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पंजा छाप सूचीः भाई-भतीजावाद से मुक्त, महिलाओं व दलबदलुओं से युक्त 

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उत्तराखंड में कांग्रेस के बहुप्रतीक्षित पंजा छाप उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही तीन बात एकदम साफ हो गईं। पहली बात यह कि नेताओं को अनुशसित कर रहा चुनाव आयोग खुद कानून व्यवस्था संभालने में नाकारा साबित हो गया वरना 63 उम्मीदवारों की सूची जारी होने पर कांग्रेस भवन में हुए बवाल से बचा जा सकता था। दूसरी बात यह उभरी कि कांग्रेस ने भाई-भतीजावाद से कसम खा कर परहेज किया, जिससे साफ है कि सत्तारूढ़ दल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा दोनों को घेरेगा। तीसरी बात यह कि कांग्रेस ने महिलाओं को अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के मुकाबले करीब दुगुनी सीटों से पंजा छाप पर चुनाव लड़ाने का मनोबल दिखाया है। यह बात दीगर है कि पंजा छाप उम्मीदवारी बांटने में कांग्रेस आला कमान भाजपा के बागियों को गले लगाने के लोभ से नहीं बच सका। इसीलिए कांग्रेस की पहली सूची पर नजर डालते ही सुनीता बाजवा, शैलेंद्र रावत और सुरेशचंद जैन के नाम सीधे नजर में चढ़ गए।

सुनीता बाजवा पर कांग्रेस ने बाजपुर से दांव लगाया है। बाजपुर से 15 जनवरी तक कांग्रेस के दिग्गज रहे यशपाल आर्य कमल छाप पकड़े मैदान में हैं। उनको सबक सिखाने के फेर में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सुनीता के पति जगतार सिंह बाजवा द्वारा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का सिर कलम कर लेने की कसम को भी नजरअंदाज कर दिया। शैलेंद्र रावत को पंजा छाप देकर यमकेश्वर से ऋतु खंडूड़ी के सामने उतारा गया है। ऋतु दरअसल भाजपा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी की बेटी हैं। शैलेंद कोटद्वार से कमल छाप उम्मीदवारी के प्रबल दावेदार थे मगर बागी कांग्रेसी पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को जब वहां भाजपा ने मैदान में उतारा तो उनके सब्र का प्याला छलक गया। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री खंडूड़ी की उम्मीदवारी के चक्कर में शैलेंद्र का पत्ता कट गया था हालांकि तब वे कोटद्वार से ही भाजपा विधायक थे। अंततः शैलेंद्र कांग्रेस के पंजे पर और बगल की यमकेश्वर सीट पर ही सही पूरे दस साल बाद चुनाव लड़ने में कामयाब होंगे। कांग्रेस के पंजा छाप पर कोटद्वार सीट से स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी उम्मीदवार बनाए गए हैं जो अपने ही साथ मंत्री रहे मगर अब कमल छापधारी हरक सिंह रावत का सामना करेंगे।

पंजा छाप उम्मीदवारों की सूची में सरसरी नजर में भाजपा के तीसरे नामी बागी सुरेशचंद जैन पकड़ में आए है। सुरेशचंद को कांग्रेस ने रूड़की से अपने ही दलबदलू विधायक और कमल छाप उम्मीदवार प्रदीप बत्रा के सामने उम्मीदवार बनाया है। यह संयोग ही है कि साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने रूड़की से पंजा छाप, भाजपा के बागी को ही अता फरमाया था मगर तब उसका नाम प्रदीप बत्रा था। प्रदीप बत्रा ने पिछले साल मार्च में नौ अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस से बगावत करके आखिरकार भाजपा में घरवापसी कर ली थी। उसके बाद 16 जनवरी को भाजपा ने अपने 64 उम्मीदवारों की सूची में जब प्रदीप बत्रा को भी कमल छाप थमा दिया तो सुरेशचंद जैन ने बिना देरी किए साल 2012 का इतिहास दोहरा दिया। उन्होंने आनन फानन अपने आप को कमल छाप के अवसरवादी कीचड़ से बाहर निकाला और लपक कर पंजा थाम लिया। सुरेशचंद जैन रूड़की के बड़े मुअज्जिज नेता हैं और वोटों के साथ-साथ लक्ष्मी के मुरीद भी हैं।

कांग्रेस ने अभी सात उम्मीदवारों के नामों के पत्ते नहीं खोले हैं, शायद उनमें किसी कमल छाप बागी को पंजे रूपी तिनके का चुनावी वैतरणी पार करने को सहारा मिल जाए! बहरहाल राज्य में सत्तारूढ़ दल ने महिला उम्मीदवारों के मामले में अपनी प्रतिद्वंद्वी और कल तक बेटियों की सरपरस्ती का ढोल पीट रही भाजपा को पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस की तरफ से अभी कुल सात सीटों पर महिलाओं को पंजा छाप देकर मैदान में उतरा गया है, जबकि भाजपा ने महज चार महिलाओं को ही विधायी सदन में भेजने लायक समझा है। हालांकि राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या, उनमें साक्षरता की दर और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों में उनकी जिजीविशा के मुकाबले कुल 70 विधानसभा सीटों में से महज दस फीसद पर ही उन्हें लड़ाया जाना तो मातृशक्ति का अपमान ही है। इसके बावजूद शायद कांग्रेस ने अपनी प्रतिद्वंद्वी से करीब दुगुनी सीटों पर महिलाओं को पंजा छाप पकड़ा कर यह जताने की कोंशिश की है कि खुद महिला अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी ने पत्नी त्यागी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले तो स्त्री शक्ति का मान ही रखा है।

 

कांग्रेस ने उत्तराखंड के लिये जारी की 63 उम्मीदवारों की सूची

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लंबे इंतज़ारके बाद कांग्रेस ने  रविवार को उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिये अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी।

घोषित किये नामों में

  • पुरोला      राज कुमार
  • यमुनोत्री     संजय डोभाल
  • गंगोत्री      विजय पाल सिंह सजवाण
  • बद्रीनाथ     राजेंद्र सिंह भंडारी
  • थराली       डा.जीत राम
  • कर्णप्रयाग    डा. अनसुईया प्रसाद मैखुरी
  • केदारनाथ     मनोज रावत
  • रुद्रप्रयाग      लक्ष्मी राणा
  • घंसाली        भिमलाल आर्या
  • देवप्रयाग      मंत्री प्रसाद नैथानी
  • नरेंद्र नगर       हिमांशु बिजलवान
  • प्रतापनगर       विक्रम सिंह नेगी
  • चकराता         प्रितम सिंह
  • विकासनगर      नव प्रभात
  • सहसपुर           किशोर उपाध्याय
  • धर्मपुर             दिनेश अग्रवाल
  • टिहरी
  • धनौल्टी
  • रायपुर
  • राजपुर रोड       राज कुमार
  • देहरादून कैंट     सू्र्यकांत धस्माना
  • मसूरी            गोदावरी थापली
  • डोईवाला         हीरा सिंह बिष्ठ
  • ऋषिकेश           राजपाल खरोंला
  • हरिद्वार            ब्रह्म स्वरुप ब्रह्मचारी
  • बीएचईएल रानीपुर  अम्बरीश कुमार
  • ज्वालापुर             शीश पाल सिंह
  • भगवानपुर           ममता राकेश
  • झबरेरा               राजपाल सिंह
  • पिरंकलियार          फुरकान अहमद
  • रुड़की              सुरेश चंद जैन
  • खानपुर              चौधरी यशवीर सिंह
  • मैंगलोर               क़ाज़ी मोहम्मद निज़ामुद्दीन
  • लक्सर                  हाजी तस्लीम अहमद
  • हरिद्वार देहात            हरीश रावत
  • यमकेश्वर              शैलेंद्र सिंह रावत
  • पौड़ी                    नवल किशोर
  • श्रीनगर                  गणेश गोंदियाल
  • चौबटाखल               राजपाल सिंह बिष्ठ
  • लैंड्सडाउन               जनरल टी पी एस रावत
  • कोटद्वार                  सुरेंद्र सिंह नेगी
  • धारचूला                  हरीश धामी
  • डीडीहाट                   प्रदीप सिंह पाल
  • पिथौड़ागढ़                 मायूख सिंह मेहर
  • गंगोलीहाट                 नारायण राम आर्या
  • कपकोट                    ललित फर्सवान
  • बागेश्वर
  • द्वाराहाट                      मदन सिंह बिष्ठ
  • सल्ट                         गंगा पचौली
  • रानीखेत                      करन महारा
  • सोमेश्वर
  • अल्मोड़ा                       मनोज तिवारी
  • जागेश्वर                      गोविंद सिंह कुंजवाल
  • चंपावत                       हेमेश खड़कवाल
  • लोहाघाट                       कुशाल सिंह अधिकारी
  • लालकुआं                      हरीश चंद्र दु्र्गापाल
  • भीमताल                        दान सिंह भंडारी
  • नैनीताल                         सरिता आर्या
  • कालाधूंगी                       प्रकाश जोशी
  • रामनगर                           रंजीत रावत
  • जसपुर
  • काशीपुर                          मनोज जोशी
  • बाजपुर                            सुनीता बाजवा
  • गदरपुर
  • रुद्रपुर                              तिलक राज बहर
  • किच्छा                              हरीश रावत
  • सितारगंज                           मालती बिश्वास
  • नानकमाता                          गोपाल सिंह राणा
  • खटीमा                              भुवन चंद्रा कपरी

टिकटों की घोषणा के साथ ही कांग्रेस मे विरोध के सुर भी उठने लगे। टिकट न मिलने से नाराज़ नेताओं के कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय पर जमकर हंगामा किया।

टिकट घोषणा के साथ ही कांग्रेस की कलह सड़कों पर उतरी

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रविवार को देहरादून में धूप खिली थी शहर छुट्टी के दिन का लुत्फ़ उठा रहा था लेकिन राज्य के कांग्रेसी नेताओं की धड़कने बड़ी हुई थी। दोपहर होते होते राजनीतिक पारा बड़ता चला गया। दिल्ली मे कांग्रेस मुख्यालय से टिकट की लिस्ट जारी होते ही देहरादून में कांग्रेस दफ़्तर पर बवाल हो गया। पार्टी ने 63 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी जिसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण सीट से और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहसपुर से लड़ेंगे। सहसपुर सीट पर पिछली बार कांग्रेसी टिकट पर चुनाव लड़े प्रदेश महासचिव आर्येंद्र शर्मा टिकट के दावेदार थे। लंबे समय से वो क्षेत्र में सक्रिय थे और चुनावों की तैयारी में लगे थे। लिस्ट में उनका नाम न होने की ख़बर मिलते ही उनके समर्थकों ने प्रदेश पार्टी कार्यालय को निशाना बनाया। शर्मा समर्थकों ने वहाँ जमकर नारेबाजी और तोड़ फोड़ की। वहीं शर्मा ने कहा कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे और 25 तारीख़ को अपना नोमिनेशन करेंगे।

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कुछ ही समय में अन्य नेताओं जिनके टिकट कटे उनके समर्थक भी पार्टी कार्यालय पहुँचे और जमकर हंगामा किया। पार्टी के लिये ये नेता आने वाले दिनों में परेशानी का सबबों बन सकते हैं

उत्तराखंड के किसानों के चेहरों पर खुशी लायेंगे “एग्री कैफे “

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आने वाले दिनों में राज्य के किसान घर बैठे ही अपने खेतों के लिये उपकरण खरीद सकेंगे, बिना गांवों से कोसों दूर शहरों तक जाये खेती संबंधी जानकारियां और सवालों के जवाब पा सकेंगे। सुनकर ये सब नामुममकिन सा लगता है? इसे मुमकिन करने की पहल की है आइडियल एग्री बिजनेस सर्विसेस कंपनी ने। किसानों के पुर्ण विकास के लिये ये कंपनी एग्री कैफे नाम का प्राॅजेक्ट शुरू करने जा रही है। कंपनी के डायरेक्टर लिलांशु अरोड़ा ने बताया कि इस प्राॅजेक्ट में किसानों को इंटरनेट की मदद से मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश की जायेगी। प्राॅजेक्ट तीन चरणों में होगा। पहला चरण है किसानों के लिये वेब पोर्टल, इस पोर्टल के ज़रिये किसानों को तीन तरह की सुविधाऐं मिल सकेंगी।

  • किसान बाज़ार जो कि एक सेल पोर्टल है जिसके ज़रिये किसान घर बैठे खेती से जुड़े तमाम उपकरण, बीज, खाद आदि खरीद सकेंगे।
  • दूसरे हिस्स में खेती के लिये ज़रूरी लेकिन मंहगे उपकरणों को किसान किराये पर ले सकेंगे।
  • तीसरा हिस्सा खेती से जुड़े व्यवसायियों के लिये है जो यहां से बाज़ार से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकेंगे।

इस प्राॅजेक्ट का दूसरा हिस्सा है “पादप रोग प्रयोगशाला” जिस पर काम शुरू हो गया है। ये प्रयोगशाला रुद्रपुर में बनाई जायेगी। इसके बनने से किसान खेती संबंधी टेस्ट जैसे मिट्टी की जांच, फसलों की किफायत आदि की जांच एवं सही रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे। इसके चलते किसानों को समय से सही जानकारी मिल सकेगी जिससे उनकी खेती की लागत में कमी आयेगी।

प्राॅजेक्ट के तीसरे हिस्से में हर ग्राम सभा में डिजिटल सेवा केंद्र “एग्री कैफै” खोले जायेंगे इनके ज़रिये किसान अपनी तमाम कृषि संबंधित समस्याओं का समाधान अपने ही गांव में प्राप्त कर सकेंगे। कैफे में खेती संबंधी तमाम जानकारियां किसानों को दी जायेंगी। प्राॅजेक्ट के बारे में बताते हुए प्राॅजेक्ट हेड डाॅ उपमा डोभाल ध्यानी ने बताया कि

  • प्राॅजेक्ट के पहले चरण का काम यानि कृषि वेबसाइट लगभग पूरी हो चुकी है।
  • फरवरी महीने में सभी ग्राम सभाओं में एग्री कैफे़ खोल दिये जायेंगे।
  • इनके संचालन के लिये एग्रीक्लचर ग्रेजुएट भी रखें जायेंगे। मार्च तक ये भाग भी पूरी तरह से काम करने लगेंगे
  • जून तक आ२नलाइन सेल का काम भी शुरू हो जायेगा।

इस प्राॅजेक्ट से किसानों को जोड़ने के लिये कंपनी लगातार राज्य की तमाम ग्राम पंचायतों से संपर्क में है और उनसे उनकी परेशानियों के साथ साथ सुझाव लिये जा रहे हैं ताकी ये पूरा प्राॅजेक्ट ज्यादा से ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचा सके।

सोने से पहले मुझे मीलों ज़ाना है- “मैती” आंदोलन

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कल्याण सिंह रावत बायोलाजी के एक रिटायर्ड लेक्चरार हैं,जो देहरादून के नाथूवाला की गलियों में रहते हैं। लोग उन्हें प्यार से कल्याण जी बुलाते हैं,और वह बहुत ही साधारण और विनम्र आदमी हैं। गढ़वाल के ज्यादातर युवाओं की तरह,उन्होंने भी एक अच्छी नौकरी और उज्जवल भविष्य के लिए पहाड़ों से पलायन कर लिया था। इन्होंने नाथूवाला में बायोलोजी लेक्चरार के तौर पर ज्वाइन कर लिया। यहां आकर शादी की,बच्चे हुए और देहरादून को ही अपना घर बना लिया।

अपने पुराने दिनों को याद करके कल्याण बताते हैं कि,साल में एक बार जब मैं पहाड़ों में अपने घर जाता था हर बार मुझे एक बात परेशान करती थी, जहां मैने अपना बचपन बिताया था उन पहाड़ों की घटती हरियाली से मुझे दुख होता था। वो इस सोच में पड़ गए कि अकेले कैसे वो गांव समुदाय में रहने वालों को शामिल करके पर्यावरण की रक्षा और उसके संरक्षण के लिए,लोगों को सजग बना सकते हैं कयोंकि उन्हें अच्छी तरह से पता था कि अकेले वह ज्यादा सकारात्मक बदलाव नहीं ला सकते इस बड़े काम में उन्हें गांव वालों की जरुरत पड़ेगी ही।

1995 में अपनी भतीजी की शादी में जब वह ग्वालदम गए, कल्याण के दिमाग में एक तरकीब आई, एक दुल्हन का उसके घर को छोड़ के जाने मतलब विदाई को और विशेष बनाने का तरीका। वो बताते हैं कि- जब शादी का उत्सव खत्म हो गया तब मैंने अपनी भतीजी से कहा कि अपने प्यार की निशानी के तौर पर वो अपनी मां के बगीचे में एक छोटा पौधा लगा दे जो माता पिता के लिए उसके प्यार को दर्शाएगा और उसे वो पौधा अपने माता पिता की याद दिलाएगा। इसके पीछे उनका एक ही तर्क था कि जब एक लड़की अपना घर छोड़ कर अपने ससुराल जाती है तो एक नाजुक पौधा लगा दे,तब दुल्हन की मां उस पेड़ की देखभाल इसलिए करती है कि वो उसकी बेटी का तोहफा है और पूरा परिवार उस पेड़ का ध्यान रखेगा और उसे हर परेशानी से बचाएगा और ऐसा करके हरियाली वापस आएगी।

यह प्रतीकात्मक अनुष्ठान लोगों के बीच ऐसे फैल गया जैसे जंगल में आग। और हां महिलाओं के बीच यह ज्यादा पसंद किया गया,कयोंकि वो इस तरकीब से भावनात्मक तौर से जुड़ रहीं थी।अतः “मैती” आन्दोलन का बीज लोगों के बीच बोया जा चुका था। मैती शब्द को गढ़वाल व कुमांऊ के मैत शब्द से लिया गया,जिसका मतलब है दुल्हन का पैतृक घर।

इस नवीन वनरोपण आंदोलन ने केवल अपने जन्मस्थान उत्तराखंड के लोगों के दिलों को नहीं छुआ, राज्य की सीमाओं पर भी लोग इस परंपरा को मानने लगे और अब तो इसने सभी सीमाएं लांघ कर विदेशों में भी अपनी जगह बना ली है, जैसे कि नेपाल,दुबई,इंडोनेशिया और कनाडा में भी लोग इसको एक परंपरा की तरह ले रहें।

भावनाओं पर पूरी तरह आधारित, मैती परंपरा में आज कई गुना वृद्धि हुई है और किसी सरकारी या गैर सरकारी,या प्रदेश सरकार के आर्थिक मदद के बिना यह बहुत प्रगति पर है। जो परंपरा एक आदमी के मिशन की तरह शुरु हुई थी आज वह एक जन आंदोलन में बदल गई है, जिसमें लगभग दो लाख पेड़ सिर्फ उत्तराखंड में लगाया गये हैं। मशहूर कवि रार्बट फ्रोस्ट की कुछ लाइनें- सोने से पहले मुझे मीलों ज़ाना है, और मीलों जाना है सोने से पहले कल्याण सिंह रावत के मैती आंदोलन के लिए बिल्कुल सही बैठती हैं।  

कांग्रेस को पीछे छोड़ बीजेपी ने बचे उम्मीदवारों के नामों की घोषणा

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चुनावों का नतीजा जो भी रहे लेकिन बीजेपी ने उम्मीदवारों के नामो की घोषणा में कांग्रेस को मात दे दी हैं। शनिवार शाम होते होते पार्टी ने उत्तराखंड विधान सभा चुनावों के लिये आख़िरी रह गई ६ सीटों के लिये उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। ये नाम हैं
चकराता: श्रीमती मधू चौहान
विकासनगर: श्री मुन्ना सिंह चौहान
धरमपुर: विनोद चमोली
भीमताल: गोविंद सिंह बिष्ट
हलद्वानी: जोगेंद्र रौतेला
रामनगरः  दिवान सिंह बिष्ठ
गौरतलब है कि पार्टी पहले ही ६५ सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है। इस लिस्ट के साथ राज्य में सभी ७० सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है।
वही कांग्रेस अभी भी अपने उम्मीदवारों के नामों को “फ़ाइनल टच” देने में लगी हुई है। जिसके चलते पार्टी के सभी टिकट चाहने वाले नेताओं की दिलों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।

कांग्रेस को “दलाल” कहने पर भाजपा को निर्वाचन आयोग से मिला नोटिस

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती राधा रतूड़ी ने बताया कि विधानसभा चुनावों के लिए गठित राज्य स्तरीय एमसीएमसी कमेटी ने 21 जनवरी, 2017 को विभिन्न समाचार पत्रों में छपे विज्ञापनों का संज्ञान लेते हुए भारतीय जनता पार्टी को नोटिस जारी किया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीमती रतूड़ी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 21 जनवरी, 2017 के विभिन्न समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर विज्ञापित पंक्ति ‘‘दलालों का जाल‘‘ पर कमेटी ने आपत्ति व्यक्त की है। नोटिस में कहा गया है कि ‘‘कमेटी द्वारा इसे असंसदीय भाषा की श्रेणी में रखते हुए आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों के अनुसार नहीं पाया गया है। नोटिस में भाजपा को नोटिस मिलने के तीन दिन के भीतर अपना  स्पष्टीकरण प्रदान करने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि “क्यों न इस प्रकार के विज्ञापन को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा‘‘।

गौरतलब है कि 21 जनवरी को लगभग सभी अखबारों के प्रथम पेज पर भाजपा ने अपने अलग अलग कोटेशन वाले विज्ञापन छपवाए थे।

 

पीएम मोदी ने कमांडर्स काॅन्फ्रेंस में लिया हिस्सा

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शनिवार को पीएम मोदी कंबाइड कमांडर्स कांफ्रेंस में हिस्सा लेने सुबह 9 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुचें जहां उनके स्वागत के लिए राज्यपाल, मुख्य सचिव और डीजीपी वहां मौजूद रहे। पीएम मोदी ने सुबह 9:30 बजे से 3:30 बजे तक आईएमए में इस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया। इस बैठक में तीनों सेनाओँ के प्रमुखों के साथ सात रक्षा मंत्री मनोहर परिकर्र, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद रहे। बैठक में देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

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गौरतलब है कि पीएम मोदी की इस यात्रा पर कांग्रेस ने कड़ी नाराजगी जलाई थी।उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने कहा था कि मोदी अपने फायदे के लिए देहरादून आ रहें हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस ने पीएम मोदी की इस यात्रा का विरोध करते हुए चुनाव आयोग में शिकायत की थी। इस शिकायत के जवाब में मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने अपनी देहरादून यात्रा में कहा था कि हम देखेंगें कि मोदी की यात्रा किसी भी तरह से आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन ना हो। हालांकि इस शिकायत से पीएम मोदी के कार्यक्रम पर कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।चुनाव आयोग ने इस शिकायत को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी को सशर्त इस यात्रा को करने की इजाजत दी थी और शर्त यह थी कि वो प्रेस या मीडिया से मुखातिब नही होंगें।

कांग्रेस के इस विरोध पर बीजेपी की तरफ से यह जवाब आया था कि कांग्रेस के लोग छोटी छोटी बात पर घबरा क्यों जाते हैं क्या उन्हें हर बात में खतरा महसूस होता है।बीजेपी ने कहा कि पीएम मोदी जी किसी जरुरी विषय की वजह से देहरादून आ रहें और कांग्रेस हमेश कि तरह इसको भी राजनितिक मुद्दा बना रही।

पीएम मोदी ने सुबह से शाम आईएमए के कार्यक्रम में भाग लिया और दिल्ली के लिए रवाना हो गए।कार्यक्रम की वहज से शहर के रुट में हल्के फुल्के डायवर्जन किए गए थे।

 

10 लाख 86 हजार रुपये के साथ पकड़े गए दो युवक

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शनिवार शाम को चौबटाखाल विधानसभा क्षेत्र में तैनात पुलिस फ्लाइग स्कावड ने ज्वाल्पा मोड़ कोटद्वार रोड पर चेकिंग के दौरान एक टाटा 709 ट्रक में बैठे दो युवकों के कब्जे से 10लाख 86 हजार आठ सौ अस्सी रूपये बरामद किया गया है।मौके पर मौजूद फ्लाइंग स्कावड  टीम के  द्वारा बरामद रूपये को थाना कोतवाली के निर्देशन में सीज करके कब्जे में लिया गया है । हालांकि पूछताछ से यह साबित नही हुआ है कि यह पैसा चुनाव में वितरण के लिए था या किसी और काम के लिए था। इस संबंध में मौके पर ड्राइवर व साथ में मौजूद युवक द्वारा बरामद पैसे को लेकर कोई संतोषजनक जवाब न देने पर बरामद पैसे को जब्त करके आयकर विभाग को रिपोर्ट भेजी जा रही है।वाहन से कोई चुनाव सामग्री बरामद नही हुआ है।

इस सराहनीय कार्य के लिए एसएसपी पौड़ी गढ़वाल ने फ्लाइंग स्कावड में नियुक्त ADO पंचायत मदन लाल उ.नि.संजीत कंडारी व का.अंकुर एवं का. प्रवीण को 2500 रूपये इनाम की घोषणा की गयी है।

बालीवुड के ब्रेकअप लिस्ट में शामिल हुए सुशांत और अंकिता

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टेलीविजन के पर्दे पर अपनी पहचान बनाने के बाद बॉलीवुड में एंट्री करने वाले सुशांत सिंह राजपूत अपनी एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे से प्यार और फिर ब्रेकअप के चर्चे हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। सुशांत सिंह राजपूत की लव स्टोरी टेलीविजन के एक शो पवित्र रिश्ता से ही शुरू हुई थी और बड़े पर्दे पर पहुंचने तक लव स्टोरी का दि एंड हो गया।

सुशांत सिंह राजपूत ने बतौर एक्टर अपना करियर टेलीविजन की दुनिया से शुरू किया था। जीटीवी पर प्रसारित होने वाले पवित्र रिश्ता सीरियल की मशहूर जोड़ी यानि सुशांत और अंकिता लोखंडे 6 साल से एक दूसरे के साथ थे।वैसे तो इन दोनों ने हमेशा ही अपने रिलेशनशिप के बारे में किसी को कुछ नहीं कहा लेकिन खबर थी कि दोनों एकसाथ मुंबई में लिव इन में रहते थे। दोनों को एकसाथ कई जगह पर देखा जाता था।

आपको बता दें कि जनवरी 2016 में ये खबरें आ रही थीं कि ये दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं लेकिन अचानक ही ब्रेकअप की खबरों ने इनके फैन्स को निराश कर दिया था। सुशांत ने अपने ब्रेकअप की बात ट्विटर पर लिखी थी।

खबर थी कि इनके रिश्ते में आई दरार की वजह ये है कि अंकिता शादी करना चाहती थीं, वहीं सुशांत का अभी ऐसा कोई इरादा नहीं था। सुशांत अभी अपने करियर पर ध्यान देना चाहते थे। लेकिन सुशांत के मुताबिक ऐसी कोई बात नहीं थी। ये सिर्फ एक दूसरे को समझने की बात होती है। दोनों में इस चीज की कमी हो गई थी और इसलिए रिश्ता टूट गया।