके।
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विभागीय सचिवों को निर्देश दिये कि विधानसभा द्वारा पारित हो चुके बजट से संबंधित फाईलें निर्वाचन कार्यालय को किसी पूर्वानुमति के लिये भेजने की आवश्यकता नहीं है और विभागीय अधिकारी इस संबंध में नियमानुसार स्वयं कार्यवाही करने हेतु सक्षम है।

कांग्रेस में बनी 63 सीटों पर एक राय; कुछ सीटों के पेंच अभी भी अटके

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आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस और अन्य दलों में मंथनों का दौर चल रहे हैं। सभी नेता अपने अपने उम्मीदवारों को टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। टिकट बंटवारे का काम वैसे ही प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के लिये चुनौती भरा होता है। कांग्रेस के लिये और भी चुनौती पूर्ण इसलिये हो गया है क्योंकि लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच आॅल इज़ नाॅट वेल के संकेत आते रहे हैं। दोनों ही नेताओं और उनके केमों से हो रही लगातार बयानबाज़ी इन खबरों को और बल दे रही है।

इस बीच प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के मुताबिक पार्टी ने 63 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिये हैं। इन नामों में काफी चेहरें तो ऐसे हैं जो अपनी पारंपरागत सीटों पर ही लड़ेंगे और उनके नामों को फाइनल करने में पार्टी आलाकमान को कोई खास दिक्कत नहीं पेश आई होगी। मसला उन सीटों पर अटका हुआ है जो

  • पार्टी छोड़ कर गये नौ विधायकों ने खाली की हैं
  • राज्य के बड़े नेता जो अपने परिजनों को टिकट दिलाने की जुगत में लगे हुए हैं
  • मुख्यमंत्री और उनके खास लोगों के लिये सीटों का चुनाव
  • प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की सीट

अटकलों का बाज़ार तमामतरह की लिस्टों और नामों से भरा हुआ है लेकिन हम आधिकारिक तौर पर दोनों बड़ी राजनीतिक दलों की तरफ से आये नामों को ही अपने पाठकों तक पहुंचायेंगे।

इस सबके बीच प्रदेश की कांग्रेसी चुनावी रणनीति में रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम भी राज्य में सक्रिय हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले ही प्रशांत किशोर की टीमें हर ज़िलें में सक्रिय ह गई हैं। ये देखना दिलचस्प होगा कि अपनी प्लैनिंग से चुनावों की दशा दिशा बदलने की मिसाल दे चुके प्रशांत किशोर उत्तराखंड में कांग्रेस को विनिंग रन दिलावे में कितने कारगर साबित हो सकेंगे।

समाजवादी दंगल में कूदे नरायण दत्त तिवारी; मुलायम को लिखी चिट्ठी

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राजनीति और परिवारवाद का पुराना साथ रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चल रहे समाजवादी दंगल में भिड़ रहे पिता पुत्र के बीच एक और पिता युद्ध विराम कराने के लिये सामने आ गये हैं। वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने समाजवादी विवाद पर मुलायम सिंह यादव को पत्र लिख डाला है। इस पत्र के माध्म से तिवारी ने मुलायम के कहा है कि ” मैने सदा आपको अपना छोटा भाई और अखिलेश को अपना भतीजा माना है। और इसी लिये में आपसे निवेदन करता हूं कि पार्टी की कमान आप अखिेलेश के युवा कंधों पर डाल दें’। तिवारी के मुताबिक अखिलेश एक मंझे हुए युवा राजनेता के रूप में अपने को स्थापित करने में कामयाब हुए हैं और ऐसै में ये सही वक्त है कि राज्य के विकास के लिये पार्टी की कमान उन्हें दे दी जाये। तिवारी ने यहां ये भी साफ किया कि राजनीति के इस जटिल सफर में अखिलेश को मुलायम के आशीर्वाद की ज़रूरत रहेगी।

तिवारी के इस पत्र से अखिलेश खेमें में तो कुछ उत्साह आयेगा क्योंकि न केवल नारायण दत्त तिवरी आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता हैं साथ ही अखिलेश सरकार ने भी अपने कार्यकाल में तिवारी को खासी तवज्जो दी थी। लेकिन इस समाजवादी संग्राम में अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव और अमर सिंह को तिवारी का ये सुझाव कितना पसंद आयेगा इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नही है।

तिवारी का मुलायम को लिखा पत्र

तिवारी ने पत्र में ये भी कहा है कि खुद अपने पुत्र शेखर तिवारी के लिये राजनीतिक संभावनाओं की तलाश करने के चलते वो लखनऊ नहीं आ रहे हैं और इसिलिये पत्र के माध्यम से अपनी बात मुलायम तक पहुंचा रहे हैं।

इसे राजनीतिक विडंबना ही कहेंगे कि एक तरफ पार्टी और राजनीतिक विरासत पाने के लिये परिवार और बाप बेटे में घमासान मचा हुआ है वहीं दूसरी तरफ एक पिता अपनी राजनीतिक विरासत को अपने पुत्र के हवाले करवाने के लिये इन दिनों ऐड़ी चोटी का दम लगा रहा है।

रावत पर बीजेपी का पलटवार कहा जनता मांग रही है रावत का “रिपोर्ट कार्ड”

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रविवार को भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ देवेन्द्र भसीन ने कहा कि उत्तराखंड की जनता को कांग्रेस सरकार से उसका केन्द्र से मांग पत्र नहीं बल्कि उसके अपने काम का रिपोर्ट कार्ड चाहिए। उन्होंने कांग्रेस हाई कमान द्वारा उत्तराखंड में प्रोफेशनल रणनीतिकार भेजने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे साफ़ हो गया है कि कांग्रेस के केंन्द्रीय नेताओं को राज्य में कांग्रेस की खस्ता हालत होने का पता लग गया है और वे उत्तराखंड के नेताओं पर भरोसा भी नहीं कर रहे।

डॉ भसीन ने कहा कि अब जब राज्य विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और चुनाव के लिए पांच सप्ताह ही शेष रह गए है ऐसे में राज्य की जनता को मुख्यमंत्री या कांग्रेस नेताओं से उनके द्वारा केंद्र से की जा रही मांगो का विवरण नहीं चाहिये। बल्कि जनता कांग्रेस नेताओं से यह जानना चाहती है कि यदि उनकी सरकार ने राज्य के विकास के लिए कुछ किया है तो वे उसका रिपोर्ट कार्ड दें।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता इस बात को अच्छी तरह जानती है कि पहले श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने उत्तराखंड को बहुत कुछ दिया और अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की भाजपा सरकार उत्तराखंड को एक के बाद एक बड़ी विकास योजनायें दे रही है। लेकिन राज्य की कांग्रेस सरकार केंद्र की मदद का सही उपयोग ही नहीं करना चाहती।

डॉ भसीन ने कहा कि चुनाव के समय उत्तराखंड की जनता चाहती है कि यदि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने प्रदेश का कुछ भी विकास किया है तो मुख्यमंत्री उसका विवरण दे। पर सच यह है कि कांग्रेस के रिपोर्ट कार्ड में केवल घोटाले, भ्रष्टाचार, लूट , कमीशन खोरी के कारनामे ही हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास विकास के नाम पर बताने के लिए कुछ भी नहीं है।

मीडिया प्रभारी ने कहा कि अब कांग्रेस हाई कमान ने एक प्रोफेशनल रणनीतिकार को उत्तराखंड भेजा है। इससे साफ़ है कि कांग्रेस के केन्द्रीय नेताओं को यह साफ़ हो गया है की उत्तराखंड में कांग्रेस की हालत ख़राब है और उनका उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं से भरोसा भी उठ गया है । ऐसे में उन्होंने प्रोफेशनल व्यक्ति को उत्तराखंड भेजा है कि शायद वे कुछ कर सके। पर सच्चाई यह है कि श्री हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस की काठ की हांड़ी एक बार चूल्हे पर चढ़ चुकी है इसलिये उसके दोबारा चूल्हे पर चढ़ने की कोई भी गुंजाईश नहीं है।

हरीश रावत ने फिर साधा बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना

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विधानसभा चुनाव उत्तराखंड में हैं लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे हरीश रावत ने इसे उनके और केंद्र सरकार और खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की लड़ाई बना दिया है। रविवार को देहरादून में पार्टी दफ्तर में पत्रकारों से बात करते हुए रावत ने केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी। रावत ने कहा कि केंद्र सरकार हर संभव कोशिश करती रही राज्य में उनकी सरकार के लिये मुश्किलें खड़ी करने की और अब भी वो इसे जारी रखे हुए है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्रकारों से बातचीत में भाजपा पर साधा निशाना। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने दो पूर्व विधायकों को वोट कटवाने के लिए प्रायोजित प्रत्याशी उतरने के काम में लगाया है। पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि इन विधायकों हर प्रत्याशी उतारने की एवज में एक से पांच करोड़ रुपये देने का अधिकार दिया गया है। नामो का खुलासा करने से इन्कार करते हुए उन्होंने इशारे कहा कि ये विधायक पुराने कांग्रेसी भी हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अचार संहिता उल्लंघन के मामले में भाजपा निर्वाचन आयोग का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने कृत्य पर माफी मांगनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने केंद्र पर फिर से उत्तराखंड की अनदेखी का आरोप लगाते हुए इसके कई उदाहरण दिए। सरकार और संगठन के तालमेल के संबंध में उन्होंने कहा कि किशोर उपाध्याय चवनप्राश हैं। जहां किशोर हैं वही मैं भी हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट की घोषणा 14 जनवरी के बाद होने की संभावना है।

पहाड़ों पर बर्फबारी और ठंड ने छुड़ा दिये नेताओं के पसीने

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राज्य के सभी इलाकों में जमकर बर्फबारी हो रही है

पिछले कुछ दिनों से राज्य के अलग अलग हिस्सों में हो रही बर्फबारी ने जहां मौसम को सुहावना बना दिया और बड़ी तादाद में पर्यटकों का रुख अलग अलग शहरों की तरफ हो रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग और पर्यटन से जुड़े व्यापारियों के चेहरे तो खिले हुए हैं लेकिन मौसम के बदले मिजाज़ ने राज्य के नेताओं के माथे पर परेशानी की लकीरें डाल दी हैं।

उत्तराखंड विधानसभा के लिये 15 फरवरी को वोट डलने हैं और मौसम विभाग की माने तो आने वाले दिनों में राज्य में और खासतौक पर पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ेगी। ऐसे में नेताओं को चिंत्ता है कि न कतेवल लोगों के बीच पहुंचना एक चुनौती हो सकती है बल्कि ठंड का सीधा असर वोटर टर्न आउट पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि “हमने पहले ही चुनाव आयोग के सामने बात रखी थी कि राज्य में मतदान की तारीख फरवरी आखिर या कम से कम 15 फरवरी के बाद की हो। राज्य की भौगोलिक हालातों को देखते हुए ये ज़रूरी था कि मतदान की तारीख ऐसी हो जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग वोट डालने आ सके। इसके अलावा ऐसी विषम परिस्थितियों में चुनाव की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाता है।”

वहीं प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने इसे कांग्रेस की हार से बचने की कवयद करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ता श्री भसीन ने कहा कि ” कांग्रेस को अपनी हार सामने दिख रही है और इससे बचने के लिये वो इसका ठीकरा चुनावों की तारीख पर डालना चाहकी है। राज्य में मौसम पल पल बदलता है और ऐसे में मतदान की तारीख अबी काफी दूर है”

गौरतलब है कि 2012 में भी विधानसभा चुनावों के लिये मतदान 20 जनवरी को हुआ था और इसमें करीब 66 प्रतिशत वोटर टर्नआउट रहा।इस बार मतदान फरवरी मे है और15 फरवरी को मतदान होने के बाद तकरीबन एक महीने तक वोट मशीनों में बंद रहेंगे। इसका फायदा किसको मिलता है ये देखना दिलचस्प रहेगा।

उत्तराखंड में कांग्रेस प्रचार की कमान संभालेंगे प्रशांत किशोर

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2014 आम चुनावों में बीजेपी और खासतौर पर नरेंद्र मोदी की सफलता के प्रमुख रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब 2017 उत्तराखंड चुनावों में हरीश रावत और कांग्रेस पार्टी की नैया पार लगा सकते हैं। कांग्रेस पार्टी पहले ही उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनावों के लिये प्रशांत किशोर की सेवाऐं ले रही है। ऐसे में सूत्रों के मुताबिक अब पार्टी किशोर की टीम की मदद उत्तराखंड में भी पार्टी के लिये जीत की रणनीति बनाने के लिये ले रही है।

प्रशांत किशोर शुरू से ही चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में हिस्सा ले रहे हैं। विधानसभा चुनावों के लिये उम्मीदवारों के चयन में भी किशोर की खासी भूमिका बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर संभावित उम्मीदवारों को जीतने की कूबत रखने की तर्ज़ पर परख रहे हैं। पार्टी उम्मीदवारों के तय होने के बाद किशोर और उनकी टीम प्रचार के तरीकों और माध्यमों पर भी कैंपेन कमेटी और उम्मीदवारों के साथ मिलकर काम करेंगे। इस मामले पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि “हां प्रशांत किशोर उत्तराकंड में भी कांग्रेस के चुनाव प्रचार को देखेंगे और उनके आने से हमारे प्रचार को और धार ही मिलेगी। प्रदेश कांग्रेस पार्टी और नेताओं का उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा”

हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में भी नितीश कुमार को जीत दिलाने में प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने अहं भूमिका निभाई थी। और इसके लिये उन्हें मोटी फीस भी दी गई थी। और तो और बिहार सरकार ने तो चुनावों में जीत के बाद प्रशांत किशोर को सरकार में सलाहकार के रूप में भी नियुक्त कर दिया है। हांलाकि कांग्रेस के रणनीतिकार का काम हाथ में लेते ही प्रशांत किशोर को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे वो उत्तर प्रदेश में नेताओं को लेकर उनके काम करने के तरीके हो या फिर पंजाब में कांग्रेसी सीएम उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनका सीधा टकराव। प्रशांत किशोर के काम करने के तरीकों से दोनो ही प्रदेशों के नेता लगातार पार्टी आलाकमान से अपनी नाराज़गी दर्ज कराते रहे हैं। लेकिन लोकसभा चुनावों में करारी हार और उसके बाद देशभर में लगातार कम होते अपने जनाधार को वापस पाने के लिये शायद कांग्रेस आलाकामान प्रशांत किशोर को मौका देने को तैयार है। शायद इसिलिये उत्तराखंड में भी उन्हें हाथ का साथ मिल रहा है। अब ये हाथ का साथ जीत का सफर तय कर पाता है या नहीं ये तो 11 मार्च को ही पता चल पायेगा।

हरिद्वार में चुनावी तैयारियों की समीक्षा बैठक

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बैठक की अध्यक्षता करते गढ़वाल आयुक्त विनोद शर्मा

जनपद हरीद्वार में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने सभी अधिकारियों को कमर कसने के निर्देश दिये गये हैं। आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश गढ़वाल आयुक्त विनोद शर्मा ने कलक्ट्रेेट सभागार रोशनाबाद में अधिकारियों की निर्वाचन की बैठक लेते हुए दियेे। आयुक्त ने कहा कि “पोस्टर, बैनर, झण्डे साफ किये जाएं तथा झण्डे के साथ डण्डे भी साफ किये जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जायेगी जिससे निर्वाचन प्रक्रिया बाधित होती हो। साम्प्रदायिकता व कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती से निपटा जायेगा। उन्होंने कहा कि आर.ओ. उम्मीद्वारों के साथ बैठक करें एवं सम्पर्क में रहें। उनकी समस्याओं का भी तुरन्त समाधान किया जाए।”

शर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित कर लें कि

  • सरकारी मशीनरी का किसी भी प्रकार दुरूपयोग न हो।
  • यह सुनिश्चिति कर लिया जाए कि समस्त सरकारी एवं सार्वजनिक स्थलों से सभी प्रकार के सरकारी विज्ञापन हटा दिये जाएं।
  • उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निर्वाचन आयोग की गाईडलाईन की सभी जानकारियों को राजनैतिक दलों के साथ साझा किया जाए।
  • यदि कोई निर्वाचन सम्बन्धी कोई भी जानकारी लेना चाहे तो उनकी समस्याओं का शीघ्रता से समाधान किया जाए।

डी.आई.जी पुष्पक ज्योति ने कहा कि

  • धार्मिक स्थलों पर प्रचार करना प्रतिबंधित है ।
  • मतदाता को रिश्वत देना, डराना, धमकाना, भ्रष्ट आचरण माना जायेगा। ऐसा करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी।
  • राजनैतिक दलों एवं प्रत्याशियों को रैली, बैठक आदि के लिए सम्बन्धित आर.ओ. से पहले अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा हमें आम जनता को विश्वास दिलाना होगा कि हम पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहे हैं। पुष्पक ज्योति ने कहा कि वाट्सस एप ग्रुप से संवाद कायम करें तथा क्या करना है और क्या नहीं करना है के सम्बन्ध में सी.डी. तैयार कर इसका उपयोग प्रशिक्षण के लिए किया जाए। जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ एवं एस.एस.पी. राजीव स्वरूप ने निर्वाचन प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डाॅ मेहरबान सिंह, बिष्ट, अपर जिलाधिकारी प्रशासन डाॅ अभिषेक त्रिपाठी, एस. पी. सिटी प्रमेन्द्र डोभाल, एस. पी. ग्रामीण मणिकान्त मिश्र, समस्त आर.ओ. एवं प्रभारी अधिकारी उपस्थित थे।

बाल मजदूरी है समाज के लिये बड़ी चुनौती: एसएसपी देहरादून

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शनिवार को  पुलिस लाइन देहरादून में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कि अध्यक्षता में बाल सरंक्षण के सम्बन्ध मे एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में जनपद के सभी एनजीओ संचालक, बाल सुधार से सम्बन्धित कार्य करने वाली संस्थायें आदि के  पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल द्वारा बाल श्रम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए एक बड़ी समस्या बताया, तथा ऐसे लोगों को चिन्हित कर, जो बाल श्रम में लिप्त हों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही करने की बात कही गयी। इसके अलावा जनपद पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान व उसके अन्तर्गत जनपद पुलिस द्वारा की गयी कार्यवही से भी सभी को अवगत कराया गया, साथ ही स्कूल कॉलेजों के आसपास तम्बाकू, सिगरेट आदि विक्रय करने वाले दुकानदारों को 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नशीला पदार्थ विक्रय न करने व तम्बाकू से होने वाले नुकसान का चेतावनी बोर्ड आवश्यक रुप से लगाने हेतु निर्देशित किया गया। इसके अलावा स्कूल/कॉलेजों में जनपद पुलिस द्वारा चलाये जा रहे नशामुक्ति अभियान में सभी एनजीओ संचालकों के सहयोग प्र्दान करने को कहा गया। पुलिस द्वारा आयोजित कि गयी बाल संरक्षण की उक्त गोष्ठी की उपस्थित सभी व्यक्तियों द्वारा सराहना कि गयी तथा प्रत्येक 02 माह में इस प्रकार कि गोष्ठी आयोजित करने का सुझाव दिया गया। इस सम्मेलन के दौरान पुलिस अधीक्षक अपराध, अपर सूचना जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी नगर (नोडल अधिकारी) व अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

स्टिंग मामले में अगली सुनवाई 13 फरवरी को

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उत्तराखंड के कथित स्टिंग मामले की सुनवाई शनिवार को नैनीताल होईकोर्ट में हुई।हरीश रावत और देवी दत्त कामथ नैनीताल होईकोर्ट में मौजूद रहे। वहीं विरोधी हरक सिंह रावत के साथ उनके वकील राजेश्वर सिंह भी केस की पैरवी के लिए पहुंचे। अदालत ने हरक सिंह रावत के वकीलका पक्ष सुना और इसके बाद मामले कि अगली सुनवाई के लिये 13 फरवरी तय कर दी।

सीबाआई जांच के मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ के सामने हो रही है, और इससे पहले हरीश रावत ने इस पूरी जांच को असंवैधानिक कहकर इसको निरस्त करने की याचिका दायर की थी लेकिन उस याचिका पर कोई सुनवाई नहीं हुई।इसके साथ ही रावत इस पक्ष में थे कि यह जांच दोनों ही पक्षों की होनी चाहिए जिससे सब कुछ साफ हो सके।