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भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में कुछ आतंकवादियों के घुसने की सूचना से दून पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में फोर्स पहुंच गई। मौके पर जाने पर पता चला कि ये मॉक ड्रिल है।
सुबह सात बजे के करीब पुलिस कंट्रोल रूम में सुचना आई की आईएमए में कुछ आतंकवादी घुस गए हैं। इस सुचना पर हड़कंप मच गया। एसएसपी व एसपी सिटी समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और आइएमए की घेराबंदी शुरू कर दी।
इस दौरान देहरादून-चकराता रोड पर वाहनों को रोक दिया गया। साथ ही मौके पर सर्च आपरेशन शुरू किया गया। कुछ देर तक तो अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। बाद में आइएमए सूत्रों ने बताया कि ये मॉक ड्रिल थी। डीआईजी पुष्पक ज्योति ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस मॉक ड्रिल में सेना के अधिकारियों से अच्छा कोआर्डिनेशन रहा। कोई बड़ी बात नही है।
एनएच चौड़ीकरण की जद में आ रही जमीनों के मुआवजे में हुए 270 करोड़ के घोटाले में सरकार किसानों से रिकवरी कर सकती है। इस क्रम में जिन कृषि की जमीनों को अकृषि कर दिया गया था, उन्हें पुन: कृषि में दर्ज करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जसपुर में नौ मामलों में 144 के जरिए भू उपयोग बदल दिया गया है।
दरअसल, इस घोटाले के असली लाभार्थी तो किसान ही हैं, क्योंकि धनराशि उनके खातों में भेजी गई है। गौरतलब है कि कृषि योग्य भूमि को 143 के जरिए अकृषि कराकर किसानों ने दस गुना मुआवजा लिया है। इसमें बड़ा सिंडीकेट शामिल रहा। मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में शासन व प्रशासन के स्तर से लगातार दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। मामले में दोषी पाए गए नायब तहसीलदारों के खिलाफ भी राजस्व परिषद के अधिकारी कार्यवाही करने जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि एक दो दिन में नायब तहसीलदारों के निलंबन की कार्यवाही होगी। उधर, जसपुर की एसडीएम युक्ता मिश्रा ने उन जमीनों की जांच की थी जो 143 के जरिए अकृषक घोषित करा ली गई थी, मगर मौके पर खेती हो रही थी। ऐसे नौ प्रकरणों में 144 के जरिए जमीनें कृषि भूमि में ही बदला गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में फर्जी तरीके से दस गुना अधिक मुआवजा लेने वाले लाभार्थियों से वसूली कराई जा सकती है।
पहाड़ो की रानी मसूरी एक ऐसा डेस्टिनेशन हैं जो किसी स्पेशल ओकेज़न की मोहताज नहीं यहां विकेंड में बिना किसी त्यौहार और बिना किसी स्पेशल दिन के भीड़ हो ही जाती हैं। लेकिन अगर विकेंड तीन दिन का हो तब क्या पूछना, ठीक ऐसा ही हो रहा है इस विकेंड, जब मसूरी लोगों से खचा-खच भरी है। जितने तरह के पर्यटक उतनी ही तरह की गाड़िया, मसूरी की सड़कों पर देखने को मिल रही है।कहने का मतलब साफ है कि शनिवार शाम से मसूरी लगभग फूल है और इससे सबसे ज्यादा खुश है स्थानीय होटल व्यापारियों। होटल और रेस्टोरंट एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी का कहना है कि, ‘मार्च आखिरी से लगभग सभी बड़े होटलों में इस वीकेंड के लिये 70-80 प्रतिशत बुकिंग पहले से हो चुकी थी।’

आकाश की ऊचाइयों को छूता हुआ यह हिल स्टेशन हमेशा से उनकी पहली पसंद रहा हैं जिन्हें शहर की धूल भरी और भाग दौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक चाहिए होता है।अलग अलग शहर जैसे कि दिल्ली,हरयाणा,पंजाब के लोग आपको मसूरी के माल रोड पर टहलते नजर आ जाऐंगे।मैदानी इलाकों में पड़ रही चिलचिलाती गर्मी और अपने रुटिन लाईफ से थोड़ा हटकर कुछ करने के लिए लोग मसूरी की ठंडी वादियों को चुनते हैं और अपना विकेंड यहां बितान पसंद करते हैं।
मसूरी पहुंचना बाकि हिल स्टेशन से आसान हैं। रेल,रोड और हवाई यात्रा की सुविधा इसको और भी खास और पर्यटकों के लिए आसान बना देती है। जबकि पर्यटक मसूरी में आकर मौसम में खो जाते हैं और यहां के कल्चर को इंजौय करते हैं। यहां के क्षेत्रीय लोगों के लिए परेशानियां थोड़ी बढ़ सी जाती हैं। टूरिस्ट बढ़ने से शहर में जाम की समस्या, पानी की समस्या, सीवेज, कूड़े आदि की समस्या बढ़ जाती हैं।मसूरी निवासी मिस्टर दास कहते हैं कि जब आप पहाड़ की वादियों में रहते हो तो कुछ ना कुछ तो परेशानी होती ही है, यह हिल स्टेशन अगर दूर-दराज के लोगों को अपनी ओर खिंच रहा हैं तो कुछ तो खास है। शायद यहां के लोकल लोगों को इसी खासियत की वजह से टूरिस्ट सीज़न में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
14 अप्रैल के दिन वर्ष 1944 में मुंबई के बंदरगाह में खड़े इंग्लैंड के फोर्ट स्ट्रीकेन नामक 9 हज़ार टन वाले जहाज में भीषण अग्नि दुर्घटना घटित हुई थी। इस अग्निकांड के दौरान हुए विस्फोट में अग्निशमन कार्य करते हुए 66 फायर सर्विस कर्मी शहीद हो गए थे। उन शहीद हुए फायरमैनो तथा उसके उपरांत अपने कर्तव्य का पालन करते हुए दिवंगत फायर सर्विस अधिकारियों/कर्मचारियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को समस्त राष्ट्र की अग्नि समन सेवाएं “अग्निशमन सेवा दिवस” मनाती हैं। साथ ही इनकी सेवा भावना के अनुरुप कार्य करने का संकल्प लिया जाता है।
मुख्य फायर स्टेशन, गांधी रोड देहरादून पर आज अग्निशमन सेवा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में शहीद अग्निशमन कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फायर स्टेशन देहरादून पर आधुनिक अग्निशमन एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। अग्निशमन कर्मीयो द्वारा भवन से घायल व्यक्तियों को उतारने का डेमो के माध्यम से प्रदर्शन भी किया गया, जिसको उपस्थित जनता द्वारा सराहा गया।
अंत में सेमिनार में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुश्री स्वीटी अग्रवाल महोदया द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद देहरादून में कुल 5 फायर स्टेशन तथा तथा एक उप केंद्र स्थापित है। इन सभी फायर स्टेशनों पर वर्ष 2016 में जनपद देहरादून के अंतर्गत कुल 908 अग्नि दुर्घटनाओ की सूचनाएं प्राप्त हुई। जिन पर कार्य करते हुए ₹ 9,48,79,000/- की क्षति हुई तथा फायर सर्विस यूनिटों के उत्कृष्ट प्रयासों के फलस्वरुप ₹ 52,76,71,320/- की संपत्ति को जलने से बचा लिया गया। इन अग्निकांडों में किसी भी मनुष्य की जलने से मृत्यु नहीं हुई तथा 06 मनुष्य को बचाया गया। इसी प्रकार कुल 50 जीव रक्षा पुकारे प्राप्त हुई, जिसमें फायर सर्विस यूनिटों के प्रयासों से 93 मनुष्य तथा 11 पशुओं को बचाया गया। जनपद में कुल 73 फायर सर्विस कर्मचारियों को एडवांस सर्च एंड रेस्क्यू प्रशिक्षण प्रदान कराया गया है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री एस के राणा द्वारा अवगत कराया गया की फायर सर्विस सप्ताह के दौरान विभिन्न संस्थानों में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि जनपद के फायर स्टेशनों पर अति आधुनिक एवं उच्च तकनीकी वाले सयंत्रों एवं उपकरणों को रखा गया है। जिससे अग्निकांड एवं अन्य प्रकार की आपदा के समय त्वरित बचाव कार्य करने की क्षमता में वृद्धि हुई है। वर्तमान समय में जनपद के फायर स्टेशनों में हाई प्रेशर वाटर टेंडर, हाई प्रेशर फोम टेंडर, पोर्टेबल पंप, डी.सी.पी टेंडर, मिनी वाटर टेंडर, तथा जीव रक्षा वाहनो सहित आपदा प्रबंधन के उपकरणों कोंबी टूल्स, हाइड्रोलिक स्प्रेडर, हाइड्रोलिक कटर, डायमंड चैन शॉ, एयर कंप्रेसर मशीन जैसी अन्य उपयोगी उपकरण उपलब्ध है।
काशीपुर, बाजपुर रोड स्थित श्यामपुरम कालोनी के निकट पुलिया पर ट्रैक्टर-ट्रॉली ने पूर्व प्रधान को कुचल दिया। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद बाजपुर रोड पर जाम लग गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
ग्राम परमानंदपुर निवासी शौकीन शाह पुत्र फुलसा ने गुरुवार को ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं भरकर बेचने के लिए अनाज मंडी भेजा। गेहूं बेचने के बाद शौकीन बाइक से घर के लिए लौट रहे थे तभी बाजपुर रोड स्थित श्यामपुरम कालोनी के पास पुलिया पर पीछे से तीन ट्रॉली लेकर बाजपुर की ओर जा रहे ट्रैक्टर ने उन्हें कुचल दिया।
इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंची आइटीआइ थाना पुलिस व परिजनों ने उन्हें एंबुलेंस से एलडी भट्ट अस्पताल भर्ती करवाया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। इधर, हादसे के बाद सड़क पर करीब आधे घंटे तक जाम लग गया।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण शंकर राज की कोर्ट ने डिग्री कॉलेज के प्राचार्य को रिश्वत लेने के मामले में पांच साल कैद व 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर दो साल अतिरिक्त सजा भोगनी होगी।
अभियोजन के अनुसार, सात मार्च 2011 को डिग्री कॉलेज द्वाराहाट के प्राचार्य हरि राम तिरुवा के खिलाफ कॉलेज में ही कार्यरत संविदा कर्मचारी चंद्रा चौहान ने विजिलेंस एसपी को शिकायती पत्र भेजा। जिसमें उसने संविदा अवधि बढ़ाने के एवज में दस हजार अथवा मोबाइल की डिमांड कर उत्पीड़न का आरोप लगाया।
11 मार्च को एसपी विजिलेंस आरपी शर्मा द्वारा निरीक्षक हरक सिंह फिरमाल के नेतृत्व में ट्रेप टीम का गठन किया और उसी दिन दस हजार रिश्वत लेते धर दबोचा। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम नैनीताल की कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से संयुक्त निदेशक विधि सोहन चंद्र पांडेय द्वारा सात गवाह पेश किए गए। हैरानी वाला तथ्य यह रहा कि शिकायतकर्ता चंद्रा चौहान आरोप से मुकर गई और पक्षद्रोही बन गई।
कोर्ट ने अधिनियम की धारा सात के तहत पांच साल कैद व 10 हजार जुर्माना व धारा 13 के तहत पांच साल कैद 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने फैसले के बाद दोषी प्राचार्य को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
अल्मोडा, चौखुटिया विकास खंड के विभिन्न हिस्सों में दिन में बंदर तो रात में जंगली सूअरों ने खेतीबाड़ी चौपट कर दी है। कहीं तो सूअरों ने खेतों में तैयार गेहूं की खड़ी फसल पूरी तरह रौंद डाली है तो कहीं गेहूं की बालियां भी नष्ट कर दी हैं। कई खेतों में गड्ढे बना दिए हैं। अभी फसल कटाई कार्य चल रहा है, लेकिन फसल की बर्बादी देख काश्तकार अंदर ही अंदर आंसू के घूंट पीने को विवश हैं।
विकास खंड के विभिन्न क्षेत्रों में जंगली सूअरों ने आतंक मचाया है, मगर घाटी क्षेत्रों में कई स्थानों पर तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। यहां चांदीखेत बैराठ में अनेक काश्तकारों के तो खेत के खेत बर्बाद कर दिए हैं। काश्तकारों को कहना है कि सूअर रात्रि में खेतों में पहुंच कर खड़ी फसल को रौंद दे रहे हैं तथा गेहूं की बालियां को चट कर दे रहे हैं। ऐसे में पौधों पर बालियों का नामोनिशान नहीं रह गया है।
चांदीखेत के काश्तकार दीपक गिरि का कहना है कि उनके आठ खेत सूअरों ने पूरी तरह तबाह कर दिए हैं। इससे दस हजार से अधिक का नुकसान हुआ है। जोगा गिरि की भी फसल नष्ट कर दी है। गांव के अन्य किसान भी नुकसान से निराश हैं। प्रधान दान सिंह कुमयां, पूर्व प्रधान नंदन सिंह, मदन कुमयां, भूपाल गिरि व भूपाल सिंह आदि ने प्रशासन से निरीक्षण कर फसल का मुआवजा देने की मांग की है।